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दिव्या माथुर की चंद चुनिंदा कविताएँ

कविताएं- दिव्या माथुरसुनामी सचतुम्हारे एक झूठ परटिकी थीमेरी गृहस्थीमेरे सपनेमेरी ख़ुशियाँतुम्हारा एक सुनामी सचबहा ले गयामेरा सब कुछ।कहानीऐत तहानी औल मम्माबहुत रात हो गई मुन्नाबेटा अब तो तू सो जा`बछ ऐत तहानी औल मम्माछुना बी दो ना'अब मुन्ना बड़ा हो गया हैकहता हैमैं बहुत बोलती हूँमुन्ना ज़रा जल्दी चलस्कूल को देर हो जायेगी`मम्मा मेले छोते छोते पाँवमैं दल्दी दल्दी तैछे तलूँ'अब मुन्ना बड़ा हो गया हैकहता है किमैं बहुत `स्लो' हो गई हूँ`मम्मा, मुदे दल लदता हैतुमाले छात छोऊँदा तुमाली दोदी में'अब मुन्ना बड़ा हो गया हैऔर उसके मुन्ने कोमेरा कमरा चाहियेउस बड़े से बूढ़ाघर मेंमम्मा के नन्हे से प्राण अटके हैंअपने मुन्ने की राह में।झूठ४मेरी ख़ामोशीएक गर्भाशय हैजिसमें पनप रहा हैतुम्हारा झूठएक दिन जनेगी येतुम्हारी अपराध भावना कोमैं जानती हूँ कितुम साफ़ नकार जाओगेइससे अपना रिश्तायदि मुकर न भी पाये तोउसे किसी के भीगले मढ़ दोगे तुमकोई कमज़ोर तुम्हेंफिर बरी कर देगापर तुमभूल के भी न इतरानाक्यूंकि मेरी खामोशीएक गर्भाशय हैजिसमें पनप रहा हैतुम्हारा झूठ।झूठ ७झूठसिर पर चढ़ केबोलता हैयही सोच केखाम…

वीरेंद्र जैन की नए वर्ष की शुभकामनाएँ...

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नये वर्ष की शुभकामनाएं

-वीरेन्द्र जैन

नये वर्ष में कम मच्छर हों कम खटमल हों....

नये वर्ष में घिरे न तूफ़ानों की आंधी
नये वर्ष में सूली चढ़े न ईसा गांधी

नये वर्ष में फिर संस्कृति को दाग ना लगे
नये वर्ष में गिरजाघर में आग ना लगे

धार्मिकों को भी थोड़ी सी षर्म सतावे
कुष्ट सेवियों को कोई जिन्दा न जलावे

नये वर्ष में दफ्तर के जैसा दफ्तर हो
सरस्वती की पूजा होवे, पर घर पर हो

सूरज के आगे आगे अंधियारे ना हों
इतिहासों के निर्माता हत्यारे ना हों

नये वर्ष में बिन रिश्वत के काम हो सके
पद मद अंधों का आराम हराम हो सके

नये वर्ष में जाति धर्म के सब दल टूटें
सच्चाई बह निकले जब भी फोड़े फूटें

पैट्रोल डीजल की दर भी और ना चढे
नये वर्ष में अनियोजित परिवार ना बढे

नये वर्ष में कम मच्छर हों कम खटमल हों
नये वर्ष में रोज आपके नल में जल हो

नये वर्ष में रोज नियम से बिजली आये
घी में पाचों उंगली हों घी असली आये

नये वर्ष में अधिक पेट पर वेट न आये
नये वर्ष में ट्रेन आपकी लेट न आये

षेयरवालों के षेयर के रेट ना गिरें
बातचीत में मोबाइल का नेट ना गिरे

बीमारी में अस्पताल पर ताला न हो
और डाक्टर मंत्र चिकित्सा वाला न हो

नये वर्ष में जमे जगत में धाक आपकी
नये …

अरूण मित्तल का गीत : नव वर्ष

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गीत नव वर्ष-अरूण मित्तलशुभ हो नव वर्ष शुभ हो नव वर्ष
चंचल चित्त नाचे झूमकर
आये मतवाली घटा घूमकर
हो नवीन सृष्टि का उत्कर्ष
शुभ हो नव वर्ष शुभ हो नव वर्ष मिट जाये हर क्लेश धरा से
एक चिर नूतन वैभव बरसे
सबके ही मन में हो हर्ष
शुभ हो नव वर्ष शुभ हो नव वर्ष मानव के हित में चिंतन हो
श्रेष्ठ कर्म से श्रेष्ठ सृजन हो
यूँ प्रयास कर छू लें अर्श
शुभ हो नव वर्ष शुभ हो नव वर्ष

