शनिवार, 30 जून 2007

असग़र वजाहत का यात्रा संस्मरण : चलते तो अच्छा था

चलते तो अच्छा था ईरान और आज़रबाईजान के यात्रा संस्मरण -असग़र वजाहत अनुक्रम 1. मिट्टी का प्याला 2. शबे शीराज़ ...

अमृता प्रीतम: क्या दिया तुमने?

-विजय शर्मा हम लोगों की आदत है, किसी ने कहा कौआ कान ले गया और बस हम दौड़ पड़ते हैं कौए के पीछे. थोड़ी देर बाद यह भी भूल जाते हैं कि क्य...

शुक्रवार, 29 जून 2007

व्यंग्य : मुझे भी एक अड्डा चाहिए

- मनोज सिंह 'चित भी मेरा, पट भी मेरा, अड्डा मेरे बाप का` चोरी और सीनाजोरी की इससे बेहतर मिसाल मिलना मुश्किल है। देशों में अमेरिका पर...

बुधवार, 27 जून 2007

पुस्तक समीक्षा : हंसते-हंसते दर्शन शास्त्र

वर्ल्ड ऑफ़ बुक्स हंसते-हंसते दर्शन शास्त्र डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल उम्र के सत्तर बरस पूरे कर लेने के बाद थॉमसन ने सोचा कि अब उसे अपनी जी...

मंगलवार, 26 जून 2007

शिव-पार्वती का संगमः उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक मिलन

( रुक्ष्मणि पटेल ) आलेख - प्रा.रुक्ष्मणि पटेल सागर-सेवित, मेघ-मेखलित यात्रा-विवरण अज्ञेय की प्रसिद्ध पुस्तक अरे यायावर, रहेगा याद का...

जॉलीवुड का फ़िल्मी धरातल

- सुशील अंकन झारखंड प्रकृति के आंचल में एक ऐसा प्रदेश है जहां की हवाओं, घटाओं, पर्वत, पानी और मिट्टी में समृद्धि की गाथा लिखी हुई है। यह...

सोमवार, 25 जून 2007

सुकेश साहनी की लघुकथाएँ.

  महत्त्वपूर्ण कड़ी चाणक्य गुरू बालक , अभिभावक और शिक्षक के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है । शिक्षा की कोई भी विधि -प्रविधि , पाठ्यक्रम-पाठ...

उम्र पचपन, याद आता है बचपन

आलेख - भारती परिमल 'वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी' जगजीत-चित्रा सिंह द्वारा गाई गई ग़ज़ल की ये पंक्तियाँ सुनते ही हम सब कई ब...

रविवार, 24 जून 2007

शैतानी गणित में बिलबिलाती रूहें...

(पिछले दिनों असग़र वजाहत की कहानी शाह आलम कैम्प की रूहें के परिप्रेक्ष्य में चिट्ठा जगत् में जमकर विवाद हुआ और उसकी परिणति नारद पर एक चिट्...

शनिवार, 23 जून 2007

अंतरिक्ष : अनंत में अस्तित्वहीनता

आलेख   अनंत में अस्तित्वहीनता - मनोज सिंह अंतरिक्ष से हम बहुत हद तक अनजान हैं। जितना हम अब तक समझ पाये हैं, उस हिसाब से भी देखें तो कि...

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