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August 2006
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पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष 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खाली पीली (http://www.ashish.net.in/khalipili/?p=89 ) चुटकुलों की गूंज कुछ यूँ रही-

चुटकुला # 0464

लालु और सुवर का बच्चा
लालुजी अपने ड्रायवर के साथ एक बार कार से जा रहे थे। एक गांव से पहले उनकी कार के निचे एक सुवर का बच्चा कुचल कर मर गया। लालुजी दुखी हुये। ड्रायवर को कुछ पैसे दिये और कहा कि "गांव मे जाओ और सुवर के मालिक को मुआवजा दे आओ"
डायवर पैसे लेकर गांव चला गया। एक घंटा बीत गया, दो घंटे बीत गये ड्रायवर वापिस नही आया। लालुजी बैचेनी से टहलते रहे। तिसरे घंटे के आखिर मे ड्रायवर एक बोरा सिर पर लादे आते दिखा। पास आने पर लालुजी ने पूछा "का रे ड्रायबर , अतना देर काहे लगा दिये ? अउर इस बोरा मे का लाये हो"
ड्राववर "इस बोरा मै पैसा है मालिक"
लालु " क्यो गांव मे का हुवा, तुम्हे अतना पईसा किसने और काहे दे दिया ?"
ड्रायवर "हमको कुछ नाही पता, हम तो गांव मे जाके इतना ही बोला कि हम लालु का ड्रायवर हूं और हमने उ सुवर का बच्चा मार दिया हूं"
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चुटकुला # 0465

दवा
कुत्ता और पत्नी दोनों के बीमार होने पर एक व्यक्ति दवा खरीदने गया। व्यक्ति ने दुकानदार से कहा, ‘दवाइयों को अलग-अलग लिफाफे में रखकर उस पर लिख दें कि कौन-सी मेरी बीवी के हैं और कौन-सी मेरे कुत्ते की। मैं नहीं चाहता कि दवा बदल जाए और मेरे कुत्ते को कुछ हो जाए।'
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चुटकुला # 0466

मित्र
रेखा ने अपने पति रोहित से कहा, ‘हमारी शादी में तो आपके बहुत से मित्र आए थे, अब उनमें से कोई नहीं आता।' रोहित ने कहा, ‘सुख के सब साथी, दुख में न कोय...।'
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चुटकुला # 0467

पदयात्रा
मत्री जी की पदयात्रा सुबह सुबह एक गांव से गुजरने वाली थी। दोपहर को निरज दिवान जी उस गांव मे भागते हुये पहुंचे और एक व्यक्ति से पोछा " क्या नेताजी गुजर गये ?" उसने जवाब दिया "काश नेताजी गुजर जाते ?"
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चुटकुला # 0468

धुलाई
रमेश धोबी को डांटते हुए, ‘एक तो तुमने मेरी पेन्ट गुम कर दी, ऊपर से धुलाई के पैसे मांग रहे हो?' धोबी ने कहा, ‘साहब, पेन्ट धुलने के बाद गुम हुई थी।'
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चुटकुला # 0469

स्कूल
कसाई बकरे को लेकर काटने जा रहा था। बकरा चिल्ला रहा था। इसे देख सोहन अपने पिता से बोला, ‘पिता जी, यह बकरा क्यों चिल्ला रहा है?' पिता ने कहा, ‘बेटा, कसाई इसे काटने जा रहा है।' सोहन ने कहा, ‘मैंने सोचा यह स्कूल जा रहा है।'
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चुटकुला # 0470

किराये का मकान
किरायेदार ने मकान मालिक से कहा, ‘भाई साहब, आपने कैसा मकान मुझे किराये पर दिया है, वहां चूहे ही दौड़ते रहते हैं।' मकान मालिक ने कहा, ‘तो क्या इतने कम किराये में आप घोड़ों की रेस देखना चाहते हैं।'
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चुटकुला # 0471

प्रेम
कमला ने हरीश से कहा, ‘मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती रमेश।' हरीश ने कहा, ‘लेकिन मैं रमेश नहीं हरीश हूं।' कमला ने कहा, ‘सॉरी डार्लिग, मैं भूल गई थी कि आज रविवार नहीं सोमवार है।' हरीश ने कहा, ‘क्या कहा, सोमवार है? अब मैं चलता हूं, पता नहीं सीमा कब से मेरा इंतजार कर रही होगी।'
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चुटकुला # 0472

नाम
एक ड्राइवर को तेज मोटर चलाने पर सिपाही ने रोका और डायरी निकालकर पूछा, ‘आपका नाम?' ड्राइवर ने कहा, ‘मेरा नाम है कपालामत चंद्रा तसकल काततीमयु नाकु दा...।' सिपाही ने कहा, ‘बस, बस। जाओ, आगे से इतनी तेज गाड़ी मत चलाना।'
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चुटकुला # 0473

गुस्सा
सोहन ने राहुल से पूछा, ‘यार, तुम्हारी बीवी को जब गुस्सा आता था तो वह काटना शुरू कर देती थी। अब काटती है या नहीं?' राहुल ने कहा, ‘नहीं।' सोहन ने पूछा, ‘क्यों, क्या उसे अब गुस्सा नहीं आता?' राहुल ने कहा, ‘ऐसी बात नहीं है। गुस्सा तो आता है, पर अब दांत नहीं रहे।'
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चुटकुला # 0474

प्रश्नपत्र
अध्यापक ने परीक्षा से पहले विद्याथियों से कहा, ‘बच्चों, परीक्षा नजदीक है, प्रश्न पत्र छपने के लिए जा चुके हैं। फिर भी अगर किसी को कुछ पूछना हो तो, वह पूछ सकता है।' सौरभ ने कहा, ‘सर, एक प्रश्न है।' अध्यापक ने कहा, ‘पूछो?' सौरभ ने कहा, ‘सर, ये प्रश्नप्रत्र कहां छप रहे हैं।'
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चुटकुला # 0475

मंहगाई
पिंकी की मां ने डाक्टर से कहा, ‘डाक्टर साहब, पिंकी बढ़ नहीं रही है, इसके लिए कोई दवा बताएं।' डाक्टर ने दवा के बदले उपाय बताते हुए कहा, ‘इसका नाम बदल कर महंगाई रख लो, फिर इसे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।'
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चुटकुला # 0476

मौके की तलाश
एक व्यक्ति बहुत देर से एक दुकान का चक्कर लगा रहा था। दुकानदान ने कहा, ‘भाई साहब, आखिर आपको चाहिए क्या?' व्यक्ति ने कहा, ‘कुछ सामान ले जाने का मौका।'
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चुटकुला # 0477

दांत में दर्द
सिनेमा हॉल का गेट कीपर दांत के डाक्टर के पास गया। डाक्टर ने पूछा, ‘तुम्हारे कौन से दांत में दर्द हो रहा है?' गेट कीपर ने कहा, ‘ऊपर की बॉलकानी में दूसरे नंबर के दांत में।'
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चुटकुला # 0478

फिजूलखर्च
कंजूस पति ने अपनी पत्नी से कहा, ‘तुम फिजूलखर्ची बहुत करती हो। भगवान न करे, यदि मुझे कुछ हो गया तो तुम्हें भीख मांग कर गुजारा करना होगा।' पत्नी ने कहा, ‘तुम इसकी चिंता मत करो। तुम से मांगते-मांगते मुझे अब भीख मांगने की आदत पड़ गई है।'
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चुटकुला # 0479

नजर
एक मरीज की आंखे कुछ ज्यादा ही कमजोर थीं। एक भी अक्षर पढ़वा पाने में नाकाम डाक्टर ने हारकर मरीज से आंखों के ठीक सामने थाली अड़ाकर पूछा, ‘क्या यह चीज तुम्हें दिखती है?' मरीज ने कहा, ‘जी, दिखती है।' डाक्टर ने पूछा, ‘क्या है?' मरीज ने कहा, ‘ठीक-ठीक नहीं बता सकता, चवन्नी है कि अठन्नी है।'
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चुटकुला # 0480

शर्म
मिस्टर वर्मा ने भिखारी से कहा, ‘भीख मांगते हुए तुम्हें शर्म आनी चाहिए। मेरे साथ चलो, मेरे घर काम करना। मैं तुम्हें दस रुपये दूंगा।' भिखारी ने कहा, ‘अच्छा ठीक है, तुम मेरे साथ बैठ जाओ। मैं तुम्हें बीस रुपए दूंगा।'
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चुटकुला # 0481

दिल
एक व्यक्ति पायलट के लिए इंटरव्यू देने पहुंचा। इंटरव्यू में उससे पूछा गया, ‘आपका दिल कहीं कमजोर तो नहीं?' व्यक्ति ने कहा, ‘जी नहीं साहब, मेरा दिल तो इतना मजबूत है कि पिछले तीन सालों ने मुझे तीन-तीन दिल के दौरे पड़े फिर भी मैं जिंदा हूं।' उस व्यक्ति से फिर पूछा गया, ‘दौरे तुम्हें कब-कब पड़े?' व्यक्ति ने कहा, ‘जी जब श्रीदेवी, माधुरी और काजोल की शादी हुई थी तब।'
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चुटकुला # 0482

कैदी
जेलर ने कैदी से पूछा, ‘जेल से छूटने के बाद क्या करोगे?' कैदी ने उत्तर दिया, ‘जी, जौहरी की दुकान खोलूंगा।' जेलर ने पूछा, ‘लेकिन जौहरी की दुकान खोलने के लिए इतना रुपया कहां से लाओगे?' इस पर कैदी ने कहा, ‘जेलर साहब आप भी कमाल करते हैं, किसी जौहरी की दुकान खोलने के लिए तो मुझे सिर्फ एक हथोड़े की जरूरत होगी।'
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चुटकुला # 0483

रिकार्ड
हरीश ने अपने मित्र से कहा, ‘यार, यह आदमी अपने-आप को जूते क्यों मार रहा है?' मित्र ने कहा, ‘यह गिनीज बुक में जूते खाने का रिकार्ड अपने नाम करवाना चाहता है।'

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चुटकुला # 0484

लाल-पीला
बबलू ने राम से कहा, ‘यार, तुम छोटी-छोटी बातों पर लाल-पीले हो जाते हो।' राम ने कहा, ‘क्या कंरू, मेरा जन्म ही होली के दिन हुआ था।'
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चुटकुलों के दस्तक (http://sagarnahar.blogspot.com/2006/07/1.html
http:// sagarnahar.blogspot.com /2006/07/blog-post_13.html ) भी हँसी और ठिठोली से भरपूर रहे-

चुटकुला # 0485

गब्बर की धमकी से डर कर चुटुकुलों की अगली कड़ी प्रस्तुत है।
एक छोटे बच्चे से शिक्षिका ने पूछा " क्यों टिंकू तुम दो दिन स्कूल क्यों नहीं आये ?
टीचर वो क्या है कि मेरे पास एक ही ड्रेस है और वो परसों मम्मी ने धोकर सुखाई थी तो मैं स्कूल कैसे आता ? पूरे दिन बिना कपड़ों के घर पर रहना पड़ा।
अच्छा फ़िर कल क्यों नहीं आये ?
कल मैं आ रहा था टीचर पर जब मैं आपके घर के बाहर से निकला तो देखा कि आपके कपड़े भी सूख रहे थे।

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चुटकुला # 0486

एक बार एक वैज्ञानिक ने एसे कम्प्युटर का अविष्कार किया जो सब कुछ बता सकता था
एक आदमी ने सवाल किया मेरे पिताजी अभी कहाँ है ?
कम्प्युटर ने जवाब दिया अभी वे कलकत्ते के एक बार में शराब पी रहे हैं
आदमी ने कहा गलत " मेरे पिताजी को गुजरे कई वर्ष हो गये है"
कम्प्युटर ने फ़िर कहा तुम्हारी माँ के पति को गुजरे कई वर्ष हो गये हैं पर तुम्हारे पिता अभी कलकत्ते के बार में शराब पी रहे हैं ।

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चुटकुला # 0487

बॉटनी (कृषि विज्ञान) में स्नातक हो कर एक युवक घर आया तो देखा उसके पिताजी पेड़ों को पानी पिला रहे थे।
उसने कहा पिताजी आप ये क्या कर रहे हो इस तरह पत्तों पर पानी डालोगे तो इस पेड़ पर कभी भी चीकू नहीं लगेंगे।
पिता ने कहा बेटा वो तो तब भी नहीं लगेंगे जब मैं इस की जड़ों में पानी लुंगा क्यों कि यह चीकू का नहीं केले का पेड़ है।

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चुटकुला # 0488

ट्रेन में एक यात्रा के दौरान एक प्रेमिका ने कहा " जानू मेरे सर में दर्द हो रहा है"
प्रेमी ने उसके सर को चूम लिया बस अब ठीक है प्रेमिका ने कहा " हाँ"
कुछ देर के बाद फ़िर प्रेमिका ने कहा जानू मेरे हाथ में दर्द हो रहा है" प्रेमी ने फ़िर वैसा ही किया और पूछा अब ठीक है?
प्रेमिका ने फ़िर कहा " हाँ"उपर की बर्थ पेर बैठे एक सज्जन से रहा नहीं गया उन्होने प्रेमी से पूछा
"क्यों जी क्या आप पाईल्स ( मस्से) का भी इलाज करते हो ? "

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चुटकुला # 0489

बाथरूम में धमाके की आवाज सुन कर पत्नी घबरा गई और पूछा क्या हुआ?
पति अन्दर से बोले कुछ नहीं जरा बनियान गिर गई थी।
बनियान गिरने से इतनी तेज धमाके की आवाज?
हाँ मैने पहन जो रखी थी।

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चुटकुला # 0490
७५ वर्ष की उम्र में चीनी भाषा सीख रहे संता सिंह जी से मित्रों ने जब इसकी वजह पूछी तो संता सिंह ने बताया उन्होनें कल ही एक अनाथ २ महीने के चीनी (Chiness) शिशु को गोद लिया है।
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चुटकुला # 0491
सावधान अगर आप बस, ट्रेन, प्लेन या कहीं से भी जा रहे हो और किसी महिला/ लड़की के हाथ में धागा, फ़ूल, चैन या कोई भी चमकती चीज़ दिखाई दे तो वहाँ से तुरंत भाग जाईये,
यह चीज राखी भी हो सकती है, आपकी जरा सी लापरवाही आपको भाई बना सकती है।
........पुरूष हित में जारी......

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चुटकुला # 0492
जज ने वकील को कहा "तुम अपने सीमा से बाहर जा रहे हो , मैं तुम्हें कोर्ट की अवमानना के जुर्म में गिरफ़्तार करवा सकता हुँ"
कौन साला कहता है ?
ज ने कहा तुमने मुझे साला कहा
नहीं मी लोर्ड मैने यह कहा कौन सा ला ( Law) कहता है

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चुटकुला # 0493

एक बार एक हवाई यात्रा के दौरान एक भारतीय सेना के मेजर संता सिंह और पाकिस्तानी सेना के दो मेजर पास पास की सीट पर बैठे थे, अचानक पाकी सेना के एक मेजर ने कहा मैं ठंडा लेकर आता हुँ, संता सिंह जी ने विनम्रता से कहा आप बेठिये मैं लेकर आता हुँ।
संता सिंह जी ने जूते उतारे हुए थे सो भूल से जूतों को पहने बिना ही ठंडा लेने चले गये, तब तक पाकी मेजर ने मौका देख कर जूतों में पान की पिचकारी मार दी, थोड़ी देर बाद दूसरे ने भी एसा ही किया, संता सिंह जी को पता नहीं चला, लंदन एयरपोर्ट पर जब उन्होने जूते पहने तो उन्हे पता चल गया कि उनके साथ क्या हुआ है,
उन्होने उन दोनो मेजर को अपने पास बुलाया और बोले
यार हम कब सुधरेंगे "कब तुम जूतों में पान की पीक की पिचकारी मारना और हम तुम्हारे कोल्ड ड्रिंक में माय ओन कोला ( my own cola -Urin) मिलाना बन्द करेंगे।

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चुटकुला # 0494
एक बार एक सेठ डॉक्टर के पास गये और बोले साहब मुझे नींद कम आती है और कुछ कब्जियात भी रहती है
डॉक्टरने दो पुड़िया देते हुए कहा सुनो इसमें एक पुड़िया में नींद लाने और दूसरे में पेट साफ़ करने की दवाई है, ध्यान रखना ये दोनो दवाई साथ साथ मत ले लेना

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चुटकुला # 0495

लुधियाना के संता सिंह जी ने डॉक्टर को फ़ोन किया
डॉक्टर साहब मैं ६ साल पहले कब्जियात का इलाज करवाने के लिये आपके पास आया तब आपने कहा था रोज ३ किलोमीटर चलने के लिये ?
डॉक्टर ने कहा तो, अब तुम कहाँ से बोल रहे हो ?
साहब अब मैं त्रिवेन्द्रम तक तो पहुँच गया हुँ।

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चुटकुला # 0496

लुधियाना के संता सिंह जी ने एक बार फ़िर से डॉक्टर को फ़ोन किया
डॉक्टर साहब मैं ६ साल पहले आपके पास सर्दी जुकाम के इलाज के लिये आया तब आपने मुझे नहाने से मना किया था"
डॉक्टर ने कहा तो,
संता सिंह जी ने पूछा क्या अब मैं नहा सकता हुँ

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चुटकुला # 0497
एक बार संजय भाई की दुर्घटना वश एक पाँव की हड्डी टूट गई, अस्पताल में पास के बिस्तर पर सागर चन्द लेटे थे जिनकी दोनो पाँव की हड्डी टूटी हुई थी,
संजय भाई से रहा नहीं गया सागर से पूछ बैठे " आप की दो पत्नियाँ है क्या?
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चुटकुला # 0498

एक आदमी कार का दरवाजा खोल कर दौड़ कर एक मेडिकल स्टोर में गया और उसने कहा जल्दी से हिचकी बन्द करने की दवा दो"
दुकानदार काऊँटर कूद कर बाहर आया और उस आदमी को एक कस कर थप्पड़ मार दिया और बोला अब आप की हिचकी बन्द हो गई होगी ?
उस बेचारे ने कहा कि आप भी दवा किसी को भी दे देते हो हिचकी मुझे नहीं गाड़ी में बैठी मेरी पत्नी को हो रही है।
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चुटकुला # 0499

होमियोपेथ डॉक्टर ने एक महिला को दवा देते हुए कहा ये तीन पुड़िया दवा दे रहा हुं रात को सोते समय लेना है।
महिला ने कहा डॉक्टर साहब इस बार जरा पतले कागज में बाँधना पिछली बार पुड़िया निगलने में बड़ी तकलीफ़ पड़ी थी।
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चुटकुला # 0500

एक मालिक ने अपने क्लर्क से पूछा आप मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास करते हो?
क्लर्क ने कहा जी हाँ साहब!
बहुत अच्छी बात है तो हुआ युँ कि तुम्हारे जिन दादा की अन्तिम क्रिया में जाने की बात कह कर तुम दो दिन की छुट्टी लेकर गये थे; तुम्हारे दादा तुम्हारे जाने के बाद तुमसे मिलने यहाँ आये थे ।
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चुटकुला # 0501
एक गरीब आदमी ने रात को सोते समय अपने भूखे बच्चों को कहा आज रात जो बिना खाना खाये सो जायेगा उसे पाँच रुपये का इनाम मिलेगा।
बेचारे बच्चे पाँच पाँच रुपये ले कर सो गये,
अगली सुबह उसने फ़िर बच्चों से कहा आज खाना उसे मिलेगा जो मुझे पाँच रुपये देगा।
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चुटकुला # 0502

एक व्यक्ति अपने मित्र से कह रहा था वाकई मुझे पता चल गया है कि पूरे भारत में एकता और अखंडता है।"
दूसरे ने पूछा कैसे पता चला?
उसने कहा मैं जब दिल्ली गया तब वहाँ के लोग मुझे देखकर हंसते थे, मुंबई गया तब भी,कोलकाता और चेन्नई गया तब भी।


- लघुकथा

उपहार

-प्रवीण पंकज

सुमा ने अस्पताल से फ़ोन लगाया, 'मुबारक हो जी, तुम पापा बन गए.'
'तुम भी तो मां बन गई.' रमण ने हँसते हुए कहा.
'पर सुनो जी अपने दिल के टुकड़े को खाली हाथ न देखने दूंगी तुम्हें. कोई प्यारा-सा उपहार लाओ, फिर दर्शन पाओ.'
सुमा की बातें सुनकर रमण हँस पड़ा, 'अच्छा तो ये बात है. आज्ञा हुजूर, सेवक हाजिर है. सच आज जो मांगोगी, दूंगा.'
'सच्ची कह रहे हो न?'
'बिल्कुल. आख़िर आपने हमारे घर को चिराग दिया है.'
'अच्छा तो अपनी फूल-सी गुड़िया रानी के लिए एक अच्छा-सा फ्रॉक...!'
'गुड़िया रानी? फ्रॉक?' रमण चौंक पड़ा.
'हां भाई, अपनी बेटी को फ्रॉक ही पहनाओगे न.'
पास खड़ी रमण की मां ने 'गुड़िया रानी' और 'फ्रॉक' शब्द सुना. उम्र के तर्जुबे ने सबकुछ समझा दिया, 'जाने पोते का मुंह देख भी पाऊंगी या नहीं. मैं तो कहती हूं, तू दूसरी शादी कर ले बेटा. बहू के लक्षण मुझे तो कुछ ठीक नहीं लगते. मुझे पोते का मुंह दिखा दे.'
रमण् अब और भी उत्तोजित हो गया, 'अरे फ्रॉक की छोड़ो. मैं तो तुम्हारे लिए वो उपहार ला रहा हूं कि तुम ज़िंदगीभर न भूलोगी.'