डॉ. भावना कुँअर की कहानी : गहना

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कहानीगहना-डॉ. भावना कुँअर आज़ भी जब मुझे रूपा की बीती जिंदगी याद आती है तो मेरा रोम-रोम सिहर उठता है कलेज़ा पीड़ा के कारण टूटने लगता है, नफ़रत होने लगती है इस संसार से… रूपा जो मेरी सबसे करीबी सहेली थी। हम दोनों एक ही कॉलेज ही पढ़ते थे। रूपा मध्यम वर्गीय परिवार में पली बढ़ी थी, अभी उसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई थी कि एक बड़े घराने से उसके लिये रिश्ता आया और आनफ-फानफ में रूपा की शादी रोहित के साथ हो गयी , जो एक बहुत बड़े बिज़नेस मैन परिवार से था। उसकी शादी को आज़ तीसरा ही दिन था, घर में बड़ी पूज़ा रखी गयी थी। रूपा की सास ने रूपा को पूज़ा का जोड़ा निकाल कर दिया और जल्दी से नहा धोकर तैयार होने को कहा, स्नान के समय रूपा ने सारे गहने उतारकर बाथरूम में रख दिये और स्नान करने के बाद वह उनको लेना भूल गयी, जब वह बाहर आयी तो देखा सभी लोग जोर-शोर से पूज़ा की तैयारी में जुटे थे। रूपा को ज़रा भी याद नहीं था कि उसने गहने बाथरूम में ही छोड़ दिये हैं। जब उसकी सास ने उसको बिना गहनों के देखा तो बोली-" रूपा तुमने गहने क्यों नहीं पहने?" अब रूपा के तो होशो-हवास ही उड़ गये क्योंकि उसको याद आ गया था कि वो …

शिक्षायतन के प्रारंग में बाल दिवस

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संस्कृति व सभ्यता का महा विश्वविद्यालय शिक्षायतन

प्रस्तुति : देवी नागरानीशिक्षायतन के प्रारंग में बाल दिवसतारीख २, दिसम्बर २००७ शिक्षायतन की ओर से आयोजित किया गया 19 वां सांस्कृतिक संगीतमय बालदिवस Hindu Temple Society of North America, Flushing, NY में सम्पन्न हुआ। पूर्णिमा देसाई शिक्षायतन की निर्माता, निर्देशिका अध्यक्ष एवं संचालिका है, जिन्होंने बड़ी समर्थता के साथ संचालन की बागडोर संभाली. ज्ञानदीप को उज्वलित करने की विधा को सरस्वती वंदना की सुंदर स्तुति से किया जिसमें सृष्टि के आधार ब्रम्हा, विष्णु, महेश बालस्वरूप उपस्थित रहे. मुख्य मेहमान World Business Forum ke Chairman
श्री किरन मेहता व सभी श्रोताओं एवं कविगण का स्वागत स्वरमय संगीत से किया गया. सिलसिले को आगे बढाते हुए अपने गुरुकुल में शिक्षा ले रहे सभी बच्चों को पेश किया एक रंगमय मंच पर जो गीत ग़ज़ल ओर शास्त्रीय संगीत से शुरू होकर वादन पर समाप्त हुआ. एक खास बात ध्यान देने योग्य यह थी जहाँ बालक बालिकाओं ने " दीदी तेरा देवर दीवाना" कि धुन पर एक अद्भुत रचना गाई
" अ-आ-इ-ई-उ-ऊ-ऋ, ये है पहले स्वर हिंदी के
ए-ऐ-ओ-औ-और-अं-अः, …

