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असग़र वजाहत का यात्रा संस्मरण -3

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(हाफ़िज शीराज़ी)

(अनुक्रम यहाँ देखें)

शबे शीराज़यात्रा करने का एक मज़ा अनिश्चित भविष्य है। अजनबी देश है, भाषा नहीं जानते, न कोई दोस्त है न दुश्मन है। न कहीं होटल में ठहरने की बुकिंग है और किसी का कोई नाम पता ही जेब में है। रात हो गयी है। पता नहीं बस अड्डे से टैक्सी कैसी मिलेगी? और जाना कहां होगा? खाना कहां मिलेगा? (तख़्त ए जमशेद , शीराज़)
रात का नौ बज गया था और बस शीराज़ पहुंच रही थी। मैंने दो सहयात्रियों से दोस्ती कर ली थी। दोनों मज़दूरों जैसे लोग थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि बस अड्डे से किसी होटल तक ले जायेंगे।अपने दो मज़दूर किस्म के ईरानी साथियों ने एक सस्ते 'मेहमान पिज़ीर' में पहुंचाया और तय पाया कि हम तीनों एक साथ रहेंगे क्योंकि यह सस्ता पड़ेगा। होटल के मालिक ने मुझे ईरानी मज़दूरों के साथ ठहरने की अनुमति नहीं दी क्योंकि मैं विदेशी था। बहरहाल, अलग कमरा लेना पड़ा। कमरे के बाहर बाथरूम वगैरा। रात के दस बजे कमरा मिल पाया और दिनभर के खाली पेट ने सताना शुरू किया। नीचे आकर होटल के मालिक से पूछा कि खाना कहां खा सकते…

सैकड़ा भर चटपटे चुटकुले

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हँसी की गारंटी.

ठहाका लगने - लगाने की गारंटी - राजेश गुप्ता द्वारा

संकलन व अनुवाद : राजेश गुप्ता rajesh02 AT gmail.com

1 .एक छोटी लड़की और एक छोटा लड़का खेल रहे थे। लड़की लड़के के पास पहुंची और बोली‚ "टॉमी‚ ‘घर' का खेल खेलोगे ?"उसने कहा ‚"हां ‚क्यों नहीं। तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो?"लड़की ने जवाब दिया ‚" मैं चाहती हूं तुम अपनी भावनाएं व्यक्त करो।""भावनाएं व्यक्त करूं ! "‚ परेशान से टॉमी ने कहा ‚"मुझे पता नहीं इसका क्या मतलब होता है।"लड़की व्यंग्य से मुस्कुरायी और बोली‚ "बिल्कुल सही। तुम ‘पति' बन सकते हो।"2 .व्यवसायिक स्कूल से ताज़ा निकले एक नवयुवक ने एकाउंटेंट की ज़रूरत के विज्ञापन का जवाब दिया। अब उसका साक्षात्कार एक परेशान सा व्यक्ति ले रहा था‚ जो खुद का शुरू किया हुआ व्यापार चला रहा था।"मुझे ऐसा आदमी चाहिए जिसके पास एकाउंटिंग की डिग्री हो।" उस आदमी ने कहा। "लेकिन असल में मुझे ऐसा कोई चाहिए जो मेरे लिए चिन्ता करे।""मैं समझा नहीं।" नवयुवक बोला।"मैं बहुत सारी चीज़ों की चिन्ता करता हूं।&quo…

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