16 मार्च 2012

एस. के. पाण्डेय के दोहे

दोहे-(५)

नेता कहते पूत से प्रजातंत्र को मूल ।

फूल सूल में भेद नहि बको उलूल-जुलूल ।।

 

हमको कुछ नहि हरज है देश जाय जो भाड़ ।

यसकेपी नेता नहीं हम हैं देश उजाड़ ।।

 

विरोधी को न छाड़िये बहुत उछालो कीच ।

यसकेपी सोते रहो पाँच साल के बीच ।।

 

जागो बेटा उस समय साल जाय जब बीत ।

यसकेपी कुछ भी करो होय चुनावीं जीत ।।

 

दुश्मन अपना को नहीं नहि कोई है मीत ।

यसकेपी कुर्सी बचे यही हमारी नीत ।।

 

तंत्र मंत्र फैलाय के जीतो अवसि चुनाव ।

यसकेपी लूटो देश को अगर लगे जो दाव ।।

 

राजनीति को छोड़कर बाकी सब बेकार ।

यसकेपी क्या चूकना कर सपना साकार ।।

 

पढ़े-लिखे बहु घूमते आते अपने पास ।

यसकेपी किरपा करो कहते बहुत उदास ।।

 

अधिकारी जितने बने सब अपने अधिकार ।

यसकेपी हम तस करें जस चाहें व्यवहार ।।

 

हम हैं राजा आज के औरन जानों दास ।

यसकेपी हम देश में करते अधिक सुपास ।।

 

नेता बनि भरि लीजिए यसकेपी भंडार ।

जनसेवा यह ही बड़ी बिना किए धिक्कार ।।

 

कोठी हो हर शहर में हर कोठी में कार ।

यसकेपी सेवा यही करत लगे नहि वार ।।

 

बिजली विल या फोन विल को नहि कोई भार ।

यसकेपी को का करी हम भारत सरकार ।।

 

सेवा से मेवा मिलै कही कहावत जात ।

जनसेवक सब जानते यसकेपी यह बात ।।

 

याते ही नेता लगे जनसेवा दिन रात ।

यसकेपी सब मिलि करैं पूत पतोहू नात ।।

 

नेता खोये होश सब खोज रहे बहु दाम ।

जनता की रक्षा करें यसकेपी के राम ।।

 

राम रखे यह देश है राम करैं कल्यान ।

यसकेपी सच ही कहा अपना देश महान ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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