देवी नागरानी की पुस्तक समीक्षा : ग़ज़ल कहता हूँ

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पुस्तक विचारग़ज़ल कहता हूँ(समीक्षा) शाइरः प्राण शर्मा प्रकाशक : अनिभव प्रकाशन, ई-२८, लाजपतनगर, साहिबाबाद. उ.प्र. मूल्यः १५०, पन्नेः ११२ -देवी नागरानी श्री प्राण शर्मा ग़ज़ल विधा के संसार में एक जाने माने उस्ताद हैं जिन्होंने अपनी शैली और सोच को शिल्पकार की तरह अपने ढंग से ढाला है. आए दिनों ग़ज़ल के बारे में उनके लेख पढ़ने को मिलते है जो नये लिखने वालों के लिये मार्गदर्शक बनते चले जा रहे हैं. आपके द्वारा लिखा गया “हिंदी ग़ज़ल बनाम उर्दू ग़ज़ल” धारावाहिक रूप में हमारे सामने आता रहा और पथ दर्शक बन कर वह कई ग़ज़ल विधा की बारीकियों पर रोशनी डालते हुए बड़ा ही कारगर सिद्ध हुआ. उसी के एक अंश में आइये देखें वो ग़ज़ल के बारे में क्या कहते हैं – “अच्छी ग़ज़ल की कुछ विशेषताएं होती हैं. इन पर समय के साथ के चलते हुए विशेषज्ञता हासिल की जाये तो उम्दा ग़ज़ल कही जा सकती है. साथ ही इनका अभाव हो तो ग़ज़ल अपना प्रभाव खो देती है या ज़्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाती. सरल, सुगम एवं कर्णप्रिय शब्दों में यदि हिंदी ग़ज़ल लिखी जायेगी तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता कि वह जन मानस को न मथ सकें. यदि ग़ज़ल में सर्वसाधारण …

आर के भंवर के दो व्यंग्य

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व्यंग्यसंचालक-आर.के.भंवर एंकर, संचालक, कम्प्येरर, उद्घोषक, एनाउंसर ये सारे शब्द एक उस बहु प्रयोजनीय व्यक्ति के निमित्त गढ़े गये हैं जो किसी संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यानमाला या सभा में 'मास्टर आफ सेरेमनी' होता है। किसी आयोजन के हिट और फ्लाप दोनों में ही उसकी भूमिका प्रबल होती है। रद्दी से रद्दी कार्यक्रम को वह बोलने की अपनी चमत्कारिक शैली में सुपरहिट करा सकता है। इसके विपरीत सुपरहिट आयोजन को अपनी नीरसता से बोगस भी। वह मंच पर ही एक दो किलोमीटर चल लेता है। वह सभापति की तरह एक आसन धर न होकर उठक बैठक लगाता ही रहता है। चुनाँचे एक स्थान पर बैठना उसके नसीब में नहीं। उसकी भूमिका उस टिकट चिपके लिफ़ाफ़ा की तरह है जिसे फाड़कर उसमें रखे पत्र को पढ़ना होता है और आप बेहतर ही जानते है कि फटे लिफाफे को कोई कलेजे नहीं लगाता है। इस प्रकार संचालक अपना काम करके डस्टबिन में चला जाता है। वह पूरे आयोजन का सूत्रधार होता है। वह मोतियों की माला का धागा होता है। माला, जिसमें मोतियां तो दिखती हैं पर धागा नहीं। और धागा यदि अपने को दिखाने की चाह रख ले तो मोतियों पर क्या गुजरेगी ? वह किसी भी आयोजन का लास्ट म…

