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November, 2006 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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हिंदी मीडिया की दिशा बदल सकता है यूनिकोड

.हिंदी मीडिया की दिशा बदल सकता है यूनिकोड - बालेन्दु शर्मा दाधीच हाल ही में राजधानी में 'मीडिया में यूनिकोड की प्रासंगिकता' पर अमेरिकन इन्स्टीटयूट ऑफ इंडियन स्टडीज की ओर से आयोजित एक गोष्ठी में मैंने किसी बड़े मीडिया संस्थान को पूरी तरह यूनीकोड समर्थित करने में आड़े आने वाली वित्तीय उलझनों का जिक्र किया था। इस पहलू ने यूनिकोड के प्रति उत्साहित लोगों को थोड़ा उद्वेलित किया। लेकिन यूनिकोड अपनाने की अनिवार्य आवश्यकता के साथ-साथ व्यावसायिक और वित्तीय पहलुओं पर व्यावहारिक दृष्टि डालना जरूरी है। किसी अखबार के यूनिकोडीकरण की तीन श्रेणियां हो सकती हैं- उसकी वेबसाइट या पोर्टल को यूनिकोड युक्त किया जाना, वेबसाइट के साथ-साथ अखबार के निर्माण तंत्र (जिसमें कम्पोजिंग, डिजाइनिंग, समाचार वितरण व संकलन व्यवस्था, ग्राफिक्स आदि आते हैं) को यूनिकोडित किया जाना और वेबसाइट व अखबार के साथ-साथ उस समाचार संस्थान की सम्पूर्ण व्यवस्था (विज्ञापन संकलन, वितरण व्यवस्था, प्रबंधन, अकाउंटिंग, ईआरपी, डेटाबेस, ईमेल प्रणालियां आदि) का भी यूनिकोडित किया जाना। इन तीनों श्रेणियों में यूनिकोडित होने वाले कम्प्यूटरों और स…

भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड

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भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड - बालेन्दु शर्मा दाधीच सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास और सुधार की निरंतर प्रक्रिया चलती रहती है और इसी संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों से सूचनाओं के भंडारण की एक आधुनिकतम पद्धति लोकप्रिय हो रही है जिसे यूनिकोड कहते हैं। यूनिकोड के माध्यम से पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी पर अंग्रेजी की अनिवार्य निर्भरता से मुक्ति की संभावनाएं दिख रही हैं क्योंकि यह पद्धति एक आम कम्प्यूटर को विश्व की सभी भाषाओं में काम करने में सक्षम बना सकती है। जाहिर है, आईटी के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को विकसित होते देखने की आकांक्षा रखने वाले लोग यूनिकोड में छिपी संभावनाओं को देखकर उत्साहित हैं क्योंकि कई दशकों के बाद अब हम बिना अंग्रेजी जाने कंप्यूटर की क्षमताओं का प्रयोग करने की स्थिति में आ रहे हैं। मीडिया में कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी की असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह भी आने वाले कुछ वर्षों में इस काल-विभाजक परिघटना से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। हालांकि यूनिकोड है तो सिर्फ डेटा के स्टोरेज संबंधी एनकोडिंग मानक, लेकिन इसके प्रयोग से क…

