संदेश

August, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

रंगभेद की घटिया मानसिकता

चित्र
आलेख- मनोज सिंहकनाडा का अति आधुनिक शहर मांट्रियल, व्यवस्थित, अनुशासित व सुंदर होते हुए भी यहां अंग्रेजी कम बोली और सुनी जाती है। फ्रेंच भाषा व सभ्यता का अधिक बोलबाला है। नगर के मध्य स्थित सेंट कैथरीन रोड यहां का मुख्य आकर्षण है। जहां रूपसियों के अनुपम सौंदर्य को आम चलते-फिरते देखा जा सकता है। आश्चर्य वाली बात है कि इनमें गोरों के साथ-साथ काली अफ्रीकन लड़कियां भी दिखाई देती हैं। जो बराबरी से खूबसूरत, स्मार्ट व आकर्षक मानी जाती हैं और रंगभेद के द्वारा उनमें तुलना नहीं की जाती। यहां की नाइट लाइफ विश्व प्रसिद्ध है। नाइट क्लब अपेक्षाकृत सुरक्षित और वैध हैं। अधिक चौकाने वाली बात है कि अफ्रीकन नृत्यांगनाओं की मांग कई क्लबों में अधिक है और इनके दाम भी कहीं-कहीं ज्यादा बताए जाते हैं। एक पर्यटक के रूप में कई दिनों तक यहां रहने पर भी किसी कनेडियन ने मेरे देश व राज्य के बारे में न तो कोई विशेष पूछताछ की, न ही कोई अपशब्द, घृणा या नापसंद की भावना प्रकट की। परंतु हमारे ही देश से वहां गए एक टैक्सी चालक ने बिना कुछ पूछे व जाने मुझे दक्षिण भारतीय घोषित कर दिया और फिर उसके चेहरे के भाव से मेरे प्रति तिरस…

हाय मेरी प्याज...

चित्र
''हिन्दी साहित्य में व्यंग्य की एक सुदीर्घ परम्परा रही है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से लेकर हरिशंकर परिसाई और शरद जोशी तक यह कई आयामों में जीवित रही है। इस परम्परा की मुख्य विशेषता यह रही है कि व्यंग्य जैसी तिक्त और मारक शैली को हास्य के रंग में ढालकर उसे प्रेषणीय और दिलचस्प बनाया गया, जिसकी वजह से पठनीयता की व्याकुलता पाठक में अन्त तक बरकरार रही। वर्तमान में गोपाल चतुर्वेदी, के.पी.सक्सेना, श्रीलाल शुक्ल आदि इस विधा में पूरे मनोयोग से सक्रिय हैं। वैसे भी यह माध्यम प्रसंग के सापेक्ष साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा अधिक प्रभावकारी है। यह विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि इस विधा में नयी पीढ़ी के जो रचनाकार काम कर रहे है, उनमें आर.के.भँवर का नाम पूरे भरोसे के साथ लिया जा सकता है।व्यंग्य आज सामाजिक औजार के रूप में प्रयुक्त हो रहा है। निश्चय ही इसका पथ उत्तरोत्तर प्रशस्त हुआ है। श्री भँवर की व्यंग्य-रचनाओं की धार तीखी है : किन्तु मीठी भी। यह व्यंग्यकार की निजी विशेषता कही जा सकती है। वह विवेच्य वस्तु को कड़वी बोली की तरह नहीं : बल्कि मीठी दवा की तरह अपने पाठकों को परोसता है।श्री भँवर अप…

रिश्तों की गरिमा खोता 'भाई'