अश्विनी केशरवानी का आलेख : छत्तीसगढ़ी काव्य के भारतेन्दु - पंडित सुन्दरलाल शर्मा

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28 दिसंबर को पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष छत्तीसगढ़ी काव्य के भारतेन्दु पंडित सुन्दरलाल शर्मा-प्रो. अश्विनी केशरवानी महानदी के तटवर्ती ग्राम्यांचलों में केवल राजा, जमींदार या किसान ही नहीं बल्कि समाज सुधारक, पथ प्रदर्शक, अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने में अग्रणी नेता और साहित्यकार भी थे। छत्तीसगढ़ अपने इन सपूतों का ऋणी है जिनके बलिदान से हमारा देश आजाद हुआ। उन्हीं में से एक थे पंडित सुन्दरलाल शर्मा। उनके कार्यो के कारण उन्हें ''छत्तीसगढ़ केसरी'' और ''छत्तीसगढ़ का गांधी'' कहा जाता है। वे एक उत्कृष्ट साहित्यकार भी थे। अपनी साहित्यिक प्रतिभा से जहां जन जन के प्रिय बने वहीं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और अछूतोध्दार में प्रमुख भूमिका निभाकर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय भावना से जोड़ने का सद्प्रयास किया है। छत्तीसगढ़ के वनांचलों में पंडित सुंदरलाल शर्मा ने ही महात्मा गांधी को पहुंचाने का सद्कार्य किया था। उनके कार्यो को देखकर गांधी जी अत्यंत प्रसन्न हुए और एक आम सभा में कहने लगे :-''मैंने सुना था कि छत्तीसगढ़ एक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। लेकिन यहां आने पर पता चला कि यह ग…

अश्विनी केशरवानी का मुकुटधर पाण्डेय पर आलेख

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प्रतिभाशाली मुकुट काव्य के मुकुट मनोहर- प्रो. अश्विनी केशरवानी महानदी के तट पर रायगढ़-सारंगढ़ मार्ग के चंद्रपुर से 7 कि.मी. की दूरी पर बालपुर ग्राम स्थित है। यह ग्राम पूर्व चंद्रपुर जमींदारी के अंतर्गत पंडित शालिगराम, पंडित चिंतामणि और पंडित पुरूषोत्तम प्रसाद पांडेय की मालगुजारी में खूब पनपा। पांडेय कुल का घर महानदी के तट पर धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों से युक्त था। यहां का एक मात्र निजी पाठशाला पांडेय कुल की देन थी। इस पाठशाला में पांडेय कुल के बच्चों के अतिरिक्त साहित्यकार पंडित अनंतराम पांडेय ने भी शिक्षा ग्रहण की। धार्मिक ग्रंथों के पठन पाठन और महानदी के प्रकृतिजन्य तट पर इनके साहित्यिक मन को केवल जगाया ही नहीं बल्कि साहित्याकाश की ऊँचाईयों तक पहुंचाया...और आठ भाइयों और चार बहनों का भरापूरा परिवार साहित्य को समर्पित हो गया। पंडित पुरूषोत्तम प्रसाद, पंडित लोचनप्रसाद, बंशीधर, मुरलीधर और मुकुटधर सभी उच्च कोटि के साहित्यकार हुए। साहित्य की सभी विधाओं में इन्होंने रचना की। पंडित लोचनप्रसाद जहां इतिहास, पुरातत्व और साहित्य के ज्ञाता थे वहां पंडित मुकुटधर जी पांडेय साहित्य जगत के मुकुट थे।…

भारती परिमल का आलेख : स्वागत् नववर्ष के स्वर्णिम सूरज...

आलेख स्वागत नववर्ष के स्वर्णिम सूरज...-भारती परिमलनवप्रभात के स्वर्णिम सूरज तुम्हारा स्वागत है। साथ ही तुम्हारी रश्मियों से छनकर आते नववर्ष के प्रकाश पुंज का भी हार्दिक... हार्दिक स्वागत है। तुम्हारे और नववर्ष के स्वागत में हम पलक बिछाए हुए हैं। आज स्वागत की इस बेला में हमारे विचारों का उफनता ज्वार तुमसे कुछ कहने को उतावला हो रहा है। आओ घड़ी भर इसके पास आकर इसे ध्यान से सुनो... नववर्ष के स्वागत में जहाँ चारों ओर हर्शोल्लास है, भड़कीला शोर और गुनगुनाता संगीत है...वहीं किसी कोने में एक अजन्मे मासूम की सिसकारी से लिपटी जिंदगी में मौत की खामोशी भी है। ये खामोशी तुमसे कुछ कहना चाहती है। इस दुनिया में लाखों धड़कनें ऐसी हैं, जिन्हें समय से पहले ही षांत कर दिया गया। माँ की विवषता और परिवार के सदस्यों की निर्दयता के कारण अनेक अजन्मे शिशुओं ने कोख से डस्टबिन तक का सफर तय किया। उनकी मासूम चीखों को सुननेवाला आसपास कोई न था। फूलों की पंखुड़ियों से भी कोमल अंगों पर तेज हथियारों से जोर आजमाइश का तांडव खेला जाता रहा और वे मासूम कुछ भी न कह सके। धारदार और नोकदार अस्त्रों का चक्रव्यूह तोड़ने के लिए अभिमन्यु…

