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हास्य-व्यंग्य : किस्से अदालतों के...

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किस्से अदालतों के...
- रवीन्द्र नाथ त्यागी
सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के फ़ैसले को रद्द करते हुए उन चार लोगों को दोषी ठहराया जिन्होंने एक पत्रकार युवती के साथ कभी सामूहिक बलात्कार किया था और जिसके फलस्वरूप उस निरीह युवती की मृत्यु हो गई थी. हाईकोर्ट ने उस युवती के पति को कायर बताया था पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस तर्क को भी गलत करार दिया क्योंकि अकेला पति इतने लोगों के सामने कुछ भी नहीं कर सकता था. उस युवती के मात्र दो कसूर थे. पहला कसूर तो यह था कि वह रूपवती थी और दूसरा कसूर यह था कि उसने एक राजनीतिक पार्टी के खिलाफ एक अख़बार में अपनी रिपोर्ट छापी थी. दुःख की बात यह है कि इस फैसले तक पहुँचने में विभिन्न अदालतों को मात्र बाईस वर्ष लगे. ज्यादा जानकारी के लिए आप 25.4.2002 का ‘हिन्दुस्तान टाइम्स' पढ़ें.न्यायपालिका प्राय: भ्रष्टाचार से मुक्त होती है पर कहीं-कहीं इस प्रथा के अपवाद भी पाए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने जब यह कहा कि इस देश में बीस प्रतिशत जज भ्रष्ट हैं तो एक जागरूक नागरिक ने राजस्थान हाईकोर्ट में उपरोक्त चीफ़-जस्टिस के खिलाफ न्याय-पालिका की म…

हास्य कथा - जैसे को तैसा

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जैसे को तैसा- मोहिनी रावएक जमींदार के लिए उसके कुछ किसान एक भुना हुआ मुर्गा और एक बोतल फल का रस ले आए. जमींदार ने अपने नौकर को बुलाकर चीजें उनके घर ले जाने को कहा. नौकर एक चालाक, शरीर लड़का था. यह जानते हुए जमींदार ने उससे कहा, "देखो, उस कपड़े में जिंदा चिड़िया है और बोतल में जहर है. खबरदार, जो रास्ते में उस कपड़े को हटाया, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो चिड़िया उड़ जाएगी. और बोतल सूंघ भी ली तो तुम मर जाओगे. समझे?"नौकर भी अपने मालिक को खूब पहचानता था. उसने एक आरामदेह कोना ढूंढा और बैठकर भुना मुर्गा खा गया. उसने बोतल में जो रस था वह भी सारा पी डाला. एक बूंद भी नहीं छोड़ा.उधर जमींदार भोजन के समय घर पहुँचा और पत्नी से भोजन परोसने को कहा. उसकी पत्नी ने कहा, "जरा देर ठहरो. खाना अभी तैयार नहीं है." जमींदार ने कहा, "मैंने जो मुर्गा और रस की बोतल नौकर के हाथ वही दे दो. वही काफी है."उसके गुस्से की सीमा न रही जब उसकी पत्नी ने बताया कि नौकर तो सुबह का गया अभी तक लौटा ही नहीं.बिना कुछ बोले गुस्से से भरा जमींदार अपने काम की जगह वापस गया तो देखा नौकर तान कर सो रहा है. उस…

