नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ खोज कर पढ़ें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

कहानी की कहानी

साझा करें:

-कृश्न चंदर नोबल पुरस्कार विजेता शोलोखोव मेरे प्रिय लेखकों में से हैं. लेकिन कभी-कभी वे भी विचित्र दकियानूसी की बात कर जाते हैं. इधर हाल मे...



-कृश्न चंदर

नोबल पुरस्कार विजेता शोलोखोव मेरे प्रिय लेखकों में से हैं. लेकिन कभी-कभी वे भी विचित्र दकियानूसी की बात कर जाते हैं. इधर हाल में उनका एक वक्तव्य प्रकाशित हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है कि साहित्य का क्षेत्र पुरुषों के लिए है और यह कि साहित्य-सर्जन स्त्रियों के वश की बात नहीं. अब यदि वे होते भारत में तो हम मिलाते उन्हें उर्दू की अस्मत चुगताई से, रज़िया सज्जाद ज़हीर से, कर्तुलैन हैदर से, सलमा सिद्दीकी से, जीलानी बानो से. हिन्दी की महादेवी वर्मा से, ऊषा देवी मित्रा, कमला चौधरी और मन्नू भंडारी से. पंजाबी की अमृता प्रीतम और प्रभजोत कौर से. फिर ये स्त्रियाँ जो अपनी-अपनी भाषा की प्रथम श्रेणी की लेखिकाएँ हैं, स्वयं समझ लेतीं शोलोखोव महोदय से. या अगर वे होते जर्मनी में तो आना सीघर्स से मुठभेड़ हो जाती उनकी, जो आधुनिक जर्मन लेखकों में अग्रणी उपन्यासकार मानी जाती हैं. या अगर वे होते मीराबाई के काल में, जेन ऑस्टिन या एमली ब्रांटे के युग में या इससे बहुत पहले प्रसिद्ध कवयित्री सोफो के जीवन में तो वह जीना दूभर कर देती उनका. वास्तव में अब तक सन्तानोत्पत्ति की महत्वपूर्ण समस्या ने स्त्रियों को फुर्सत ही कब दी कि वे किसी अन्य काम के प्रति पूरा ध्यान दे सकतीं. फिर उन्हें इतना अधिक पिछड़ा हुआ रखा गया, इतना अनपढ़ रखा गया, इतना अधिक पर्दे में या घर की चारदीवारी में बन्द रखा गया कि जीवन के अन्य विभागों की तरह ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में भी वे अधिक संख्या में अपनी प्रतिभा न दिखा सकीं- तो इस पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए. और उनपर छींटाकशी की तो कोई गुंजाइश ही नहीं है.

मैंने शोलोखोव और स्त्रियों की चर्चा इसलिए की कि ‘कहानी की कहानी’ का वर्णन करने के सिलसिले में इनकी चर्चा आवश्यक थी. बहुत से लोग यह भूल जाते हैं कि कहानी की कला का आरम्भ सबसे पहले स्त्री ने ही किया था. बाद में पुरुष अपनी धांधली और घपलेबाजी से उससे आगे बढ़ गया. लेकिन इस तथ्य पर अधिकतर वैज्ञानिक और अन्वेषक सहमत हैं कि कहानी कहने की कलाकार सबसे पहले स्त्री ही थी – खेती बाड़ी की तरह. शायद इस बात से आप भी सहमत होंगे कि खेती-बाड़ी करना पुरुष को सबसे पहले स्त्री ने सिखाया था. जब मानव जंगलों में रहते थे तो अधिकतर पुरुष शिकार के लिए चले जाते थे – और शिकार खेलना आज के शिकार की तरह आसान भी न था. न बन्दूक थी उन दिनों, न राइफल, न कारतूस. तीर-धनुष भी बाद के आविष्कार हैं. इससे पहले मनुष्य के लिए किसी जन्तु को मारना और उसका मांस प्राप्त करना जान जोखिम का काम था. कई बार अपने जाल में स्वयं आखेटक आ जाता था और किसी का मांस प्राप्त करने की बजाए स्वयं उसके खाने का मांस बन जाता था. इधर तो यह दुर्घटना हुई, उधर घर पर या किसी खोह में बीवी-बच्चे भूखे हैं. ऐसी स्थिति में स्त्री ने वे पौधे ढूंढे जिनके बीज खाकर जीवित रहा जा सकता था. स्त्री ने न केवल पुरुष को गेहूँ का दाना खाने पर प्रेरित किया, बल्कि उसे उगाना भी सिखाया. चावल भी स्त्रियों ही की खोज है. फिर पत्थर के हल या किसी जंगली पशु की हड्डी से भूमि खोदकर बीजों द्वारा नए पौधे उगाना – यह भी स्त्रियों ही की देन है. आज का किसान खेत में हल चलाता है और समझता है वह अपनी स्त्री को रोटी खिला रहा है, हालांकि रोटी पकाकर खिलाने की कला भी स्त्रियों का ही आविष्कार है.