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'सच्ची? बताओ तो सही क्या ला रहे हो?' सुमा ने उत्सुकता से पूछा.
'बता दूं?'
'हां भाई, अब बता भी दो.'
'मैं ला रहा हूं 'काग़ज़.'
रमण की इस बात से सुमा ज़ोर से हँस पड़ी, 'तो क्या काग़ज़ उपहार में दोगे?'
''हां-हां, कागज दूंगा उपहार में, तलाक़ के काग़ज़ दूंगा. दूसरी शादी करूंगा मैं. इंतज़ार करना अपने इस प्यारे से उपहार का. आ रहा हूं मैं.' कहते हुए रमण ने फ़ोन रख दिया.

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मेरा पन्ना (http://www.jitu.info/merapanna/?p=559 ) की दुकान के कुछ भयंकर मीठे चुटकुले -
चुटकुला क्र............................................... # 0430

पंजाब के एक रेलवे स्टेशन पर एक सरदारजी दौड़ते हुए स्टेशन मास्टर के पास आए, और बोले " साहब! वहाँ प्लेटफ़ार्म नम्बर १ की पटरी पर लगभग १०० सरदार ट्रेन के नीचे आ गए है। चलिए" स्टेशन मास्टर का माथा ठनक गया। तो दौड़े दौड़े प्लेटफ़ार्म पर पहुँचे तो देखा लगभग १०० सरदार ट्रेन से कटकर मर चुके थे। स्टेशन मास्टर ने दौडकर आने वाले सरदार से मामला पूछा:
स्टेशन मास्टर :क्या हुआ था?
सरदार : साहब! एक मिनिस्टर आने थे, ट्रेन से। सारे सरदार उस मिनिस्टर के स्वागत के लिये प्लेटफ़ार्म पर खड़े थे। अचानक एनाउन्समेन्ट हुई, कि ट्रेन प्लेटफ़ार्म नम्बर एक पर आ रही है। बस फिर क्या था,सारे सरदार पटरी पर उतर पड़े, अपने नेता के स्वागत के लिये और कट कर मर गए।
स्टेशन मास्टर : अच्छा तो ये बात है, लेकिन तुम कैसे बच गए तुम भी तो सरदार हो।
सरदार : साहब मैं तो स्टेशन पर आत्महत्या करने आया था, इत्ते सारो के ऊपर कैसे कूदता?


चुटकुला क्र............................................... # 0431

एक छोटा सा जोक है:
एक सरदार कान पर मोबाइल लगाए, बात करते हुए जा रहे थे, अचानक उनके मोबाइल की घन्टी बज उठी।


चुटकुला क्र............................................... # 0432

एक जनाब अक्सर अपनी बीबी को छेड़ा करते थे। जब भी वे काम पर जाते तो बोलते:
"गुड बाय! चार बच्चों की अम्मा। "
बीबी बहुत परेशान, एक दिन उसने भी जवाबी हमला बोल दिया। जैसे ही पति बोला,
"गुड बाय! चार बच्चों की अम्मा।
बीबी बोलो : "बाय बाय, दो बच्चो के बापू।"

चुटकुला क्र............................................... # 0433

मानो या ना मानो, सन्ता सिंह और बन्ता सिंह एक दिन शतरन्ज खेलते हुए पाए गए।

चुटकुला क्र............................................... # 0434

एक शेर मुलाहिजा फरमाए :
जिसके दिल मे दर्द है वो दिलदार है
जिसके दिल मे दर्द है वो दिलदार है
जिसके दिल मे दर्द है वो दिलदार है
जिसके सर मे दर्द है वो सरदार है।

अब कुछ निरन्तर के पुराने अंक से :

चुटकुला क्र............................................... # 0435

समाचार वाचक सुक्खी ने समाचार चैनल पर एक ब्रेकिंग न्यूज़ कुछ यों दी

एक दो सीटर जहाज आज पंजाब के एक कब्रिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। स्थानीय सरदारों को पाँच सौ लाशें मिली है और वे अभी बाकी यात्रियों को खोद खोद कर ढूँढ रहे हैं।


चुटकुला क्र............................................... # 0436

सुक्खी एक बीमार चीनी दोस्त कि मिजाजपुरसी करने देखने अस्पताल गये। जब वे बस जा ही रहे थे कि उसी पल उनका दोस्त उनके सामने ही तीन शब्द "चिन यू यान" कह कर खुदा को प्यारा हो गया। सुक्खी बड़े परेशान हुये। पुस्तकालय जाकर तुरंत एक चीनी शब्दकोश देखा उस वाक्य का मतलब पता करने के लिये। मतलब पता चला, "नामुराद! तू मेरी आक्सीजन ट्यूब पर पाँव रक्खे खड़ा है।"

चुटकुला क्र............................................... # 0437

अध्यापक: सुक्खी, तुम्हारा कुत्ते पर लिखा निबंध तुम्हारे भाई के निबंध जैसा क्यो हैं? क्या तुमने नकल की?
सुक्खी:ओ नइ जी नइ, बात यह है कि हम दोनों ने एक ही कुत्ते पर निबंध लिखे हैं।

चुटकुला क्र............................................... # 0438

टीचर : राजू अपने पिताजी का नाम अंग्रेजी मे लिखो
राजू : ब्यूटीफुल रेड मेल अन्डरवियर
टीचर : ये क्या बदतमीजी है
राजू मासूमियत से बोला : "मास्साब मेरे पिताजी का नाम सुन्दर लाल चड्ढा है।"


चुटकुला क्र............................................... # 0439

एक बार एक सरदार जी, हिन्दू,मुस्लिम और अंग्रेज हनुमान के मन्दिर के बाहर बैठे थे।सभी हनुमान को अपने अपने धर्म का बता रहे थे।
हिन्दू बोला: "हनुमान जी हमारे ईष्ट देव है। रामायण मे इसका उल्लेख है।
मुसलमान : "हनुमान शब्द, सुलेमान से बना है, इसलिए हनुमान मुसलमान हुए"
अंग्रेज बोला: "हनुमान, हैनीमैन, सुपरमैन शब्द से बना है, इसलिए हनुमान अंग्रेज हुए।"
सरदार बहुत देर तक बकझक सुनता रहा, आखिर मे बोला : "हनुमान सरदार थे"
सभी : "कैसे?"
सरदार : देखो, बीबी किसकी गयी थी? राम की। लेकर कौन गया था? रावण। लंका मे जाकर कौन पिला था? हनुमान। सिर्फ़ एक सरदार ही बिलावजह कंही भी पिल सकता है। इसलिए हनुमान सरदार थे।
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और ये हैं फ़ुरसतिया (http://hindini.com/fursatiya/?p=158 ) के कुछ प्राचीन, वजनदार चुटकुले

चुटकुला क्र............................................... # 0440

.एक मियाँ साहेब परदेस में सरिश्तेदारी पर नौकर थे। कुछ दिन पीछे घर का एक नौकर आया और कहा कि मियाँ साहब,आपकी जोरू राँड हो गई। मियाँ साहब ने सिर पीटा,रोए गाए,बिछौने से अलग बैठे, सोग माना, लोग भी मातम-पुरसी को आए। उनमें उनके चार पाँच मित्रों ने पूछा कि मियाँ साहब आप बुद्धिमान हो के ऐसी बात मुँह से निकालते हैं,
भला आपके जीते आपकी जोरू राँड होगी। मियाँ साहब ने उत्तर दिया-"भाई बात तो सच है,खुदा ने हमें भी अकिल दी है,मैं भी समझता हूँ कि मेरे जीते मेरी जोरू कैसे राँड होगी। पर नौकर पुराना है,झूठ कभी न बोलेगा।

चुटकुला क्र............................................... # 0441
.दो कुमारियों को एक जादूगरनी ने खूब ठगा,उनसे कहा कि हम एक रुपये में तुम दोनों को तुम्हारे पति का मुख दिखा देंगे और रुपया लेकर उन दोनों को एक आईना दिखा दिया। बिचारियों ने पूछा," यह क्या"? तो बह डोकरी बोली-"बलैया ल्यौ जब ब्याह होगा तो यही मुंह दूल्हे का हो जायेगा।"

चुटकुला क्र............................................... # 0442
एक नामुराद आशिक से किसी ने पूछा,"कहो जी तुम्हारी माशूक तुम्हें क्यौ नहीं मिली?"बेचारा उदास होके बोला,"यार कुछ न पूछो। मैंने इतनी खुशामद की कि उसने अपने को सचमुच की परी समझ लिया और हम आदमियों से बोलने में भी परहेज किया।

चुटकुला क्र............................................... # 0443
लाला रामसरन लाल ने देर होने पर रामचेरवा से खफा होकर कहा,"क्यौं बे नामाकूल आज तू इतनी देर कर आया कि और नौकरों के काम शुरू किये एक घंटा से ज्यादा गुजर गया"। वह नटखट झट बोला,"तब लालाजी ओमें बात को हौ ! सांझ के हम और लोगन से एक घंटा अगौंऐं चल जाब हिसाब बराबर होय जाइब"।

चुटकुला क्र............................................... # 0444
.एक धनिक के घर उसके बहुत से प्रतिष्ठित मित्र बैठे थे,नौकर बुलाने को घंटी बजी। मोहना
भीतर दौड़ा पर हंसता हुआ लौटा और नौकरों ने पूछा,"क्यौं बे हंसता क्यौं है?" तो उसने जबाब दिया,"भाई,सोलह हट्टे-कट्टे जवान थे उन सभी से एक बत्ती बुझाये न बुझी। जब हम गये तब बुझाई।"
चुटकुला क्र............................................... # 0445
किसी अमीर ने जरा सी शिकायत के लिये हकीम को बुलाया। हकीम ने आकर नब्ज देखी
और पूछा-
आपको भूख अच्छी तरह लगी है?
अमीर ने कहा- हाँ।
हकीम ने फिर सवाल किया-आपको नींद भरपूर आती है?
अमीर ने जवाब दिया-हाँ।
हकीम बोला- तो मैं कोई दवा ऐसी तजबीज़ करता हूँ जिससे यह सब बातें जाते रहें।

चुटकुला क्र............................................... # 0446
अमेरिका के एक जज ने किसी गवाह की हाजिरी और हलफ लाने के लिये हुक्म दिया।
वकीलों ने इत्तिला दी कि वह शख्स बहरा और गूंगा है।
जज ने कहा,"मुझे इससे कोई गरज़ नहीं कि वह बोल सकता है या नहीं। यूनाइटेड स्टेट्‌स का कानून यह मेरे सामने मौजूद
है। इसके मोताबिक हर आदमी को अदालत में बोल सकने का हक हासिल है और जब तक मैं इस अदालत में हूँ हर्गिज कानून के बखिलाफ तामील होने की इजाजत न दूंगा जिसमें किसी की हकतलबी हो। जो कानून की मनशा है उस पर उसको जरूर अमल करना पड़ेगा।"

चुटकुला क्र............................................... # 0447
.मिलटन की बीबी निहायत बदमिजाज थीं मगर खूबसूरत भी हद से ज्यादा थी। लार्ड बकिंगहेम ने एक रोज मिलटन के सामने उसकी नजाकत की तारीफ करते हुये उसकी उपमा गुलाब के फूल से दी।
मिलटन ने कहा ,"चूंकि मैं अंधा हूँ और नजाकत नहीं देख सकता तो भी आपकी बात की सचाई पर गवाही देता हूँ। हकीकत में वो गुलाब का फूल है क्योंकि कांटे अक्सर मेरे भी लगते रहते हैं।

चुटकुला क्र............................................... # 0448
एक डाक्टर साहिब कहीं बयान कर रहे थे कि दिल और जिगर की बीमारियाँ औरतों से
ज्यादा मर्दों को होतीं हैं।

एक जवान खूबसूरत औरत बोल उठी," तभी मर्दुए औरों को दिल देते फिरते हैं।"

चुटकुला क्र............................................... # 0449
एक शख्स ने किसी से कहा कि अगर मैं झूठ बोलता हूँ तो मेरा झूठ कोई पकड़ क्यों
नहीं पाता?

उसने जवाब दिया -आपके मुंह से झूठ इस कदर जल्दी-जल्दी निकलता है कि कोई उसे पकड़ नहीं सकता।

चुटकुला क्र............................................... # 0450
एक वकील ने बीमारी की हालत में अपना सब माल और असबाब पागल, दीवाने और
सिड़ियों के नाम कर दिया।

लोगों ने पूछा, "यह क्या किया?"

उसने जवाब दिया," यह माल मुझे ऐसे ही आदमियों से मिला था इसीलिये अब उनका माल उनको ही दिये जाता हूँ।"

चुटकुला क्र............................................... # 0451
एक काने ने किसी आदमी से यह शर्त बदी कि जो मैं (काना) तुमसे(आदमी से) ज्यादा देखता हूँ तो पचास रुपया जीतूँ और जब शर्त पक्की हो चुकी तो काना बोला कि लो मैं जीत गया।

आदमी ने पूछा-कैसे?

काने ने जवाब दिया-"मैं तुम्हारी दोनों आंखे देखते हो और तुम मेरी एक ही देख पाते हो।"

चुटकुला क्र............................................... # 0452
एक राजपूत बहुत अफीम खाता था। संयोग से उसे विदेश जाना पड़ा। वहां किसी अड्डे पर रुका तो लोगों ने सावधान किया-ठाकुर साहब!यहाँ चोरी बहुत होतीं हैं। आप चौकसी से रहियेगा। यह बात सुनकर रात तो उसने जागकर काटी,पर यह बात जी में रखी कि चोरी बहुत होती है। भोर होते ही वो घोड़े की पीठ लगाकर एक नगर के बीच चला जाता था कि एका एकी पीनक से चौंक कर पुकारा,अरे रमचेरा!अरे रमचेरा! घोड़ा कहाँ? वह बोला महाराज! घोड़े पे तो बैठेही जाते हो,और घोड़ा कैसा? अफीमची ठाकुर साहब बोले," ये तो हमें भी पता है कि हम घोड़े पर ही बैठे हैं। इस बात की कुछ चिंता नहीं पर सावधान रहना अच्छा है।"

चुटकुला क्र............................................... # 0453
.किसी बड़े आदमी के पास एक ठठोल आ बैठा था,और इनके यहां कहीं से गुड़ आया।उसने ठठ्ठे में कहा कि महाराज! मैंने जनम भर में तीन बिरिया गुड़ खाया है।

बोला,बखान कर। ठठोल बोला,'एक तो छठौ के दिन जनमघूंटी में खाया था ;और एक कान छिदाये थे; और एक आज खाऊंगा।

उन्ने कहा,जो मैं न दूं तो? वो ठठोल बोला तो दो ही सही!