हास्य - व्यंग्य : पति का मुरब्बा

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हास्य - व्यंग्यपति का मुरब्बा-गीता शॉ पुष्पयदि आपके पास पति है, तो कोई बात नहीं. न हो तो अच्छे, उत्तम कोटि के, तेज-तर्रार पति का चुनाव करें. क्योंकि जितना बढ़िया पति होगा, मुरब्बा भी उतना ही बढ़िया बनेगा. दागी पति कभी भी प्रयोग में न लाएँ. आवश्यकता से अधिक पके का चुनाव करने से भी मुरब्बा जल्दी खराब हो सकता है. नए ताजे पति का मुरब्बा डाल देने ठीक होता है. नहीं तो मौसम बदलते ही, अन्य सुन्दरियों के सम्पर्क में आने से उसके खराब होने की सम्भावना है.अभी से मुरब्बा डालकर रखेंगी, तो जीवन भर उंगलियाँ चाटकर, चटखारे लेकर उसका आनन्द उठा सकेंगी. आपके घर की शोभा बढ़ेगी. भविष्य में आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा. मुरब्बा डला पति मर्तबान के दायरे में ही रहता है. ट्रान्सपोर्टेशन में भी आसानी होती है. किसी भी मौसम में उसका उपयोग कर सकती हैं. पड़ोसियों और सहेलियों को जला सकती हैं.आवश्यक सामग्री : प्रेम की चीनी, पति के बराबर तोल के मुस्कान की दालचीनी, हँसी की इलायची, जीवन के रंग, आवश्यकतानुसार नैनों की छुरी, एक मर्तबान.विधि : पति को धो-पोंछकर साफ करें. मन के ऊपर लगी धूल अच्छी तरह रगड़कर दिल के कपड़े से पोंछ …

कुछ पाकिस्तानी ग़ज़लें

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मुनव्वर हुसैन बलोच की दो ग़ज़लेंइस धरती पर कितना दुःख हैइस धरती पर कितना दुःख है प्यारे, देखऊँचे महलों के वासी दुखियारे , देखभूक और बेचैनी का हर-सू राज यहाँये मजदूरों की बस्ती है प्यारे, देखसुर्खी, पाउडर और परफ़्यूमों के इनसानबिलख रहे हैं बच्चे भूक के मारे, देखआस न तोड़ मिलन की, मन को आशा देचाँद की राहें देखें कब से तारे, देखबादल, सब्जा, फूल और पानी, सब यकजाकुदरत की फनकारी के शहपारे देखलफ़्जों में तस्वीर उतर सकती है कबहोंट कली से बढ़कर नैन नियारे देखयार ‘बलोच’ ये वक्त भी कितना जालिम हैहमसे बिछड़े कैसे यार हमारे देख**-**फीका-फीका सा है शहर का रंगमैं मजबूर, तेरी चाहत और शहर का रंगकब तक देखूं इक जलती दोपहर का रंगलोगों बोझल आँखों के सब ख्वाब हवानींदें अपनी और न अपना दहर का रंगकौन समय की आँखों में डूबा-उभराकिसने देखा उस उठती हुई लहर का रंगजख़्मों की गहराई नापने से हासिल?क्या मतलब खंजर से, कैसा जहर का रंगमर मिटना ही जब ठहरा अंजाम तो फिरक्या घबराना जुल्म से, कैसा कहर का रंगयार ‘मुनव्वर’ इक मैं ही अफ़सुर्दा नहींफीका-फीका सा है सारे शहर का रंग**-**रिजाज़ साग़र की दो ग़ज़लेंमैं बिखर रहा हूँमैं …

बाल पहेली कोश से कुछ बाल पहेलियाँ...

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चंद बाल पहेलियाँ1 चार पाँव पर चल न पाए चलते को भी वह बैठाए
2 मारे से वह जी उठे बिन मारे मर जाए
3 चल पड़ती तो चल जाती बिना सहारे ठहर न पाती
4 छोटे से मियाँ जी दाढ़ी सौ गज की
5 एक घर में राजा सोएँ दूसरे में पाँव पसारें
6 दिन में मुर्दा रात में जिंदा
7 मुंह पर पानी छिड़का क्यों सुनार खाली बैठा क्यों
8 मेरा भाई बड़ा शैतान बैठे नाक पर पकड़े कान
9 साथ-साथ मैं जाती हूँ हाथ नहीं मैं आती हूँ
10 हरा आटा लाल पराँठा सखियों ने मिलकर बांटा
11 दिन में लटकी रात में अटकी
12 सिर पर पत्थर पेट में अंगुलि
13 सदा करूं चौकीदारी मेरे दम पे दुनियादारी
14 एक लड़का जनम का हीना जिन देखा तिन थू-थू कीना
15 गोल मोल और छोटा मोटा हर दम वह जमीन पर लोटा खुसरो कहे यह नहीं झूठा जो न बूझे अक्ल का खोटा
16 आगे-आगे बहना आई पीछे-पीछे भइया दाँत निकाले बाबा आए बुरका ओढ़े मइया
17 अचरज बँगला एक बनाया ऊपर नींव तरे घर छाया बांस न बल…

