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चुटकुला 151 - 175

चुटकुला#151विचित्र सवाल ! एक सुंदर तरुणी गवाही देने के लिए विटनेस बॉक्स में खड़ी थी। उसे तेज नजरों से घूरते वकील ने गरजकर बोला, ' मैं अपना प्रश्न फिर दोहराता हूं। अठारह सितंबर की रात को आप कहां थीं? तरुणी लज्जा से सुर्ख हो गयी। ओह! वह बोली - 'यह प्रश्न पूछें तो ही अच्छा है वकील साहब। मैं इसका उत्तर नहीं दे सकती। वकील ने और दबाव डालते हुए कहा, 'यह तो आपको बताना ही होगा। बहाने मत बनाइए उस रात आप कहां थीं? तरुणी के कपोल रक्तिम हो उठे। किसी तरह संभल कर उसने कहा- अच्छा, जब आप इतना जोर दे रहे हैं तो मुझे बताना ही पड़ेगा।अठारह सितंबर की रात में मैं घर बैठी वर्ग पहेली हल कर रही थी। वकील ने बौखलाते हुए हैरत से पूछा। 'भला इसमें शर्माने की क्या बात थी? बात तो थी वकील साहब। उसने सुबकी भरी- 'मेरी जैसी सुंदर, जवान और कुंवारी लड़की घर बैठकर वर्ग पहेली में रात बर्बाद करे, यह शर्माने की बात नहीं है? उसने जवाब दिया।चुटकुला#152कहीं पे निगाहें ! मैं तुम्हारे द्वारा प्रेषित पत्रों पर लगे डाक टिकटों को चूमना नहीं भूलता, क्योंकि उसमें तुम्हारे होठो का स्पर्श शामिल रहता है। प्रेमी ने कहा।…

चुटकुले 125 -150

चुटकुला# 126शादीकाफैसलाबेटी (अपनीमांसे)- मां, मैंअमरसेशादीनहींकरुंगी।मां- क्योंबेटी, क्यातेरीनजरमेंकोईऔरहै?बेटी- हांमां, लेकिनअभीफैसलानहींकियाहै।मां- क्याकोईपरेशानीहै?बेटी- मां, मेरेप्रेमीकोतोस्वर्ग-नरकमेंविश्वासहीनहींहै।मां- घबरामतबेटी, तूपहलेउससेशादीकरले।शादीकेबादउसेअपनेआपस्वर्ग- नरकमेंविश्वासहोजाएगा।चुटकुला# 127षडयंत्रलेखक (अपनेमित्रसे) : मुझेऐसालगताहैकिसभीप्रकाशकोंनेमिलकरमेरेविरुध्दषडयंत्ररचरखाहै।मित्र : आपकोऐसाक्योंलगताहै? आपकेपासकोईप्रमाणहै।लेखक : हां, मेरेपास

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