मंगलवार, 28 फ़रवरी 2006

लघुकथा : बीच का दिन

-अम्बिका दत्त _अब चुप कर कटुए. दोगले. _ओ...य, ओ...य...बामणी के. कमीणजात गरुड्ए. आगे मत बोलियो...नींतो. _नीं तो? नीं तो?? क्या कर लेगा त...

शनिवार, 25 फ़रवरी 2006

माँ

लघुकथा - यश मालवीय माँ को सब-कुछ धुंधला-सा नजर आता है, उनकी आँखों में गहरा मोतियाबिंद है. माँ कायदे से कुछ भी खा नहीं पातीं. उनका दाँतो...

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2006

कहानी: प्रायश्चित्

-प्रेमचंद दफ्तर में जरा देर से आना अफसरों की शान है। जितना ही बड़ा अधिकारी होता है, उत्तरी ही देर में आता है; और उतने ही सबेरे जाता भी है।...

सोमवार, 20 फ़रवरी 2006

स्वभाव

-बालकवि बैरागी डराओ मत बिजली को बादल से सोने को आग से शून्य को अंक से और मछली को पानी से मुक्त कर लो अपने आपको इस डरावनी मानसिकता और पाग...

सोमवार, 13 फ़रवरी 2006

शब्दों में कहाँ रहती है कविता?

-हितेश व्यास कविता में शब्द आते हैं जैसे, शब्दों में आती है कविता तारों में बहता है करेंट, ऐसे आती है शब्दों में कविता रमाशंकर फेंकता है, ...

शनिवार, 11 फ़रवरी 2006

इकराम राजस्थानी की ग़ज़लें

ग़ज़ल 1 कैसा वातावरण हो गया रात दिन जागरण हो गया शब्दों से वाक्य बनते नहीं व्यर्थ सब व्याकरण हो गया झूठ पाखंड धोखा-धड़ी आज का आचरण हो गया य...

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2006

रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानी – संकट तृण का

जमींदार के नायब गिरीश बसु के घर में प्यारी नाम की एक नौकरानी काम पर नई-नई लगी. कमसिन प्यारी अपने नाम के अनुरूप रुप और स्वभाव में भी थी. वह द...

रविवार, 5 फ़रवरी 2006

मेरे सपने और मैं

- चंद्र प्रकाश यादव मेरे सपने, शीशे की मीनारों से थे कल्पना की चाँदनी जब उनसे लिपटती मानों इन्द्रधनुष का कारवाँ जिन्दगी के रेगिस्तान में झूम...

शनिवार, 4 फ़रवरी 2006

लघुकथा – पतिव्रता

-कालीचरण प्रेमी दो बजे होंगे. मैं अपने नर्सिंग होम में बैठा यही सोच रहा था कि अब लंच कर लिया जाए. मैं लंच के लिए अपने चेम्बर से बाहर निकला ...

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2006

हितेश व्यास की कुछ रचनाएँ

पिता की स्मृति *****. याद किया जा सकता है पिता को उनकी पिचहत्तरवी वर्षगांठ पर भी पिता की स्मृति के लिए आवश्यक नहीं है उनका स्वर्गीय होना स...

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