चुटकुला क्र............................................... # 0454
एक सौदागर किसी रईस के पास एक घोड़ा बेचने को लाया और बार-बार उस की तारीफ में कहता ,"हुजूर यह जानवर गजब का सच्चा है"।

रईस साहब ने घोड़े को खरीदकर सौदागर से पूछा कि घोड़े के सच्चे होने से तुम्हारा क्या मतलब है।

सौदागर ने जवाब दिया"हुजूर जब कभी मैं इस घोड़े पर सवार हुआ तो इसने हमेशा गिरने का खौफ दिलाया और सचमुच इसने आज तक कभी झूठी धमकी नहीं दी।"

चुटकुला क्र............................................... # 0455
.एक दिल्लगीबाज शख्स एक वकील से ,जिसने किसी मजनून पर एक वाहियात सा रिसाला लिखा था, राह में मिला और बेतकुल्लफी से कहा,"वाह जी तुम भी अजब आदमी हो कि मुझसे आज तक अपने रिसाले का जिकर भी न किया। अभी कुछ वरक जो मेरी नजर से गुजरे उसमें मैंने ऐसी उम्दा चीजें पाईं कि जो आज तक किसी रिसाले में देखने में न आईं थीं।

वह शख्स इस लाइक आदमी की ऐसी राय सुनकर खुशी के मारे फूल उठा और बोला,"मैं आपकी कद्‌रदानी का निहायत ही शुक्रगुजार हुआ-मेहरबानी करके बतलाइये कि वह कौन-कौन सी चीजें हैं जो आपने उस रिसाले में इस कदर पसंद कीं।"

उसने जवाब दिया ,"आज सुबह को मैं एक हलवाई की दुकान की तरफ से गुजरा तो क्या देखा कि एक लड़की आपके
रिसाले के वरकों में गर्मागर्म समोसे लपेटे लिये जाती है। ऐसी उम्दा चीज आज तक किसी रिसाले में देखने में न आईं थीं।"

चुटकुला क्र............................................... # 0456
मोहिनी ने कहा-न जानैं हमारे पति से ,जब हम दोनों की राय एक ही है, तब फिर क्यों लड़ाई होती है।
क्योंकि वह चाहते हैं कि मैं उनमें दबूं और यही मैं भी चाहती हूँ।

चुटकुला क्र............................................... # 0457
एक मौलवी साहब अपने एक चेले के यहाँ खाने गये। जब मेज पर खाना लग चुका तो चेले ने मौलाना साहब से दुआ मांगने को कहा।
एक लड़के ने जो वहाँ हाजिर था घबड़ाकर अपने बाप से पूछा,"बाबा जब यह कहीं खाने आते हैं तब हमेशा हाथ उठा कर बड़ी मिन्नत करते हैं। क्यो जो आरजू न करें तो लोग बुला कर भी इन्हें भूखा फेर(लौटा) दें।"

चुटकुला क्र............................................... # 0458
किसी लायक मौलवी ने एक बार निहायत उम्दा और दिलचस्प तौर पर तकरीर की कि खैरात के बराबर दुनिया में कोई अच्छा काम नहीं है।
एक मशहूर कंजूस जो वहां मौजूद था बोला,"इस तकरीर में यह अच्छी तरह साबित हो जाता है कि खैरात करना फर्ज है इसलिये मेरा भी जी चाहता है कि फकीर हो जाऊं।"

चुटकुला क्र............................................... # 0459
लार्ड केम्स अक्सर अपने दोस्तों से एक शख्स का किस्सा बयान किया करते थे जिससे उनके मुलाकाती होने का बड़ा पक्का पता बतलाया गया था। लार्ड साहब जिन दिनों जज थे एक बार किसी सफर में राह भूल गये और एक आदमी से जो सामने पड़ा दर्खास्त की कि भाई हमें रास्ता बता देना।

उसने बड़ी मोहब्बत से जबाब दिया,"हुजूर मैं निहायत खुशी से आपकी खिदमत में हाजिर हूँ। क्या हुजूर ने मुझे पहचाना नहीं ? मेरा जान ...है और मैं एक बार बकरी चुराने की इल्लत में हुजूर के सामने पेश होने की इज्जत हासिल कर चुका हूँ।"

"अहा जान,मुझे बखूबी याद है। और तुम्हारी जोरू किस तरह है? उसने भी तो मेरे सामने होने की इज्जत हासिल की थी क्योंकि उसने चोरी की बकरियों को जानबूझकर घर में रख छोड़ा था।"

हुजूर के इकबाल से बहुत खुश है।हम लोग उस बार काफी सबूत न होने की बदौलत छूट गये थे। अब तक हुजूर की बदौलत वही पेशा किये जाते हैं।

लार्ड केम्स बोले,"तब तो हम लोगों को एक दूसरे से मुलाकात की फिर भी कभी इज्जत हासिल होगी।"

चुटकुला क्र............................................... # 0460
एक नौजवान जोड़ा किसी हिल स्टेशन में हनीमून के लिये गया। होटल में खाने के रेट वगैरह तय हो गये। संयोग कुछ ऐसा हुआ कि वे रोज बाहर घूमने जाते तो रात का खाना बाहर ही खाकर आते । तथा इस दौरान वे होटल में मना भी नहीं कर पाते कि वे रात का खाना नहीं खायेंगे।

होटल से चलते समय जब बिल मिला तो उसमें डिनर के पैसे जुड़े थे। पति बोला-भई डिनर तो हमने कभी लिया नहीं। ये डिनर के पैसे कैसे जोड़ दिये?

मालिक बोला-आपने तो मना भी नहीं किया। हम रोज बनाते रहे कि हमारे ग्राहक भूखे न रहें। आपके लिये खाना तो तैयार था। आप न खायें तो हमारा क्या दोष ? पैसे तो डिनर के बिल में जुड़ेंगे।

आदमी ने पैसे दे दिये। सूटकेस उठाकर बाहर की तरफ चलने लगा। अचानक उसने होटल मालिक की गरदन पकड़ ली।

बोला ,"तुमने मेरी बीबी को छेड़ा कैसे? पांच हजार रुपये दो तुरंत नहीं तो पुलिस को रिपोर्ट करता हूँ।"

होटल वाला बोला मैंने कहां छेड़ा? मैंने तो उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखा।

पति गरदन दबाते हुये बोला-"तुमसे उसे छेड़ा नहीं तो इसमें उसकी क्या गलती? वो तो तैयार थी!"

चुटकुला क्र............................................... # 0461
एक मूर्ख से लड़के की शादी हो गयी। शादी के बाद ससुराल वालों को पता चला कि लड़का बेवकूफ है। लेकिन न इसकी पुष्टि हो पायी न खंडन। लिहाजा वे चुप रहे। शादी के कुछ दिन बाद गौने के लिये अपनी दुलहन को लेने के लिये लड़का ससुराल जाने लागा तो उसकी समझदार मां ने समझाया-बेटा ससुराल में सब बडों को प्रणाम करना ,आदर केसाथ बोलना
तथा छोटों से प्यार से बोलना।

लड़के ने कहा -अच्छा अम्मा। अउर कुछ?

मां बोली-हां बेटा । एक बात और करना कि वहां जो बोलना शुद्ध-शुद्ध बोलना ।

लड़का बोला-शुद्ध-शुद्ध बोलना ! यहिका का मतलब है?

मतलब यह कि बेटा वहां जब कोई पूछे खाना कइस बना है ? तो यह न कहना कि खाना नीक (अच्छा)बना है। कहना-भोजन बड़ा स्वादिष्ट है। और हां,पानी को पानी न कहना जल कहना ताकि लोग समझें कि दामाद पढ़ा-लिखा विद्वान है।

लड़के ने बात गांठ बांध ली तथा ससुराल के चल पड़ा।

ससुराल में उसके सभ्य व्यवहार से सब लोग चकित रह गये। वे समझे कि किसी ने उनको भड़काने के लिये दूल्हे के बारे में अफवाह उड़ा दी है कि वह पागल है। ऐसा विनयी,मितभाषी दामाद उन लोगों ने आसपास कहीं नहीं देखा था।

फिर भी गांव की महिलाओं में उत्सुकता थी सो वे खाना खिलाने के समय किसी न किसी बहाने आंगन में जमा थीं।

खाने के दौरान सास ने पूछा-बेटा ,खाना कइस बना है?

दामाद जी विनम्रता से बोले-माताजी ,भोजन तो बड़ा स्वादिष्ट बना है।

इस पर सास से अपनी प्रसन्नता छिपाये नहीं छिपी- वह आसपास की महिलाओं से उलाहने के स्वर में बोली- देखा,झुट्ठै सब लोग कहत रहलीं कि हमार दमाद पागल है,हमार दमाद पागल है। सबके दमाद तो कइसी अइली-गइली बतियात हैं। हमार दमाद तो देखा केतना बड़ा ज्ञानी है कहत है -'भोजन बड़ा स्वादिष्ट है।'

लड़के ने भी इस कनफुस-वार्ता को सुन लिया। उससे भी रहा न गया। वह बोला-तू त इतनैं मा छिटकै लगलू। अगर हम जो कहूँ पानी का जल कहि देब तौ तो तुम्हार छतियै फाटि जाई।
(तुम तो इतने में ही उछलने लगी। अगर मैं पानी को जल कह दूंगा तो तो तुम्हारी जान ही निकल जायेगी।)

चुटकुला क्र............................................... # 0462
एक ट्रक के पीछे बहुत से कुत्ते हांफते हुये भाग रहे थे। किसी ने एक कुत्ते से पूछा, "तुम कहां जा रहे हो?" कुत्ता हांफते हुये बोला, "मेरे आगे वाले से पूछो। जहां वह जा रहा है, वहीं मैं भी जा रहा हूं"। आगे वाले ने भी यही जवाब दिया। जब सबसे आगे वाले से पूछा गया तो वह हांफते हुये बोला, "यह तो नहीं पता हम कहां जा रहे हैं। बस इस ट्रक के पीछे लगे हैं। ट्रक में लदे हैं बांस। यह ट्रक जहां तक जायेगा हम वहां तक जायेंगे। जहां ट्रक रुकेगा, बांस उतारे जायेंगे, फिर गाड़े जायेंगे। जहां बांस गड़ेंगे हम वहीं मूत के भाग आयेंगे।"
(निरंतर के अप्रैल ,२००५ के अंक में पूर्व प्रकाशित)

चुटकुला क्र............................................... # 0463
.एक बार देखादेखी जंगल के जानवरों को भी चुनाव का चस्का लग गया। वहां भी जनता कीकी बेहद मांग पर चुनाव कराये गये। वोट पडे। संयोग कुछ ऐसा कि सबसे ज्यादा वोट बंदर को मिले। लिहाजा बंदरराजा बन गया। शेर ने बंदर को चार्ज दे दिया।
एक दिन बंदर के पास एक बकरी आयी। बोली -महाराज शेर मेरे बच्चे को उठा ले गया है। आप कुछ करो नही तो मेरा बच्चा मारा जायेगा।
बंदर बोला-शेर की यह हिम्मत?ऐसा कैसे किया उसने?अब वो कोई राजा तो है नहीं कि जो मन आये करता रहे। राजा तो मैं हूं। बताओ कहां है शेर ?मैं अभी उसे देखता हूं।
बकरी उसको ले के गयी शेर के पास। शेर एक पेड के नीचे मेमने को अपने पंजे में दबोचे बैठा था। खाने की तैयारी में।

बकरी ने कहा-महाराज बचाइये मेरे बच्चे को।
बंदर ने त्वरित निर्णय लिया और उसी पेड के ऊपर चढ गया जिसके नीचे शेर बैठा था। वह एक डाल से दूसरी डाल,दूसरी से तीसरी डाल कूदता। पसीने -पसीने हो गया पर कूदना जारी रखा।
काफी देर हो जाने पर बकरी बोली -महाराज, कुछ करिये नही तो मेरा बच्चा मारा जायेगा।
इस पर बंदर हांफते हुये बोला-"देखो ,तुम्हारा बच्चा रहे या मारा जाये। हमारी दौड-धूप में कोई कमी हो तो बताओ।"
***









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मैं खड़ा था के पीठ पर मेरी
इश्तिहार इक लगा गया कोई

- कैफ़ी आज़मी

ग़ज़ल 1

पत्थर के खुदा वहाँ भी पाए
हम चाँद से आज लौट आए

दीवारें तो हर तरफ़ खड़ी हैं
क्या हो गए मेहरबान साए

जंगल की हवायें आ रही हैं
कागज का यह शहर उड़ न जाए

लैला ने नया जनम लिया है
है कैस कोई तो दिल लगाए

है आज जमीं का गुस्ल-ए-सेहत
जिस दिल में हो जितना खून लाए

सहरा सहरा लहू के खेमे
फिर प्यासे लब-ए-फुरात आए

****
गुस्ल-ए-सेहत = स्वस्थ स्नान, सहरा = मरूस्थल

**-**

ग़ज़ल 2

मैं ढूंढता हूँ जिसे वह जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीं नया आसमां नहीं मिलता

नई ज़मीं नया आसमां भी मिल जाए
नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता

वोह तेग मिल गई जिस से हुआ है कत्ल मिरा
किसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलता

वोह मेरा गांव है, वोह मेरे गांव के चूल्हे
के जिनमें शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता

जो इक खुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यों
मुझे खुद अपने कदम का निशाँ नहीं मिलता

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता

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बशर=व्यक्ति, तेग=तलवार

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ग़ज़ल 3

क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं
उस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं

दीवाना पूछता है यह लहरों से बार बार
कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गयीँ

अब जिस तरफ से चाहे गुजर जाए कारवां
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गयीं

पैमाना टूटने का कोई गम नहीं मुझे
गम है तो यह के चाँदनी रातें बिखर गयीं

पाया भी उन को खो भी दिया चुप भी यह हो रहे
इक मुख्तसर सी रात में सदियाँ गुजर गयीं

**-**

ग़ज़ल 4

हाथ आकर लगा गया कोई
मेरा छप्पर उठा गया कोई

लग गया इक मशीन में मैं
शहर में ले के आ गया कोई

मैं खड़ा था के पीठ पर मेरी
इश्तिहार इक लगा गया कोई

यह सदी धूप को तरसती है
जैसे सूरज को खा गया कोई

ऐसी मंहगाई है के चेहरा भी
बेच के अपना खा गया कोई

अब बोह अरमान हैं न वो सपने
सब कबूतर उड़ा गया कोई

वोह गए जब से ऐसा लगता है
छोटा मोटा खुदा गया कोई

मेरा बचपन भी साथ ले आया
गांव से जब भी आ गया कोई

**-**
साभार, सरमाया : क़ैफी आज़मी समग्र, वाणी प्रकाशन, दिल्ली. आईएसबीएन नं. 81 - 7055-628-7


तेरी मेरी कहानी


-सलीम खान


आधी रात को हिंदुस्तान आजाद हुआ था परंतु स्वतंत्र देश की पहली सुबह में विभाजन के खून की लाली शामिल थी और बदहवासी के उस आलम में खुशी के साथ आंसू शामिल थे। आबादी की अफरा-तफरी के दौर में कई लोगों के लिए किसी नतीजे पर पहुंचना बहुत मुश्किल था। जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करके ख्वाबों की जन्नत में जाएं या न जाएं ये सवाल अनेक आत्माओं को मथ रहा था। कैसा अजीब-सा दौर था कि दरख्त जमीन से इल्तिजा कर रहा है कि मेरे पैर छोड़ दो। सब भाग रहे थे परंतु कोई कहीं पहुंच नहीं रहा था।

हम लोग पलासिया में अपने पुश्तैनी मकान में रहते थे। मेरे पिता अब्दुल रशीद खान होलकर पुलिस में डीआईजी थे और उनके महकमे में भी तब्दीलियां हो रही थीं।

इंदौर हमेशा से एक थमा हुआ शहर रहा है, कमोबेश मानसरोवर झील की तरह। वक्त की बर्फ यहां आहिस्ता-आहिस्ता पिघलती है परंतु उस दौर में पहली बार मालवा की जमीन का मोह छोड़कर कुछ लोग जाना चाहते थे। मालवा की जमीन में एक नशा है जिससे छूटना आसान नहीं। इस शहर में बसे अधिकांश लोग यहां किसी नौकरी के तहत आए थे।

तबादला होने पर खुद बाहर चले गए परंतु अपने परिवार को मालवा की शरण में ही रखा और सेवानिवृत्त होते ही यहां आकर जम गए। इस शहर की सुस्त रफ्तार यहां के बाशिंदों की दिल की धड़कन की तरह है जिसमें एक रिदम है, एक ताल है। इस जमीन पर स्टेस्थेस्कोप रखकर देखिए। यह काम आपको अजीब और मुश्किल लगता है तो उस्ताद अमीर खान को सुन लीजिए। इसके रंग आपको एम.एफ. हुसैन के चित्रों में नजर आएंगे। लता के अलाप में आप इसकी सुबह को महसूस कर सकते हैं। उस दौर में कुछ लोग इस दिलकश शहर को छोड़ने का सोच रहे थे।

इस शहर में सराफा है, कसेरा बाजार है, कोयला बाखल हैं, कपड़ा बाजार और व्यवसाय के आधार पर रखे मोहल्लों के नाम वाले इस शहर में तवायफों के मोहल्ले को बंबई बाजार कहते हैं। यह बंबई के साथ नाइंसाफी है परंतु छोटे शहर और कस्बे महानगरों को कुछ इसी अंदाज में देखते हैं। बचपन से मन में जमे कुटैव कुछ इस तरह भी जाहिर होते हैं।

उस सुबह बारिश हो रही थी। अब्बा अहाते में बैठकर चाय पी रहे थे। रेडियो सीलोन पर कुंदनलाल सहगल का गीत बज रहा था। इस फरमाइशी प्रोग्राम में सहगल का गीत रोज बजाया जाता था और इसी के साथ अब्बा अखबार रखकर दफ्तर जाने के लिए तैयार होते थे। ठीक उसी समय एक साइकल आकर रुकी। बर्तन बाजार के नदीम साहब आए थे। जब नदीम साहब राजस्थान के सूखे से तंग आकर इंदौर आए थे तब वे महू के छावनी में जाकर पुराने कपड़ों के बदले नए बर्तन देने का व्यवसाय करते थे। बर्तन बाजार में दुकान लेने लायक हैसियत बनते-बनते दस बरस लग गए थे।

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इंदौर के हर गली मोहल्ले में उन्होंने बर्तन बेचे थे। अब्बा ने नदीम साहब को तौलिया दिया और चाय के लिए आवाज लगाई। अब्बा ने उनकी पेशानी पर लिखी परेशानी पढ़ ली परंतु वे कुछ बोले नहीं। अब्बा की तरह खामोशी को इस्तेमाल करते मैंने आज तक किसी को नहीं देखा। मेरी पटकथाओं में पात्रों की खामोशी शायद इसी प्रभाव से आई है। कोई बाप कभी मरता नहीं, वह बेटे की सांसों में जिंदा रहता है। बेटे की खामोशी में आप पिता को सुन सकते हैं। नदीम साहब ने ठंडी करने के लिए रकाबी में चाय डाली और काढ़े की तरह हलक से नीचे उतार ली। जाहिर है कि वे जल्दी में थे।

नदीम साहब ने रकाबी नीचे रखी और तपाक से बोले-मैं पाकिस्तान जाना चाहता हूं। मुझे लगता है हिंदू ग्राहक मुझसे बर्तन नहीं खरीदेंगे। विभाजन का सबसे ज्यादा असर इंसानी सोच पर हुआ था। अब्बा ने खामोशी बनाए रखी। नदीम साहब बोले-मैं आपसे सलाह लेने आया हूं।

नदीम साहब को अब्बा पर बहुत भरोसा था। बरसों पहले बरसात की एक रात नदीम साहब को सामने से आता हाथी नजर नहीं आया और उनकी बर्तन से लदीफदी साइकल टकरा गई। कीचड़ में गिरने के कारण उन्हें चोट तो नहीं आई मगर उनके बरतन बिखर गए और साइकल का हैंडल टेढ़ा हो गया। महू से लौटते हुए अब्बा ने नदीम साहब के बर्तन इकट्ठे कराए और उन्हें मय साइकल के अपनी कार पर लादकर घर ले आए। इस तरह ये दोस्ती शुरू हुई थी। इस बार साइकल का हैंडल ठीक था पर नदीम साहब का खुद पर भरोसा से उठ गया था। कोई इस तरह से अपनी जमीन नहीं छोड़ता। इस बार बर्तन बिखरे नहीं थे, बांधे जा रहे थे।

