रचनाकार

व्यंग्य // कला केंद्र , कला और कलाकार // यशवंत कोठारी

हर शहर में कला केन्द्र होते हैं , कलाकार होते हैं और कहीं कहीं कला भी होती है। रविन्द्र मंच, जवाहर कला केंद्र , भारत भवन, मंडी हाउस , आर्ट ग...

अकेला बेचारा एक राष्ट्र // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

हिन्दी में एक मुहावरा है। आदमी अकेला आया है और अकेला ही जाएगा। लेकिन विडम्बना देखिए कि इस आने और जाने के बीच आदमी न तो अकेला रह पाता है और न...

वसंत पंचमी विशेष आलेख // प्रदूषण की मार से बसंतोत्सव भी हारा // डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

प्रदूषण की मार से बसंतोत्सव भी हारा ० भविष्य में बसंत के लिए कहीं तरसना न पड़े प्रकृति का चक्र बड़ा ही सुकून देने वाला रहा है। ईश्वर की रचना...

बसन्त पंचमी ‘‘या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता’’ // डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता

बसन्त पंचमी ‘‘या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता’’ डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता मानस शिरोमणि एवं विद्यावाचस्पति भारत त्योहारों का द...

संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 10 - रिश्तों की मजबूत डोर // रामानुज श्रीवास्तव 'अनुज'

प्रविष्टि क्र. 10 रिश्तों की मजबूत डोर रामानुज श्रीवास्तव 'अनुज' जाने क्यूँ ये दरोदीवार जाने पहचाने से लगते हैं, जबकि मैं ऋतु के घर ...

संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 9 - कैसे मोक्ष हो यहां....! // वंदना अवस्थी दुबे

प्रविष्टि क्र. 9 कैसे मोक्ष हो यहां....! वंदना अवस्थी दुबे कई सालों से अम्मा का मन था कि हम दोनों “गया” जायें और पापा का पिंडदान करके आयें. ...

हिन्दी भाषा का दुनिया में बढ़ता वजूद // चन्द्रशेखर

वर्तमान समय में हिन्दी साहित्य को जानना और समझना इसलिए आवश्यक है ताकि हिन्दी भाषा की दशा और दिशा का पता चल सके और हम सब एक लक्ष्य की ओर पहुं...

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर विशेष आलेख // गर्व से सिर उठाने का दिन // देश के जयघोष का पर्व है - गणतंत्र दिवस // डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर विशेष गर्व से सिर उठाने का दिन ० देश के जयघोष का पर्व है -गणतंत्र दिवस भारतीय गणतंत्र पर्व यानी गर्व से सिर उठाने ...

संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 8 // पानी रे पानी... // शशि रायजादा (लखनऊ)

प्रविष्टि क्र. 8 पानी रे पानी... शशि रायजादा (लखनऊ) दोपहर के चार बजे थे। स्कूल से आ कर थक कर मैं सोई ही थी कि घंटी बजने की आवाज़ से उठना प...

संस्मरण: दिल्ली यात्रा // दिल की डोर और पुस्तक मेले की पतंग // डॉ.अर्पण जैन 'अविचल'

संस्मरण: दिल्ली यात्रा दिल की डोर और पुस्तक मेले की पतंग डॉ.अर्पण जैन ' अविचल ' मथुरा से फरीदाबाद और फिर हजरत निजामुद्दीन होते हुए न...

लघुकथा // जीवन-संघर्ष // योगेश किनकर

जिंदगी चलने का नाम है, ढेर-सा प्यार तो कभी गम हजार। लेकिन इस सब के बीच जिसने सामंजस्य बिठा लिया समझो उसने जिंदगी का अहम अध्याय सीख लिया। और ...

व्यंग्य // रंगों की रंगदारी – रंग गेरुआ // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

रंग हैं तो रंगरेज़ भी हैं और रंगरेजों का काम रंगना है। रंगने के इस कार्य को आप रंगदारी भी कह सकते हैं। लेकिन रंगदारी सिर्फ रंगने का कार्य ही ...

लक्ष्मीकांत मुकुल की पंद्रह कवितायें

इतिहास  का गढ़ पहले पहल बगीचे में जाते हुए पहली ही बार हमें दिखा था मूंजों से ढंका रेड़ों से जाने कब का लदा खेतबारी के पास यूँ ही खड़ा पड़...