कहानी : ... एडीटर बुल्लेशाह का

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किस्सा बी सियासत भठियारिन और एडीटर बुल्लेशाह का
-अमृतलाल नागरजाड़े की रात. नया जंगल. एक डाल पर तोता, एक डाल पर मैना. हवा जो सनसन चली तो दोनों कांप उठे. मैना अपने पैरों को समेटकर बोली की अय तोते, तू भी परदेशी, मैं भी दूसरे देश की. न यहाँ तेरा आशियाना और न मेरा बसेरा. किस्मत ने हमारा घर बार छुड़ाया, लेकिन मुसीबत ने हमें साथी बनाया, इसलिए अय तोते, अब तू ही कोई जतन कर कि जिससे रात कटे, कोई किस्सा छेड़ कि मन दूसरा हो.तोता बोला कि अय-मैना, सुन! मैं देश-परदेश उड़ा और सरायफानी देखी. उसके भठियारे का नाम इलाही, और भठियारिन हैं बी सियासत, जो जिन्दगी की सेज से उतरने का नाम ही नहीं लेती. उन्हें ढली जवानी में नयी नवेली बनने का शौक चर्राया है कि अल्लाह अल्लाह! उनके साज सिंगार की फरमाइशों ने मियाँ इलाही की सरायफानी को सुनार की दुकान बना रखा है. चारों ओर भट्टियाँ धधक रही हैं, दिमाग का सोना गलाया जा रहा है. हर तरफ ठक-ठक का शोर इस कदर कि भठियारे मियाँ इलाही के हुक्के की गुड़गुड़ाहट ही दब गई. ग्राहकों की तौबातिल्ला और शिकायतों से सरायफानी का छप्पर उड़ने लगा. मगर ऐ मैना, अजब ढंग हैं बी सियासत के कि कल का …

चुटकुले - 851 से 900

चुटकुला # 0851शर्मा जी अपने पड़ोसी के घर पहुंचे और बोले- देखिए आपके लड़के ने मेरे कमरे का शीशा ईट मारकर तोड़ दिया।पड़ोसी (शर्मा जी से)- आप उसकी हरकतो पर ध्यान मत दीजिए वह तो पागल है।शर्मा जी (पड़ोसी से) - तो फिर अपने मकान का शीशा क्यों नहीं तोड़ता?पड़ोसी (शर्मा जी से)- क्योंकि वह इतना पागल भी नहीं है।चुटकुला # 0852एक कैदी (दूसरे कैदी से)- तुमसे कोई मिलने क्यों नहीं आता,क्या तुम्हारा कोई रिश्तेदार नहीं है।दूसरा कैदी- है तो, बहुत पर सारे इसी जेल में है। चुटकुला # 0853मां (बेटे से)- ‘तुम्हारा ऑफिस में काम कैसा चल रहा है?‘बेटा (मां से)- ‘मेरे नीचे 25 आदमी काम करते है।‘मां - ‘तो क्या तू अभी से अफसर हो गया?‘बेटा- मां, ‘मैं ऊपर की मंजिल में काम करता हूं।‘चुटकुला # 0854प्रेमिका (प्रेमी से)- तुम इतने घबराये क्यों हो?प्रेमी (प्रेमिका से)- मुझे एक व्यक्ति की ओर से धमकी भरा खत मिला है कि मैंने उसकी पत्नी से मिलना नहीं छोड़ा तो वह मेरा खून कर देगा।प्रेमिका (प्रेमी से)- तो फिर तुम उसकी पत्नी से मिलना क्यों नहीं छोड़ देते?प्रेमी (प्रेमिका से)- पर धमकी भरा खत गुमनाम व्यक्ति ने लिखा है। मैं कैसे जान सकता हूं क…

व्यंग्य - कंप्यूटरजी को एक ख़त...

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प्रिय श्री कंप्यूटरजी- गोपाल चतुर्वेदीप्रिय श्री कंप्यूटरजी,परलोकीप्रसाद का सादर वंदे स्वीकार हो.आगे समाचार यह है कि परमेश्वर की कृपा से यहाँ सब आनंद-मंगल है. ऐसी ही कामना आपके लिए भी है. भारत ज्योतिष संघ ने अपनी साधारणसभा की अत्यावश्यक बैठक में यह निश्चय किया है कि मैं आपसे तत्काल संपर्क करूं. आपको पत्र लिखने के मूल में विशुद्ध ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' की भावना है. जैसा आपको विदित है, भारत अर्वाचीन और आधुनिक जीवन-शैली के सह-अस्तित्व का सबसे सशक्त उदाहरण है.दिल्ली में जहाँ एक ओर परांठेवाली गली है, वहीं चाइनीज भोजन के पाँच-सितारा रेस्तरां भी हैं. कहीं कैबरे चल रहा है, कहीं कथा. तकनीकी कारखानों की आधारशिला भी शुभमुहूर्त के समय पूजा-पाठ के बाद, नारियल फोड़कर रखी जाती है. यह मिली-जुली संस्कृति हमारी सबसे महत्वपूर्ण धरोहर है. हजारों वैज्ञानिकों का अथक परिश्रम और लगन इसके लिए जिम्मेदार है, साथ ही हम पंडितों का संस्कार-प्रेम भी.हाल ही में हमारे शांतिप्रिय देश में एक रक्तहीन क्रांति हुई है. नई सरकार और नए नेतृत्व का प्रादुर्भाव हुआ है. सुना है, इसमें आपकी बहुत चलती है. प्रत्याशियों के …