अब्बा ने उन्हें समझाया कि ग्राहक क्वालिटी और किफायती देखकर दाम देकर माल खरीदता है न कि दुकानदार का मजहब देखकर। आमतौर पर औरतें ही बर्तन खरीदती हैं और किफायत का जितना खयाल उन्हें होता है, उतना मर्दों को नहीं। जिस शहर की तमाम गलियों में जिसने घर-घर व्यापार किया, उस शहर के ग्राहकों पर भरोसा करना चाहिए। यह शहर बहुत पुराना है और आप इसके अफसाने का एक हिस्सा हैं। नदीम साहब थोड़ी देर चहलकदमी करते रहे और फिर बैठ गए। अब्बा ने उनके कंधे पर हाथ रखा। दोनों थोड़ी देर खामोश रहे। बरसात भी थम गई थी। नदीम साहब ने अपने रेनकोट की घड़ी की और उसे साइकल के कैरियर पर लगाया। अब्बा को शुक्रिया कहकर चले गए।

अब्बा की समझाइश का असर हुआ और नदीम साहब ने पाकिस्तान जाने का इरादा छोड़ दिया। उनकी दुकान जम गई। उनके सारे डर काफूर हो गए। उनकी मेहनत और मुनासिब मुनाफा कमाने के कारण उनकी दुकान पर लोगों का भरोसा बढ़ गया और बर्तन बेचने वालों की बिरादरी में कभी किसी ने उनके मुसलमान होने की बात कभी नहीं की। बिरादरी के सारे समारोह में उन्हें सम्मान से बुलाया गया और बर्तन विक्रेता संघ के अध्यक्ष भी चुने गए।

कुछ वर्षों बाद अब्बा कपड़ा बाजार किसी काम से गए तो लौटते समय नदीम की दुकान पर रुके। नदीम ने उन्हें सादर बैठाया। थोड़ी देर बाद एक ग्राहक आया और एक बर्तन के मूल्य को लेकर नदीम से बात करने लगा। नदीम साहब ने उसे झिड़क दिया और बहुत सख्ती से पेश आए। इतना ही नहीं उन्होंने उसे कहीं और से बर्तन खरीदने की सलाह भी दे दी। कुछ ही देर में अब्बा ने महसूस किया कि कामयाबी ने नदीम का दिमाग खराब कर दिया और अब वे बहुत मगरूर हो गए हैं।

अब्बा उठकर रुखसत लेने लगे तो नदीम ने और रुकने का इसरार किया। अब्बा से उनका व्यवहार सम्मानपूर्वक था परंतु ग्राहकों के प्रति व्यवहार बदल चुका था। अब्बा ने उनसे कहा कि अब वे चाहें तो पाकिस्तान जा सकते हैं।
साभार - दैनिक भास्कर

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चुटकुला # 0401
शिक्षक : "तुम्हे आने में देर क्यों हुई?"
विद्यार्थी : "जी, रास्ते में बोर्ड लगा हुआ था, ‘आगे स्कुल हैं-कृपया धीरे चलें'"

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चुटकुला # 0402
शिक्षक : "राम तुम्हे आने में देरी क्यों हुई?"
राम : "जी, मेरे दो रूपैये रास्ते में गिर गये थे, मैं उन्हे ढ़ुंढ़ रहा था"
शिक्षक : "और श्याम तुम्हे देरी क्यों हुई? क्या तुम्हारे भी रूपैये खो गये थे?"
श्याम : " जी नहीं, मैं तो राम के रूपैये को पावँ के नीचे दबा कर खड़ा था."

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चुटकुला # 0403
शिक्षक : "ऐसा कोई उदाहरण बताओ जो साबित करे कि गरमी से चीज़े फैलती हैं तथा ठंड में सिकुड़ती हैं."
विद्यार्थी : "गर्मीयों में दिन बड़े होते हैं तथा सर्दीयों में छोटे."

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चुटकुला # 0404
"उठो बेटा, स्कूल जाने में देरी हो जायेगी"
"नहीं माँ, मैं स्कूल नहीं जाऊंगा."
"क्यों नहीं जाना चाहते, जरा दो कारण भी बता दो."
"एक सारे विद्यार्थी मुझसे नफरत करते हैं, दो सारे टीचर भी मुझसे नफरत करते हैं'
"यह तो कोई कारण नहीं हुआ'
"तो फिर तुम भी कोई दो कारण बताओ कि मुझे स्कूल क्यों जाना चाहिए"
"एक तुम 52 वर्ष के हो, दो तुम स्कूल के प्रिंसीपल हो"
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कुछ इधर उधर की (http://www.kaulonline.com/chittha/?p=122 ) से चुटकुलों जैसे विचारों के बेलगाम प्रवाह -
चुटकुला # 0405

विवाह के विषय में कुछ सुभाषित (पुरुषों की नज़र से)

मैं ने सुना है कि प्रेम रसायनशास्त्र की तरह है। शायद यही वजह है मेरी पत्नी मुझे विषैले पदार्थ के समान समझती है।

- डेविड बिसोनेट
कोई व्यक्ति यदि आप की पत्नी को चुरा लेता है, तो उस से बदला लेने का सब से बेहतर तरीका है कि उसे ही रखने दो।

- साचा गिल्ट्री
विवाह के बाद पति पत्नी एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाते हैं - वे एक दूसरे का मुँह नहीं देख सकते हैं पर सदा साथ रहते हैं।
विवाह आप के लिए हर तरह से लाभकारी है - यदि अच्छी पत्नी मिली तो सुखी रहेंगे, बुरी मिली तो फिलासफर बनेंगे।

- सुकरात
सफल विवाह में कुछ लेना होता है, कुछ देना। पति का देना और पत्नी का लेना।
नारी हमें महान कार्य करने की प्रेरणा देती है, और उन्हें अंजाम देने से रोकती है।

- ड्यूमास
जीवन का सब से दुष्कर प्रश्न, जिस का मुझे उत्तर नहीं मिल पाया है..... "आखिर नारी चाहती क्या है?"

- फ्रायड
हमारा वार्तालाप हुआ - मैंने कुछ शब्द कहे, और उस ने कुछ पृष्ठ कहे।
"कुछ लोग मुझ से हमारे सफल दांपत्य जीवन का राज़ पूछते हैं। हम हर सप्ताह में दो बार रेस्तराँ जाने का समय निकालते हैं - कैंडल-लाइट डिनर, कुछ संगीत, कुछ नाच। वह हर मंगल जाती है, मैं हर शुक्र।"

- हेनरी यंगमैन
"मैं आतंकवाद से नहीं ड़रता। मैं दो साल तक शादीशुदा रहा हूँ।"

- सैम किनिसन
"बीवियों के बारे में मेरी हमेशा किस्मत ख़राब रही है। पहली मुझे छोड़ कर चली गई, और दूसरी नहीं गई।"

- पैट्रिक मरे
यह सही है कि सब लोग आज़ाद और बराबर जन्म लेते हैं, पर कुछ लोग शादी कर लेते हैं!
विवाह एक ऐसी विधि है जिस के द्वारा आप यह मालूम करते हैं कि आप की पत्नी को किस तरह का व्यक्ति दरकार था।
विवाह को आनन्दमय रखने के दो राज़

1. जब आप गलत हों तो गलती मान लें
2. जब आप सही हों तो चुप रहें

- नैश
मेरी पत्नी को बस दो शिकायतें हैं - पहनने को कुछ नहीं है, और कपड़ों के लिए अलमारियाँ काफी नहीं हैं।
मैं शादी से पहले क्या करता था? .... जो जी में आता था।

- हेनरी यंगमैन
मेरी पत्नी और मैं बीस साल तक बहुत खुश रहे। फिर हमारी मुलाकात हुई।

- रॉडनी डेंजरफील्ड
एक अच्छी पत्नी हमेशा अपनी ग़लती के लिए अपने पति को माफ कर देती है।

- मिल्टन बर्ल
शादी एक अकेला ऐसा युद्ध है जिस में आप अपने शत्रु के साथ सोते हैं।

- अनाम
"मैं ने अपनी पत्नी से कई वर्षों से बात नहीं की। मैं बीच में नहीं टोकना चाहता था।"

- रॉडनी डेंजरफील्ड

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यह है रीडर्स कैफ़े का निठल्ला चिंतन (http://www.readers-cafe.net/nc/?p=72 )

चुटकुला # 0406

एक सोफ्टवेयर प्रोग्रामर मरने के बाद यमराज के पास पहुँचा, उसे बताया गया कि उसके कर्मो के आधार पर उसे ये च्वाइस दी जाती है कि वो स्वर्ग या नर्क में से एक चुन ले। उसने कहा कि वो पहले दोनो जगह देखना चाहेगा। उसे जब दोनो जगह दिखाई गयी तो उसने देखा कि नर्क में लोग क्या मजे से हैं, अप्सरायें नाच रही है, सुरा की नदियां बह रही है, चारों तरफ मस्ती और मजे का आलम है जबकि स्वर्ग में लोग आराम से बैठे तो हैं, लेकिन ना सुरा है ना अप्सरायें, सिर्फ खाने के लिये फल वगैरह है। तो उसने यमराज को नर्क जाने को बोल दिया। कुछ दिनों बाद यमराज जायजा लेने पहुँचे तो देखते है सोफ्टवेयर प्रोग्रामर को जंजीरों से बाँध लटकाया हुआ है, नीचे आग जली है, पीठ पर कोड़े पर रहे हैं वो चीखे जा रहा है। यमराज उसके पास पहुँचे तो वो देखते ही बोला ये क्या नाइंसाफी है आपने तो कुछ और दिखाया था ऐसा तो कुछ नही था। यमराज छुटते ही बोले जो तुमने देखा दरअसल वो स्क्रीन सेवर था।

चुटकुला # 0407

संता सिंह अंडरवियर खरीदने करने दुकान पर पहुँचे, जब एक पसंद करी तो दुकानदार ने उसका दाम बताया 150 रूपये। संता बोले अरे भाई डेलीवियर दिखाओ पार्टी वियर नही चाहिये।

चुटकुला # 0408

एक बार संता ‘वांटेड' का पोस्टर देखके सोच में पड़ गये, सोचने लगे कि साला वांटेड था तो फोटो खींचने के बाद उसे जाने क्यों दिया।

चुटकुला # 0409

संता सिंह जी कार की बैटरी बदलवाने गये, मैकनिक बोला कि एक्साइड (Exide) कि डाल दूँ, संता बोले नही यार दोनो साइड की डालना नही तो बाद में फिर प्रोब्लम करेगी।

चुटकुला # 0410

संता के भाई बंता एक बार बुक्स वापस करने लाइब्रेरी पहुँचे, मेज पर पटक कर बोले, क्या बकवास है - सारी बुक पड़ ली, इतने सारे करेक्टर थे, कोई कहानी ही नही थी। लाईब्रेरियन बोला अच्छा तो वो तुम थे जो टेलिफोन डायरेक्टरी ले गया था।

चुटकुला # 0411

बंता सिंह एक बार संता को बोले ओये तु हर एस एम एस (SMS) को दो बार क्यों भेज रहा है। संता ने जवाब दिया कि क्योंकि तुझे अगर एक फोरवर्ड करना पड़े तो दूसरा तेरे पास रहे।

चुटकुला # 0412

संता सिंह जी अपने एक दोस्त को बोले यार मैं ट्रेन में सारी रात नही सो पाया। दोस्त ने पूछा, क्यों? संता बोले, अरे वो ऊपर की बर्थ जो मिली थी। दोस्त ने कहा कि तुमने बदली क्यों नही। संता बोले, ओये नीचे की बर्थ में कोई था ही नही बदली करने को।

चुटकुला # 0413

टीचर ने क्लास में जनसंख्या के बारे में बताया कि भारत में एक औरत हर दस सैकंड में एक बच्चे को जन्म देती है। संता खड़े होकर बोले, हमें तुरंत ही उसे ढूँढ कर रोकना चाहिये।

चुटकुला # 0414

संता ने एक आदमी से पूछा, ये सारे लोग दौड़ क्यों रहे हैं? आदमी ने जवाब दिया कि ये दौड़ है जो जितेगा उसे कप मिलेगा। संता बोले कि अगर सिर्फ जीतने वाले को कप मिलेगा तो बाकी लोग क्यों दौड़ रहे हैं।

चुटकुला # 0415

संता ने एक लड़की को प्रपोज किया, लड़की बोली मैं तुम से 1 साल बड़ी हूँ। संता बोले, ओये नो प्रोब्लम सोणिये, मैं तुम से अगले साल शादी करूँगा।

चुटकुला # 0416

संता एक बार अपनी आखिरी इच्छा बता रहे थे कि मैं अपने दादा की तरह शांति के साथ नींद में ही जन्नत को प्यारा होऊँ ना कि जिस गाड़ी को मेरे दादा चला रहे थे उसमें बैठे चीखते चिल्लाते पैसेंजरों की तरह।

चुटकुला # 0417

संता आर्ट गैलरी में पहुँच बोले, इस खतरनाक सी दिखने वाली तस्वीर को आप मार्डन आर्ट कहते हो। गैलरी वाला बोला, ‘माफ कीजिये सर, ये तो मिरर (दर्पण) है।

चुटकुला # 0418

एक बार संता बहुत धीरे धीरे लिख रहे थे, दोस्त ने कहा इतने धीरे क्या लिख रहे हो। संता बोले अपने 6 साल के बेटे को लैटर लिख रहा हूँ वो तेज नही पढ़ सकता ना।

चुटकुला # 0419
एक आदमी ने एक बार संता सिंह से पूछा, ये मनमोहन सिंह जी वॉक पर शाम को क्यों जाते हैं सुबह क्यों नही? संता ने जवाब दिया, "अरे भई मनमोहन इज पीएम (PM) नोट ए एम (AM)।
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ये हैं चुटकुलों के कुछ मंतव्य (http://www.tarakash.com/mantavya/2006/07/21.html )

चुटकुला # 0420

एक बार मैरे सागर भाई सा. साइबर कैफे में बैठे बाहर सडक की ओर देख रहे थे. अचानक उन्हें सामने से आता एक सुमो पहलवान दिखा. इत्ता बडा आदमी तो उन्होंने जिन्दगी में कभी देखा ही नहीं था. जैसे ही वो पास आया, भाई सा. पूछ बैठे, "भाई तू कौन?" सुमो पहलवान बोला ,"सुमो पहलवान" और चला गया.

उसके पीछे पीछे सुमो पहलवान की बीवी निकली. कद में थोडी छोटी थी पर माशाअल्ला वो भी खाते पीते घर की हट्टी कट्टी थी. भाई सा. तो चौंक गए, बोले "अरे तू कौन?" वो बोली,"सुमो पहलवान" और चली गई.

इतने उनका बच्चा पीछे पीछे आया. कद में तो छोटा पर था सांड जैसा.
भाई सा. बोले,'अरे भैया तू कौन?" वो बोला,"सुमो पहलवान" और चला गया.

भाई सा. हैरत मे तब पड गए जब उनके पीछे पीछे डेढ फुटिया बच्चा निकला. थोडा मनचला था. भाई सा. को ठोकर देता निकल गया. भाई सा. धड़ाम से गिरे. चीख निकली और भाई सा. बोले,"हे भगवान, अरे बाबा तु कौन?" बच्चा खी खी करता बोला,"सुमो पहलवान. और आप कौन?"

भाई सा. कराहते हुए बोले," हूँ तो मै भी सुमो पहलवान. आजकल थोडा बीमार चल रहा हूँ."
चुटकुला # 0421


डॉ. सुनील के पास एक आदमी भागा भागा आया. बोला," डोकटर साहेब, देखो मेरी बीवी को क्या हो गया है. कब से चिल्लम चिल्ली कर रही है."

डॉक्टर बोले,"कोई गल्ल नहीं, अन्दर इनकी जाँच करते हैं" थोडी देर बाद डॉक्टर बाहर आए और बोले,"नर्स जल्दी से पेचकश दो". आदमी डर गया - ओये यह क्या?

थोडी देर बाद डॉक्टर साहेब फिर बाहर आए और बोले,"धत्त तेरे कि पत्ता नही कै हो गया है, नर्स जल्दी से हथौडा दो." अब तो बेचारा आदमी बुरी तरह डर गया. बोला,"मालिक मेरी बीवी को हुआ क्या है?"

डॉक्टर साहेब बोले," अरे बापु चेक तो करने दो. यहाँ तो मेरी बेग ही नही खुल रही है."

चुटकुला # 0422

मेरा दोस्त रवि कामदार एक शुक्रवार को अपनी नई नवेली गर्लफ्रेंड को लेकर एक ज्वैलर के शोरूम में गया और कहा,"भईया, मेरी स्वीट हार्ट के लिए एक सुन्दर सी अंगूठी दिखाओ."

सेल्समेन ने एक अंगूठी निकाली और कहा,"ये देखिए सर, कितनी सुन्दर है. सिर्फ 5000 रूपये." रवि बोला, "बस! अरे यार थोड़े ढंग की दिखाओ"

सेल्समेन खुश हो गया. एक और अंगूठी निकाली और बोला,"ये देखिए सर. एकदम आपके क्लास की. कीमत 25000 रूपये." रवि बोला,"बस यह ठीक है. ये लीजिए 25000 का चेक. आप सोमवार को बेंक में एकबार चेक करवा लेना. हम अंगूठी फिर ले जाएंगे."

सोमवार को सेल्समेन ने रवि को फोन किया,"सरजी, आपकी बेंक में तो बेलेंस ही नही है!"
रवि बोला, "कोई बात नहीं, लेकिन मैरा वीकेंड बडा मजेदार गुजरा"
चुटकुला # 0423


एकबार मैं, अमित और संजयभाई दुनिया से कल्टी हो लिए और पहुँच गए स्वर्ग नरक जंक्शन पर. वहाँ बही खाता लिए चित्रगुप्त से भिडंत हो गया.

चित्रगुप्त,"चलो अपना अपना नाम बोलो"
अमित,"नही बताएंगे. पैचान कौन?"
चित्रगुप्त,"अच्छा ये बात है, तो बताओ वो कौन सी प्रोग्रामिंग लेंग्वेज है जो एक पेय भी है?" अमित हँसा और बोला,"लो कर लो गल्ल. ए तो जावा है."
चित्रगुप्त बोला,"वाह वाह आप तो अमित गुप्ता हैं, आओ आओ. अच्छा अब आप बताओ सिंगापुर पहले क्या था?"
अब संजयभाई बोले,"भईया, सिँहपुर था".
चित्रगुप्त झट पहचान गया. बोला,"अहोभाग्य संजयभाई आओ आओ."

