शुक्रवार, 31 अगस्त 2007

रंगभेद की घटिया मानसिकता

आलेख - मनोज सिंह कनाडा का अति आधुनिक शहर मांट्रियल, व्यवस्थित, अनुशासित व सुंदर होते हुए भी यहां अंग्रेजी कम बोली और सुनी जाती है। फ्रें...

हाय मेरी प्याज...

''हिन्दी साहित्य में व्यंग्य की एक सुदीर्घ परम्परा रही है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर हरिशंकर परिसाई और शरद जोशी तक यह कई आयामो...

गुरुवार, 30 अगस्त 2007

रिश्तों की गरिमा खोता 'भाई'

आलेख - डॉ. महेश परिमल आज जीवन की धरती पर रिश्तों की इंद्रधनुषी धूप ऐसी चटकी है कि हर रिश्ता अपने अर्थ खो रहा है. इन्हीं अर्थ खोते ...

बुधवार, 29 अगस्त 2007

दुनिया हमारे बगैर

वर्ल्ड ऑफ बुक्स -डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल तेज़ी से बढती दुनिया की आबादी और तकनीक का कल्पनातीत प्रसार. कहीं ऐसा तो नहीं कि मनुष्य प्...

शनिवार, 25 अगस्त 2007

टोनी मॉरीसन: पूर्वजों का ॠण, काले अतीत की आवाज

(टोनी मॉरीसन) आलेख -विजय शर्मा डेढ़ सौ साल पहले एक अमेरिकी लेखक ने अपने पूर्वजों के पाप का प्रायश्चित करने के लिए एक पुस्तक रची, ज...

शुक्रवार, 24 अगस्त 2007

भारत : यात्रा जारी है!

वर्ल्ड ऑफ बुक्स -डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल भारतीय पाठक मार्क टली के नाम से भली भांति परिचित हैं. 1935 में कोलकाता में जन्मे और ब्र...

बुधवार, 22 अगस्त 2007

हेरॉल्ड पिंटर: एक सदी के अमर्ष की आवाज

(हेरॉल्ड पिंटर - चित्र : साभार नोबेल प्राइज डॉट ऑर्ग) आलेख -विजय शर्मा हेरोल्ड पिंटर नाम है उस शख्सियत का जो अपने देश के प्रधान मंत्री...

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