मंगलवार, 13 मई 2008

लुकमान पी का लघुआलेख - नया माहौल


नया माहौल

-लुकमान पी


जहाँ मैं खड़ा हूँ आज, वह जगह आसमान सा खुला और शान्त है। यहाँ छुपाके जीने वाले कम दिखाई देता है। ये नया दौर जो शुरु हुआ छह साल पहले, मुझे अफसोस नहीं था कि मुझे यहाँ आना पड़ा। क्योंकि मुझे ज्यादा सपना देखने की आदत नहीं है।

जहाँ मैं खड़ा हूँ आज, वहाँ अमीरों की महफिल है। यहाँ आने के पहले, मुझे बताया गया था, ‘‘जिन चीज़ों को तुम सपने तक में भी देखा नहीं होगा, उन चीज़ों को अपने आखों के सामने देख सकते हो महसूस का सकते हो। अपने सफर के लक्ष्य को सदैव जी मैं रखो और आगे बढ़ते जाओ। ‘‘हाँ, मैं देख पा रहा हूँ उन चीज़ों को जहाँ जिंदगी हसीन है, और समाँ नशीली, क्योंकि इन खुले हुए आसमान के नीचे हैं उपस्थित, अनगिनत मदहोश जवान सितारे जिन्हें यह नहीं पता कि कैसी जिन्दगी वे जी रहे हैं? वाकई में वे क्या कर रहें है? मेरे आँखों के सामने नाचते ऐश कर रहे है वे नशीले सितारे। कभी-कभी उनमें से एक होने की आशा तो होती है जी मैं, मगर मैं रहता हूँ खामोश। खामोशी है मेरा हथियार । पता नहीं कब तक जारी रहेगा मेरा ये नया तरीका। पता नहीं कब फूट पड़ेगी मेरी ये नई खामोशी भरी जिंदगी।

अपने लिए एक हद मैंने रचा है। मुझे सौ फीसदी विश्वास है कि मैं उस हद को कभी पार नहीं करूँगा।
इस भरोसे से मैं अपनी जिन्दगी जी रहा हूँ।
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संपर्क:

लुकमान पी
विजुअल कम्यूनिकेशन 1,
डॉ जी आर दामोदरन विज्ञान महाविद्यालय,
कोयम्बटूर 14

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