अब मै बचा. शक्ल से ही झंडु बाम लगता हुँ.
चित्रगुप्त बोला,"तेरे लिए इजी लेता हुँ. बोल भारत के प्रधानमंत्री कौन."
मैं बोखलाया, सर खुजाया, मुहँ बनाया, गाल सहलाया और बोला,"सरदारजी"

चित्रगुप्त: "ह्म्म.. पंकज बेंगाणी. आजा इधर साइड में. नर्क की लाइन में लग जा"
***
पंकज भाई अंबाले वाले (http://ms.pnarula.com/200607/हिन्दी-चुटकले-अनुगूँज-21/ ) के यह चुटकुले भी खूब रहे-
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चुटकुला # 0424

संता बंता पेड़ पर बैठे हैं। बंता गाना गाना शुरु कर देता है। चार पांच गाने गाने के बाद वह थोड़ा चुप होता है व फिर चमगादड़ की तरह उलटा लटक कर फिर गाना शुरु कर देता है। संता पूछता है - ओ भाई की कर रिहा है। बंता - यार पहले साइ़ड ए के गा रहा था अब साइड बी के गाने गा रहा हूँ।

चुटकुला # 0425

दो लड़किया बातें कर रही हैं। ए शीना, ए शीना ते को पता है जब लड़किया बातें कर रही होती हैं तो लड़को के कान खड़े हो जाते हैं। दूसरी लड़की - हैं बहन उसे कान भी कहते हैं।

चुटकुला # 0426

तमिल, गुजराती व पंजाबी इक्कठे काम करते हैं व रोज लंच पर मिलते हैं। तीनो एक ही तरह का खाना खा खा कर पक चुके होते हैं। तमिल कहता है कि गर कल फिर लंच में बीवी ने इडली रखी तो वह कूद कर जान दे दे गा। गुजराती कहता है कि अगर उसे फिर एक बार खाकरा खाने को मिला तो वह भी बनाने वाले के पास चला जाएगा। पंजाबी भी परांठों के बारे में यही विचार जाहिर करता हैं। अगले दिन तीनों मिलते हैं व लंच में वही देख कर तीनों कूद कर जान दे देते हैं। शम्शान में तीनों की बीवियाँ बात कर रही हैं। तमिल बीवी - हाय अगर मुझे पता होता कि ये इडली के कारण जान दे देंगे तो में उतपम्म बना कर भेजती। गुजराती - हाय मुझे भी खाकरा ले डूबा। हाय रे। आखिर में पंजाबी बीवी के चेहरे पर बहुत परेशानी के भाव हैं व वह कहती पर मेरे सरदार जी तो सुबह आप ही लंच बनाते थे।

चुटकुला # 0427

एक ग्रामीण शहर में आ कर घूम रहा है व घूमने के बाद थक कर कुछ खाने की जगह ढूढंता है। शहर के बाहर बाहर होने की वजह से वहाँ कुछ मिलता नहीं और वह भटकता हुआ कचहरी पहुँच जाता है। उसे कचहरी के बारे में जानकारी नहीं होती और व किसी जिरह चल रहे केस की कार्यवाही में पहुँत जाता है। कार्यवाही के दौरान शोर मचने पर जज चुप कराने के लिए कहता है - ऑडर ऑडर। अपना ग्रामीण भाई - हाँ हाँ दो कुलचे ते इक छोलयाँ दी प्लेट (यह मेरा बचपन का सबसे पहला याद किया चुटकला है)

चुटकुला # 0428

आजादी की लड़ाई के दिनों में महात्मा गाँधी के खादी प्रेम के चलते सभी को खादी ही प्रयोग करनी पड़ती थी। पंडित नेहरु को सर्दियों में लग गया जुकाम अब खादी का रुमाल होता है खुरदरा। बस जब नाक पोंछनी नाक पर खादी रेगमार जैसे काम करती। इस मारे नाक एक दम लाल हो गया। गाँधी जी ने नेहरु के लाल नाक को देख कर कहा कि - क्यूँ भई जूकाम कैसा है। नेहरु बोले - चिंता की बात नहीं आप के खादी के रुमालों से कुछ दिनों में नाक ही नहीं रहेगा फिर जुकाम ही न होगा।
चुटकुला # 0429

लाँग रुट की बस का कंडक्टर एक गाँव वालो से बड़ा परेशान था। गाँव वाले हाथ देकर अगले गाँव जाने के लिए भी बस रुकवा लेते थे जबकि वह बस का स्टॉप भी नहीं था। अब बस जा रही है व वह गाँव आने वाला है। कंडक्टर पीछे से ड्राइवर को आवाज लगाता है कि - रै भाई इब के ना रोकिए, कोई रस्ते माँ हो तो सालयाँ ने पेल दिए। ड्राइवर भी जोश में आकर गाड़ी की स्पीड बढ़ा देता है। फिर क्या देखता है की गाँव आने पर एक बुढ़िया एक छोटे से लड़के, जिस ने सिर्फ बुशर्ट ही पहन रखी है, के साथ सड़के के बीचो बीच खड़ी है। ड्राइवर को गाड़ी में ब्रेक लगानी पड़ी जाती है। ड्राइवर थोड़ा सा साइड मार कर अपनी खिड़की से सर निकाल कर गुस्से में पूछता है - रै माई कित जा गी। बुढ़िया - ना बेटे जाणा तो कोनी, बालक रोवे था इसने भोपूं बजा के दिखा दे।

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युद्ध









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-बलजीत सिंह रैना



रातोंरात सुरेंद्रनाथ कौल अपने घर का थोड़ा सा ज़रूरी सामान सरदार हकूमतसिंह के ट्रक पर लादकर परिवार सहित जम्मू आ पहुंचा था.
सरदार हकूमतसिंह से उसकी जान- पहचान बहुत पुरानी नहीं थी लेकिन गहरी और सघन थी. तब वह बारामूला सरकारी अस्पताल में मेडिकल असिस्टेंट था. हकूमतसिंह का बड़ा ख़तरनाक ट्रक एक्सीडेंट हुआ था. बाईं टांग की हड्डी टूट गई थी. ग्यारह दिन अस्पताल में रहा और इन ग्यारह दिनों में सुरेंद्रनाथ ने बड़े अपनेपन से उसकी मरहम पट्टी की थी. बाद में बीस-बाइस दिन मरहम पट्टी के लिए वह उसके घर भी जाता रहा. यह एक महीने की सेवा उन दोनों को इतना निकट ले आई कि वह सगे भाईयों जैसे दोस्त हो गए.


ट्रक पर सामान रखवाते हुए सुरेंद्रनाथ की आंखें भर आईं तो हकूमत सिंह ने गर्म हाथों से उसका कंधा दबाते हुए कहा था, ''हौंसला रख सुरेंद्रनाथ! कभी हम भी इसी तरह मुजफराबाद से उजड़े थे. पैदल चलते ऊड़ी, करना होते हुए बारामूला पहुंचे थे. हिम्मत रख...तेरे परिवार को जम्मू पहुंचाने के लिए रब सबबी (ईश्वर की इच्छा से) मैं आज अपने ट्रक के साथ तेरे पास हूं पर जब हम उजड़े थे तब हमें छोड़ने वाला कोई नहीं था. कबाईलियों की गोलियों की बौछार को लांगकर आधे-अधूरे पहुंचे थे बारामूला. कईयों का तो अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए थे. पर तू दिल छोटा न कर, हम चाहे पलटकर मुजफराबाद न जा सके, पर मेरा दिल कहता है, आप लोग ज़रूर वापस आओगे. भारत सरकार इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाली इस कश्मीर को.

बाल्टियां ट्रक के क्लीनर को पकड़ाते हुए सुरेंद्रनाथ के बड़े लड़के प्राणनाथ ने कहा, ''मेरी बात याद रखिएगा, सिंघ अंकल, हम पंडितों के बाद यह जिहादी आपको भी नहीं छोड़ेंगे.''
हकूमत सिंह ने हां में सिर हिलाते हुए माना था, ''जानता हूं बेटा. यह धार्मिक जनून किसी का सगा नहीं होता. यह तो अपने ही धर्म के लोगों को बे-वजह शक के आधार पर मार डालता है फिर दूसरे किसी को बख्शने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. यह तो पंजाब में चल रही मूवमेंट का परिणाम है जो अभी तक इन्होंने हमसे छेड़छाड़ नहीं की, वरना जिन्होंने सैंतालीस में गोलियां बरसाकर हमें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया था, वे आज कैसे हमारे सगे हो गए? फिर भी, मैं समझता हूं कि अभी इन्सानियत इतनी नहीं मरी कि कोई किसी की की हुई नेकियों को ही भूल जाए.''
''हां यह बात तो आपकी ठीक है, भाईसाहब! नेकी को तो दुश्मन भी याद रखता है.'' इस बार सुरेंद्रनाथ की पत्नी बोली थी.


सुरेंद्रनाथ गहरे सोच में डूब गया था. सचमुच लोग इतने नाशुकरे नहीं है. बीमारों की सेवा-टहल करते हुए उसने पैसे के साथ-साथ कुछ नेकियां भी कमाई थीं. पड़ोसी ज़हूर साहब की बेटी फरीदा भी उसकी कमाई हुई नेकियों में से एक थी.
फरीदा_जो थोड़ी देर पहले ही उनके घर आई थी. पहले तो बारह बजे रात की दस्तक ने उन्हें डरा ही दिया था. लेकिन जब हिम्मत जुटाकर दरवाज़ा खोला तो सामने बुरके में छिपी फरीदा की सलाम सुनकर सांस में सांस आई थी. लेकिन यह सांस थोड़ी देर बाद घुटन में बदल गई. फरीदा ने बताया कि आज रात किसी भी समय उन पर हमला हो सकता है, इसलिए जैसे भी हो उन्हें रातों-रात जान बचाकर निकल जाना चाहिए.


''एक बोतल खून दिया था फरीदा को.'' सुरेंद्रनाथ अचानक बोल पड़ा, ''हकूमत सिंघ, उस एक बोतल खून ने आज मेरे परिवार को जिहादियों की गोलियों का निशाना बनने से बचा लिया. फरीदा बेटी का ऑपरेशन था तब, उसके पेट में बहुत बड़ा टयूमर बन चुका था. ईश्वर की कृपा से बच गई. सचमुच नेकी दरिया से निकल कर कब, कैसे, किस मोड़ पर आपके सामने खड़ी हो जाए,...वरना जिस जेहलम में इतना ज़हर भर गया हो उसमें से अमृत निकल कर आधी रात को मेरे दरवाज़े पर दस्तक क्यों देता? और तुम! आज ही रात भर ठहरने के लिए मेरे घर कैसे आ जाते? मैं इसे केवल संयोग नहीं मानता.''


हकूमत सिंह ने एक बार फिर अपने गर्म हाथ से सुरेंद्रनाथ का कंधा दबाया. साथ ही उसे ख़याल आया, क्या सुरेंद्रनाथ के परिवार की तरह उन्हें भी किसी रात अचानक यूं उजड़ना पड़ेगा? इस सोच ने उसे झनझना दिया. उसने एक लंबी सांस खींचकर छोड़ी और तभी ट्रक का डाला बंद होने की खड़ाक ने उसकी चेतना को झिंझोड़ा.
ट्रक जब जवाहर नगर की एक मस्जिद के पास से निकला तो लाउडस्पीकर से कश्मीर की आज़ादी के लिए छिड़े जिहाद में, कुर्बानियां देने के लिए, उकसाने वाले भाषण के साथ ले के रहेंगे_आज़ादी यहां पे चलेगा_निज़ामें मुस्तफ़ा...जैसे नारे गूंज रहे थे.


सुबह आकाश में अभी एक अकेला तारा टिमटिमा रहा था जब हकूमत सिंह ने ट्रक बटोत की चढ़ाई में एक होटल के आगे जा रोका था. वह जब पंडित सुरेंद्रनाथ के परिवार के साथ चाय-नाश्ते के लिए
हकूमतसिंह के साथ, कश्मीरी पंडितों का परिवार देखकर बोला था, ''ओ कूमते चाचा, पंडितों का डेरा तो नहीं ले जा रहा जम्मू? मैंने भी चार जीव बिठाए हुए हैं...बीजबिहाड़ा के आगे खड़े थे...कहने लगे जितने चाहे पैसे ले लों सरदार जी पर हमें जम्मू ले चलो. मैंने भी बेचारों को बिठा लिया. हालात कुछ ज्यादा ही ख़राब हो गए हैं कूमते चाचा! हमारे लिए भी मुश्किलें बनेंगी.'' ''हां खराब तो बहुत हो गए हैं!'' हकूमतसिंह ने सिर हिलाते हुए कहा था, ''तू अपनी सुना, सुना है तेरे घर रोज़ जलूस लेकर चले आते थे?''


''हमारी तो तू कुछ ना पूछ चाचा. तू तो जानता है हमारे बाबा की ज़मीन जायदाद...हमारे सेब और बादाम के बाग़ों को देख कर दुनिया वैसे ही जलती है. असल में कुछ मुसलमानों की हमारे बाग़ों पर नीयत ख़राब हो गई थी. गांव के पांच-सात घर रोज़ जलूस निकालकर हमारे घर आ धमकते. एक दिन, दो दिन, तीसरे दिन, हमारे बाबे को गुस्सा आ गया उस दिन...डांग लेकर निकला बाहर_कहने लगा, ''हमारा घर कोई यू एन ओ का दफ्तर है? त्राठा जोगियो (इस लायक हो कि तुम पर बिजली गिरे) हमने कब रोका है तुम्हें आज़ादी लेने से? चलो मैं साथ चलता हूं तुम्हारे, चल के यू एन ओ के दफ्तर के बाहर नारे मारो.'' बाबे के हाथों में डांग देखकर दौड़े फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. अगले दिन गुरुद्वारे की बाहर वाली दीवार पर पोस्टर लगा छोड़ा था, जो सिक्ख हमारी आज़ादी की तहरीक में रुकावट बन रहे हैं वे सब हमारी हिट-लिस्ट में हैं. पोस्टर पढ़कर बाबे को चढ़ा गुस्सा, वह गया मुजाहिदीनों के लोकल कमांडर के पास...उसे बाबे ने मुसलमानों की सारी करतूत सुनाई. कमांडर ने कहा कि जो मुसलमान इस तरह सिक्खों को नाजायज तंग करते हैं वे कश्मीर की आज़ादी के लिए जद्दोजहद करने वालों के गध्दार हैं, और उनके ख़िलाफ़ कारवाही होगी. बस, फिर नहीं आया कोई. हकूमते चाचा आपको किसने कहा यह सब?


हकूमत सिंह मुस्कराया था, ''अख़बारों में इश्तिहार पढ़ा था आपके बाबे का कि, मैं वाहिगुरू को हाज़िर नाज़िर जानकर वज़ाहत करना चाहता हूं कि मैं कश्मीरियों की आज़ादी की लड़ाई में किसी प्रकार की रुकावट खड़ी नहीं कर रहा. कुछ लोग अपने जाति फ़ायदे के लिए हमारे बारे में ग़लत प्रचार कर रहे हैं. लिहाज़ा जेकेएलएफ या हिजबुल मुजाहिद्दीन मेरे ख़िलाफ़ पूरी तहक़ीकात किए बिना कोई कारवाही न करें. एक बे-गुनाह कश्मीरवासी- सरदार ज्वालासिंघ, त्रााल, कश्मीर.''


''इश्तिहार तो देना ही पड़ता है आजकल, हकूमते चाचा! जान किसे प्यारी नहीं होती, आधी से अधिक अख़बार तो इश्तिहारों से भरी होती है...हर किसी को अपनी बेगुनाही का इश्तिहार देना ही पड़ता है. कभी सोचा था कि यह सब कुछ होगा कश्मीर में?'' ''पिछले दस वर्षों में पंजाब में थोड़ा कुछ हुआ था? पर यह सब नहीं देखा अख़बारों में!'' हकूमत सिंह के माथे पर चिंता की रेखाएं गहरा गईं. सोचने लगा, कश्मीर में ही नहीं, अलग होने का नारा तो पंजाब में भी लग रहा था. लेकिन पंजाब में इस नारे से पहले पानी का नारा था, बिजली का नारा था, चंडीगढ़ की मांग थी...लेकिन जब एक भी मांग पूरी न हुई तब देश से अलग होने का नारा लगा, पर यहां कश्मीर में तो सीधे ही आज़ादी का नारा लग गया.''


नाश्ते के बाद ट्रक स्टार्ट करते हुए हकूमत सिंह बोल पड़ा था, ''सुरेंद्रनाथ, मैं सोचता हूं कि यह लोग अभी कश्मीरी सिक्खों को तंग नहीं करेंगे, पर मुझे लगता है अगले चक्कर में मुझे भी अपना परिवार जम्मू लाना पड़ेगा.''
जैसे-जैसे गाड़ी पतनी टॉप की तरफ़ बढ़ रही थी. धुंध और और गहरी होती जा रही थी. एक स्थान पर गाड़ी एक तरफ़ करके हकूमते ने ट्रक रोक लिया था और इस घनी धुंध के छंटने की प्रतीक्षा करने लगा.


कुछ दिन गीता भवन में रहने के बाद सुरेंद्रनाथ के परिवार को जम्मू से पंद्रह किलोमीटर दूर अखनूर रोड़ पर मिश्रीवाला के पास लगे शरणार्थी कैंप में एक तंबू मिल गया था.
शुरू-शुरू में तो जम्मू के डोगरों ने बड़ी फराख दिली से कश्मीरी शरणार्थियों का स्वागते किया, बढ़-चढ़कर मदद की, गीता भवन में स्थान दिया, लंगर चलाए, कपड़े बांटे, यहां तक की मुसीबतों के मारे कश्मीरियों ने अपनी बेटियों के रिश्ते कमाऊ डोगरे लड़कों के साथ करने के फ़ैसले भी ले लिए थे, लेकिन जैसे-जैसे कश्मीरी शरणार्थियों की जम्मू में भीड़ बढ़ने लगी और कश्मीर के हालात और अधिक बिगड़ते गए, डोगरे अपने आदर्शवादी इन्सानी जज्बे की जकड़न से मुक्त होते हुए और यथार्थवादी दृष्टिकोण से अपने भविष्य को लेकर चिंतित होने लगे. उन्हें अपने अधिकार, भविष्य में बंट जाने का भय सताने लगा. शरणार्थियों के कारण ज़मीन की क़ीमत आसमान छूने लगी थी. दाल-सब्जी और छोटी-बड़ी चीज़ें महंगी हो रही थीं. जम्मू शहर में जिधर दृष्टि दौड़ाओ कश्मीरियों की एक भीड़ चली आती दिखाई देती, जिस मेटाडोर, बस में बैठो कश्मीरियों से लदी हुई मिलती, यहां तक कि जम्मू; कश्मीरी पंडितों के शहर का भ्रम पैदा करने लगा! परिणाम इसका यह निकला कि जम्मूवालों को अपनी डोगरा पहचान पर ही हमला होता महसूस होने लगा. धीरे-धीरे, अलग-अलग धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक... स्थानीय संस्थाओं की तरफ़ से कश्मीरी पंडितों को वापस भेजने या फिर जम्मू शहर से बाहर दूर दराज़ स्थानों और कैंपों में बसाने की आवाज़ें उठने लगीं.


इस बार गर्मी भी तो खूब पड़ी थी. कुछ पत्राकार जब सुरेंद्रनाथ कौल के टैंट के आगे से निकल रहे थे तो उन्हें देखकर सुरेंद्रनाथ की पत्नी ने ऊंची आवाज़ में सुनाकर कहा था, 'कश्मीर से चिल्लेकलां की सख्त सर्दी के दिनों में स्वर्ग के सुख जैसी कांगड़ी सिर्फ़ पेट की चमड़ी ही जलाती थी, लेकिन यह छयालिस डिग्री सैल्सियस ने तो तन के साथ-साथ मन भी जला डाला है.' कहते-कहते उसने एक लंबी सांस छोड़ी थी.

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एक स्थानीय पत्राकार ने आगे बढ़कर कहा था, ''हां गर्मी तो सचमुच बहुत है, लेकिन सैंतालिस में जब पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से, बहुत से सिक्ख और पंडित शरणार्थी बनकर इस शहर में आए थे, तो उन्होंने अपने आपको यहां की आबोहवा में एडजस्ट कर ही लिया था.''
''कौन एडजस्ट नहीं करता?'' इस बार प्राणनाथ बोला था, ''सब करते हैं. जो मर जाते वे भी तो एडजस्ट ही करते हैं...इस जला देने वाली गर्मी में बिन पंखे के इन तिरपाल के टैंटों में हालात के साथ एडजस्ट करते हुए; मां के आंचल जैसी चिनार की ठंडी छाया में पले बच्चे से पूछिए इस आग में झुलसना क्या होता है?''
प्राणनाथ को भावुक सा होते देख एक और पत्राकार उसके पास आ खड़ा हुआ और बड़े हमदर्दी भरे लहज़े में पूछने लगा, ''आपका नाम प्लीज़?''
''प्राणनाथ कौल.''


पत्राकार बोला, ''देखिए कौल साहब, जेकेएलएफ वाले दावा कर रहे हैं कि उन्होंने किसी कश्मीरी पंडित को परेशान नहीं किया, बल्कि पंडित कुछ हिंदू पार्टियों के ग़लत प्रचार के कारण से कश्मीर छोड़ रहे हैं. आप बताएंगे कि आपके घर छोड़ने की क्या वजह रही?''
''देखिए ऐसा है कि कश्मीरी मुजाहिद जब हमें ज़बरदस्ती जलूस के साथ चलने के लिए कहते; वहां तक तो ठीक था, फिर वे आज़ाद कश्मीर का नारा लगाने को कहते, जान बचाने के लिए हम नारा भी लगा देते थे, पर जब उन्होंने कहा कि हमारे साथ ट्रेनिंग के लिए सीमा पार चलो तो यह हम कैसे कर सकते थे? इस बात के लिए वे हमारे पूरे परिवार को जलाकर मार डालने वाले थे लेकिन हमारी एक पड़ोसन ने हमें उनके ख़तरनाक इरादों के बारे में बतला दिया और हम रात में ही निकल आए.''


कुछ खीजते हुए सुरेंद्रनाथ ने कहा था, ''आपने कभी उनके नारे सुने होते तो यह सवाल ही न करते. एक ग्रुप कहता है, ''बटो बरयि, बटनियो सान-सब बनेगा मुसलमान. (पंडितें के बिना, पंडितानीयों के साथ, सब को बनाएंगे मुसलमान)'' तो दूसरा कहता है, ''हिंदुस्तानी कुत्ताो, वापस जाओ.'' तीसरा जलूस चिल्लाता है, ''आधी रोटी खाएंगे, पाकिस्तान बनाएंगे.''...एक ग्रुप नहीं है वहां, भाई साहब! पचासों हैं, और आप एक जेकेएलएफ को लेकर बैठे हैं! एक ग्रुप सबको साथ लेकर चलने की बात करता है, तो दूसरा हम लोगों की बहू-बेटियों पर बुरी नज़र डालता है. धमकी भरी चिट्ठियां मिलती हैं. हमारे तो घर तक बांट लिए हैं उन्होंने!''


जवाब में एक पत्राकार ने कैमरा क्लिक करके सुरेंद्रनाथ के टैंट के भीतर परिवार का फ़ोटो खींच लिया. शेष, सिर हिलाते हुए आपस में बयानों का विश्लेषण करते हुए अगले टैंट की तरफ़ चले गए.
सूरज की सिंदूरी टिक्की धीरे-धीरे नीचे होती हुई दूर लहरा रहे सफ़ेदों और टाली के वृक्षों में जा अटकी थी. एक अर्धपागल कश्मीरी पंडित जिसके इकलौते पुत्रा को मिलिटेंटों ने घर से बुलाकर बीच गली में मार डाला था, दूर जा रहे पत्राकारों की टोली को देखते हुए यकायक अपनी धुन में ललदिद का गीत ऊंची आवाज़ में टेक लगाकर गाने लग पड़ा था, ''बुथ क्या जान छुय...वोन्द छुय किद्बा...असलुच कथ जांह सनीनो...परान लेखान वुठ ओंगजि ग़ज़ी... अंदरिम दुयी चज़ी नो'' (रूप क्या सुंदर...दिल पत्थर का...पढ़ने-लिखने में दी उम्र गवां...सत्य कभी जाना ही नहीं...भीतर का द्वैत वहीं का वहीं)
पसीने से तर-ब-तर सुरेंद्रनाथ रिहाड़ी कॉलोनी की खाली मेटाडोर में जा चढ़ा था. गर्मी बर्दाश्त के बाहर. मेटाडोर का एक आधा सा खुला शीशा उसने हवा के लिए पूरा खोल दिया, पायजामे के पहुंचे ऊपर सरका कर पिंडलियां, घुटने नंगे किए, दोनों बाजुओं को फैलाकर चौड़ा होकर आराम से सीट पर पसर गया.


थोड़ी ही देर में मेटाडोर सवारियों से भर गई, सुरेंद्रनाथ वैसे ही चौड़ा होकर बैठा था कि उसी जैसा एक अक्खड़ डोगरा मेटाडोर में चढ़ आया. उसने सुरेंद्रनाथ को इशारे से एक तरफ़ सिकुडने के लिए कहा ताकि उसके बैठने के लिए भी स्थान निकल सके. लेकिन गरमी से बौखलाए सुरेंद्रनाथ ने अपनी भौंहों को ऊपर की तरफ़ झटका देते हुए तर्क पेश किया था, ''जगह किधर है और सवारी बिठाने के लिए?''


डोगरे को उसकी बात सुनकर गुस्सा आ गया था, बोला, ''आप लोग अपने आपको समझते क्या हो? अपनी मारूति में नहीं बैठे हो आप, मैटाडोर है. हम जम्मू के लोग एडजस्ट करने वाले लोग हैं. आप एक तो कश्मीर से भागकर हमारे सिर पर आ चढ़े हो, अब ऊपर से एडजस्ट भी नहीं करते!'' पंडित सुरेंद्रनाथ कौल को अचानक एहसास हुआ कि उसने बड़ा ग़लत पंगा ले लिया है. झट से एक तरफ़ सिमटता हुआ बोला, ''अरे आप तो ऐसे ही नाराज़ हो गए...आओ जी राजा जी! बैठो आप...ऐसी भी क्या बात है...आप ही की गाड़ी है.''
डोगरा सीट में फंसते हुए बोला, ''गाड़ी की बात नहीं है पंडित जी, असूल की बातहै.''


''बिल्कुल जी, असूल तो होना ही
चाहिए.'' बनावटी सी हँसी सुरेंद्रनाथ ने अपने चेहरे पर उतार ली थी.
इतनी देर में कुछ और सवारियों के चढ़ आने से मेटाडोर खचाखच भर गई. एक और कश्मीरी बूढ़ा जिसे बैठने के लिए सीट नहीं मिली थी सवारियों के बीच पैरों में बैठ गया. लू बरसती गरमी से उसके शरीर से पसीना जैसे निचुड़ रहा था. सांस चढ़ी होने के बावजूद उसने जेब से सिगरेट की डब्बी और माचिस निकाली और एक सिगरेट सुलगा लिया. पहला ही भरपूर कश खींच कर जब उसने धुआं छोड़ा तो साथ की सीट पर बैठी औरतों ने चुन्नियों के सिरे से अपनी-अपनी नाक ढंक ली.


''जंगल में!'' वह बूढ़ा कश्मीरी यूं बोला था, जैसे अचानक मुंह में चली आई कड़वाहट को थूक रहा हो, ''हां, जंगल में रहता रहा हूं मैं...शहर होता तो आज रिफूजी बनकर जम्मू में क्यों आता?''
सिक्ख लड़के ने बूढ़े पंडित की मानसिक अवस्था को समझते हुए कहा, ''घबराओ नहीं पंडित जी, यह जंगल किसी को भी समाप्त नहीं कर सके. छ: सदी पहले भी तो कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के केवल ग्यारह परिवार ही बचे रह गए थे!''


''अब नहीं बचेंगे!'' बूढ़े ने पक्का होते हुए कहा था, ''तब की बात और थी. तब यह जंगल एक मुर्गे तक को जिबह होते हुए नहीं देख सकता था लेकिन अब क्लाशिनकोव और बंदूकें लेकर घूम रहा है!''
सुरेंद्रनाथ का जी कर रहा था कि वह भी कुछ बोलकर अपने मन की भड़ास निकाले, पर वह साथ बैठे डोगरे से इतना सहम गया था कि उसके मुंह से चूं तक न निकली.
रिहाड़ी कॉलोनी के बरगद के पास जब वह मेटाडोर से उतरा तो उसके पीछे वह बूढ़ा भी उतर आया. सुरेंद्रनाथ ने उसे अपने जैसा ही दुखी शरणार्थी जान नमस्कार करते हुए कहा था, ''बू छुस कोशर'' (मैं कश्मीरी हूं). ''नमस्कार नमस्कार!'' उसे अपना कश्मीरी भाई जानकर बूढ़े ने भी कश्मीरी में ही कुशलक्षेम पूछी थी, ''वारे? खोश पेयठ?'', फिर अचानक बूढ़े को अहसास हुआ कि ''खोश पेयठ'' पूछना तो व्यर्थ है, आज कश्मीरी पंडित कैसे खुश हो सकते हैं? पर कुशल क्षेम पूछने का आदिम संस्कार आदमी छोड़ भी कैसे सकता है?
''मैं सुरेंद्रनाथ कौल, जवाहर नगर, श्रीनगर से. आप?''


''छानपुरा कश्मीर.''
''यहां कहां ठहरे हैं?'
''नगरोटा कैंप में. इधर पास ही मेरे सांढ़ू ने मकान बनाया हुआ है. आप इधर किधर जा रहे हैं?'' बूढ़े ने पूछ लिया था.
मैं किराए पर रहने के लिए एक कमरा ढूंढ रहा हूँ. ''अच्छा...अच्छा...कमरा...''


चिलचिलाती धूप और हवा की तपिश झेलते हुए वे धीरे-धीरे बात करते हुए चल रहे थे. अचानक बूढ़ा चक्कर खा कर गिरने लगा तो सुरेंद्रनाथ ने उसे थाम लिया. गरमी के मारे बूढ़े का मुंह खुल गया था और आंखें बंद हो रही थीं.
बूढ़े को बेहोश होते गिरते देख कुछ राह चलते सज्जन भी रुक गए. हर कोई बूढ़े का अपने ज्ञान के अनुसार मुआयना कर रहा था, कि अचानक भीड़ में से आवाज़ उभरी, ''पंडितैं गी लू लगी गेई दीअै. इसी हस्पताल लेई जाओ (पंडित को लू लग गई है. इसे हस्पताल ले जाओ).''
एक और आवाज़ उभरी, जो सुरेंद्रनाथ से मुखातिब थी, ''पंडित जी, यह आपके बुजुर्ग हैं?''


रिश्तेदारी तो कोई नहीं थी पर सुरेंद्रनाथ ने सोचा उन दोनों के बीच कश्मीर की मिट्टी का रिश्ता तो है ही, उनके बीच घर उजड़ने की सांझ तो है ही और सबसे बड़ी बात, दोनों की आज एक ही सांझी पहचान थी, 'कश्मीरी शरणार्थी', उत्तार में उसने अपना सर हां में हिला दिया, ''हां, यह मेरा बुजुर्ग है.''
प्रधानमंत्राी ने लोगों को मानसिक रूप से युध्द के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया है. तरह तरह की अटकलों का बाज़ार गर्म है. बड़ी ताक़तें हिंद पाक युध्द के समर्थन में नहीं हैं. युध्द को किसी भी क़ीमत पर टालने की विश्वस्तरीय कार्यवाहियां शुरू हो चुकी हैं. शरणार्थियों के आ जाने से ज़मीनों के जो भाव अचानक बढ़ गए थे, युध्द की संभावना ने उन्हें उसी स्तर पर रोक लिया था.
सुरेंद्रनाथ कौल का अधिकांश समय आजकल तवी पुल के पास ही बने इंडिया काफ़ी हाउस में व्यतीत होता था. जम्मू में 'कॉफी हाउस कल्चर' का अभी अधिक प्रचलन नहीं था, लेकिन कश्मीरी पंडितों के आ जाने से वहां आजकल चहल-पहल थी. सारा दिन कश्मीरी यहीं बैठे-बैठे काफ़ी पीते, सिगरेट फूंकते, सियासत की बातें करते, कश्मीर की बातें करते, शरणार्थी कैंपों की बातें करते, डोगरों के बदलते व्यवहार की बातें करते, और बातें करते-करते नहीं थकते!


उसकी मेज़ पर जुड़े कश्मीरियों में से एक प्रोफ़ेसर कह रहा था, 'कश्मीर भारत के लिए ऐसे लाड़ले बेटे की तरह है, जिसने अपने जिद्दी स्वभाव के चलते हमेशा अधिक रियायतें प्राप्त की हैं.'
सुरेंद्रनाथ ने उसकी बात को आगे बढ़ाया, ''और अगर ईश्वर न करे यही कश्मीर कभी भारत और पाकिस्तान से अलग हुआ तो उस मनहूस बेटी की तरह होगा, जिसकी मांग भारत और पाकिस्तान के लाखों सिपाहियों के ख़ून से भरी जाएगी.''
''अरे कुछ नहीं होगा.'' एक और कश्मीरी बोला था, ''आज के दौर में युध्द के बारे में सोचना कोई खाला जी का बाड़ा नहीं. भारत एशिया की एक बड़ी ताक़त है. युध्द की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय शक्तियां भारत की शक्ति को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती. यह सब जिहादी जल्दी ही एक मेज़ पर बातचीत के लिए आ बैठेंगे. गवर्नर ने इनकी कमर तोड़ दी है.''


''कश्मीर में यह सब तो होना ही था,'' सुरेंद्रनाथ ने स्पष्ट किया, ''चुनाव में हेराफेरी करके मुस्लिम युनाइटिड फ्रंट को हराना, फ्रंट के लोगों को झूठे पुलिस केस बनाकर पकड़ना, उन्हें टार्चर करना...यह सब कितनी देर सहते वे? वे यही मुसलमान हैं जो कभी कहते थे, ''अल करी, वांगन करी, बॅब करी लो लो (हमारा घिया बनाएगा या बैंगन बनाएगा जो भी करेगा शेख अब्दुल्ला करेगा...) आज उसी शेर की क़ब्र खोदने के लिए तैयार हो गए हैं. जब लोगों को इन्साफ़ मिलना बंद हो जाए तो उनका लोकतांत्रिाक प्रणाली पर से विश्वास तो उठना ही था.''
प्रोफ़ेसर महोदय को सुरेंद्रनाथ की बात हज़म नहीं हुई, ''आप पाकिस्तान में चलने वाले ट्रेनिंग कैंपों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं. यह लड़ाई सत्ताासी में एक इलैक्शन हारने से ही शुरू नहीं हो गई है. इसके लिए पाकिस्तान का रिलिजियस एक्सपलॉयटेशन का कार्ड बड़ी देर से काम कर रहा है. यही नहीं पाकिस्तानी हुक्मरानों को सत्ताा में बने रहने के लिए हमेशा से ही भारत के साथ जुड़े किसी अहम मुद्दे की ज़रूरत रही है, किसी ऐसे हउवे की जिसके नाम पर लोगों को गुमराह करके राजपाट चलाया जा सके. अब जब अफगानिस्तान से रूसी सेनाएं हट गई हैं, तो पाकिस्तान के लिए कश्मीर जैसा हऊआ तो था ही. सो उसने कश्मीर कार्ड खेल दिया. एमयूएफ को बूथ कैपचरिंग करके हराना तो..."


प्रोफ़ेसर साहब ने लंबा क़िस्सा छेड़ दिया था. सुरेंद्रनाथ सोच रहा था, जो हो गया, जिस तरह भी हो गया, क्या यह सब इतना महत्तवपूर्ण है कि हम अब आगे 'क्या होने वाला है' या 'क्या होगा' की चिंता के स्थन पर अपने अतीत में ही डूबे रहें? युध्द का ख़तरा देश पर मंडरा रहा है...और यदि कहीं ईश्वर न करे युध्द छिड़ ही गया तो उसका कैंप तो कान्हा चक सीमा के पास ही है...क्या उसके परिवार को एक बार फिर उजड़ना पड़ेगा? क्या शरणार्थी कैंप का एक अदद तम्बू भी उनकी क़िस्मत में नहीं है? वह सोच रहा था और बस सोच रहा था!
बरसात शुरू हो चुकी थी. शरणार्थी कैंप के तम्बुओं के आसपास की मिट्टी पोली होने के कारण दलदल सा बन गया था. रात दिन में रात के लगभग दस बज चुके थे जब हकूमत सिंह ने अपना ट्रक मिश्रीवाला शरणार्थी कैंप के पास ही नहर के किनारे ला खड़ा किया था. सब्जियों का थैला उठाकर वह कीचड़ से बचता हुआ सुरेंद्रनाथ के तंबू की तरफ़ बढ़ा. काफ़ी एहतियात बर्तने के बावजूद अंधेरे के कारण उसका पांव एक फिसलवीं जगह पर पड़ गया और वह 'छड़ाप' से गिर पड़ा था. गिरने की आवाज़ सुनकर सुरेंद्रनाथ अपने लड़कों सहित तंबू से बाहर निकल आया, पर उनके आने तक एक और कश्मीरी लड़के ने आगे बढ़कर हकूमत सिंह को उठा लिया था. प्राणनाथ ने आगे बढ़कर 'सत श्री अकाल' कहते हुए सब्जियों वाला थैला पकड़ लिया. सुरेंद्रनाथ भीतर से टार्च लेकर बाहर आया और उसे तंबू के भीतर ले गया.


''ज्यादा तो नहीं लगी, भाई साहब?'' सुरेंद्रनाथ की पत्नी ने पूछा?
''नहीं कुछ ख़ास नहीं.''
सुरेंद्रनाथ आधी सी बाल्टी पानी ले आया. गड़वी से पानी डालकर हकूमत सिंह के हाथ पैर धुलवाए. कपड़ों से लगी मिट्टी साफ़ करके जब वह लोहे के फोल्डिंग बेड पर बैठा तो सुरेंद्रनाथ का पांच साल का पोता उसकी गोद में आ बैठा.


