October 2006

व्यंग्य : उधारी का दर्शन

. व्यंग्य उधारी का दर्शन - श्याम सुंदर व्यास उधारी, मध्यमवर्गीय मंहगाई के मारों के लिए सदैव से संकट-मोचक रही है. वेतनभोगियों की जेब एक तरफ ...

तमसो मा ज्योतिर्गमय:

*दीपावाली की मंगल कामनाएं* - डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल हर साल दीवाली पर बहुत सारे बधाई कार्ड आते हैं. आजकल कार्डों के अलावा ई मेल और एस एम एस...

चुटकुले - 751 से 800

. चुटकुला # 0751 नौकर (मालिक से)- अगर आप मुझ पर विश्वास नहीं करेगेे, तो मैं नौकरी छोड़ दूंगा। मालिक (नौकर से)- ऐसा क्यों कह रहे हो? मैंने त...

बाबा नागार्जुन की चंद कविताएँ

. बाबा नागार्जुन की कुछ कविताएँ 1 इन घुच्ची आँखों में क्या नहीं है इन घुच्ची आँखों में इन शातिर निगाहों में मुझे तो बहुत कुछ प्रतिफलित लग रह...

धूमिल की चंद कविताएँ....

. धूमिल की कुछ कविताएँ 1 दिनचर्या सुबह जब अंधकार कहीं नहीं होगा, हम बुझी हुई बत्तियों को इकट्ठा करेंगे और आपस में बांट लेंगे. दुपहर जब कहीं...

व्यंग्य क्षणिकाएँ

. - मिश्रीलाल जायसवाल जनसेवक थानेदार साहब जनसेवा को समर्पित हैं जिससे कुछ मूर्छित कुछ काल कलवित कवलित हैं भवसागर स्वामी जी ने भव सागर पार क...

चुटकुले - 701 से 750

चुटकुला # 0701 रमेश (अपनी सास से)- आपने तो कहा था कि आपकी लड़की शाकाहारी है। सास (रमेश से)- पक्की शाकाहारी है बेटा। रमेश (सास से) - घर पर तो ...

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' की तीन कविताएँ

. 1 दुःख सगा है - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' जब से यह दुःख रात-दिन मेरे पीछे लगा है , तब से मैंने जाना गैर हैं सब एक यही तो मेरा ...

डॉ. कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य कविता

. देशी फ्लाइट १८ डॉ. कान्ति प्रकाश त्यागी देशी फ्लाइट १८ में ड्राइवर हरभजन की सलाम,सतश्री अकाल और नमस्ते मुझे पूरा विश्वास तथा आशा है कि, आप...

कैलाश बनवासी की कहानी

. बाज़ार में रामधन -कैलाश बनवासी यह बालोद का बुधवारी बाज़ार है. बालोद इस ज़िले की एक तहसील है. कुछ साल पहले तक यह सिर्फ़ एक छोटा-सा गांव...

दो लघुकथाएँ

दो लघुकथाएँ - रमेश चन्द्र श्रीवास्तव इंसान कौन है? किसी बात पर मालिक ने अपने नौकर को डांटा - "तू इंसान है या बैल?" नौकर पढ़ा-लिखा,...

चुटकुले - किश्त 651 से 700

चुटकुला # 0651 सेठ जी (पत्नी से)- ‘कल तुम मायके गई थी कि रात घर में चोर घुस आए। उन्होने मुझे खूब मारा-पीटा, यहां तक कि मुझे मुर्गा भी बना ...