आनंद कृष्ण की उपन्यास समीक्षा : "सफेद पर्दे पर : एक अभिजात्य शून्यता"

सफेद पर्दे पर : एक अभिजात्य शून्यता (डॉ. रमेश चन्द्र शाह के उपन्यास पर केन्द्रित)- आनंदकृष्ण------------------------------------------------ ''मैंने एक कमरे के घर में चार सदस्यों के परिवार को पाला पोसा, बच्चों को लिखाया पढाया और आज इसी शहर में मेरे बेटे के चार मकान है जिनमें उसके बूढे बाप के लिए एक कोना भी नसीब नहीं है ।'' फिल्म ''लगे रहो मुन्ना भाई'' में वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर हुए नि:शक्त और बेबस बुजुर्ग का उक्त आशय का कथन समाज के उस विद्रूपित और घृण्य चेहरे का अक्स हमारे सामने रखता है जो विगत वर्षों मे तेजी से घनीभूत होता हुआ मानव के बहिर्मुखी और अंतर्मुखी व्यक्तित्वों में से मूल्यों के तिरोहित होने और उस समग्र प्रदूषण को मानव के डीएनए में शामिल होने तक के खतरे की गंभीरता उकेरता है । यह प्रवृत्ति मानवीय सभ्यता की कृतज्ञता-ज्ञापन की विशेषता को विस्मृत करने का प्रयास है और इसीलिए समाज का एक नया चेहरा, नया रूप और नई अनुभूतियों के साथ सामने आता है जहां वर्जनाएं दम तोड़ती नजर आती है और नित नए प्रतिमान आविर्भूत होते जाते हैं । अपनी बुजुर्ग पीढ़ी का…

प्रो. अश्विनी केशरवानी का आलेख : शादी के लिए कुंडली नहीं, रक्त समूह मिलाइए

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आलेखशादी के लिए कुंडली की नहीं रक्त की जांच कराइये -प्रो. अश्विनी केशरवानी मेरे एक मित्र हैं-अनंत, जैसा नाम वैसा गुण, धीरज और सभ्यता जैसे उन्हें विरासम में मिला था। घर में अकेले और बड़े होने से उसकी शादी बड़े धूमधाम से एक सुधड़ कन्या से हुआ। लड़की सुशील, सभ्य और गृह कार्य में दक्ष थी। दोनों की जोड़ी को तब सभी ने सराहा था। बड़ी खुशी खुशी दिन गुजरने लगे मगर एक दिन उसका रक्त स्त्राव होने लगा। थोड़े बहुत इलाज से सब ठीक हो गया और बात आई गई हो गई। दिन गुजरने लगा और कभी कभी उसका रक्त स्त्राव हो जाता था, गर्भ ठहरता नहीं था। बार-बार रक्त स्त्राव से गर्भाशय कमजोर पड़ गया। एक बार गर्भ ठहर गया तब सभी कितने खुश हुये थे। सभी उस सुखद क्षण की कल्पना करके खुश हो जाते थे मगर जब वह वक्त आया तो बच्चा एबनार्मल हुआ। थोड़ी देर जीवित रहने के बाद शांत। बड़ी मुश्किल से मां को बचाया जा सकता है। दादा-दादी बनने की इच्छा ने इलाज से टोने टोटके तक ले आया और इस अंध विश्वास ने बेचारी को एक दिन मौत के गले लगा दिया। उस दिन की घटना ने मुझे विवाह सम्बंधी तथ्यों पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की बाध्य कर दिया। वास्तव में विवाह दो अनजा…

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रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

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