February 2007

कहानी : कल्लो

- ऋषि शर्मा कल्लो शीर्षक पढ़कर पाठक शायद एक बार को चौंकें। मगर यह निश्चित है कि कहानी का केन्द्रीय पात्र कल्लो ही है। तीनो...

आपकी यह हौसला अफजाई बहुत काम आएगी

ग़ज़ल - योगेश समदर्शी आपकी यह हौसला अफजाई बहुत काम आएगी सच कहता हूं यदि आपने यूं ही दिया साथ तो वर्षों से रुकी कलम में फिर से जान आएगी मैं...

ऑफ़िस नियम

- कान्ति प्रकाश त्यागी एक आफ़िस में कर्मचारी प्रायः नदारद रहते थे , नदारद रहने के कोई ना कॊई बहाने देते थे । जिसको देखो या तो रे...

पुस्तक समीक्षा - तुर्रम (बाल उपन्यास) तथा दिवास्वप्न (शिक्षण कला)

- सुधा अवस्थी तुर्रम (बाल उपन्यास) : लेखक - कमलेश भट्‌ट ‘ कमल ' प्रकाशक : आत्मा राम एण्ड संस नई दिल्ली प्रथम संस्करण:2006 , ...

व्यंग्य : किसका घर

- नरेन्द्र कोहली रामलुभाया ने एक स्वप्न देखा कि वह भारत का प्रधानमंत्री या कोई साधारण मंत्री बन गया है. बात स्वप्न की है, इसील...

कहानी : मृगमरीचिका

-आशुतोष ज़बरदस्त बारिश और घर की बालकनी पर बैठा मैं. बारिश की बूंदों को गिनते-गिनते नहा पड़ी पार्क के पास एक कुतिया. वह अपने दांतों में नन्हे...

हास्य कविता : सोने की चिड़िया

-डा० कान्ति प्रकाश त्यागी एक भाई हंसते हुए आये , सुना है अपना देश , एक बार फ़िर सोने की चिड़िया बन गया है. हमने हैरत से पूछ ह...

कहानी - फ्राइडे

- अजीत अंजुम आज बॉस का मूड फिर उखड़ा-उखड़ा दिख रहा था. चेहरे पर बारह बज रहे थे. कोई पहली बार देख ले तो यही लगेगा कि अभी-अभी निगमबोध घाट से ...

रामेश्वर काम्बोज की चंद ताज़ा कविताएँ

1-कविता क्या है? भोर में पाखी का कलरव गान फिर नील गगन में पंख खोलकर तैरना लेना ऊँची उड़ान । किसलय की नोक पर फिसलती ओस की बूँद पहाड़ की तलह...

कहानी : गुरूदेव

-अविनाश गुरुदेव ने पहले ही दिन कहा था, 'बेटा बतकही के चक्कर में जिस दिन पड़े_ख़बर का मर्म भूल जाओगे.' उन्हें लगता था कि लड़का नया-न...