बगिया....

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बगिया
- कुसुम लता त्यागीबगिया में कोयल कूके है ,कुहु कुहु ओहो कुहु कुहु ये मंत्र कानों में फूंके है ,तु ही तु है ओहो तु ही तु है
आकाश में पंछी डोले हैं ,फुर फुर फुर ओहो फुर फुर फुर संगीत मिलन का बोले है ,तू ही तू है ओहो तू ही तू है
पपिहा ये बूंद को तरसे है ,कहे पिया पिया ओहो पिया पिया ये तुझसे मिलन के नगमें हैं ,कहे मोरा जिया ओहो मोरा जिया
फूलों पर भौंरे गूंजे हैं ,गुन गुन गुन ओहो गुन गुन गुन ओंकार की सुन्दर की गूंजें हैं ,सुन सुन सुन ओहो तू भी तो सुन
आकाश में बादल गरजें हैं ,उमड़ घुमड़ ओहो उमड़ घुमड़ वो भी तो पी से मिलने का ,सुर है सुन्दर ओहो अति सुन्दर
बादल से पानी बरसे है ,छम छम छ म ओहो छम छम छम भक्तिन देवालय जाए है ,कहे थम थम थम ओहो थम थम थम**-**
चित्र : रवि..

लोन लीजिए लोन...

बैंक लोन
डा कान्ति प्रकाश त्यागी खाने के बाद सोया ही था, अचानक बजने लगा टेलिफ़ोन ,
घबरा कर उठा, फ़ोन उठा कर पूछा, हैलो ! आप हैं कौन ?
नमस्कार, मैं हूँ, यूनियन बैंक आफॅ इंडिया से के के ज़ोन,
कहिए मि ज़ोन !, हम बैंक से दिलाते हैं सस्ती दर पर लोन
यदि आप कवारे हैं, तो मैरिज़ के लिए लोन ले सकते हैं
हनीमून के लिए, विलिगंटन अथवा वाशिंगटन जा सकते हैं
ग्रीष्म अवकाश के लिए, होनूलूलू एवं टिम्बकटू जाइए,
पर्यटन के लिए, ओसाका और लूसाका जाइए
तलाकशुदा से शादीशुदा, शादीशुदा से तलाकशुदा बनायेंगे ,
बैंक से लोन दिलाकर, आपका जीवन सुखी बनायेंगे
आपको कुछ नहीं करना है ,
घर बैठे ही फार्म भरना है
यदि आपकी कन्या विवाह योग्य है, तो "कन्या विवाह लोन" लीजिए,
यदि विवाह योग्य नहीं, तो विवाह योग्य बनाने के लिए लोन लीजिए
बच्चों को दिलानी हो, प्रसिद्ध संस्थानों की उच्च शिक्षा ,
राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्थानों की पूर्ण दीक्षा
तुमको क्या मतलब ?, हमें उनको चोर बनाना है,
उसके लिए भी तो जनाब आपको लोन लेना है
आजकल गली नुक्कड़ के चोर उचक्कों से काम नहीं चलना है,
प्रतिस्पर्धा के युग में, अंडरवर्ल्ड का बहुत बड़ा डॉन बनना है
च…

