रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

साक़िब अहमद की कविताएं

यादें

saquib 29 (WinCE)

-साक़िब अहमद

 

तुम्हारी कुछ यादें,

दिल में आती जाती हैं.

बातें, तुम्हारी प्यारी प्यारी बातें,

यादें बन कर दिल को तड़पाती हैं.

तुम्हारी आखों की वो शरारत,

तुम्हारी प्यारी सी मुस्कुराहट,

मुझसे मिल कर तुम्हारा वो मचलना,

आंखों आंखों वक्त गुजरना,

मुझको हर पल की याद आती है.

यादें बन दिल को तड़पाती हैं.

हमने साथ गुजारे थे जो पल,

खायी थी प्यार भरी जो कसमें,

थाम कर हाथ, हाथ में हमने,

किये थे साथ निभाने के जो वादे,

उन कसमों वादों की याद आती है.

यादें बन दिल को तड़पाती हैं.

क्यूं तुम मुझसे दूर चली गयी,

क्यूं मुझको तन्हा छोड़ चली गयी.

......

‘बेजान फूल’

जब आखिरी बार,

मैंने देखा था तुम्हें.

तुम कितनी मासूम लग रही थी.

तुम्हारा संदली चेहरा,

जैसे हरसिंगार का फूल,

जो, सूरज की पहली किरण पड़ते ही,

साख से जुदा हो कर,

जमीन पर आ गिरा हो.

खामोश, बेजान फूल.

..........

मगर

तन्हा मुझको छोड़ कर,

तुम चली तो गई,

मगर, तुम भी मेरी ही तरह,

तड़पती होगी.

एक मजबूरी, एक बेचैनी,

साथ तुम्हारे भी तो होगी.

पास मेरे हर पल,

साया बन रहती तुम होगी.

मेरी तन्हाई, मेरी खामोशी,

तुझसे कुछ कहती तो होगी.

.....

गम

जाऊं कहा मैं,

गम से घबरा कर.

यह गम तो,

सौंपी हुई तुम्हारी,

विरासत है मुझको.

हजार कोशिशें कर भी लूं लेकिन,

दिल है मेरा कि,

बहलता नहीं है.

मेरी जिंदगी तो,

सिर्फ तुम्हारे लिए ही थी.

तुम ही थी मेरी मसीहा.

तन्हा मुझे छोड़ कर,

तुम चली तो गयी मगर,

अभी तक ढूंढ़ती हैं तुम्हें मेरी निगाहें,

अभी तक तुम्हारी,

सिर्फ तुम्हारी जरूरत है मुझको.

-------------.

 

संपर्क-

साक़िब अहमद

सी@1447@5, इंदिरा नगर, लखनऊ.

ई मेल - saquibdilse@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

बेनामी

likho...likhte raho...ek din likhai hi pahchan banegi.

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget