March 2008

भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे (3)

भूपेन हजारिका दिल हूम-हूम करे -दिनकर कुमार ( पिछले अंक से जारी ....) (साथ में सुनिये रेडियोवाणी पर भूपेन दा के गीत यहाँ पर) सात स्वतंत्...

भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे (2)

भूपेन हजारिका दिल हूम-हूम करे -दिनकर कुमार ( पिछले अंक से जारी ....) तीन एम. ई. स्कूल के शिक्षक नीलकान्त हजारिका बाद में सरकारी अधिकारी...

भूपेन हजारिका की जीवनी : दिल हूम हूम करे

भूपेन हजारिका दिल हूम-हूम करे -दिनकर कुमार रचनाकार परिचय: दिनकर कुमार जन्म : 5 अक्तूबर 1967, ग्राम ब्रह्मपुरा, जिला दरभंगा (बिहार) एक ...

कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता - जूता महिमा

जूता चलता है डॉ० कान्ति प्रकाश त्यागी आओ दोस्तों,तुम्हें सुनाएं जूते की महिमा जिसका चल रहा, उसकी ही होती गरिमा रूस के थे ख्रुश्चेव निकेता...

रचना श्रीवास्तव की कविता : होली के हुड़दंग में हो गई जरा सी भूल...

कविता फ़िर गलती हो गई - रचना श्रीवास्तव --------------------------- होली के हुडदंग मे हो गई भूल हमसे भारी बीवी समझ रंग लगा जिसको वो निक...

योगेन्द्र कृष्णा की कविताएं हिंदी काव्य-परंपरा में नया अध्याय जोड़ती हैं : अरुण कमल

योगेन्द्र कृष्णा के काव्य संकलन 'बीत चुके शहर में' का लोकार्पण   पिछले दिनों प्रलेस के तत्वावधान में माध्यमिक शिक्षक संघ सभ...

डॉ. शरद काळे की दो कविताएं

दो कविताएं - डॉ. शरद काळे ओ मेरी अनुभूतियों ओ मेरी अनुभूतियों, समय से पहले ही प्रकाशित हो जाने वाली पत्रिकाओं की तरह यूँ असमय...

प्रेम जनमेजय का व्यंग्य "कौन कुटिल खल कामी" लोकार्पित

प्रेम जनमेजय जैसे ‘खतरनाक’ रचनाकारों से सावधान रहना चाहिए क्योंकि इनकी दृष्टि बहुत पैनी है । - कन्हैयालाल नंदन ‘कौन कुटिल खल कामी’ का लोकार्...

जीवन के तीन रंग

जीवन के तीन रंग -डॉ. ओम प्रकाश एरन (1) धर्मराज ने राशन की दुकान पर पूछा- उत्तर मिला “घासलेट अभी नहीं आया” कुछ दिनों बाद पूछा उत...

महेंद्र भटनागर का होली फाग

फाग -महेंद्र भटनागर फागुन का महीना है, मचा है फाग होली छाक छाई है; सरस रँग-राग ! बालों में गुछे दाने, सुनहरे खेत चारों ओर झर-झर झूम...

ऋषि कुमार शर्मा का आलेख : कान्हा बरसाने में आइ जइयों, बुलाइ गई राधा प्यारी

होली पर्व पर विशेष कान्हा बरसाने में आइ जइयों , बुलाइ गई राधा प्यारी । -ऋषि कुमार शर्मा वृषभान लली राधा और देवकी नंदन कृष्ण की ...

सीताराम गुप्ता का आलेख : होली की प्रासंगिकता

होली की प्रासंगिकताः घातक मनोभावों से मुक्ति का पर्व है रंगोत्सव -सीताराम गुप्ता होली एक ओर तो बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के ...

देवी नागरानी की पुस्तक समीक्षा : प्रवासिनी के बोल

" प्रवासिनी के बोल " सं पादकः डॉ॰ अंजना संधीर प्रिय अंजना, महिलाओं का तू चितवन है सुंदर और सलोना मधुबन है ...

अश्विनी केशरवानी का होली पर आलेख

होली का त्योहार मनायें, ले लेकर अबीर झोली में प्रो. अश्विनी केशरवानी होली केवल हिन्दुओं का ही नहीं वरन् समूचे हिन्दुस्तान का त्योहा...

कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : इन्टरनेट

इन्टरनेट डा० कान्ति प्रकाश त्यागी पड़ोसी श्याम लाल की लड़की ने दरवाज़ा खटखटाया, अन्दर आओ, कैसी हो ! बिटिया रानी, मैंने फ़रमाया । ...

महेंद भटनागर की कविता : नारी

नारी डॉ. महेंद्र भटनागर चिर-वंचित, दीन, दुखी बंदिनि! तुम कूद पड़ीं समरांगण में, भर कर सौगंध जवानी की उतरीं जग-व्यापी क्रंदन में, युग के तम...

राजेन्द्र अविरल की होली पर दो कविताएं

कविता -राजेन्द्र अविरल होली मन की उमंग होली के संग लो मची है हु़ड़दंग पी के चले अब भंग छाई मृदुल तरंग सब रंग ही रंग भीगा...

सीमा सचदेव की कविता कथा - महलों की रानी

कविता-कथा 1.महलों की रानी सीमा सचदेव एक कहानी बड़ी पुरानी आज सुनो सब मेरी जुबानी विशाल सिन्धु का पानी गहरा टापू एक वहाँ पर ठहरा ...