पूरन सरमा का व्यंग्य - सूट कथा

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व्यंग्य : सूट कथा


- पूरन सरमासूट सर्दी का पहनावा है. हर आदमी की इच्छा होती है कि वह सूट पहने. कुछ लोगों को शादी के मौके पर सूट नसीब हो जाता है और वे पूरे जीवन उसे सीने से लगाए फिरते हैं. कुछ लोग सूट बनवा भी लेते हैं, लेकिन पहन नहीं पाते. वे सूट को लेकर पेशोपेश में रहते हैं. इस तरह सूट पूरी सर्दी परेशान करता है. मेरी परेशानी फिलहाल यह है कि मेरे पास सूट नहीं है. हिसाब से तो मेरे पास सूट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसके पहनने का कोई कारण मेरे पास नहीं है, लेकिन बावजूद इसके मेरे पास इसकी एक महत्वाकांक्षी योजना है कि मेरे पास काश! एक सूट हो तो मेरे बराबर वाली सीट पर सूट पहन कर बैठे आदमी को मैं किसी क्षेत्र में परास्त कर देता. यह बराबर वाली सीट मेरे दफ़्तर में ही नहीं, बस में, रेल में, सिनेमा में, सांस्कृतिक संध्या में या फिर किसी आशीर्वाद समारोह में, कहीं भी हो सकती है.लोगों का मानना है कि सूट पहनने के लिए अच्छी आय या पद का होना अपेक्षित नहीं है. क्योंकि अच्छे पद वाले सूट नहीं पहन पाते और उधर उनके अधीनस्थ लिपिकीयकर्मी रोज सूट बदलते हैं. इस तरह सूट यहाँ फिर धर्मसंकट बन जाता है मेरे लिए…

हिंदी मीडिया की दिशा बदल सकता है यूनिकोड

.हिंदी मीडिया की दिशा बदल सकता है यूनिकोड - बालेन्दु शर्मा दाधीच हाल ही में राजधानी में 'मीडिया में यूनिकोड की प्रासंगिकता' पर अमेरिकन इन्स्टीटयूट ऑफ इंडियन स्टडीज की ओर से आयोजित एक गोष्ठी में मैंने किसी बड़े मीडिया संस्थान को पूरी तरह यूनीकोड समर्थित करने में आड़े आने वाली वित्तीय उलझनों का जिक्र किया था। इस पहलू ने यूनिकोड के प्रति उत्साहित लोगों को थोड़ा उद्वेलित किया। लेकिन यूनिकोड अपनाने की अनिवार्य आवश्यकता के साथ-साथ व्यावसायिक और वित्तीय पहलुओं पर व्यावहारिक दृष्टि डालना जरूरी है। किसी अखबार के यूनिकोडीकरण की तीन श्रेणियां हो सकती हैं- उसकी वेबसाइट या पोर्टल को यूनिकोड युक्त किया जाना, वेबसाइट के साथ-साथ अखबार के निर्माण तंत्र (जिसमें कम्पोजिंग, डिजाइनिंग, समाचार वितरण व संकलन व्यवस्था, ग्राफिक्स आदि आते हैं) को यूनिकोडित किया जाना और वेबसाइट व अखबार के साथ-साथ उस समाचार संस्थान की सम्पूर्ण व्यवस्था (विज्ञापन संकलन, वितरण व्यवस्था, प्रबंधन, अकाउंटिंग, ईआरपी, डेटाबेस, ईमेल प्रणालियां आदि) का भी यूनिकोडित किया जाना। इन तीनों श्रेणियों में यूनिकोडित होने वाले कम्प्यूटरों और स…

भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड

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भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड - बालेन्दु शर्मा दाधीच सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास और सुधार की निरंतर प्रक्रिया चलती रहती है और इसी संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों से सूचनाओं के भंडारण की एक आधुनिकतम पद्धति लोकप्रिय हो रही है जिसे यूनिकोड कहते हैं। यूनिकोड के माध्यम से पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी पर अंग्रेजी की अनिवार्य निर्भरता से मुक्ति की संभावनाएं दिख रही हैं क्योंकि यह पद्धति एक आम कम्प्यूटर को विश्व की सभी भाषाओं में काम करने में सक्षम बना सकती है। जाहिर है, आईटी के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को विकसित होते देखने की आकांक्षा रखने वाले लोग यूनिकोड में छिपी संभावनाओं को देखकर उत्साहित हैं क्योंकि कई दशकों के बाद अब हम बिना अंग्रेजी जाने कंप्यूटर की क्षमताओं का प्रयोग करने की स्थिति में आ रहे हैं। मीडिया में कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी की असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह भी आने वाले कुछ वर्षों में इस काल-विभाजक परिघटना से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। हालांकि यूनिकोड है तो सिर्फ डेटा के स्टोरेज संबंधी एनकोडिंग मानक, लेकिन इसके प्रयोग से क…

कहानी : ... एडीटर बुल्लेशाह का

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किस्सा बी सियासत भठियारिन और एडीटर बुल्लेशाह का
-अमृतलाल नागरजाड़े की रात. नया जंगल. एक डाल पर तोता, एक डाल पर मैना. हवा जो सनसन चली तो दोनों कांप उठे. मैना अपने पैरों को समेटकर बोली की अय तोते, तू भी परदेशी, मैं भी दूसरे देश की. न यहाँ तेरा आशियाना और न मेरा बसेरा. किस्मत ने हमारा घर बार छुड़ाया, लेकिन मुसीबत ने हमें साथी बनाया, इसलिए अय तोते, अब तू ही कोई जतन कर कि जिससे रात कटे, कोई किस्सा छेड़ कि मन दूसरा हो.तोता बोला कि अय-मैना, सुन! मैं देश-परदेश उड़ा और सरायफानी देखी. उसके भठियारे का नाम इलाही, और भठियारिन हैं बी सियासत, जो जिन्दगी की सेज से उतरने का नाम ही नहीं लेती. उन्हें ढली जवानी में नयी नवेली बनने का शौक चर्राया है कि अल्लाह अल्लाह! उनके साज सिंगार की फरमाइशों ने मियाँ इलाही की सरायफानी को सुनार की दुकान बना रखा है. चारों ओर भट्टियाँ धधक रही हैं, दिमाग का सोना गलाया जा रहा है. हर तरफ ठक-ठक का शोर इस कदर कि भठियारे मियाँ इलाही के हुक्के की गुड़गुड़ाहट ही दब गई. ग्राहकों की तौबातिल्ला और शिकायतों से सरायफानी का छप्पर उड़ने लगा. मगर ऐ मैना, अजब ढंग हैं बी सियासत के कि कल का …

चुटकुले - 851 से 900

चुटकुला # 0851शर्मा जी अपने पड़ोसी के घर पहुंचे और बोले- देखिए आपके लड़के ने मेरे कमरे का शीशा ईट मारकर तोड़ दिया।पड़ोसी (शर्मा जी से)- आप उसकी हरकतो पर ध्यान मत दीजिए वह तो पागल है।शर्मा जी (पड़ोसी से) - तो फिर अपने मकान का शीशा क्यों नहीं तोड़ता?पड़ोसी (शर्मा जी से)- क्योंकि वह इतना पागल भी नहीं है।चुटकुला # 0852एक कैदी (दूसरे कैदी से)- तुमसे कोई मिलने क्यों नहीं आता,क्या तुम्हारा कोई रिश्तेदार नहीं है।दूसरा कैदी- है तो, बहुत पर सारे इसी जेल में है। चुटकुला # 0853मां (बेटे से)- ‘तुम्हारा ऑफिस में काम कैसा चल रहा है?‘बेटा (मां से)- ‘मेरे नीचे 25 आदमी काम करते है।‘मां - ‘तो क्या तू अभी से अफसर हो गया?‘बेटा- मां, ‘मैं ऊपर की मंजिल में काम करता हूं।‘चुटकुला # 0854प्रेमिका (प्रेमी से)- तुम इतने घबराये क्यों हो?प्रेमी (प्रेमिका से)- मुझे एक व्यक्ति की ओर से धमकी भरा खत मिला है कि मैंने उसकी पत्नी से मिलना नहीं छोड़ा तो वह मेरा खून कर देगा।प्रेमिका (प्रेमी से)- तो फिर तुम उसकी पत्नी से मिलना क्यों नहीं छोड़ देते?प्रेमी (प्रेमिका से)- पर धमकी भरा खत गुमनाम व्यक्ति ने लिखा है। मैं कैसे जान सकता हूं क…

व्यंग्य - कंप्यूटरजी को एक ख़त...

