May 2006

कवियों को संबोधित करती एक कविता: गोष्ठियाए हुए कवि

-हितेश व्यास हे महाकवियों ! महाकाव्यों की रचना के बाद ऐसा क्या अपच रह गया था जिसके लिए तुम्हें गोष्ठियों में पुनःपुः जन्म लेना पड़ता है ...

एक नई साहित्यिक पत्रिका – परिकथा

हिन्दी साहित्य की यूँ तो सैकड़ों पत्रिकाएँ निकलती हैं मगर उनमें हंस जैसा इम्पेक्ट पता नहीं क्यों किसी में भी दिखाई नहीं देता. और यही वजह ...

हास्य व्यंग्य: शरद जोशी के कमलमुख के कुछ पठनीय पत्र

(शरद जोशी के कमलमुख की आलोचना-आलेख को पाठकों ने खूब सराहा और अनुरोध किया कि कुछ ऐसी ही रचनाएँ प्रकाशित करें. प्रस्तुत कुछ पत्र उसी व्यं...

संजीव ठाकुर की कहानी: नारायण! नारायण!!

मैं चक्रधरपुर जा रहा था. बेटिकट! साथ में चाचा जी थे. टिकट लेना शायद चाचा जी को अपमानजनक लगा था. मेरे यह कहने पर कि 'टिकट ले लें'...

व्यंग्य: शरद जोशी के कमलमुख से ‘आलोचना’

**-** “लेखक विद्वान हो न हो, आलोचक सदैव विद्वान होता है. विद्वान प्रायः भौंडी बेतुकी बात कह बैठता है. ऐसी बातों से साहित्य में स्थापनाएँ ह...

ज्ञानप्रकाश विवेक की कहानी : जाल

आकाश सक्सेना सुबह जब दफ़्तर पहुँचा, तब कम ही लोग आए थे. जो आए थे वे ई.टी. पढ़ रहे थे या फिर आपस में फैशन, फूड या फ़िल्म में से किसी एक विष...

लक्ष्मीनारायण गुप्त की इच्छा कविता

इच्छा इच्छा है मन में कि अपनी एक कुटिया हो कुटिया में एक खटिया हो पास में एक खुँटिया हो खुँटिये पे लटकी एक तुलसी की माला हो मन भक्ति से म...

अनवर सलीम की चंद ग़ज़लें

**-** ग़ज़ल 1 हाथ जलने लगे पाँव फिर शल हुए यूँ निगाहों में कितने ही मक़्तल हुए । आसमां में जो तहलील बादल हुए जानते बूझते लोग पागल हुए । ...

सुदामा प्रसाद पाण्डेय 'धूमिल' की लंबी कविता

पूरे तीस पृष्ठों की इस पूरी कविता का टंकण अनूप शुक्ल ने किया है तथा उनके चिट्ठा स्थल फ़ुरसतिया पर यह पूर्व प्रकाशित है. इसे साभार यहाँ पुनर...