गुरुवार, 15 मई 2008

अनुज नरवाल रोहतकी की नज़्म

Some Pink Bokeh for Bokeh Wednesday!चित्र - Flickr सेनज़्म

डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी

जिस्म मरते है, ख़्वाब मरते नहीं
आप क्यूं मेरा यकीन करते नहीं
मां की आंखों में बेटी की शादी का ख़्वाब
बेटा बड़ा आदमी बने, ये पिता जी का ख़्वाब
पोते-पातियों को खिलाना, दादा जी का ख़्वाब
पोते की शादी देखूं, होता है ये दादी का ख़्वाब
आरजू मरती नहीं, ख़्वाब मरते नहीं
आप क्यूं मेरा यकीन करते नहीं
होते है दादी-नानी की कहानी में ख़्वाब
बहुत लाज़मी है ज़िंदगानी में ख़्वाब
छुपे होते हैं हर लफ़्ज़ मानी में ख़्वाब
ये ख़्वाब अपने दिलों, अपनी सांसों की तरह
रेज़ा-रेज़ा होकर बिखरते नहीं
आप क्यूं मेरा यकीन करते नहीं
ख़्वाब, रोशनी और हवा की तरह होते हैं
ख़्वाब, आजाद मिज़ाज़ खुशबू के झोंके हैं
मानिंद-ए-वक्त ये भी कहीं ठहरते नहीं
आप क्यूं मेरा यकीन करते नहीं
ख़्वाब प्रेरणा हैं, ख़्वाब स्त्रोत हैं
हर हकीकत, हकीकत से पहले
समझो एक ख़्वाब ही होती है
सोचो! चांद पर जाने का अगर
हमारे ज़हन में कोई ख़्वाब नहीं होता
तो हम कभी चांद पर उतरते नहीं
आप क्यूं मेरा यकीन करते नहीं
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संपर्क:
डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी
454/33 नया पड़ाव, काठ मंडी, रोहतक - 124001 (हरियाणा) भारत

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