प्राणनाथ की पत्नी ने थैले से सब्जी निकाल कर टोकरी में डाली तो हाकसाग और नदडू देखकर सुरेंद्रनाथ की पत्नी की आंखें भर आईं.
''और सुनाओ बाल-बच्चे...परिवार का क्या हाल है?'' सुरेंद्रनाथ ने पूछा, ''सुना है त्रााल में दो तीन सिक्खों को मार दिया है मुसलमानों ने?''
''हां, त्रााल में सिक्खों ने कड़ा फ़ैसला लिया है. उन्होंने किसी भी स्थिति में घर छोड़ने से इन्कार कर दिया है. उन्होंने मानसिक रूप से स्वयं को लड़ने मरने के लिए तैयार कर लिया है. हमने भी बारामूला में सिक्खों की मौत के विरोध में जलूस निकाला था...पर सच्ची बात तो यह है कौल कि मैं अपना परिवार वहां से निकाल लाया हूं. नानक नगर की तरफ़ कमरा ले लिया है; एक बुजुर्ग अभी बारामूला में ही है...लेकिन, जिस हिसाब से सिक्खों के क़त्ल हो रहे हैं, कितनी देर तक वे लोग रह पाएंगे वहां? कश्मीरी पंडित तो निकल ही आए हैं अब यदि कश्मीरी सिक्ख भी निकल आए; तब कश्मीर और पाकिस्तान में क्या फ़र्क़ बचेगा? वहां तो पाकिस्तान बना बनाया है.''


''पता नहीं क्या बनेगा हम लोगों का?'' सुरेंद्रनाथ गहरे सोच में डूब गया, ''सात महीने हो गए हैं श्रीनगर से निकले हुए...फिरन में तिरंगा सेंकते हुए जवाहर टनल पार किया था...आज चिनार की छाया के लिए तरस रहे हैं. लोग कहते हैं युध्द का संकट टल गया है, लेकिन क्या तुम यह बात कह सकते हो हकूमत सिंह?'' सुरेंद्रनाथ कौल ने उसकी आंखों में गहरे झांका. हकूमत सिंह की आंखों में एक सहम थी, एक अनिश्चय का भाव और था. सुरेंद्रनाथ कौल का प्रश्न, ''क्या युध्द सचमुच टल गया है?''
वे दोनों एक-दूसरे की आंखों में किसी रोशनी की किरण की तलाश कर रहे थे और तंबू के एक कोने में बैठा सुरेंद्रनाथ का छोटा-बेटा विजय नाथ अपनी डायरी में यह कविता नोट कर रहा था...

युध्द!


टल गया होगा आपके लिए
आप, जो सीमाओं पर
दो देशों की फ़ौजी लड़ाई को
कहते हो युध्द!
क्या समझोगे-क्या होता है युध्द?
पूछो हमसे
जो उजड़ते और भोगते आए हैं युध्द
एक मुद्दत से....
हम जिनका
सैंतालिस मुज़फराबाद में उजड़ा
पैंसठ पूंछ में
इकत्तार छंब में
और अब नब्बे...कश्मीर में!
हम-जिन्हें जीते जी
स्वर्गवासी होने का
सम्मान प्राप्त है;
भारत के वह अदृश्य सैनिक हैं
युध्द केवल युध्द है नियति जिनकी!
युध्द!
टल गया होगा आपके लिए
आप-जो सीमाओं पर
दो देशों की लड़ाई को
युध्द कहते हो
आप क्या समझोगे
क्या होता है युध्द?

रचनाकार - पंजाबी के चर्चित कथाकार बलजीत सिंह रैना के 'इक जमा दो मनफ़ी', 'घर परत रेहा आदमी', 'मिट्ठी मिट्ठी चौम' 'अजीब आदमी', 'जायज-नाजायज', 'कथा अजब देश की' आदि कहानी-संग्रह के अलावा तीन कविता-संग्रह, दो उपन्यास और एक नाटक प्रकाशित हैं.

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0376
प्यार स्वर्ग से?

वेलेन्टाइन डे के अवसर पर एक सर्वे में लोगों से पूछा कि आप स्वर्ग से प्यार करते हैं या नर्क से? केवल एक व्यक्ति को छोड़कर सभी का उत्तर स्वर्ग था। प्रश्नकर्ता ने कहा कि ताज्जुब है कि आप अकेले व्यक्ति हैं जिन्होंने स्वर्ग के बजाय नर्क को चुना है। क्या आप बताएंगे कि ऐसा क्यों?


मासूमियत से उन्होंने जवाब दिया कि यह धरती नर्क से भी बदतर है और मैं यहीं बहुत खुश हूं। बाकी सब लोगों को आप स्वर्ग जाने दीजिए।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0377
प्रेम विवाह !

प्रेमिका - मैं तुमसे विवाह नहीं कर सकती।

प्रेमी - विवाह को मारो गोली! प्रेम तो कर सकती हो?

प्रेमिका - अवश्य कर सकती हूं।

प्रेमी - मगर कब?

प्रेमिका - विवाह के बाद।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0378
हसीन सपना !

लड़का - कल रात मैंने सपने में देखा कि मैं संसार की सबसे सुंदर लड़की से बातें कर रहा हूं।
लड़की - अच्छा क्या सचमुच?
लड़का - हां, मैं सच कह रहा हूं।
लड़की - अच्छा तो यह बताओ, कि मैं तुमसे क्या कह रही थी?

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0379
कारनामा!

बंसी की लंबे अरसे से बेबी से कोर्टशिप चल रही थी। एक दिन जब बेबी बंसी के
साथ उसकी कार में बैठी हुई थी बंसी ने कहा - आज मैं तुम्हें राज की एक ऐसी बात
बता देना चाहता हूं, जो अब तक मैंने तुमसे छुपा रखी थी।

बेबी ने शंकित होकर पूछा - कौन सी बात?

बंसी ने बताया - यही, कि मैं शादीशुदा हूं।

बेबी ने कहा - ओहो! बंसी! तुमने तो मुझे डरा ही दिया था। मैं समझी कि तुम कहोगे, यह कार तुम्हारी नहीं है।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0380
घडी-घडी दिल धडके !

अफलातून - लडकियाँ घडी क्यों पहनती हैं?

पेन्टालून - क्योंकि उन्हें सजना का इंतजार रहता है।

अफलातून - और लड़के घडी क्यों पहनते हैं?

पेन्टालून - क्योंकि उन्हें समय पर सजनी के पास पहुँचना होता है।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0381
जानवर जानू !

मालिनी ने अपने प्रेमी की छेडछाड से तंग आकर कहा - तुम तो एकदम
जानवर हो, जानवर !
प्रेमी झटका खा गया और गुमसुम होकर पार्क की घास के तिनके उखाडने
लगा । मालिनी को उसकी ये अदा भा गई और प्यार से बोली - और पूछो
मत, मुझे जानवर कितने पसंद हैं।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0382
धडाम ! धूम !!

एक बेकार फिल्म के डायरेक्टर ने आलोचक से पूछा - मेरी इस फिल्म पर
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0383
आपकी क्या राय है?

आलोचक बोला - मेरी राय में फिल्म के आखिर में हीरो को जहर देने के
बजाय उसे गोली मारकर खत्म करना था।

डायरेक्टर ने पूछा - मगर इससे क्या फायदा होता?

आलोचक ने फरमाया - यही फायदा होता कि सोए हुए दर्शक गोली की
आवाज सुनकर जाग जाते और अपने-अपने घर चले जाते।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0384
दि एंड

पीटू - मैंने प्यार-मोहब्बत से तौबा कर ली है दोस्त ।
किसी हसीन लड़की की तरफ ऑंख उठाकर भी नहीं देखूँगा अब ।

घसीटू - क्यों? क्या किसी लड़की ने तुम्हें ठुकरा दिया?

पीटू - नहीं दोस्त । मुझसे शादी कर ली उसने ।

.

.

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0385
प्रेम गणना !

मोहिनी - 'डार्लिंग मोहन, मुझसे पहले कितनी लडकियाँ तुम्हारे जीवन में आ चुकी हैं?

उत्तर देने के बजाय मोहन ने एक सिगरेट सुलगा लिया । काफी समय बीत गया, तो मोहन ने कहा - मोहन, मैं अभी भी तुम्हारे जवाब का इंतजार कर रही हूँ।

मोहन ने कहा - ठहरो प्रिये ! मैं अभी भी गिन ही रहा हूँ ।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0386
शादी की रट !

पीटर अपने दफ्तर की खूबसूरत स्टेनो को बाँहों में समेटे उसके कानों में
शहद घोल रहा था - 'तुम मेरी रूह हो। मेरा जीवन हो। मेरा प्रेम पर्वत
हो । मुझे तुमसे इतनी मुहब्बत है...इतनी मुहब्बत है कि...
स्टेनो ने उम्मीद के साथ बीच में ही पूछ लिया - 'यानी तुम मुझसे शादी
कर लोगे ना?
पीटर ने सिर पीटकर कहा - 'तुम लडकियों में यही बड़ी खराबी है। झट
से टॉपिक बदल देती हो।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0387
ज्ञानी तोता !

नीना अपने ड्राइंग रूम में अशोक के साथ बैठी थी । मौसम मादक था । रोशनियाँ मध्दिम थीं और घर में पूरा एकांत था । धीमा उत्तेजक संगीत लहराया, तो अशोक ने हिम्मत करके नीना को अपनी बाँहों में भरकर उसके अधर चूम लिए । नीना ने बड़ी अदा से कुछ कहने को मुँह खोला ही था कि कोने में टंगे का पिंजरे का तोता पहले ही बोल पड़ा - 'सुनो तुम पहले मर्द हो जिसने मेरा चुंबन लिया है।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0388
प्यासा !

एक लंबी चौडी पार्टी में एक मेहमान ने मेजबान महिला से पूछा - 'वह
खूबसूरत बला किस तरफ गई, जो अभी-अभी शरबत बाँटती फिर रही
थी?

मेजबान ने पूछा -' क्या आपको शरबत चाहिए?

जवाब मिला - 'जी नहीं, अपना पति चाहिए। वह जरूर शरबत पे शरबत पिए
जा रहा होगा ।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0389
मां और उसकी बेटी

एक बंगाली मां और उसकी बेटी बात कर रहे थे।

लड़की को उसकी मां ने डाटते हुए कहा - तुम उस लड़के को मना नहीं कर सकती
थीं, जब वह तुम्हारी किस ले रहा था!

लड़की (बड़ी मसूमियत से अपनी मां से बोली) - मां आप तो जानती हैं कि मुझे
बंगाली भाषा नहीं आती है।

फिर मैं उसे कैसे डांटती?


चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0390
पीछा करने वाला लड़का

दो लडकियां आपस में बात करती रहती हैं।

पहली लड़की(दूसरी लड़की से)- शीला, वो नीली जींस वाला लड़का है ना,
कल से मेरे पीछे पड़ा है। बता ना मैं क्या करुं?

शीला थोडी समझदार रहती है, वह बोली देख वो लड़का .. तेरे पीछे
आता है ना .. उसको आने देना, जब वह ज्यादा नजदीक आ जाए तो
निकालना चप्पल और सट् से मार देना उसके मुंह पर।

पहली लड़की बोलती है हां यार, कल मैंने ऐसा ही किया था। उसको पीछा
करने दिया जब वह नजदीक आ गया तब निकाली चप्पल और जैसे ही मारने
को पलटी, तो उफ्!

शीला तो क्या हुआ? बता ना जल्दी।

पहली लड़की वो इतना हेंडसम था कि मैं ही मर गई उस पर और उसे मारने
की इच्छा ही नहीं हुई।

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0391
गरीबी ने किया गंजा ...

गरीबी ने किया गंजा नहीं तो चांद पर जाता!
तुम्हारी मांग भरने को सितारे तोडकर लाता!
बहा डाले तुम्हारी याद में आंसू कई गैलन!
अगर तुम फोन न करती तो यहां सैलाब आ जाता!
तुम्हारे नाम की चिट्ठियां तुम्हारे बाप ने खोली!
उसे उर्दू अगर आती तो वो कच्चा चबा जाता!
तुम्हारी बेवफाई से बना हूं टॉप का शायर!
तुम्हारे इश्क में पड़ता तो सीधा आगरा जाता!

तरकश (http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=55 ) के कुछ जोगलिखे तीर :-

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0392
डॉक्टर साहब

आधी रात को डॉक्टर के घर फोन फोन आता है." आप घर आ कर देखने की कितनी फीस लेते हैं?"
"सौ रूपैये"
"और क्लीनिक पर देखने के?"
"चालीस रूपैये"
"ठीक हैं फिर आप तैयार हो कर क्लीनिक पहुंचिए, मैं एक घंटे में आ रहा हूँ."

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0393
मरीज का निरीक्षण करते हुए डॉक्टर ने पूछा," आप क्या पीते हैं चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब..."
"आप बेकार तकल्लुफ कर रहे हैं, मैं खा-पी कर आया हूँ" मरीज ने कहा.

***

चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0394
पत्नी: 'डॉक्टर साहब मेरे पति को रात में बड़बड़ाने की आदत है, कोई उपाय बताएं".
डॉक्टर:"आप उन्हें दिन में बोलने का मौका दिया करें".

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0395
डॉक्टर वृद्धाश्रम में तीन वृद्ध व्यक्तियों का परिक्षण कर रहा होता है.
डॉक्टर पहले से:." अच्छा बताईये 3 को 3 से गुणा करने पर कितना मिलता है?"
पहला : ," जी 52″
डॉक्टर दुसरे से : " अच्छा आप बताईये 3 को 3 से गुणा करने पर कितना मिलता है?"
दुसरा : " जी बुधवार"
डॉक्टर तीसरे से : " अच्छा अब आप बताईये 3 को 3 से गुणा करने पर कितना मिलता है?"
तीसरा : " 9 मिलता है"
डॉक्टर खुश होकर : "आप को कैसे पता चला?"
तीसरा : " कुछ नहीं मैंने 52 को बुधवार से घटा दिया था"

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0396
मरीज : " डॉक्टर साहब मुझे भूलने कि गम्भीर बीमारी है"
डॉक्टर : "यह बीमारी आपको कब से हैं?"
मरीज : " कौन सी बीमारी? "

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0397
मनोचिकित्सक : "आपको क्या समस्या है"
मरीज : " मुझे लगता है मैं मुर्गा हूं"
मनोचिकित्सक : "आपको ऐसा कब से महसूस हो रहा है"
मरीज : " तभी से जब मैं अण्डा था."

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0398
"डॉक्टर ने कहा था कि वो मुझे एक महीने में पैदल चलने लायक कर देंगे"
"सचमुच? क्या ऐसा हुआ"
" हाँ, मुझे उनके बिल चुकाने के लिए अपनी कार बेचनी पड़ी"

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0399
महिला : "डॉक्टर साहब मेरे पति को लगता हैं कि वे डिश एंटीना हैं"
डॉक्टर : " कोई बात नहीं, मैं उनका ईलाज कर देता हूँ"
महिला : "नहीं नहीं आप केवल उन्हें ठीक से सेट कर दें, ताकि मैं स्टार प्लस देख सकूं"

***
चुटकुला क्रमांक -------------------------------------0400
गुरू-गुरूघंटाल

शिक्षक : "तो बच्चों, आपकी समझ में आ गया होगा कि मनुष्य की उत्पति कैसे हुई"
बुद्धीधन : "पर मास्टरजी पिताजी तो कहते हैं कि हमारी उत्पति बन्दरों से हुई हैं"
शिक्षक : "बेटा, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता, यह तुम्हारा पारिवारीक मामला हैं."

.

जमाना मुफ़्त खोरी का










- हिना जैन

जमाना मुफ़्तखोरी का है
डिब्बे पर डिब्बा मुफ़्त
टीवी पर टीवी मुफ़्त
दो किलो किराने के सामान पर
एक किलो मुफ़्त
साबुन पर साबुन मुफ़्त
और मुफ़्त का ये अंतहीन सिलसिला
चलता ही रहता है
सोमवार की हर सुबह
मन कहता है, हे भगवान!
क्यों नहीं है आखिर
रविवार पर एक रविवार मुफ़्त?

--*--

सोच रहा हूँ

- डॉ. रवीन्द्र पहलवान

बेटे ने कहा-
पापा, अब यह टेबल
पुराना हो गया है,
इसे घर के
पिछवाड़े डाल दो,
और मैंने
डाल दिया.
अब,
मैं सोच रहा हूं
मैं भी तो
हो चला हूँ, पुराना, बूढ़ा.

*-***-*
अब समझ आया

कल शाम
मेरा चश्मा
गिर कर टूट गया.
अब समझ आया
जो आँखों पर चढ़ता है
वह टूटता है
और
जो आँखों में उतरता है
वह जोड़ता है.

**-**

.

.

कम अवे विद मी


- नोरा जोन्स (अनुवाद - कमला पाटनी)

रात के समय
दूर चले आना मेरे साथ

दूर चले आना मेरे साथ
और
मैं तुम्हें दूंगी लिखकर एक गीत

दूर चले आना मेरे साथ
एक बस में
जहाँ कोई पीछा न कर सके
अपनी झूठी बातों के साथ

दूर चले आना मेरे साथ
जब
बादल हों आसमान में
और
घुटनों तक हो
पीली घास खेतों में
क्या मेरे साथ
चलना पसन्द नहीं करोगे?

दूर चले आना मेरे साथ
हम प्यार करेंगे
पहाड़ों की ऊँची शिखा पर
अन्तहीन प्यार!

और
बरसात की फुहार के साथ
जागना चाहूंगी
सुरक्षित
तुम्हारी बाहों में

इसलिए
इसलिए मैं चाहती हूँ
दूर तक चले आना
मेरे साथ

कम अवे विद मी
कम अवे विद मी....

**-**

(लघु काव्य संकलन - ‘समय के साथ' से साभार)

.

