बुधवार, 14 मई 2008

वीरेन्द्र जैन के तीन गीत

broken glass (best large)चित्र Flickr सेगीत

--वीरेन्द्र जैन


अगर कहूंगा सही कहूंगा
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अगर कहूंगा सही कहूंगा
इसीलिए चुप अभी रहूँगा

सभी को मीठी मिठाई सुनना
है कौन जिसको सचाई सुनना
न मुंह को खोला
ना कोई बोला
वो बात में अनकही कहूँगा
इसीलिए चुप अभी रहूँगा

वो चापलूसी दुमें हिलाती
हमें न भाये ठकुर सुहाती
छुपा के उनने रखे हुये जो
वो सारे खाते बही कहूँगा
इसीलिए चुप अभी रहूँगा

परम्पराएं रहीं हमारी
हरी को भी भृगु ने लात मारी
अचेत में चेतना जगाने
जो जैसे समझे वही कहूँगा
इसीलिए चुप अभी रहूँगा

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भविष्य की उम्मीद का गीत
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नफरत के फैलाने वालों
आपस में लड़वाने वालों
जिस दिन बुद्धि विवेक ज्ञान की बारिशा आयेगी
तेरी नकली सूरत उस दिन ही धुल जायेगी

भय का भूत रहेगा
जब तक यहाँ अंधेरा है
जहाँ डाक्टर नहीं
वहाँ पीरों ने घेरा है
जिस दिन सब बीमारों को औषधि मिल जायेगी
तेरी ढोंगी सूरत उस दिन ही धुल जायेगी

जब तक हैं अभाव
तब तक ढेरों बहकावे हैं
असली मालिक नहीं दिखे तो
सब के दावे हैं
जिस दिन लिखित पढत सब के आगे आ जायेगी
तेरी झूठी सूरत उस दिन ही धुल जायेगी

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जन्मभूमि आजाद हो गयी
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जन्मभूमि आजाद हो गयी, अगर अवध में राम की
फिर क्यों नौजवान के आगे खड़ी समस्या काम की

इनकी नहीं अवस्था बदली
बिल्कुल नहीं व्यवस्था बदली
भटक रहे हैं मारे मारे फुरसत नहीं विराम की
जन्मभूमि आजाद हो गयी, अगर अवध में राम की
फिर क्यों नौजवान के आगे खड़ी समस्या काम की

व्यापारी लूटे दिन दूना
अफसर लगा रहे हैं चूना
नेता पूंजीपति खाते हैं अब भी रोज हराम की
जन्मभूमि आजाद हो गयी अगर अवध में राम की

झूठे मन झूठे आन्दोलन
इनसे सुविधा पाते शोषण
सुबह सुबह ये बातें करते रहें डूबती शाम की
जन्मभूमि आजाद हो गयी अगर अवध में राम की

--
संपर्कः
वीरेन्द्र जैन
21 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र

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