चित्र
आलेख- डॉ. महेश परिमल आज जीवन की धरती पर रिश्तों की इंद्रधनुषी धूप ऐसी चटकी है कि हर रिश्ता अपने अर्थ खो रहा है. इन्हीं अर्थ खोते रिश्तों में एक रिश्ता है, भाई-बहन का. सदियों से चला आ रहा यह पवित्र रिश्ता श्रद्धा और मर्यादा से परिपूर्ण है. इस रिश्ते को लेकर न जाने कितनी ही बार भाइयों ने अपनी बहनों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, तो कई बार बहनों ने भी अपने धर्म का पालन किया है. भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते पर अब उँगलियाँ उठने लगी हैं. अब तो कहीं भी कोई भी सुरक्षित नहीं है. न बहन और न ही भाई. देखते ही देखते भाई शब्द ने अपनी परिभाषा बदल दी. अब तो भाई शब्द इतना डरा देता है कि जान हलक पर आकर अटक जाती है. बहन अपने भाई से छुटकारा पा सकती है, लेकिन कोई भी इंसान इस भाई से छुटकारा नहीं पा सकता. जिसकी कलाई में राखी बँधी है, वह तो है भाई, पर जिसके हाथ में कोई अस्त्र-शस्त्र है, वह भी तो कुछ है भाई. इस भाई के आगे रिश्तों की गुनगुनी धूप भी आकर सहम जाती है. इसके सामने कोई रिश्ता नहीं होता, इनका रिश्ता केवल अपराध से होता है. आज किसी बहन का भाई होना भले ही फख्र की बात न हो, पर दूसरे ही तरह का भाई होना …

दुनिया हमारे बगैर

चित्र
वर्ल्ड ऑफ बुक्स-डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल तेज़ी से बढती दुनिया की आबादी और तकनीक का कल्पनातीत प्रसार. कहीं ऐसा तो नहीं कि मनुष्य प्रकृति से भी ज़्यादा शक्तिशाली बन गया है? हम बहुत तेज़ी से, हालांकि अनचाहे ही, मौसम को बदल रहे हैं, पारिस्थितिकी को बदल, प्रदूषित और यहां तक कि नष्ट कर रहे हैं, और अपने तथाकथित विकास को कुछ इस तरह धकिया रहे हैं कि इस पृथ्वी के अन्य जीवों को भी एक नए मानव-निर्मित विश्व से तालमेल बिठाने को मज़बूर होना पड रहा है. ऐसे में, यह कल्पना कि अगर अचानक पूरी मानव-जाति लुप्त हो जाए तो क्या होगा? यह दुष्टतापूर्ण कल्पना की है ‘ईको इन माय ब्लड’ (1999) पुस्तक के लेखक, जाने-माने और बहु पुरस्कृत पत्रकार एलन वाइज़मैन ने अपनी सद्य प्रकाशित किताब ‘द वर्ल्ड विदाउट अस’ में. वाइज़मैन ने सवाल किया है कि अगर कोई विषैला वायरस या किसी भी तरह की कोई हलचल रातों-रात हमारी इस पृथ्वी को जन-विहीन कर दे तो जो कुछ मानव ने अब तक बनाया-संजोया है वह और कब तक बचा रह सकेगा. बेशक वाइज़मैन की यह कल्पना शरारती है, एक हद तक रुग्ण भी, लेकिन है विचारोत्तेजक. और यह भी कि किताब इस सवाल पर ही खत्म नहीं हो जाती, इसस…

टोनी मॉरीसन: पूर्वजों का ॠण, काले अतीत की आवाज

चित्र
(टोनी मॉरीसन)
आलेख-विजय शर्माडेढ़ सौ साल पहले एक अमेरिकी लेखक ने अपने पूर्वजों के पाप का प्रायश्चित करने के लिए एक पुस्तक रची, जो आज इतने वर्षों के बाद भी इंग्लिश साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखती है. पुस्तक है 'द स्कारलेट लैटर. इसने लेखक नथैनियल हॉथर्न को स्थापित कर दिया और स्वयं भी इतने वर्षों से विश्व साहित्य में जमी हुई है, अभी भी अमेरिकी साहित्य के शीर्ष पर है. साहित्य जगत में मील का पत्थर है 'द स्कारलेट लैटर’, जिसके बारे में एक विख्यात समीक्षक ने लिखा है, 'साहित्यिक सृजनात्मकता की पराकाष्ठा पूर्णता के उतना निकट, जितना मानवीय प्रयास पहुँच सकता है’. हरमन मेल्विल नथैनियल हॉथर्न को 'अमेरिका का शेक्सपीयर कहता है. इतना ही नहीं इसने अन्य कई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया इस पर 1926 से ले कर अब तक चार-पाँच बहुचर्चित फिल्में बन चुकी हैं और भविष्य में भी इससे काफी संभावनाएँ हैं. इस रचना का उत्स उससे दो सदी पहले सत्रहवीं सदी में है. स्कारलेट लैटर जैसी रचना देने के पीछे एक कारण यह था कि हॉथर्न के पूर्वजों में से एक जॉन हॉथर्न 1692 में सेलम के कुख्यात विच-क्राफ्ट मुकदमे में …