आपने सबसे पहली कहानी अपनी नानी मां से सुनी होगी या दादी मां से या अपनी मां से. आज से हजारों वर्ष पहले की कहानी अर्थात् सबसे पहली कहानी भी इसी प्रकार रात के सन्नाटे में कही गई थी – अंधेरे के भय को मिटाने के लिए. बच्चे के मन में जीवन की सुखद कल्पना को जगाने के लिए. मां की मेहरबान गोद में सुलाने के लिए. इसी प्रकार लोरी, गीत, कविता और कहानी की कला का प्रारंभ हुआ. चेखोव, शोलोखोव, मोपासां, माम, प्रेमचन्द, मण्टो, राजेन्द्रसिंह बेदी बाद में आए. पहले तो एक स्त्री आई थी. आज की भी कोई कहानी स्त्री के बिना पूर्ण नहीं होती और नहीं दिलचस्प समझी जाती है.

जिस प्रकार खेती-बाड़ी की कला स्त्री के हाथ से निकलकर एक पेचीदा और मिश्रित क्रिया बन गई है, उसी प्रकार कहानी मां की लोरियाँ और परीकथाएँ आगे बढ़कर जीवन की व्याख्या बन गई हैं और बेहद पेचीदा और मिश्रित हो गई हैं.

बहुत समय तक कहानी की कला एशिया में भाटों के और योरुप में प्रोउबाडौर्ज के सुपुर्द रही. ये घुमक्कड़ गायक विभिन्न किस्से-कहानियों को काव्य का रुप देकर और उन्हें राग में ढालकर साज पर सुनाते थे. इन दिनों कहानियाँ गाई जाती थीं. कविता, संगीत और कहानी एक ही सांचे में ढल जाते थे – और क्या-क्या दिलचस्प किस्से होते थे. शूरवीरों के और बहादुरी के, नाईट्स के, राजाओं के और राजकुमारियों के, सफल और असफल प्रेमियों के, उन अप्राकृतिक दैत्यों के जो कोमलांगी सुन्दरियों को काठ के पिंजरे में या एक छोटी-सी डिबिया में बन्द करके अपनी जेब में रख लेते थे और ‘मानस गंध, मानस गंध’ कहते हुए मनुष्य के शिकार की तलाश में निकल पड़ते थे.

आज कहानी उस काल से बहुत दूर निकल आई है. प्रत्यक्ष रुप से उसका सम्बन्ध कविता से, संगीत से, राग और साज से कट गया है. अब कहानी गद्य की भाषा में ढल गई है, लेकिन आज की कहानी भी भीतरी संगीत, भीतरी राग और उसकी लय से वंचित नहीं हो सकती जो साहित्य और कला की हर शाखा में एक अच्छी रचना को एक बुरी रचना से विशिष्ट बतलाती है. आज की अच्छी कहानी भी उसी पहले उद्देश्य को पूरा करती है, जिसकी आवश्यकता मां ने अपने बच्चे के लिए समझी थी. अर्थात् अंधेरे के भय को मिटाने के लिए और जीवन की सुखद कल्पना को मानव-मन में जगाने के लिए आज भी कहानी प्रयोग में लाई जाती है, और भविष्य में लाई जाएगी. और यही इसका समुचित उद्देश्य भी होगा. क्योंकि मनुष्य यद्यपि बहुत उन्नति कर गया है तथापि वह आज भी जंगल में रहता है. चारों खूंट जंगल बसे हैं और उनमें दीवारों के वृक्ष उगे हुए हैं और दानव-शक्तियाँ जीवन के सुन्दर और मृदुल मूल्यों को काठ के पिंजर में कैद किए या जेब की किसी डिबिया में डाले ‘मानस गंध, मानस गंध’ करती हुई मनुष्य के शिकार की तलाश में घूम रही हैं. समुदायों, जातियों और देशों के सरदार, महाराजे और सुल्तान गए तो तेल के बादशाह आ गए. लोहे के शहनशाह और जूट के सुलतान. भाट यदि प्रशंसा-गायक नहीं हैं तो उनका सिर कलम होगा. घुमक्कड़ों, सफल और असफल प्रेमियों के लिए कहानी कहना आज भी उतना ही कठिन है चितना उन पिछले जमाने में था.

