सोमवार, 5 सितंबर 2005

कहानीः एक बच्ची का सपना


एक छोटी सी लड़की जिसने सपने देखने की कोशिश की...
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जैसे ही एमी हैगदार्न अपनी कक्षा में जाने के लिए मुड़ी, वह पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाले एक लंबे से लड़के से, जो उलटी दिशा से तेज़ी से दौड़ता चला आ रहा था, टकरा गई.

“ए छिपकली, देख कर नहीं चल सकती क्या” तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली उस छोटी सी लड़की से बचने के लिए छलांगें लगाता हुआ वह लड़का उस पर चिल्लाया. फिर वह लड़का रुका और उसे चिढ़ाने के अंदाज में अपनी खींसे निपोरता हुआ अपने दाएँ टाँग को उठाकर उसी तरह से लँगड़ा कर दिखाया जिस तरह एमी चलने में लंगड़ाती थी.

एमी ने अपनी आँखें बन्द कर ली. ‘इसकी ओर ध्यान देने की कतई ज़रूरत नहीं’, अपनी कक्षा की ओर बढ़ते हुए उसने अपने आप से कहा.

दिन भर, रह रह कर एमी के मन में उस लंबे लड़के की वह छेड़ याद आती रही. ऐसा नहीं था कि पूरे स्कूल में सिर्फ वही था जिसने एमी को चिढ़ाया था. जब से एमी तीसरी कक्षा में आई थी, हर रोज कोई न कोई उसे चिढ़ाता ही था. बच्चे उसकी हकलाहट और उसकी लंगड़ी चाल को लेकर उसका मजाक उड़ाते रहते थे. एमी को इससे बहुत कोफ़्त होती थी. और, अकसर ऐसा होता था कि जब कोई एमी को चिढ़ाता था तो भरी पूरी कक्षा में भी वह अपने आप को नितांत अकेला महसूस करती थी.

आमतौर पर अपने घर पर चहकते रहने वाली एमी उस रात को बहुत ही गुमसुम सी थी. उसकी मां को यह भान था कि स्कूल में एमी के साथ सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. और इसी लिए पैटी हैगदार्न अपनी बेटी से बातचीत करने की कोशिश कर रही थी कि शायद इससे एमी के मन का बोझ कुछ हलका हो और वह स्कूल की बातें उसे बताए.

“तुम्हें पता है एमी- रेडियो स्टेशन पर क्रिसमस कामना प्रतियोगिता होने वाली है” उसकी मां ने उसे बताया. “उसमें तुम्हें सांता क्लॉज़ को एक पत्र लिखना है- अपनी किसी इच्छा को पूरी करने के लिए. सबसे बढ़िया लिखने वाले को इनाम मिलेगा. मुझे तो लगता है जिसकी तुम्हारे जैसी घुंघराले बाल होंगे, इनाम उसे ही मिलेगा.”

एमी की हँसी छूट गई. प्रतियोगिता उसे मज़ेदार लग रही थी. वह सोचने लग गई कि इस दफा क्रिसमस के मौके पर उसे क्या चाहिए था.

उसके चेहरे पर मुस्कान की क्षणिक रेखा खिंची जब उसके दिमाग में एक विचार उठा. वह तुरंत काग़ज़ कलम लेकर लिखने बैठ गई. “प्रिय सांता क्लॉज़,” उसने पहली लाइन लिखी.

जब एमी प्रतियोगिता के लिए अपना पत्र लिख रही थी, सारा परिवार यह अंदाजा लगाने में लगा था कि एमी अपने लिए क्या मांगेगी. एमी की दीदी तथा उसकी मां को लगता था कि एमी जरूर 3 फुट की बार्बी गुड़िया मांगेगी जिसे वह हर बार ललचाई आँखों से डिपार्टमेंटल स्टोर पर देखा करती थी. एमी के पिताजी का कहना था कि शायद वह कार्टून बनाने वाली किताब मांगेगी – जिसे वह लाने के लिए अकसर अपने पिता को कहा करती थी. परंतु एमी ने किसी को भी अपनी क्रिसमस कामना के बारे में नहीं बताया. वह इसे गुप्त ही रखना चाहती थी.

जिसे वह सबसे गुप्त रखना चाहती थी, उसने उस रात यह क्रिसमस कामना लिखी थी-


प्रिय सांता क्लॉज़,

मेरा नाम एमी है. मैं नौ साल की हूँ. मेरे साथ स्कूल
में समस्या है. क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो सांता क्लॉज़? जिस तरह से मैं बोलती
हूँ और चलती हूँ, उस पर स्कूल के बच्चे मेरे ऊपर हँसते हैं. मुझे सेरेब्रल पाल्सी
बीमारी है. मैं सिर्फ एक दिन ऐसा चाहती हूँ जिस दिन बच्चे मुझ पर न हँसें और न ही
मेरा मजाक उड़ाएँ.

प्यार,
एमी


फोर्ट वायेन, इंडियाना के डबल्यूजेएलटी रेडियो स्टेशन पर क्रिसमस कामना प्रतियोगिता के लिए बच्चों की चिट्ठियों का अंबार लग गया. कार्यकर्ताओं को चिट्ठियों को छांटने व पढ़ने में मजा भी आ रहा था. आसपास के तमाम बच्चों ने अपनी अपनी इच्छाओं को मजेदार तरीके से सांता क्लॉज़ से मांगा था.

