---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

वेद प्रकाश की किताब : हिन्दी कम्प्यूटरी (1)

साझा करें:

हिंदी कंप्यूटरी सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकार हिंदी कंप्यूटरी सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकार ...

हिंदी कंप्यूटरी

hindi computri

सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकार


हिंदी कंप्यूटरी

सूचना प्रौद्योगिकी के

लोकतांत्रिक सरोकार

ved prakash

वेद प्रकाश

लोकमित्र


लोकमित्र

1/6588, सी-1, रोहतास नगर (पूर्व)

शाहदरा, दिल्ली-110032

दूरवाक् : 22328142

@ वेद प्रकाश

प्रथम संस्करण 2007 ईस्वी

मूल्य : एक सौ पचहत्तर रुपये

आवरण : कमलकांत

HINDI COMPUTEREE

Written by Ved Prakash

Price : Rs. 175.00

LokMitra

1/6588, C-1, Rohtas Nagar (East)

Shahdara, Delhi-110032

Telephone : 22328142

पूज्य पिता श्री राम प्रसाद

एवं माता श्रीमती लाजवंती को सादर समर्पित,

जिन्होंने अपार कष्ट सहकर भी

मुझे सदैव आगे बढ़ाया


भूमिका

सूचना क्रांति की रफ्तार का अंदाज़ लगाने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि आप याद करें कि वाई टू के में प्रवेश करने से पहले याने सन् 2000 के पहले आपके घर-दफ़्तर, मोहल्ले-पड़ोस में कितने मोबाइल फोन थे, कितने इंटरनेट कनेक्शन। जो चीज़ें कुछ ही बरस पहले तक बड़े लोगों के विशेषाधिकार के दुर्ग में सुरक्षित थीं, वे आज साधारण लोगों तक भी पहुँच रही हैं। अब मोबाइल फोन की नुमाइश या इंटरनेट कनेक्सन का ज़िक्र करके कोई अपने आपको ‘चुने हुए लोगों’ की श्रेणी में नहीं मान सकता। अब समाज कंप्यूटर भगवान के अपने ख़ास लोगों और उस भगवान से वंचित साधारण मनुष्यों के बीच बँटा हुआ नहीं रह गया है।

विस्तार किसी भी प्रौद्योगिकी का स्वभाव है; उसके बने रहने की शर्त है। जितने अधिक उपभोक्ता, उतनी सस्ती और सक्षम तकनीक—प्रौद्योगिकी के इतिहास में यह लगातार होता आया है। लेकिन केवल इतना ही होता रहे तो एक अन्य प्रकार का वर्ग-विभाजन भी समाज में पैदा हो जाता है। कुछ लोग ज्ञान-विज्ञान का उत्पादन करते हैं, कुछ लोग इस समूची प्रक्रिया के हाशिए पर खड़े या पड़े या तो बस उपभोग करते रहें या ज्ञानियों का रौब खाते रहें। अपने समाज में ऐसा विभाजन ज्ञान के हर क्षेत्र में दीखता है, सिर्फ तकनीक ही के क्षेत्र में नहीं।

यह साफ है। अपने यहाँ ज्ञान-विज्ञान और सोच-विचार की भाषा कुछ और है; और उस ज्ञान-विज्ञान को बेचने की भाषा कुछ और। पैसा तो हिंदी में अपना माल बेचने से ही मिलता है, वह माल चाहे गहना-कपड़ा जैसा हो चाहे फिल्म या सीरियल जैसा। इसीलिए प्रोडक्ट का विज्ञापन हिंदी में होता है, सीरियल हिंदी में बनाए जाते हैं। एक से एक नकचढ़े चैनल हिंदी में खुद को लाँच करते हैं—लेकिन इस सब चीज़ों से जुड़े फ़ैसले अंग्रेज़ी में लिए जाते हैं। हिंदी प्रचार की भाषा है --- अंग्रेज़ी फैसलों की।

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यह स्थिति डिज़िटल विभाजन कहलाती है। इस विभाजन को बढ़ावा देने वाला एक तत्त्व हम हिंदी वालों का नए के प्रति नकार भी है। हिंदी के कुछ धनी धोरी तो प्रौद्योगिकी के व्यवहार रूपों के प्रति अपने अज्ञान में रस भी लेते हैं, उस पर गर्व भी करते हैं। अज्ञान के इस आत्मविश्‍वास को नई पीढ़ी के भी संस्कार का हिस्सा बनाने का प्रयत्‍न वे बड़े आत्मविश्‍वास के साथ करते हैं। प्रौद्योगिकी से वंचित होने को वे ‘सरल हृदयता’ के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करते हैं—हालाँकि ‘सरल हृदयता’ से उनका संबंध इतना सरल होता नहीं। सच तो यह है कि डिज़िटल विभाजन उसी बृहत्तर विभाजन का एक पहलू है, जो ज्ञान पर कुछ लोगों के एकाधिकार का परिणाम भी है और कारण भी।