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प्रिय श्री कंप्यूटरजी- गोपाल चतुर्वेदीप्रिय श्री कंप्यूटरजी,परलोकीप्रसाद का सादर वंदे स्वीकार हो.आगे समाचार यह है कि परमेश्वर की कृपा से यहाँ सब आनंद-मंगल है. ऐसी ही कामना आपके लिए भी है. भारत ज्योतिष संघ ने अपनी साधारणसभा की अत्यावश्यक बैठक में यह निश्चय किया है कि मैं आपसे तत्काल संपर्क करूं. आपको पत्र लिखने के मूल में विशुद्ध ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' की भावना है. जैसा आपको विदित है, भारत अर्वाचीन और आधुनिक जीवन-शैली के सह-अस्तित्व का सबसे सशक्त उदाहरण है.दिल्ली में जहाँ एक ओर परांठेवाली गली है, वहीं चाइनीज भोजन के पाँच-सितारा रेस्तरां भी हैं. कहीं कैबरे चल रहा है, कहीं कथा. तकनीकी कारखानों की आधारशिला भी शुभमुहूर्त के समय पूजा-पाठ के बाद, नारियल फोड़कर रखी जाती है. यह मिली-जुली संस्कृति हमारी सबसे महत्वपूर्ण धरोहर है. हजारों वैज्ञानिकों का अथक परिश्रम और लगन इसके लिए जिम्मेदार है, साथ ही हम पंडितों का संस्कार-प्रेम भी.हाल ही में हमारे शांतिप्रिय देश में एक रक्तहीन क्रांति हुई है. नई सरकार और नए नेतृत्व का प्रादुर्भाव हुआ है. सुना है, इसमें आपकी बहुत चलती है. प्रत्याशियों के …

बगिया....

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बगिया
- कुसुम लता त्यागीबगिया में कोयल कूके है ,कुहु कुहु ओहो कुहु कुहु ये मंत्र कानों में फूंके है ,तु ही तु है ओहो तु ही तु है
आकाश में पंछी डोले हैं ,फुर फुर फुर ओहो फुर फुर फुर संगीत मिलन का बोले है ,तू ही तू है ओहो तू ही तू है
पपिहा ये बूंद को तरसे है ,कहे पिया पिया ओहो पिया पिया ये तुझसे मिलन के नगमें हैं ,कहे मोरा जिया ओहो मोरा जिया
फूलों पर भौंरे गूंजे हैं ,गुन गुन गुन ओहो गुन गुन गुन ओंकार की सुन्दर की गूंजें हैं ,सुन सुन सुन ओहो तू भी तो सुन
आकाश में बादल गरजें हैं ,उमड़ घुमड़ ओहो उमड़ घुमड़ वो भी तो पी से मिलने का ,सुर है सुन्दर ओहो अति सुन्दर
बादल से पानी बरसे है ,छम छम छ म ओहो छम छम छम भक्तिन देवालय जाए है ,कहे थम थम थम ओहो थम थम थम**-**
चित्र : रवि..

लोन लीजिए लोन...

