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अनुज नरवाल रोहतकी के नज़्म, कविता व दोहे

कविताएं

-डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी

नज्म
सागर में गिरा रहा हूं
आंख से अपनी इक आसूं
आंसू ये जब तक न मिलेगा
मेरा दिल करता रहेगा
तुमसे ही प्यार, तुमसे ही प्यार
ये मन का सूरज मेरे यारा
करता रहेगा जब-तक उजियारा
रोशनी धड़कन में रहेगी जब-तक
करता रहूंगा यार मैं तब-तक
तुमसे ही प्यार, तुमसे ही प्यार
गुल में रहेगी जब-तक खुशबू
चमकते रहेंगे जब-तक जुगनू
तब-तक तेरा बनकर मजनू
लेकर तेरे इश्क का जुनूं
हंसता रहेगा, करता रहेगा
तुमसे ही प्यार, तुमसे ही प्यार
ये जमीं ये आस्मां है जब-तक
जमीं पर हवा रवां है जब-तक
तारों में रोशनी जब-तक है बाकी
जीवन जब-तक साथ है साथी
तेरा ये दीवाना करता रहेगा
तुमसे ही प्यार, तुमसे ही प्यार
मौसम बदलते रहेंगे जब-तक
चाँद-सूरज निकलते रहेंगे जब-तक
बादलों में बूंदों का खजाना रहेगा
जब-तक बहारों का आना-जाना रहेगा
मेरा इश्क तुमपर मरता रहेगा
और ये दिल करता रहेगा
तुमसे ही प्यार, तुमसे ही प्यार

....
जब भी तुम जन्मदिन बनाओ
याद करके उस दिन एक पेड़ लगाओ
वो पेड़ हमें ताजी हवा देगा
हमारे जीवन को बढ़ा देगा
जन्मदिन पर जो आएं मेहमान
खिलौने,चॉकलेट अगर लाएं मेहमान
उनको कहना, माफ करना श्रीमान
मुझको खिलौने या चॉकलेट नहीं चाहिए
मुझे केक या आमलेट नहीं चाहिए
तोहफा ही देना चाहते हैं आप अगर
तो पेड़ लगाना, घर के आंगन में जाकर
जब वो पेड़ बडा होगा
ताजी-ताजी हवा देगा
खाने को मीठे-मीठे फल देगा
मेरे जन्मदिन का यह तोहफा
सबको साफ सुथरा कल देगा
(नोट- यह कविता २० जनवरी २००८ के दैनिक ट्रिब्यून के रविवारीय अंक में
प्रकाशित हो चुकी है।)

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रक्तदान मौजू पर कुछ दोहे

१,बडे पुण्य का है काम
रक्तदान, रक्तदान, रक्तदान

२,मेरी बात पर दें आप विशेष ध्यान
तीन महीनें में एक-बार जरूर करें रक्तदान

३, हमें मालूम हैं मानी रक्तदान के
काम आता है इन्सान,इन्सान के

४,आफ रक्तदान से बच सकती है किसी की जान
फिर संकोच कैसा, जी भरकर करें रक्तदान

५, ये सच है दुनियावालों, रक्तदान महादान होता है
जो करता है रक्तदान, सही माइने में वही इन्सान होता है।

------


संपर्क:
डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी
454/33 नया पड़ाव, काठ मंडी, रोहतक -124001 हरियाणा, भारत

e-mail- dr.anujnarwalrohtaki@gmail.com
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