शनिवार, 31 दिसंबर 2005

मानसी चटर्जी की कुछ प्रेम कविताएँ

*************. प्रिय तुम... प्रिय तुम मेरे संग एक क्षण बाँट लो वो क्षण आधा मेरा होगा और आधा तुम्हारी गठरी में नटखट बन जो खेलेगा मुझ सं...

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2005

आलेख : काग के भाग

- जयप्रकाश मानस सृष्टि का सबसे बड़ा चमत्कार है- हर कृति का अनन्य एवं अनुपम स्वभाव । सबकी अपनी-अपनी अर्थवत्ता, अपना-अपना माहात्म्य । निरुद्...

गुरुवार, 29 दिसंबर 2005

आलेख : कविता क्या है?

**-** प्रकृति ही कविता है - अज्ञात् कविता क्या है ? - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कविता से मनुष्य-भाव की रक्षा होती है. सृष्टि के पदार्थ या व...

मंगलवार, 27 दिसंबर 2005

राजकुमार कुम्भज की कुछ कविताएँ

**-** अंतर्आत्मा की जलेबियाँ ******************. मैं लोकतंत्र में रहता हूँ और किसी एक लोकतांत्रिक पार्टी में रहते हुए किसी एक लोकतांत्रिक...

सोमवार, 26 दिसंबर 2005

हास्य-व्यंग्य : त्रासदियाँ अनिवार्य सेवा की

- नरेन्द्र कोहली सवेरे नींद खुली तो देखा, काफी देर हो चुकी है. समझ गया, गीता का कर्म-सिद्धांत एकदम सत्य है. रात को देर से सोया था, इसलिए ...

शनिवार, 24 दिसंबर 2005

लघुकथा : पहचान

- कालीचरण प्रेमी एक बार देवलोक के राजा इंद्र ने पृथ्वी लोक की यात्रा की योजना बनाई. अगले दिन वे नारद मुनि के साथ पुष्पक विमान द्वारा आकाश...

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2005

व्यंग्य : त्रासदियाँ प्रेम की

***.*** - नरेन्द्र कोहली कहां तो वह मेरी बात भी नहीं सुनती थी और कहाँ उस दिन बोली, “मैं तैयार हूँ. जहाँ तुम्हारा मन चाहे, ले चलो.” मेरे ...

गुरुवार, 22 दिसंबर 2005

हितेश व्यास की दो नई कविताएँ

**-** छोटी छोटी बात छोटी छोटी बातों पर मोटा मोटा ध्यान दिया और तुमने क्या किया मोटी मोटी बातों को सहन कर गए मोटे मोटे भार को वहन कर गए छो...

मंगलवार, 20 दिसंबर 2005

व्यंग्य : शिष्ट बनने के लिए भ्रष्ट बनिए

***-*** - राजकुमार कुम्भज भ्रष्टाचार में ही शिष्टाचार है. नो भ्रष्टाचार नो शिष्टाचार. नित नए नारागढ़ू, हमारे नेताओं को चाहिए कि वे ...

रविवार, 18 दिसंबर 2005

कैदी कविराय की कुंडलियाँ

*--* - अटल बिहारी वाजपेयी न्यूयॉर्क मायानगरी देख ली, इन्द्रजाल की रात; आसमान को चूमती, धरती की बारात; धर...

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2005

नरेन्द्र अनिकेत की कहानी : अनंत यात्रा

**-** उस दिन शरद अचानक भड़क उठा. एकदम अचानक गालियाँ बकने लगा, ‘सारी व्यवस्था चोर है. सब साले कुत्ते हैं.’ इससे पहले सारी बहसों में वह नई ...

शनिवार, 10 दिसंबर 2005

हितेश व्यास की दो कविताएँ

**-** सम्बन्ध **** सम्बन्ध मिट्टी के घरौंदे होते हैं लेकिन अब कहाँ होते हैं मिट्टी के घरौंदे कहावतों के सिवाय वे पाँव जो घरौंदे बनाते थे ...

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2005

आलेख : कविता तो परम स्वतंत्रता का दूसरा नाम है.

- हितेश व्यास जब संस्कृत काव्य शास्त्रियों ने गद्य को कवियों की कसौटी कहा तो उन्हें पता नहीं था कि एक समय गद्य में ही कविता लिखी जा...

गुरुवार, 8 दिसंबर 2005

हितेश व्यास की कविताएँ

**-** मोबाइल में तबदील सब कुछ पैसे में और पैसा बाज़ार में बदल गया है बाज़ार बदल गया है चीज़ों में आदमी हो गया है चीज़ों में एक चीज़ शब्द ...

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