1001 चुटकुलों की पीडीएफ़ ई-बुक

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1001 चुटकुले - पीडीएफ़ ई-बुक डाउनलोड
सुहैब ने रचनाकार के कुछ पुराने चुटकुलों की कड़ियों के बारे में पूछा था. दरअसल, अनुगूंज के एक आयोजन के तहत 1001 चुटकुलों के संग्रह की कवायद की गई थी, जिसे रचनाकार में समय समय पर प्रकाशित किया गया था. इसे आप नीचे सीधे ही पढ़ सकते हैं -


Open publication - Free publishing - More chutkula .
इन 1001 चुटकुलों की ई-बुक पीडीएफ़ ई-बुक को आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं:
http://issuu.com/ravishankarshrivastava/docs/1001-hindi-jokes-e-book?mode=window&viewMode=singlePage&backgroundColor=%23222222

रचनाकार के चुटकुले
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चुटकुले 801 से 850

चुटकुला # 0801(एक यात्री ट्रेन से यात्रा कर रहा था, तभी टिकट चेकर आता है...)टिकट चेकर (यात्री से)- टिकट दिखाओ?यात्री (टिकट चेकर से)- नहीं है।टिकट चेकर (यात्री से)- कहां जाना है?यात्री (टिकट चेकर से)- वही जहां राम पैदा हुए थे।टिकट चेकर (यात्री से)- अब चलो मेरे साथ।यात्री (टिकट चेकर)- कहां?टिकट चेकर (यात्री से)- जहां श्रीकृष्ण पैदा हुए थे।चुटकुला # 0802अभिनेता (डायरेक्टर से)- डायरेक्टर साहब, इस फिल्म में मेरा किरदार एक पागल का है। मुझे इसमें जान डालने के लिए क्या करना चाहिए?डायरेक्टर (अभिनेता से)- कुछ नहीं, तुम बिल्कुल वैसे ही हो, जैसा तुम्हें रोल मिला है। चुटकुला # 0803एक साहब कपड़े की दुकान पर कपड़ा लेने आए और वह कपड़े की क्वालिटी तथा उसकी गारंटी के बारे में पूछताछ कर रहे थे। दुकानदार ने उनसे पूछा भाई साहब आखिर आपको कितना कपड़ा चाहिए।साहब बोले- मुझे केवल आधा मीटर कपड़ा टोपी बनाने के लिए चाहिए।दुकानदार ने उनको आधा मीटर कपड़ा दे दिया तो साहब फिर बोले- इस कपड़े की गारंटी क्या है?दुकानदार झल्लाकर बोला- आपका सिर फट सकता है पर इस कपड़े की बनी टोपी नहीं फट सकती।चुटकुला # 0804मच्छर का खून करने के इल्…

व्यंग्य : फूल खिले हैं बेशरम...

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व्यंग्य :फूल खिले हैं बेशरम-बेशरम- रघुनंदन चिलेबेशरम का पौधा कितना सुहावना होता है. हमेशा हरा. हरित-क्रान्ति का प्रतीक. इसी तरह यदि हरित-क्रान्ति बारहों मास फूलती-फलती रहे तो दस साल में गरीबी दूर! चारों ओर अभिजात्य-वर्ग का साम्राज्य. कितना सुन्दर होगा यह देश! कोई गरीब नहीं होगा. सबके बंगले होंगे. सबकी कारें होंगी. भिखारी भी कार में बैठकर भीख मांगेगा. तब न कोई राजा भोज होगा, न कोई गंगू तेली.बेशरम पर हल्के बैंजनी फूल उगे हैं. ये फूल मन मोहने में माहिर होते हैं. लोग कहते हैं कि ये केवल बेशर्म लोगों का ही मन मोहते हैं. पर मेरा निजी अनुभव है कि कथित शर्मदार भी इसकी ओर आकृष्ट होते हैं. आकृष्ट होने का सबसे बड़ा कारण है इसकी जीवटता. यह पौधा इतना जीवट होता है कि पानी है तो ठीक, नहीं है तो ठीक. खाद है तो ठीक, नहीं तो ठीक. सुरक्षा है तो ठीक, नहीं है तो ठीक. यह गुण आदमी ग्रहण कर ले, तो नेता की श्रेणी में आ जाता है. यह स्थिति कहलाती है स्थित-प्रज्ञ की. लात मारो तो जमे हैं, जूता मारो तो ठंसे हैं, और गाली दो तो लगे हैं. यश अपयश की रत्ती भर परवाह नहीं. सही मायने में आज का नेता किसी भी प्राची…

माँ की अर्चना...