इधर कहानी के क्षेत्र में कुछ नए लोग आए हैं. ये लोग कहने को ‘नई पीढ़ी’ के हैं लेकिन हैं बिल्कुल हमारे जैसे. हमारे जैसे ही कपड़े पहनते हैं, उसी प्रकार शेव करते हैं. उसी भाषा में बातचीत करते हैं, जिसमें हम करते हैं. उसी प्रकार रोटी-रोजी की तलाश में मारे-मारे फिरते हैं. बिलकुल सामान्य लोगों की तरह उद्देश्य पूर्ति के लिए खुशामद भी करते हैं. इनके जीवन के प्रत्येक विभाग में व्यवस्था है, सन्तुलन है, उद्देश्य है, मार्ग है, मंजिल है – और अगर कहीं पर कुछ नहीं है तो केवल साहित्य के क्षेत्र में नहीं है. वे जीवन के प्रत्येक अंग में किसी न किसी उद्देश्य को सामने रखते हैं लेकिन साहित्य में नहीं. आप जब उनसे बात करेंगे तो उनकी बातचीत बिलकुल ठीक-ठीक आपकी समझ में आ जाएगी. लेकिन जब कहानी लिखेंगे तो आपके पल्ले कुछ नहीं पड़ेगा. सिवाय ऊटपटांग, अनबूझ पहेली के. वे कॉफी हाउस का रास्ता जानते हैं लेकिन अपनी कहानी के नहीं. उन्हें अपनी नौकरी का उद्देश्य मालूम है, अपनी कहानी का नहीं. जब वे अपने घर जाते हैं तो दो टांगों के सहारे कदम उठाते हुए जाते हैं, लेकिन अपनी कहानी में सिर के बल रेंगते हैं, और उसे आर्ट कहते हैं. उन्हें कहानीकार नहीं, मदारी कहता हूँ. ये लोग रंगीन शब्दों के फीते अपने मुँह से निकालते हैं. अपनी झोली से खरगोश, अपनी जेब से अंडा – और आपको आश्चर्यचकित छोड़कर चल देते हैं. बाद में आप सोचते हैं कि आपकी जेब की आखिरी चवन्नी भी इसी तमाशे की भेंट हो गई और मिला कुछ भी नहीं. और आपको कुछ मिले भी क्यों? क्योंकि ये लोग आपसे केवल लेने के काइल हैं, बदले में कुछ देने के नहीं – और समाज में आप जानते हैं, लोग कुछ काम करते हैं. उस काम का कोई क्रम होता है, प्रबन्ध होता है, कोई उद्देश्य होता है. उस काम से किसी की सेवा की जाती है और उसका पारिश्रमिक भी मिलता है. लेकिन ये नए कहानीकार समाज को केवल इस सीमा तक मानते हैं कि समाज इनको कुछ दे और बराबर देता रहे. उसके एवज़ में ये समाज को क्या देते हैं, इसकी इन्हें कोई परवाह नहीं है. न ये इस प्रकार की बातों के काइल हैं. कहानी लिखते समय ये बिल्कुल निरूद्देश्य होंगे लेकिन कहानी छपते ही तुरन्त उद्देश्य के काइल हो जाएंगे – यानी पारिश्रमिक के, ख्याति के, सम्मान और प्रशंसा के – अर्थात् उन समस्त उद्देश्यों के, जिनके लिए सामान्य व्यक्ति प्रायः संघर्षशील रहते हैं.

