सोमवार, 25 सितंबर 2017

प्राची - अगस्त 2017 : साहित्य समाचार

बरगद की छांव तले कहानी पाठ (चौथी कड़ी) जबलपुरः परिवार/समाज और देश को एक सूत्र में बांधने वाला एक साहित्य ही है. साहित्य एक व्यवस्था प्रदान क...

प्राची - अगस्त 2017 : आत्म संदर्भ // धारावाहिक आत्मकथा (आठवीं किस्त) // अनचाहा सफर // रतन वर्मा

पुनः साहित्यिक परिवेश का फंडा गतांक से आगे ... भैया चले तो गए थे, लेकिन मेरे लिए एक अच्छा खासा साहित्यिक माहौल बनाकर. जब तक भैया थे, उस बीच ...

प्राची - अगस्त 2017 : कहानी // मछली कूदी पानी में // डॉ. कुंवर प्रेमिल

अब बालमंडली में दादाजी भी शामिल हो गये थे . दादाजी मछल के अनन्य भक्त हो गये थे. मछली की पूरी चौकसी हो रही थी. एक दिन दादाजी कह रहे थे...‘‘सच...

प्राची - अगस्त 2017 : समीक्षात्मक लेख // निराला का यह ‘भिक्षुक’ कौन है // भारत यायावर

‘भि क्षुक’ निराला की सर्वाधिक लोकप्रिय और मार्मिक कविता है. यह छायावादी दौर में यथार्थवादी जीवन-चित्र प्रस्तुत करने वाली इकलौती कविता है. इस...

प्राची - अगस्त 2017 : संस्मरण आलोक-मंजूषा : संस्मरण विजय निकोर

स पने प्रायः अप्रासंगिक और असम्बद्ध नहीं होते. कल रात सोने से पूर्व मित्र-भाई रामदरश मिश्र जी से बात हुई तो संयोगवश उनका ही मनोरंजक सपना आया...

प्राची - अगस्त 2017 : साक्षात्कार // एक लेखक की हैसियत से कविता ही मेरे बहुत निकट रही // (डॉ. रामदरश मिश्र जी से डॉ. भावना शुक्ल की बातचीत)

हिंदी साहित्य के वरिष्ठ और श्रेष्ठ साहित्यकार , विविध विधाओं में सिद्धहस्त, पुरोधा पीढ़ी के साहित्यकार,आलोचक की दृष्टि रखने वाले, बहुआयामी व्...

प्राची - अगस्त 2017 : डायरी // वसन्त पंचमी // डॉ. रामदरश मिश्र

लो फिर वसन्त पंचमी आ गयी. फिर मन घर में, घर के चारों ओर वसन्त की आहट सुनने को बेचैन हो उठा. सुबह-सुबह उठा था तो मन में एक गूंज थी कि आज वसन्...

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