शनिवार, 31 मई 2008

बृजमोहन श्रीवास्तव का व्यंग्य : कहां खो गया कवि मतवारा

कहाँ खो गया कवि मतवारा   -बृजमोहन श्रीवास्तव   साहित्य और संस्कृति पर विविध प्रकार से प्रहार होता रहा है और वह निरंतर बढ़ता जा रहा ह...

राम स्वरूप त्रिपाठी की पुस्तक समीक्षा

समीक्षा काव्य संग्रह-‘‘अभिलाषा”   कवि - कृष्ण कुमार यादव   समीक्षक - डॉ. राम स्वरूप त्रिपाठी   व्यक्तिगत सम्बन्धों की कविता...

कृष्ण कुमार यादव की दो कविताएं

कविताएं -कृष्ण कुमार यादव   आटा की चक्की गाँव की एक अनपढ़ महिला ने मुझसे पूछा सुना है, अमरीका ने आटा चक्की को पेटेंट करा ...

आकांक्षा यादव की कविताएं

कविताएं -आकांक्षा यादव श्मशान कंक्रीटों के जंगल में गूँज उठते हैं सायरन शुरू हो जाता है बुल्डोजरों का ताण्डव खाकी वर्दियो...

शुक्रवार, 30 मई 2008

साक़िब अहमद की कविताएं

यादें -साक़िब अहमद   तुम्हारी कुछ यादें, दिल में आती जाती हैं. बातें, तुम्हारी प्यारी प्यारी बातें, यादें बन कर दिल को तड़पात...

गुरुवार, 29 मई 2008

अनुज खरे का व्यंग्य : ये अपुन का बजट है मामू...

बजट : ए टेलीफिल्म ये अपुन का बजट है मामू -- अनुज खरे   समयावधि : अनंतकाल तक कभी भी देख लें। वैधानिक चेतावनी : ढेर सारे सा...

अशोक कुमार वशिष्ट का आलेख : निर्बलता

आलेख निर्बलता   -अशोक कुमार वशिष्ट   ज्ञानी कहते हैं कि प्रभु आनंद है। वे प्रभु को परमानंद कहते हैं।हम उस परमानंद के अंश हैं। और ह...

बुधवार, 28 मई 2008

सीमा सचदेव की कविताएँ : कविता के लिए वध

चंद कविताएं   -सीमा सचदेव 1.कविता के लिए वध कहते हैं....? कविता कवि की मजबूरी है उसके लिए वध जरूरी है जब भी होगा कोई वध ...

मंगलवार, 27 मई 2008

अश्विनी केशरवानी का आलेख - छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी

छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी प्रो. अश्विनी केशरवानी छत्तीसगढ़ में अनेक स्वनामधन्य साहित्यकार हुए जो महानदी की अजस्...

शालिनी मुखरैया की कविता : मेरे गीले बिस्तर को माँ तुमने, अपने आंचल से सुखा दिया

कविताएं - शालिनी मुखरैया माँ जग में किसने देखा ईश्वर को आखें खोलीं तो पहले पाया तुझको मुझको लाकर इस संसार में ”माँ” मुझ ...

सोमवार, 26 मई 2008

अन्जू - अनुज नरवाल का भाषा सम्प्रेषण पर आलेख

भाषा सम्प्रेषण का एक लोकप्रिय माध्यम है। भाषा का प्रयोग लिखकर या बोलकर किया जाता है। रोजमर्रा के जीवन में ज्यादातर हम अपने विचारों का आदान-प...

संजय सेन सागर की कविताएं

कुछ कविताएं -संजय सेन सागर बस इतनी सी इनायत बस इतनी सी इनायत मुझ पर एक बार कीजिए कभी आ के मेरे जख्मों का दीदार कीजिये । हो जाये बेगान...

सुशील कुमार की पुस्तक समीक्षा : शब्द और संस्कृति

शब्द और संस्कृति'- हमारे समय, लोक और संस्कृति का अर्थपूर्ण अवगाहन --------- डा. जीवन सिंह के अब तक के किये-धरे को लक्ष्य करके यह क...

रविवार, 25 मई 2008

अनुज खरे का व्यंग्य : हमारे मिश्रा जी

व्यंग्य एक ‘कला’ के पतन पर विमर्श -अनुज खरे लो वे धर लिए गए... अबे, कौन धर लिए गए एक उवाच। वे ही तुम्हारे मिश्राजी... रामदुलारे... रिश्व...

शनिवार, 24 मई 2008

अनुज नरवाल रोहतकी के नज़्म, कविता व दोहे

कविताएं -डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी नज्म सागर में गिरा रहा हूं आंख से अपनी इक आसूं आंसू ये जब तक न मिलेगा मेरा दिल करता रहेगा तुमसे ही प्यार,...

राजेश कुमार पाटिल की कहानी : देव

कहानी देव -राजेश कुमार पाटिल निर्मला, समय कितनी तेज गति से चलता है हम यह सोच ही नहीं पाते, वह न तो किसी के लिये ठहरता है न किसी के साथ चल...

शुक्रवार, 23 मई 2008

उमेश कुमार गुप्ता का व्यंग्य : रोड इंसपेक्टर

व्यंग्य रोड इंस्पेक्टर - उमेश कुमार गुप्ता रोड इंस्पेक्टर उर्फ सड़क छाप मजनूं, समाज के ऐसे चिर-परिचित जीव हैं, जिनसे सभी परिचित हैं...

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