भारत : यात्रा जारी है!

चित्र
वर्ल्ड ऑफ बुक्स-डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल भारतीय पाठक मार्क टली के नाम से भली भांति परिचित हैं. 1935 में कोलकाता में जन्मे और ब्रिटेन में पले-पढे-बढे सर मार्क टली पूरे बाइस साल तक नई दिल्ली में बी बी सी के ब्यूरो चीफ रहे हैं. भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के नागरिक टली को ब्रिटेन में नाइटहुड से तो भारत में पद्मभूषण से नवाज़ा जा चुका है. टली भारत विषयक कई पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें प्रमुख हैं नो फुल स्टॉप्स इन इण्डिया, इण्डिया इन स्लो मोशन, और हार्ट ऑफ इण्डिया. भारत विषयक उनकी ताज़ा किताब का शीर्षक है इण्डिया ’ज़ अनएण्डिंग जर्नी : फाइंडिंग बैलेंस इन अ टाइम ऑफ चेंज. टली महसूस करते हैं कि पश्चिमी राष्ट्र और पश्चिमी लोग भारत के नियंता बन गए हैं. इससे चिंतित होकर वे प्रश्न करते हैं कि भारत का पश्चिमी शैली के भौतिकवाद आदि को गले लगाना, वह भी अपनी विशिष्ट पहचान और संस्कृति को त्यागते हुए, कितना उचित है? वैसे तो टली विनम्रता में यह भी कहते हैं कि “मेरी किताब यह नहीं कहती कि भारत जो भी कर रहा है, सब गलत कर रहा है. मैं तो मात्र यह कहना चाहता हूं कि समायोजन और संतुलन की ज़रूरत है. हमें देखना चाहिये क…

हेरॉल्ड पिंटर: एक सदी के अमर्ष की आवाज

चित्र
(हेरॉल्ड पिंटर - चित्र : साभार नोबेल प्राइज डॉट ऑर्ग)
आलेख -विजय शर्मा हेरोल्ड पिंटर नाम है उस शख्सियत का जो अपने देश के प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर को उसकी गलतियाँ गिनाते हुए बेवकूफ कहने की हिम्मत रखता है. यह वह शख्सियत है जो आज के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को खुलेआम हत्यारा कहता है. यह वह शख्सियत है जिसने अपनी किशोरावस्था में राजाज्ञा का उल्लंघन किया और खुले तौर पर युद्ध में भाग लेने से इंकार कर दिया और जेल जाने के लिए तैयार रहा तथा जिसने सजा के तौर पर जुर्माना भरा. यह वह शख्सियत है जिसने 1966 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री जॉन मेजर के द्वारा नाइटहुड देने की पेशकश को ठुकरा दिया, जो मागरेट थेचर की दक्षिणपंथी नीतियों का कटु आलोचक है. यह वह शख्सियत है जो आज के दौर का इंग्लिश भाषा का सबसे चर्चित नाटककार है, जिससे इंग्लिश भाषा को नए शब्द मिले. यह वह शख्सियत है जो नाटककार होने के साथ-साथ कवि, पटकथा लेखक, अभिनेता, और निर्देशक है. यह वह शख्सियत है जिसने छोटेबड़े उन्तीस नाटक और करीब इतने ही स्क्रीनप्ले लिखने के बाद अपनी सम्पूर्ण शक्ति को समेट कर मानवाधिकारों की जद्दोजहद में खु…

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.