मैंने अपनी बूढ़ी नानी मां से भी कहानियाँ सुनी हैं और स्वयं अपनी मां से भी. इसलिए मेरी कहानी की कला भी उतनी ही पुरानी है. अर्थात् कहानी सुनने वाले को कहानी का आनन्द आए. रात, मौत और अंधेरे का भय दूर हो. जीवन की सुखद और प्रकाशमान कल्पनाएँ जागें क्योंकि हम सूर्य की सन्तान हैं. यदि हम अंधकार की संतान होते तो हमारी आँखें न होतीं और हमारी अनुभूतियों की कुछ और ही स्थिति होती. लेकिन हम सूरज की संतान हैं. अग्नि हमारा देश है. प्रकाश हमारा भोजन है. चाँदनी हमारे प्रियतम का बदन है. हम आँखों में आँखें डालते हैं और प्रेम करते हैं क्योंकि हम अंधे नहीं हैं. इस संसार में आँखों से अधिक पवित्र कोई वस्तु नहीं है.

इसीलिए मेरी कहानियाँ आँखें रखती हैं. वे मार्ग देखती हैं और आसपास के मनोरंजक दृश्य भी, लेकिन प्रतिक्षण दृष्टि उधर ही रहती है जहाँ जाना है. जिसे उद्देश्य या गन्तव्य कुछ भी कह लीजिए. मैं उसे हाथीदांत का टावर कहता हूँ. सौ वर्ष से मेरे सपनों की सुन्दर राजकुमारी उस टावर में सो रही है. केवल वही नहीं सो रही, उसके आस-पास सौ-सौ मील तक सारा जंगल सो रहा है और मेरी नानी मां ने मुझे बताया था कि जब भी कोई व्यक्ति उस घने जंगल को पार करके और उस टावर का दरवाजा तोड़कर उस राजकुमारी की आँखों पर चुम्बन देने में सफल हो जाएगा राजकुमारी उसी क्षण जाग उठेगी और उसी क्षण सारा सोया हुआ जंगल भी जाग जाएगा और चारों ओर प्रकाश, प्रसन्नता फैल जाएगी.

क्या यह कहानी सचमुच इतनी पुरानी है कि आज की परिस्थिति से मेल नहीं खाती? क्या आज हाथीदांत के टावर में कोई राजकुमारी नहीं सोई हुई? क्या आस-पास सौ वर्ष से तो क्या कई वर्षों से कोई जंगल सोया हुआ नहीं – अंधकार में, भय में, निराशा के अंधेरे में और मृत्यु के भयानक सायों में, जिन्होंने जीवन पर जादू करके उस मायूस राजकुमार की आँखों में नींद भर दी है?

मैं उन मूर्खों में से हूँ जो घने अंधेरे जंगल को पार करके हाथीदांत के टावर का दरवाजा तोड़कर सोई हुई राजकुमारी की आँखों पर चुम्बन देने के इच्छुक हैं. मेरी कहानियाँ उसी इच्छा का प्रतीक होती हैं...


***-***
रचनाकार - -कृश्न चंदर भारत के जाने माने कहानीकार-उपन्यासकार थे. एक गधे की आत्मकथा नामक उनका व्यंग्यात्मक उपन्यास खासा चर्चित रहा था. प्रस्तुत आलेख उन्होंने अपने कहानी संकलन – मेरी प्रिय कहानियाँ में प्रस्तावना स्वरुप लिखा था.

**-**
चित्र – रज़ा की कैनवस पर एक्राइलिक रंगों से बनी कलाकृति.

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
  1. सटीक! कहानी से रस निचोड़ कर उसमें मसाला भरने वाले साहित्यकार हत्यारे हैं। भारत का दुर्भाग्य है की प्राचीन काल के बाद या तो पंडिताऊ रचनाएँ लिखी गईं या अश्लील, और जब बात आधुनिक होने की आयें तो इन हत्यारों ने साहित्य को आखाडा बना डाला। प्रेमचंद के बाद कोई ऐसा कहानीकार नहीं है जो जनलोकप्रिय हो। कोई ऐसी रचना नहीं जो लोगों को जोड़ सके। बस हर चीज़ को दलित, राजनीति, देह के संदर्भ में बांटेट जाओ पर जीवन का स्पंदन कहाँ है?

    उत्तर देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$height=75

---प्रायोजक---

---***---

|कथा-कहानी_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$rm=1$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|उपन्यास_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|लोककथा_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=complex$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$height=85

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3981,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2953,कहानी,2218,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,521,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,339,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,62,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,10,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,26,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1200,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1993,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,698,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,774,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कहानी की कहानी
कहानी की कहानी
http://photos1.blogger.com/blogger/4284/450/320/raza.jpg
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2006/01/blog-post_31.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2006/01/blog-post_31.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