शुक्रवार, 31 मार्च 2006

मोहनदास नैमिशराय की कहानी: आग ऐसे लगी

आधी रात तक मुखी के शरीर में प्राण थे. कुछ लोग सोने के लिए चले गए थे और कुछ अभी तक जाग रहे थे. उनकी आंखों में नींद से अधिक चिंता थी. चिंत...

बुधवार, 29 मार्च 2006

लघुकथा: उच्च पद

- प्रशस्यमित्र शास्त्री बुद्धिमती रमा के लिए पण्डित एक रिश्ता लेकर आए. उस समय मैं भी वहाँ उपस्थित था. रमा के पिताजी का स्वर्गवास हो गया ...

सोमवार, 27 मार्च 2006

चाँद ‘शेरी’ की लहू बरसाती चंद ग़ज़लें...

**-** ग़ज़ल एक **-** वहाँ पर अमन क्या होगा सुकून की बात क्या होगी, जहाँ बारिश लहू की हो वहाँ बरसात क्या होगी । कभी मेरठ कभी दिल्ली कभी प...

शनिवार, 25 मार्च 2006

कहानी: 'ड्रेन' में रहने वाली लड़कियां

- असग़र वजाहत संसार से लड़कियां ग़ायब हो गई हैं. पूरी दुनिया में अब कोई लड़की नहीं है. यह विचित्र स्थिति पैदा कैसे हुई? सुनिए : रात का दो बजा...

शुक्रवार, 24 मार्च 2006

डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल की लघुकथाएँ

तख़्तियाँ बेचारी तख़्तियाँ! कोने वाले कमरे में कार्यालय का टूटा-फूटा सामान रखा जाता था, वहीं पर वे रखी रहती थीं. आज उन्हें वहाँ से निका...

मंगलवार, 21 मार्च 2006

सलीम अख़्तर की मौसमी ग़ज़लें

- सलीम अख़्तर ग़ज़ल 1 हवा सी, मौसमों की, पानियों की समझता है तू मन्शा तितलियों की मुझे लिखना, मुझे ईजाद ...

सोमवार, 20 मार्च 2006

नदीम अहमद ‘नदीम’ की लघुकथाएँ

वक़्त देख रहा है! वक़्त देख रहा है कि नन्हा बच्चा बीमार है. ख़ून टेस्ट के लिए कम्पाउण्डर शरीर में सुई चुभो रहा है. बच्चा मां की गोदी मे...

शनिवार, 18 मार्च 2006

हैदराबाद के अनवर सलीम की रेशमी ग़ज़ल

-ग़ज़ल - अनवर सलीम तुझसे मिलने के हैं आज पल रेशमी क्या पता मेरा होगा भी फल रेशमी ख़त बदन के तेरे सब नुमायां करूं खींचूं तस्वीर ऐसी सजल...

शुक्रवार, 17 मार्च 2006

हम फिर मिलेंगे - हितेश व्यास

हितेश व्यास की कुछ नई ग़ज़लें ***.*** ग़ज़ल 1 देगा समय गर साथ तो हम फिर मिलेंगे होगी कभी बरसात तो हम फिर मिलेंगे । हमने उजालों के लिए ओ...

बुधवार, 15 मार्च 2006

''आज की होली''

-- अमित कुमार सिंह कहीं खेल रहे हैं खून से होली , कहीं पर खेली जा रही है इंसानियत से होली। कहीं जल रह...

मंगलवार, 14 मार्च 2006

श्यौराजसिंह बेचैन का बेचैन कर देने वाला आत्मकथांश

बेवक़्त गुज़र गया माली -श्यौराजसिंह बेचैन तब मेरी उम्र क़रीब पांच-छह साल की रही होगी. मेरी सब से बड़ी बुआ 'कलावती' डिबाई के पास भ...

सोमवार, 13 मार्च 2006

लघुकथा : फ़ोटो

- डॉ. पूरन सिंह सुनीता भाभी की मृत्यु के बाद भइया लगभग पागल से हो गए थे. अकेले में बातें करते, कभी बात के तो कभी बिना बात के रोते हँसते. द...

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