April 2006

मिराक़ मिर्जा की ग़ज़ल

--*-- कि दश्ते-ग़म में कहीं गुलिस्तां भी होगा ज़मीन होगी जहाँ, आसमान भी होगा तलाश करते रहो पत्थरों में मोम का दिल सितमगरों में ...

दामोदर खड़से की कहानी: छड़ी

**-** वह फिर दिखाई दिया. उसके कान्धे पर छड़ियों का एक बड़ा गट्ठा था. वह झुका-सा लग रहा था, घर जाने का उसका समय अभी हुआ नहीं है. हालांकि अब...

अनिल पांडेय का आलेख : देशी फिल्मों का कारोबार

(पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में, करीब ढ़ाई महीने के दौरान अनिल पांडेय ने सराय – सीएसडीएस दिल्ली के स्वतंत्र फ़ेलोशिप के तहत जो शोध...

अमित कुमार सिंह की भोजपुरिया फ़िलॉसफ़ी

''जीबन'' जीबन का ह? जीबन का ह? रहस्य बा ई अनोखा चलत रहे का मंतर इम्मे कौउन है फूँका? अजब बा ई पहेली एक को खोलौ तो दू...

यथार्थ व्यंग्य : पुलिस कप्तान बनाम पत्रकार

**-** - एन. के. राय उस जिले के कप्तान साहब आंग्ल-भारतीय सज्जन थे. उनका रहन-सहन राजा-महाराजों-जैसा था. अंग्रेज तो भारत छोड़ गए थे, परन्त...

एज़ाज अख्तर के माहिए...

हिन्दी में माहिए उर्दू में आजकल बहुत माहिए लिखे जा रहे हैं। यह पंजाबी का लोक गीत है जिस की तीन पंक्तियों में पहली तथा तीसरी में तुक होता ह...

दृश्यावली : एजाज़ अख्त़र की तीन कविताएँ

दृश्य-1 कच्ची मस्जिद के पीछे थूहर की लम्बी कतार रस्ते में कुछ गोलियां खेलते बच्चे भी दो-चार रस्ते के उस ओर पड़ा घूरे का बड़ा अम्बार कुछ चु...

सदाशिव कौतुक की व्यंग्य कविताएँ

***-*** तलाश गुमशुदा की तलाश है ..... गुमशुदा की तीन जुड़वां बेटे मिज़ाज एक सा / और ऊँचाई एक सी बड़े का नाम ईमान मझले का कर्म / और छोटे...

मधु कांकरिया की कहानी : फ़ाइल

परिकथाओं सी मोहक तारों भरी वह रात-इतनी संपूर्ण और जादूभरी थी कि उसके आकर्षण की डोर में बंधे हम सभी गोल-गोल घेरा बनाकर बैठ गए. मंद-मंथर बहती...

अखिलेश अंजुम की खिड़कियाँ खोलती ग़ज़लें

**-** आदमी रद्दी हुआ अखबार हो जैसे **-** ग़ज़ल 1 घर बिना छत घर बिना छत बनाए जायेंगे लोग, जिनमें बसाये जायेंगे। आपका राज हो या उनका ह...

असग़र वजाहत का सम्पूर्ण कहानी संग्रह: मैं हिन्दू हूँ

असग़र वजाहत का सम्पूर्ण कहानी संग्रह: मैं हिन्दू हूँ टीप – 1-संपूर्ण संग्रह की फ़ाइल बड़ी है, अतः पृष्ठ लोड होने में समय लग सकता है, अतः क...