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अर्चना- कुसुम लता त्यागीवाणी का वरदान दो माँ ,विश्व का कल्याण हो माँ कर दूं मैं सब कुछ समर्पित ,आपके चरणों मैं हे माँ
शब्दों का भंडार दो माँ ,अर्थों का विज्ञान दो माँ रच दूं मैं कुछ ऐसी कविता,सृष्टि का उपकार हो माँ
लेखनी को दे दो वो बल ,कर सके सत्कार्य हरपल ज्ञान का प्रकाश दो माँ ,चन्द्रमा की शीत दो माँ
करती है विनती कुसुम अब,हाथ जोङ समक्ष खङी है भाषा को संस्कार दो माँ ,लिखने का आशीष दो माँ
आतंक का उत्तर हैं देवें ,प्यार के दो बोलों से माँ हो कृपा माँ, आपकी तो,दुष्ट बन जाएँ सुजन माँ
क्या पता कब जन्म लेले,इस युग में भी कोई गौतम ,औ,बदल दे अपने बल से ,डाकुओं की सोच हे माँ
आपकी कृपा जो होवे ,असंभव भी संभव होवे तलवार ने जो कर सकी ,लेखनी वो कर देवे हे माँ
शील का उपहार दो माँ ,लिख सकूं कुछ ऐसा सुन्दर ,हो सके उद्धार जन का
(चित्र - श्रीमती शीला गर्ग की कैनवस पर तैलरंगों से बनी कलाकृति)

कान्ति प्रकाश त्यागी की मजाहिया कविता - बीबी

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बीबी-डॉ. कान्ति प्रकाश त्यागी
एक आदमी ने रात में पड़ोसी का दरवाजा खटखटाया ,
पड़ोसी गहरी नींद से उठा, दरवाजा खोलते ही बड़बड़ाया
क्यों भई ?, क्या मुसीबत है जो इतनी रात में उठाया ,
भाई साहब संकट बहुत गहरा है, इसलिए आपको उठाया
क्षमा कीजिए आपको इस समय तकलीफ़ दी ,
आपको उठाकर, आपकी नींद हराम की
आप ही मेरे पड़ोसी हैं ,
सब से अच्छे हितैषी हैं ,
मेरी बीबी खिड़की में बैठी है ,
वह अपनी जिद की पक्की है
खिड़की में बैठी है, तो बैठी रहने दो ,
काम से थका हूं, मुझे तो सोने दो ..
भाई साहब, आप मेरी बात नहीं समझ रहे हैं ,
आप भी तो ठीक से, नहीं समझा रहे हैं
वह खिड़की से कूद कर आत्महत्या करना चाहती है ,
इस घटना के लिए, मुझे दोषी बनाना चाहती है
यह तो आपका व्यक्तिगत मामला है ,
आप ही को सब कुछ संभालना है
बीबी मेरी है अथवा तुम्हारी ,
यही है सब से बड़ी लाचारी
मैं पत्नीव्रता पति हूं, पति धर्म निभाना चाहता हूं ,
अग्नि समक्ष फेरों की याद निभाना चाहता हूं
फिर भी कहिये, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं ,
कैसे आपको, इस भारी संकट से बचा सकता हूं
साफ साफ बोलिए, आपको क्या चाहिए ,
बस आपकी जरा थोड़ी सी मदद चाहिए
वह बहुत देर से प्रयत्न कर रही है ,
उस…

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अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

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