September 2007

एक आम हिन्दुस्तानी की आवाज : दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लें

(30 सितम्बर, दुष्यन्त कुमार की जयंती पर विशेष) (दुष्यन्त कुमार. चित्र साभार अनुभूति-हिन्दी.ऑर्ग) -अरुण मित्तल अद्भुत दुष्यन्त कुमार हिन्...

5 गीत

- सुजान पंडित 1- सदभावना गीत -- बेला, गुलाब, जुही, चम्पा, चमेली। नाम अलग पर हम है सहेली॥ भारतीय - हम है भारतीय --   मंदिर में सजते हम मस...

दो लघुकथाएँ

  -संजय पुरोहित नासमझ ''पापा, ये कविता तो मुझे बिल्कुल ही समझ नहीं आई'' ''बेटा, इसमें हैरानी की क्या बात, जो समझ म...

नेता जी की षष्ठ्यब्दि पर हिंदी व्यंग्यकारों की बधाइयाँ

-शंकर पुणतांबेकर एक नेताजी के हाल ही में साठ वर्ष पूर्ण हुए. काफी ऊँची किस्म के राष्ट्रीय नेता थे वे. अतः जब साठ साल जी लेने के उपलक्ष्य म...

हिन्दी पद्य साहित्य में नारी : वर्तमान परिप्रेक्ष्य

-अरुण मित्तल अद्भुत     यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते , सर्वास्तत्राफला: क्रिया। नारी तुम केवल ...

अथ रिश्वतमेव जयते

· आर.के.भंवर हमारे स्वनामधन्य एवं गुणज्ञ महापुरूषों ने देश की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए बड़े-बड़े काम किये है और नारे दिये है। नारे व...

लोक हास्य धारा

- सीताराम गुप्ता बच्ची   एक व्यक्ति रेलगाड़ी में सफर कर रहा था। दोपहर को जब उसे भूख लगी तो उसने अपना खाने का डिब्बा बाहर निकाला और खाना ख...

“धर्म का मूल्यांकन करता है धर्मावलंबियों का आचरण”

तथा ''गुरु के मूल्यांकन की कसौटी है उसके शिष्यों का आचरण'' -सीताराम गुप्ता साधु-संत त्याग, तपस्या और सहनशीलता तथा क्षमा क...

दो लघुकथाएँ

-सीताराम गुप्ता ' आवभगत ' कई बार कालबेल का बटन दबाने के उपरांत अंदर से एक युवती निकल कर बाहर आई और बरामदे में से ही ऊँची आवाज म...

''घोर व्यावसायिक दृष्टिकोण में परिवर्तन ही सही शिक्षा है''

  - सीताराम गुप्ता   पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से ही हलचल शुरू हो गई। पेट्रोल पंपों पर रौनक बढ़ गई। आख़िरकार आधी रात के बाद दाम...

भावों को दें उचित आकार साँचे में मन के

- सीताराम गुप्ता   चीन और जापान में भाषा, संस्कृति, कला तथा जीवन के कई अन्य क्षेत्रों में इतनी अधिक समानता पायी जाती है जिसके कारण इन दोन...

''अकाल में कलाओं का विकास''

- सीताराम गुप्ता होरेस ने कहा है कि ''प्रतिकूल या विषम परिस्थितियाँ प्रतिभा को प्रकट करती हैं तथा समृद्धि इसका लोप''। सामा...

रिहाई

-सीताराम गुप्ता ये जितने पेड़-पौधे हैं तुम्हारी कैद में जिन्हें तुम रोज   नवजात शिशुओं की तरह अपने चम्मचों में डालकर पानी पिलाते हो खिलाते ...

हमें बोलने की स्वतंत्रता है?

-मनोज सिंह   कितना अच्छा लगता है यह सोचना, सुनना और महसूस करना कि हम स्वतंत्र हैं। कितना गर्व होता है यह कहकर कि हम एक आजाद देश के नागरिक ह...

धर्म, अध्यात्म और योग:

  योग द्वारा ही संभव है धर्म का पालन   - सीताराम गुप्ता   प्राय: योग, धर्म और अध्यात्म को अलग-अलग माना जाता है। योग का संबंध भौतिक शरीर क...

लाल्टू की कहानी : निताई भिखमंगा, प्रेमिका और कविता एक मौत की

कहानी निताई भिखमंगा, प्रेमिका और कविता एक मौत की - लाल्टू अजंता, तपती दुपहरी, लू के तमाचे और शाम का एकाकीपन, इन सबसे अलग अब...

''अग्रपूज्य गणेश की प्रतीकात्मकता तथा प्रासंगिकता''

    -सीताराम गुप्ता   हिन्दी में एक मुहावरा है 'श्रीगणेश करना' जिसका अर्थ है किसी कार्य का शुभारंभ करना। इस मुहावरे से जनजीवन...