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संजय सेन सागर की कविताएं

कुछ कविताएं

-संजय सेन सागर



बस इतनी सी इनायत

बस इतनी सी इनायत मुझ पर एक बार कीजिए
कभी आ के मेरे जख्मों का दीदार कीजिये ।

हो जाये बेगाने आप शौक से सनम
आप हैं आप ही रहेंगे एतबार कीजिए ।

पढ़ने बाले ही डर जाये देख कर उसे
किताबें दिल को इतना ना दागदार कीजिए ।

ना मजबूर कीजिये मैं उनको भूल जाउं
मुझे मेरी वफाओं का ना गुनाहगार कीजिए ।

इन जलते दियों को देखकर ना मुस्कुराइये
जरा हवाओं के चलने का इंतजार कीजिये ।

करना है इश्क आपसे , करते रहेंगे हम
जो भी करना है आपको मेरे सरकार कीजिये ।

फिर सपनों का आशियां बना लिया हमने
फिर आंघियों को आप खबरदार कीजिये ।

हमें न दिखाइये ये दौलत ,ये शोहरत
हम प्यार के भूखे हैं हमें बस प्यार कीजिये ।
...........

कब तक सताओगे तुम

कब तक सताओगे तुम , कब तक रूलाओगे
निकलने को है जॉ बताओ कब आओगे ।

गुजर जायेंगे हम तुझे य ही तन्हा छोड़कर
कहो साथ बिताये लम्हों को भुला पाओगे ।

ना यादों में नसीब होंगे ,ना ख़्यालों में आयेंगे
तेरे आंसू से नम मिट्टी में यूं ही महक जायेंगे।

खबर है हमें कि तू मुस्कुराता रहता है हर वक्त
मेरे खून से भीगे अपने दिल को जला पाओगे ।

अहसास है हमें की जाने वाला कभी नहीं आता
मेरे जाने के बाद क्या मुझे तुम बुला पाओगे ।

-------.

हमें यकीं जिन पर होता

हमें यकीं जिन पर होता है, वही दगा दे जाते हैं
जिन्हें पता हम बेगुनाह हैं वही सजा दे जाते हैं

चलो ये देश अच्छा है जहां लुटेरों से लुटते हैं लोग
हमारे देश में अक्सर दरोगा लूट जाता हैं ।

ना हमराही है यहां कोई ना कोई साथ देता है
यहां तो अपना साया भी साथ छोड़ जाता है ।

सुना तो हमने भी यारो बड़े बड़े वीर बसते है
जे तूफां आने से पहले ही घरोंदा छोड़ जाते हैं।

नहीं मतलब निकलता अब यहां आंसू बहाकर भी
यहां तो हर शख्स अपने अश्क दिखाकर गुजर जाता है

नहीं प्यासा यहां कोई जो मयखाने को जाता हो
यहां बसने वाले पपीहों को सागर चूम जाता है ।
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टिप्पणियाँ

  1. बहुत अच्छी रचनायें हैं, लिखग्ते रहें..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. rachana1:12 am

    ati sunder bahut badi baat bahut payare shabdon ke saath kahi aap ne
    badhai
    rachana

    उत्तर देंहटाएं

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