बैंक लोन
डा कान्ति प्रकाश त्यागी खाने के बाद सोया ही था, अचानक बजने लगा टेलिफ़ोन ,
घबरा कर उठा, फ़ोन उठा कर पूछा, हैलो ! आप हैं कौन ?
नमस्कार, मैं हूँ, यूनियन बैंक आफॅ इंडिया से के के ज़ोन,
कहिए मि ज़ोन !, हम बैंक से दिलाते हैं सस्ती दर पर लोन
यदि आप कवारे हैं, तो मैरिज़ के लिए लोन ले सकते हैं
हनीमून के लिए, विलिगंटन अथवा वाशिंगटन जा सकते हैं
ग्रीष्म अवकाश के लिए, होनूलूलू एवं टिम्बकटू जाइए,
पर्यटन के लिए, ओसाका और लूसाका जाइए
तलाकशुदा से शादीशुदा, शादीशुदा से तलाकशुदा बनायेंगे ,
बैंक से लोन दिलाकर, आपका जीवन सुखी बनायेंगे
आपको कुछ नहीं करना है ,
घर बैठे ही फार्म भरना है
यदि आपकी कन्या विवाह योग्य है, तो "कन्या विवाह लोन" लीजिए,
यदि विवाह योग्य नहीं, तो विवाह योग्य बनाने के लिए लोन लीजिए
बच्चों को दिलानी हो, प्रसिद्ध संस्थानों की उच्च शिक्षा ,
राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्थानों की पूर्ण दीक्षा
तुमको क्या मतलब ?, हमें उनको चोर बनाना है,
उसके लिए भी तो जनाब आपको लोन लेना है
आजकल गली नुक्कड़ के चोर उचक्कों से काम नहीं चलना है,
प्रतिस्पर्धा के युग में, अंडरवर्ल्ड का बहुत बड़ा डॉन बनना है
च…

1001 चुटकुलों की पीडीएफ़ ई-बुक

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1001 चुटकुले - पीडीएफ़ ई-बुक डाउनलोड
सुहैब ने रचनाकार के कुछ पुराने चुटकुलों की कड़ियों के बारे में पूछा था. दरअसल, अनुगूंज के एक आयोजन के तहत 1001 चुटकुलों के संग्रह की कवायद की गई थी, जिसे रचनाकार में समय समय पर प्रकाशित किया गया था. इसे आप नीचे सीधे ही पढ़ सकते हैं -


Open publication - Free publishing - More chutkula .
इन 1001 चुटकुलों की ई-बुक पीडीएफ़ ई-बुक को आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं:
http://issuu.com/ravishankarshrivastava/docs/1001-hindi-jokes-e-book?mode=window&viewMode=singlePage&backgroundColor=%23222222

रचनाकार के चुटकुले
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चुटकुले 801 से 850

चुटकुला # 0801(एक यात्री ट्रेन से यात्रा कर रहा था, तभी टिकट चेकर आता है...)टिकट चेकर (यात्री से)- टिकट दिखाओ?यात्री (टिकट चेकर से)- नहीं है।टिकट चेकर (यात्री से)- कहां जाना है?यात्री (टिकट चेकर से)- वही जहां राम पैदा हुए थे।टिकट चेकर (यात्री से)- अब चलो मेरे साथ।यात्री (टिकट चेकर)- कहां?टिकट चेकर (यात्री से)- जहां श्रीकृष्ण पैदा हुए थे।चुटकुला # 0802अभिनेता (डायरेक्टर से)- डायरेक्टर साहब, इस फिल्म में मेरा किरदार एक पागल का है। मुझे इसमें जान डालने के लिए क्या करना चाहिए?डायरेक्टर (अभिनेता से)- कुछ नहीं, तुम बिल्कुल वैसे ही हो, जैसा तुम्हें रोल मिला है। चुटकुला # 0803एक साहब कपड़े की दुकान पर कपड़ा लेने आए और वह कपड़े की क्वालिटी तथा उसकी गारंटी के बारे में पूछताछ कर रहे थे। दुकानदार ने उनसे पूछा भाई साहब आखिर आपको कितना कपड़ा चाहिए।साहब बोले- मुझे केवल आधा मीटर कपड़ा टोपी बनाने के लिए चाहिए।दुकानदार ने उनको आधा मीटर कपड़ा दे दिया तो साहब फिर बोले- इस कपड़े की गारंटी क्या है?दुकानदार झल्लाकर बोला- आपका सिर फट सकता है पर इस कपड़े की बनी टोपी नहीं फट सकती।चुटकुला # 0804मच्छर का खून करने के इल्…

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तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

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अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

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