व्यंग्य

चुंबन लो, पैसे दो

- यज्ञ शर्मा

दिल्ली में एक नियम लागू होने वाला है- जो भी सार्वजनिक स्थान में चुंबन लेगा, उसे 500 रुपये दंड भरना पड़ेगा। यह कानून लागू हो गया तो दिल्ली में क्या हुआ करेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

दृश्य 1:

लोदी गार्डन में नौजवान जोड़ा बैठा है। जोड़ा समझता है कि झाड़ी की ओट में किसी को कुछ नहीं दिखता। बड़ी भारी गलतफहमी में है। हमारी पुलिस की एक खासियत है। खुलेआम होता कारनामा उसे भले ही न दिखे, ओट में होने वाला हर काम उसे साफ दिखता है। इधर नौजवान जोड़ा नजदीक आया, उधर पुलिसवाला हाजिर हो गया, 'के हो रया है?' 'बैठे हैं, सिपाही जी।' 'बैठ्ठा है कि चुम्मा ले रया है? चल 500 रुपैया निकाल।' 'पर, हमने तो कुछ नहीं किया।' 'नहीं करया तो झाड़ी के पिच्छे के करणे बैठा है? खुल्ले में बेंच पे के नहीं बैठ्ठा? 500 रुपैया निकालता है के ले चलूं थाणे?' 'मेरे पास 500 नहीं है।' 'कित्ते हैं?' '100।' 'चल दे दे।'

दृश्य 2:

लोदी गार्डन। खुली जगह में लगी बेंच पर नौजवान जोड़ा बैठा है। एक पुलिसवाला उनके पास आया, 'ये के हो रया है?' 'बैठे हैं, सिपाही जी।' 'इधर खुल्ले में बैठ के तू के कर सके है, रे? जा, उधर झाड़ी के पिच्चे बैठ जा।' 'ना जी, उधर नहीं बैठना। कल बैठे थे तो 100 रुपये भरने पड़ गये।' '500 की जगह 100 ई भरे, चार सौ तो बचे न।' 'पर रोज के 100 रुपये तो भारी पड़ जाएंगे, जी। इसलिए, हमने सोचा है कि अब चुंबन शादी के बाद ही लेंगे, अपने घर में।' 'अरे, तै घर में चुंबन लेगा तो म्हारा के होएगा? मने तो पैसे खिला के इधर की पोस्टिंग मिली है। तू घर में चूमेगा तो मेरी वसूली कैसे होवेगी?... एक काम कर, मैं तनै कंसेसन दे दूंगा। चाहिए तो महीने का रेट फिक्स कर ले। जा, झाड़ी के पिच्छे बैठ्ठ जा और चुम्मा ले, बेखटके।'

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दृश्य 3:

लोदी गार्डन में नौजवान जोड़ा बेफिक्र हो कर बैठा है। चुंबन रेट तय हो चुका है। पुलिसवाला डायरी लेकर पास आया, 'कित्ते हो गये रे?' 'तीन, सिपाही जी।' 'झूठ मत बोल। पांच हुए हैं, मैंने खुद गिणे हैं।' 'अरे नहीं सिपाही जी, तीन ही लिये, सच्ची।' बहस तीन-पांच पर अटक गयी। पुलिस वाला जल्दी में था। उसे और भी कई जोड़ों का हिसाब करना था। झिकझिक में समय खराब हो रहा था, 'अच्छा, ठीक है। न तेरा, न मेरा। न तीन, न पांच। चल, चार का हिसाब कर दे।'

दृश्य 4:

लोदी गार्डन में एक नौजवान जोड़ा आया। हवलदार को जोड़ा अनजाना-सा लगा, 'के रे, पैली बार आया है?' 'हां, सिपाही जी।' 'रेट पता है, न?' 'किस चीज का?' 'चुम्माचाटी का?' 'कितना है?' 'चुंगी भरणी है तो 500 और नहीं भरणी तो जित्ता तू दे सके।' 'पैसे न होवे तो?' 'तो कहीं और जा के बैठ। यहां बैठ्ठणा है तो नियम मानना पड़ेगा। और, नियम ये है कि चुंबन ले तो पैसा दे।' 'पर, मेरे पास पैसे नहीं हैं, सच्ची। कसम से!' 'ठीक है। कैश नहीं, तो काइंड में दे दे।' 'मतलब?' 'मतलब जे कि मैं एक चक्कर लगा कर आऊं हूं। तब तक तू अपने चुम्मे ले ले, बाद में मैं लूंगा।' 'ये कैसे हो सकता है?' 'कैसे नहीं हो सकता, रे? जब मरीन ड्राइव पर हो सकता है तो लोदी गार्डन में काहे नहीं?'

दृश्य 5:

जैसे ही नौजवान जोड़ा लोदी गार्डन में आ कर बैठा, पुलिसवाला भी आ गया। नौजवान रौब से बोला, 'पहचाना नहीं क्या? मैं, कमिश्नर साहब का बेटा!' 'सॉरी बबुआ, भूल हो गयी। आप आराम से बैठ्ठो। मैं इधर फटकूंगा भी नहीं। कुछ नास्ता-कोल्ड डिं्रक भिजवाऊं?'

हो सकता है यह नियम लागू करते समय प्रशासन को सच्चे प्रेमियों का ख्याल आ जाए और जुम्मे के दिन चुम्मे फ्री कर दिये जाएं।

**-**
साभार - प्रभासाक्षी

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ग़ज़लें

-प्रभा दीक्षित






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ग़ज़ल 1

सवालों के जंगल डराने लगे हैं
यहाँ आइने मुँह चुराने लगे हैं।

अंधेरे में कुछ रोशनी के फरिश्ते
अदब की दुकानें सजाने लगे हैं।

जहाँ भूख को रोटियाँ खा रही हैं
वहां फलसफे सर झुकाने लगे हैं।

हमारे शहर के पुराने लुटेरे
नई बस्तियाँ भी बसाने लगे हैं।

ज़मीनी जरूरत के बुनियादी मुद्दे
कलावादियों को पुराने लगे हैं।

बदलते समय में सुबह के मुसाफिर
‘प्रभा' की ग़ज़ल गुनगुनाने लगे हैं।

**-**


ग़ज़ल 2


तू कारवां के साथ में सबको मिला के चल
इक रोशनी का फूल दिलों में खिला के चल

ये रात तेरे सर पे भी मंडराएगी जरूर
जुगनू की तरह जलते हुए झिलमिला के चल

कुछ मुश्किलें पहाड़ सी आएंगीं राह में
दरिया की तरह हँसते हुए खिलखिला के चल

चलने के लिए शर्त है मंजिल की राह में
सारे जहाँ के बोझ को सर पे उठा के चल

हर दर्द से गुजरा है मेरे इश्क का ज़मीर
फटते हुए दामन को जरा सिल सिला के चल

शायद ग़ज़ल में तेरी ‘प्रभा' वो असर नहीं
बस्ती की बेहतरी में खुद का घर जला के चल

**-**

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ग़ज़ल 3

हम अपनी जिन्दगी को सही मायने तो दें
मंजिल को दिशा ठीक से पहचानने तो दें

ये जुस्तजू ये जिन्दगी कुछ बेवजह नहीं
पर्वत से अपने कद को जरा नापने तो दें

इक पूरा समन्दर मेरी बाहों में आ सके
बूंदों को हौसला जरा निर्वाहने तो दें

दुनिया में सलीबों की रवायत जरा बदल गई
इस दौरे मसीहा को जरा आइने तो दें

हम हद में रह के भी तो हदों से गुजर गए
दुनिया को मेरे फन की अदा जानने तो दें

आँखों के ख्वाब दिल के असूलों में जी लिए
पहले अदब से रोशनी को थामने तो दें

रौशन सियाह रात भी हो जाएगी ‘प्रभा'
पहले मेरे चिराग की लौ कांपने तो दें

**--**
साभार, अन्यथा - जुलाई 2006

चित्र - रेखा की कलाकृति, कागज पर काली स्याही से रेखांकन.

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0351
अंधा प्यार...

पति- 'क्या खाना बनाया है तुमने, सब्जी कच्ची और रोटी जली हुई है।
पत्नी- 'तुम स्वयं कहते नहीं हो कि प्रेम...।
पति- '...अंधा होता है, पर इतना तो नहीं कि कच्चा-जला भी न दिखे।

शहर

प्रेमी तो पक्का है न कि हम आज रात 2 बजे शहर छोड़कर भाग जाएँगे। तुम लेट
मत होना।
प्रेमिका तुम फिक्र मत करो, मेरे पति मेरा सामान बाँध रहे हैं।

डर...

मोनू- 'पापा, आप हाथी से डरते हैं?
पिता- 'नहीं बेटा।
मोनू- 'आप शेर से डरते हैं?
पिता- 'नहीं बेटा।
मोनू- 'भूत से?
पिता- 'नहीं।
मोनू- 'यानी आप मम्मी के सिवा किसी से नहीं डरते।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0352
जिम्मेदारी...

एक बच्चे ने अपने पापा से पूछा- 'पापा मुंबई कहाँ है?
पापा का जवाब था- 'बेटे अपनी माँ से पूछो, वे ही सारी चीजें संभालकर रखती हैं।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0353
खोया

हलवाई ने कविता लिखी यो, तुम्हारे रूप की चाशनी में मन को डुबोया है
मक्खन-सी देह, मलाई-सा रंग है, मन 'खोया-खोया है।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0354
नई-नवेली दुल्हन

एक नौजवान अपनी नई-नवेली दुल्हन के साथ कार से कहीं चला जा रहा था कि रास्ते में अचानक कार के नीचे (पहिये में) एक मुर्गी आ गई।
'यह तीस रुपए रख लो भाई, तुम्हारी मुर्गी की कीमत। नौजवान ने मुर्गी के मालिक को रुपए देते हुए कहा।
'पचास रुपए और दीजिए। मुर्गीवाले ने कहा।
'पचास रुपए वो किसलिए? हैरत से नौजवान ने पूछा।
'मुर्गे को जब यह पता चलेगा कि उसकी नई-नवेली दुल्हन दबकर मर गई है, तो वह भी खुदकुशी कर लेगा हुजूर। मुर्गीवाला बोला।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0355
चमत्कार...

लडाई के दिनों में जब एक सैनिक को पता चला कि उसकी प्रेमिका नर्स बन गई है तो उसने पत्र लिखा- 'दुआ करो प्रिये, यहां मेरे साथ कोई दुर्घटना हो जाए और मुझे तुम्हारे हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़े।

दो दिन बाद पत्र का उत्तर मिला- 'दुर्घटना नहीं, कोई चमत्कार ही तुम्हें मेरे पास पहुंचा सकता है, क्योंकि मेरी डयूटी अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में है।

खुदा ने जिस रोज तुझे बनाया होगा ...

प्रेमी प्रेमिका से : खुदा ने जिस रोज तुझे बनाया होगा इक सुरुर सा उसके दिल पे छाया होगा।

प्रेमिका : वाह क्या बात है !

प्रेमी : आगे तो सुनो और भी तारीफ है। पहले तो उसने सोचा होगा के तुझे स्वर्ग में रख लूँ, लेकिन फिर उसे झू का ख्याल आया होगा।


चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0356
पहाड ....

एक बार दो प्रेमी पहाड चढने के लिए जाते है। चढते-चढते बहुत रात हो जाती है, तो दोनों सो जाते हैं। इस बीच प्रेमी उन दोनों के बीच एक तकिया रख देता है ताकि कुछ हो न जाए। सुबह होती है और प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहता है कि चलो अब सिर्फ 2 घंटे मे पहाड चढना है। प्रेमिका ने कहा, क्या खाक पहाड चढें रातभर में एक तकिया तो पार कर नहीं सके पहाड क्या खाक चढोगे!


चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0357
जरूरत

संता (प्रेमिका से)- यदि तुम मुझसे शादी कर लो तो मैं तुम्हारी छोटी से
छोटी जरूरतों को पूरा करूंगा।

प्रेमिका (संता से)- लेकिन बड़ी जरूरतों का क्या होगा?

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0358
उम्र

प्रेमी (प्रेमिका से) - तुम्हारे दांत देखकर लगता है कि तुम्हारी उम्र 15 साल होगी। घने
बालों को देखकर लगता है कि 20 साल और चंचलता देखकर लगता है कि तुम
सिर्फ सोलह साल की होगी।

प्रेमिका - अच्छा मेरी सही उम्र बताओ तो जानूं।

प्रेमी - कुल इक्यावन वर्ष।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0359
सुंदरता

प्रेमी : 'प्रिये, तुम्हारी सुंदरता, तुम्हारी सरलता और सादगी हमारे प्रेम को कितना वास्तविक
बनाते हैं।

प्रेमिका : 'हां, प्रिये तुम्हारी संपत्ति और तुम्हारा बैंक बैलेंस भी इसमें पूरा सहयोग देते हैं।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0360
उपहार

प्रेमिका- यह क्या बेमतलब का उपहार लाए हो तुम वेलेंटाइन डे पर। चाय के कप तो हमारे घर में भी भरे पड़े हैं।

प्रेमी- यह बेमतलब का नहीं, मतलब का उपहार है प्रिय! यह सदा तुम्हारे होंठों को चूमता रहेगा।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0361
पत्थर दिल

प्रेमिका ने प्रेमी की छाती पर हाथ रखते हुए कहा - 'अरे, आपका दिल तो पत्थर के समान कडा है।

'नहीं डाश्ललग! प्रेमी ने मुस्कुराकर कहा, 'तुम्हारा हाथ मेरी जेब में पड़े लाइटर पर है।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0362
प्रेमी- प्रेमिका

प्रेमिका- यदि दुनिया में औरत न होती तो तुम्हारी पैंट में बटन कौन टाँकता?

प्रेमी- अगर दुनिया में औरत न होती तो आदमी को पैंट पहनने की जरूरत न होती।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0363
धोबी का गधा

एक बार एक धोबी का गधा खो गया। उसे ढूंढते-ढूंढते उसका पूरा दिन निकल गया
लेकिन गधा नहीं मिला। परेशान होकर धोबी एक पेड़ पर चढकर चारों तरफ गधे को
देखने लगा। इस बीच एक प्रेमी युगल आकर पेड़ के नीचे बैठ गया और प्रेमी ने
प्रेमिका की आंखों में आंखें डालकर कहा- डार्लिंग! तुम्हारी आंखों में मुझे सारी दुनिया
दिखाई दे रही है।

उनकी बातों को सुन धोबी निवेदन करते हुए बोला-भैया, अगर आपको हमारा गधा
दिखाई दे तो बता देना। कहीं खो गया गया है।


चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0364
उदासी

प्रेमिका- क्या बात है जानू, बहुत उदास लग रहे हो।

प्रेमी- हां, मैंने अभी करुणान्त पुस्तक पढी है।

प्रेमिका- कौनसी पुस्तक?

प्रेमी- बैंक की पास बुक।

.

.

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0365
प्यार

प्रेमिका(शरमाते हुए)- तुम मुझे बहुत प्यार करते हो।

प्रेमी- हां, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं।

प्रेमिका- जब मैं मर जाउंगी तो तुम बहुत रोओगे।

प्रेमी- हां, मैं बहुत रोऊंगा।

प्रेमिका- तुम कैसे रोओगे, मुझे रोकर बताओ?

प्रेमी-ठीक है, पहले तुम मर कर बताओ।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0366
शादी

प्रेमी(प्रेमिका से)- प्रिय, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

प्रेमिका(शरमाते हुए)- हां, हां क्यों नहीं।

इसके बाद दोनों लोग चुपचाप बैठे रहे।

प्रेमिका ने चुप्पी तोडी- अरे तुम तो चुप हो गए, कुछ तो बोलो।

प्रेमी- अब बोलने को रहा ही क्या है।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0367
टायर पंचर

प्रेमिका- प्रिय, यह टायर पंचर कैसे हो गया?

प्रेमी- एक कांच की बोतल पर चढ गया था।

प्रेमिका- अच्छा, क्या वह बोतल तुम्हें दिखाई नहीं दी थी।

प्रेमी- नहीं, वह तो उस आदमी की जेब में थी जो मेरी कार के नीचे आ गया था।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0368
चुम्बन लेने की कोशिश

एक प्रेमिका अपने प्रेमी से बोली-'' अगर तुमने मेरा चुम्बन लेने की कोशिश
की तो मैं अपने भाई को आवाज लगा दूंगी।

भाई का नाम सुनकर प्रेमी का जोश ठंडा पड़ गया।

उसने प्रेमिका से पूछा- '' कितना बड़ा है तुम्हारा भाई?

प्रेमिका- '' अगले महीने एक साल का हो जाएगा।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0369
लड़की का हाथ

एक युवक झिझकता हुआ अपनी प्रेमिका के पिता के सामने पहुंचा।

और उसके पिता से बोला- मैं आपसे आपकी लड़की का हाथ मांगने आया हूं।

लड़की का पिता बोला- सिर्फ हाथ नहीं मिल सकता।

लड़का डर गया और धीरे से बोला- तो फिर?

लड़की का पिता मुस्कराया और बोला-मांगनी है, तो पूरी लड़की मांगो।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0370
सिस्टर

नई-नई नौकरी पर लगी प्रेमिका नर्स ने प्रेमी को बताया - हॉस्पिटल में मुझे कोई नर्स
नहीं कहता।

प्रेमी- तो क्या कहते हैं।

प्रेमिका-सब 'सिस्टर कहते हैं।

प्रेमी (चुटकी लेते हुए) : पर खयाल रहे, अगली तरक्की में कहीं 'मदर मत बन जाना।


चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0371
पकाने के लिए

प्रेमी और प्रेमिका ने जब एक-दूसरे को शादी का वचन दे दिया तो प्रेमिका बोली -
डियर, मैं एक बात पहले ही साफ कर दूं कि मुझे खाना बनाना नहीं आता।

प्रेमी बोला - कोई बात नहीं डार्लिंग, एक बात मैं भी पहले साफ कर देता हैूहूं- मैं एक
कवि हूं। मेरे घर में पकाने के लिए कुछ है ही नहीं।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0372
ब्यूटी क्लीनिक में नौकरी

प्रेमिका - तुम तो कह रहे थे कि इस ब्यूटी क्लीनिक में तुम्हें नौकरी मिल गयी है। तुम
फिर बाहर खड़े क्या कर रहे हो ?

प्रेमी - यहां बाहर खड़ा रहना, भीतर जाने वाली नारियों की उपेक्षा करना है, जब श्रृंगार
कराकर बाहर निकले तो सीटी बजाना-यही तो मेरी नौकरी है।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0373
बेटी का हाथ

प्रेमी (प्रेमिका के पिता से) : मैं आपकी बेटी का हाथ मांगता हूं।

प्रेमिका का पिता : लेकिन मैं नही चाहता कि मेरी बेटी एक गधे के साथ सारी
उम्र गुजारे।

प्रेमी : इसलिए ही तो मैं आपकी बेटी का हाथ मांग रहा हूं।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0374
मंगेतर के दांत

एक युवती ने अपनी सहेली से अपने मंगेतर को मिलवाया तो बाद में सहेली बोली -लड़का तो ठीक है, लेकिन जब हंसता है तो उसके ऊबड-खाबड दांत बडे बुरे लगतेहैं।

तो क्या हुआ ? युवती इत्मीनान से बोली - शादी के बाद मैं उसे हंसने का मौका ही कब दूंगी।

चुटकुला क्रमांक *********************************** # 0375
गजब सरप्राइज !

विजय - 'डार्र्लिंग, आज हमारी शादी की पच्चीसवीं वर्षगांठ है, मैं तुम्हें एक सरप्राइज देनेवाला हूं।

रेशमा - 'अच्छा, क्या है?

विनय, 'तुमयह जो हीरे की अंगूठी पहने हो, याद है मैंने सगाई के समयतुम्हें मैंने दी थी। अब यह बिल्कुल तुम्हारी है, क्योंकि आज मैंने इसकी आखिरी किश्त चुका दी है।

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