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कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य-व्यंग्य कविता

अतीत के झरोखे

-डॉ० कान्ति प्रकाश त्यागी

धीरे धीरे हम बड़े होने लगे

निकर से पैन्ट में आने लगे

शुभ मुहूर्त निकलवाया

बताशों भरा थाल मंगवाया

विधिवत दाखिला करवाया

हमारा असली नाम बतलाया


पहले दिन दादाजी के साथ गए

दादाजी के साथ वापिस गए

दूसरे दिन जब स्कूल,नहीं गए

स्कूल के बच्चे पकड़ने गए

ज़िद करके, ज़मीन पर लेट गए,

जोर जोर से रोना शुरु किया

कुछ इंतज़ार करने के बाद

बाहुबलियों ने कंधे पर धर लिया


शुरु में रो कर, बुरा हाल मचाकर

बाद में बिना रोए धोए,स्कूल गए

औरों को देख कर,मास्टर साहब की

स्नेहमय भाषा भली भांति समझ गए

हाथ में तख़्ती-बस्ता थमा दिया

स्कूल का रास्ता बता दिया


से अनार, से आम

से गुरुजी, से प्रणाम

एक से दस तक की गिनती

सुनानी पड़ी, बिना किसी गलती

पहाड़े तो पहाड़ जैसे लगते

क्यूं, आठ दूनी सोलह होते

पहाड़े रटना शुरु किया

इन्हें बीस तक याद किया


काली चमकती तख़्ती पर

खड़िया से लिखा जाता था

सबसे साफ़ लिखने वाला

कक्षा में अव्वल कहलाता था

समय तेज़ी से बदलता गया

पढ़ने का स्तर बढ़ता गया


पढ़ने लगे, बागवानी,इतिहास भूगोल

प्राचीन संस्कृति, भू को बताया गोल

अंकगणित में अंकों का खेल था

रेखागणित में रेखाओं का मेल था

परन्तु बीज़गणित में, बीज़ों का

कोई भी खेल नहीं था

केवल अक्षरों का मेल था


सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यता पढ़ी

मोहनजोदोड़ो, हड़प्पा की खुदाई पढ़ी

हड़प्पा से लगी हड़पने की बात

जैसे हम करते थे दिन और रात

मोहनजोदोड़ो ऎसा लगा

जैसे मोहन जी दौड़ो


बम्बई से लन्दन का समुद्री मार्ग बतलाया

पत्थर घर्षण से आग का जलना सिखलाया

मूलधन पर चक्रवृद्धि ब्याज़ निकालना सिखाया

न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण, खींचना सिखाया

तूलसी, सूर, मीरा, कबीर का साहित्य समझाया


गौतमबुद्ध, भगवान महावीर पढ़ाए

सम्राट अशोक,चन्द्रगुप्त, चाणक्य पढ़ाए

सिकन्दर का आक्रमण, पुरू की वीरता

चाणक्य की कूटनीति, चन्द्रगुप्त की शूरता

कलिंग विजय के बाद अशोक का हृदय परिवर्तन

बौद्ध धर्म का प्रचार, अनेक विद्वानों को आमंत्रण

ईसा मसीह का जन्म एवं मृत्यु दंड

धर्म के ठेकेदारों का फ़ैलाया पाखंड


कितने साल बाद, बाप की आयु

बेटे की आयु की तिगुनी होगी

कैसे बाघ, बकरी को घास सहित

बिना झंझट नदी पार करनी होगी


परिधि, क्षेत्रफल, आयतन

भार, मात्रा, संतुलन

विलय, विलेयक, विलयन

अम्ल क्षार,लवण

बाढ़, ज्वालामुखी, भूकम्पन

स्नेह, वात्सल्य, आलिंगन

स्पर्श, आशीर्वाद, स्पंदन


कलियां, भौंरें, गुंजन

घृणा, करुणा, आकर्षण

चीख़, पुकार, क्रन्दन

जन्म, जीवन, मरण

त्रिभुज,चतुर्भुज, पंचभुज

वर्गाकार, आयताकार, वृत्ताकार

व्याकरण,समास, अलंकार


ठोस, द्रव्य और गैस

बकरी, गाय और भैंस

विद्युत, प्रकाश, ध्वनि

कूप, आवाज़, प्रतिध्वनि

मन, माया, महाठगिनि

फल, प्राप्ति, करनी


फार अप्पल, बी फार बैट

फार आऊल. सी फार कैट

टिट फार टैट, रेमेम्बर दैट

इफ़ यू किल माई डाग,

आई विल, किल योर डाग


आर्कमिडिज डूबते डूबते बच गया

हमारे लिए बड़ी मुसीबत कर गया

यदि सेव न्यूटन के सामने ना गिरता

हमें, गुरुत्वाकर्षण याद करना पड़ता

मानव मेंढक की शरीर रचनी पढ़ी

पेड़ पौधों की अनेक जाति प्रजाति पढ़ी


जैम्सवाट ने तश्तरी से उड़ती भाप देखी

थॉमस एडिसन ने बिज़ली की राह देखी

जिस गति से हमारी यह आयु बढ़ रही थी

चौगुना गति से विषयों के मार पड़ रही थी

कौन कब पैदा हुआ, कब और कहां हुआ

कितने साल राज किया, कब रुखसत हुआ

बाप और बेटों के नाम याद करने पड़ते थे

जन्म और मृत्यु के दिन याद करने पड़ते थे


भारत, प्राचीन से मध्यकालीन

मध्यकालीन से अर्वाचीन हो गया

मुग़लों और अंग्रेजों से मुक्त हो गया

समीकरण सरल से जटिल हो गए

शिक्षा पाने के ढंग आधुनिक हो गए

हम शिशु से पूर्ण व्यस्क हो गए

स्नातक हो कर , शादी योग्य हो गए

--------.

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भारत, प्राचीन से मध्यकालीन

मध्यकालीन से अर्वाचीन हो गया

मुग़लों और अंग्रेजों से मुक्त हो गया

समीकरण सरल से जटिल हो गए

शिक्षा पाने के ढंग आधुनिक हो गए

हम शिशु से पूर्ण व्यस्क हो गए

स्नातक हो कर , शादी योग्य हो गए

बहुत ही सुंदर रचना। साधुवाद।

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