रविवार, 11 मई 2008

सीमा सचदेव की कविता - प्रणाम हे माता


मातृदिवस विशेष
प्रणाम करूँ तुझको माता

-सीमा सचदेव



हे जननी जीवन दाता
प्रणाम करूँ तुझको माता
तू सुख समृद्धि से संपन्न
निर्मल-पावन है तेरा मन
तुझसे ही तो है ये जीवन
तुझसे ही भाग्य लिखा जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

माँ की गोद पावन-आसन
हम वार दें जिस पर तन मन धन
तू देती है शीतल छाया
जब थक कर पास तेरे आता
प्रणाम करूँ तुझको माता

इस विशाल भू मंडल पर
माँ ही तो दिखलाती है डगर
माँ ऐसी माँ होती न अगर
तो मानव थक कर ढह जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

हर जगह नहीं आ सकता था
भगवान हमारे दुख हरने
इस लिए तो माँ को बना दिया
जगजननी जग की सुख दाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

धरती का स्वर्ग तो माँ ही है
इस माँ की ममता के आगे
बैकुण्ठ धाम , शिव लोक तो क्या
ब्रह्म लोक भी छोटा पड जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

ऐसी पावन सरला माँ का
इक पल भी नहीं चुका सकते
माँ की हृदयाशीष बिना
मानव मानव नहीं रह पाता
प्रणाम करूँ तुझको माता
क्यों मातृ दिवस इस माँ के लिए
इक दिन ही नाम किया हमने
इक दिन तो क्या इस जीवन में
इक पल भी न उसका दिया जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

माँ बच्चों की बच्चे माँ के
भूषण होते हैं सदा के लिए
न कोई अलग कर सकता है
ऐसा अटूट है ये नाता
प्रणाम करूँ तुझको माता
माँ को केवल इक दिन ही दें
भारत की ये सभ्यता न थी
माँ तो देवी मन मंदिर की
हर पल उसको पूजा जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

बच्चों के दर्द से रोता है
इतना कोमल माँ का दिल है
बच्चों की क्षुधा शांत करके
खाती है वही जो बच जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

सच्चे दिल से इस माता को
इक बार नमन करके देखो
माँ के आशीष से जीवन भी
सुख समृद्धि से भर जाता
प्रणाम करूँ तुझको माता

----
सम्पर्क :
सीमा सचदेव

7ए, 3रा क्रास
रामाजन्या लेआउट
मारथाहल्ली
बैंगलोर-37
----
(चित्र - सौजन्य, सृजन कैमरा क्लब, रतलाम)

1 blogger-facebook:

  1. सीमा जी
    सही कहा आपने। माँ को बस प्रणाम कर लें यही काफी है।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------