जब एमी का पत्र रेडियो स्टेशन पर पहुँचा, तो प्रबंधक ली टॉबिन ने उसे ध्यानपूर्वक पढ़ा. उसे पता था कि सेरेब्रल पाल्सी मांसपेशियों में खराबी की एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में स्कूल के अन्य छात्रों को नहीं पता होगा कि एमी किस तकलीफ़ से गुजरती रहती है. उसे लगा कि फोर्ट वायेन के लोगों को तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली एमी की इस विशिष्ट क्रिसमस कामना के बारे में जानना चाहिए. टॉबिन ने स्थानीय समाचार पत्र के दफ़्तर में फोन लगाया.

अगले दिन, समाचार पत्र ‘न्यूज़ सेंटिनल’ के पहले पृष्ठ में एमी का चित्र उसके क्रिसमस कामना पत्र के साथ छपा. कहानी तेज़ी से चारों ओर फैली. पूरे देश में, सारे समाचार पत्रों में, सारे टेलीविज़न चैनलों में फोर्ट वायेन, इंडियाना की उस छोटी बच्ची की विशिष्ट परंतु बहुत सहज सी क्रिसमस कामना – सिर्फ एक दिन की कामना, जिस दिन कोई उसे न चिढ़ाए – के बारे में चर्चा होती रही.

और, देखते-देखते हैगदार्न के घर पोस्टमैन बोरों में भरकर चिट्ठियाँ लाने लगा. एमी के लिए सारे देश से, बच्चों-जवानों-बूढ़ों से हर आकार प्रकार में लिफ़ाफे आने लगे. उनमें शुभकामनाएँ होती थीं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा के शब्द होते थे.

उस क्रिसमस पर, जिसे एमी कभी नहीं भूल सकती, सारे देश से दो हजार से भी अधिक लोगों ने एमी को शुभकामना के पत्र लिखे. एमी तथा उसके परिवार के सदस्यों ने हर पत्र को पढ़ा. कुछ ऐसे लोगों ने भी पत्र लिखे थे जिन्हें एमी की तरह कुछ न कुछ शारीरिक समस्याएँ थीं, और जिन्हें एमी की ही तरह चिढ़ाया जाता रहा था. एमी के लिए हर पत्र में संदेश था. हालांकि शुभकामना कार्ड और पत्र पूरी तरह अजनबियों के थे, परंतु एमी को महसूस हुआ कि दुनिया में दयालु लोग हैं जो वास्तव में एक दूसरे की चिंता करते हैं. उसने निश्चय किया कि अब कोई कितना ही चिढ़ाए, सताए, अब वह कभी भी अकेलापन महसूस नहीं करेगी.

बहुत से लोगों ने एमी को धन्यवाद दिया कि उसने हिम्मत कर अपनी बात बताई. कई अन्य ने कहा कि लोगों के चिढ़ाने और सताने को नजर अंदाज कर अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुटे रहो. टेक्सास में छटीं कक्षा में पढ़ने वाली लिएन ने यह चिट्ठी एमी के लिए लिखीः

“मैं तुम्हारी दोस्त बनना चाहती हूँ” उसने लिखा- “और यदि तुम कभी मेरे यहाँ आ सको तो हम सचमुच बहुत सारे खेल खेलेंगे. यहाँ कोई हमें चिढ़ाएगा नहीं, क्योंकि हम उनकी बातें सुनेंगे ही नहीं.”

साउथ वायेन प्राथमिक शाला में एमी को उसकी क्रिसमस कामना ‘एक पूरा दिन बिना चिढ़ाए - बिना सताए’ मिल गई. इसके अतिरिक्त उस स्कूल में हर एक को शिक्षा का एक मंत्र भी मिला. स्कूल के शिक्षक और छात्रों ने यह समझा कि किसी को चिढ़ाने पर उसे कैसा महसूस होता होगा – खासकर तब जब उसे कोई शारीरिक अपंगता हो.

उसी वर्ष, फोर्ट वायेन के मेयर ने पूरे शहर में दिसम्बर 21 को एमी जो हैगदार्न दिवस मनाने की घोषणा की. मेयर ने स्पष्ट किया – एमी ने यह सरल सी क्रिसमस कामना कर सबको व्यापक पाठ पढ़ाया है.

“हम सब को” मेयर ने आगे कहा- “दूसरों से मान, मर्यादा और उत्साह युक्त व्यवहार की कामना होती है.”

- चिकन सूप फ़ॉर दि किड्स सॉल से साभार. मूल अंग्रेजी कहानी – एलन डी. शुल्ज. चिकन सूप फ़ॉर् दि किड्स सॉल – चिकन सूप फ़ॉर... श्रेणी की अत्यंत प्रसिद्ध और बेस्टसेलर किताबों में से एक है. इसमें आत्मा को झकझोरती, साहस की, प्यार और आशा की, बाल जीवन की 101 सच्ची कहानियाँ हैं. इस संकलन की हर कहानी पाठक के दिल को छूकर निकलती है. प्रकाशक- हेल्थ कम्यूनिकेशन्स इन्क., फ्लोरिडा, यूएसए. आईएसबीएन नं. 1-55874-609-9

- चित्र साभार सृजन कैमरा क्लब, रतलाम.

1 blogger-facebook:

  1. रवि भाई

    बेहद मार्मिक कथा है और साथ ही बहुत शिक्षाप्रद. दिल भर आया पढ़ते पढ़ते. आपके साभार से इस कहानी तक पहुँचा, बहुत धन्यवाद.

    समीर लाल

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