ऐसे विभाजन को तोड़ना गहरे अर्थ में समाज के लोकतांत्रिकीकरण में योगदान करना है। श्री वेद प्रकाश की यह पुस्तक ऐसे योगदान के रूप में ही देखी जानी चाहिए।

श्री वेद प्रकाश ने कंप्यूटर-विद्या किसी से बाकायदा सीखी नहीं, अपने आपको स्वयं सिखाई है। ऐसा बहुत से लोग करते हैं। वेद प्रकाश की विशेषता यह है कि उन्होंने कंप्यूटरी को अपनी लोकतांत्रिक सामाजिक चेतना के साथ जोड़ कर अपनाया है। पिछले कई बरसों की लगन और मेहनत से वे स्वयं तो कंप्यूटरी के उस्ताद बन ही गए हैं, इस उस्तादी को बाँटना जैसे उन्होंने अपना मिशन बना रखा है। इस मिशन का प्रसाद बीच-बीच में मुझे भी मिलता रहता है। बहुत ही खुशी की बात है कि अब वेद प्रकाश ने अपनी जानकारी और अनुभव के आधार पर हिंदी कंप्यूटरी से जुड़ी ग़लतफहमियों और संकोचों रो दूर करने का प्रयत्‍न इस छोटी सी पुस्तक के जरिए किया है।

इस पुस्तक को पढ़ना आपको पढ़ना कम, बतियाना ज़्यादा लगेगा। इतने साफ-सुथरे ढंग से, इतने व्यावहारिक नज़रिए से वेद प्रकाश ने हिंदी कंप्यूटरी से जुड़े मुद्दों को समझाया है कि बिल्कुल आरंभिक पाठक के लिए भी पुस्तक अत्यंत उपयोगी हो गई है। इसी के साथ, वेद प्रकाश ने हिंदी कंप्यूटरी के व्यापक सामाजिक और सैद्धांतिक पहलुओं पर ध्यान लगातार जमाए रखा है। इसीलिए यह किताब हिंदी में कंप्यूटरी करना सिखाने वाली किताब भर नहीं, बल्कि इस विषय पर लोकतांत्रिक ढंग से सोचने का न्योता देने वाली किताब है।

इस किताब को पाठक हाथों हाथ लेंगे—कम से कम मुझे तो इस बात का पूरा यकीन है।

पुरुषोत्तम अग्रवाल

45, दक्षिणापुरम,

जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय,

नई दिल्ली- 110067

--------

अपनी बात

सन् 1995 की बात है. किसी पत्रिका में हिंदी के विज्ञान लेखक गुणाकर मुळे का एक लेख मेरी नज़र से गुज़रा जिसमें उन्होंने कहा था कि एक लंबे समय से वे अपने लेख सीधे कंप्यूटर पर टाइप करते हैं. और वे चाहते थे कि हिंदी के लेखक भी कंप्यूटर मित्र हो जाएँ, नहीं तो हिंदी का भविष्य खतरे में पड़े या न पड़े हिंदी के लेखकों का भविष्य ज़रूर खतरे में पड़ जाएगा.

यह बात कहीं न कहीं मेरे भीतर पलती रही. हमारे कार्यालय में सभी सरकारी कार्यालयों की तरह अंग्रेज़ी का माहौल था. हिंदी के नाम पर प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार योजनाएँ, हिंदी बैठकें भी चलती रहती थीं. इनके साथ ही अंदर ही अंदर हिंदी में काम की मात्रा धीरे-धीरे ही सही बढ़ती जा रही थी. इसी बीच कार्यालय में कंप्यूटर का प्रवेश हुआ. शुरू में यह काफी सीमित था. कंप्यूटर पर टाइप मात्र करने वाले लोग किसी टैक्‍नोक्रेट के समान श्रद्धा से देखे जाते थे. हिंदी विभाग के लोग तो सहम कर उधर ताकते तक न थे.

गुणाकर मुळे की बात हिंदी अधिकारी होने के नाते मन में कहीं कसकती भी थी. इसी कशमकश में दिन बीत रहे थे कि हमारे मुख्यालय ने हिंदी सॉफ्टवेयर की सीडी भेज दी. यह सीडी भारत सरकार के संस्थान सी-डेक के हिंदी सॉफ्टवेयर एएलपी (एपेक्स लैंग्वेज़ प्रोसेसर) की थी. यह एक डॉस-आधारित स्वतंत्र बहुभाषी हिंदी शब्द संसाधक था. लगभग उतना ही शक्तिशाली और सुविधा संपन्न जितना कि उस समय वर्ड स्टार नामक अंग्रेज़ी सॉफ्टवेयर था. उनके इस कदम ने मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी. सबसे ज्यादा हम ही खिले हुए थे. मैं सोच रहा था कि अब हिंदी के विकास और प्रसार को कौन रोक सकता है.

लेकिन जल्द ही मुझे पता चल गया कि कंपनी का काम जिन सॉफ्टवेयरों में होता है, यह उनसे काफी अलग और काफी सीमित है. मेरे उत्साह पर तुषारापात हो गया. पर कोई बात नहीं. कंप्यूटर की पवित्र-पावन दुनिया में हिंदी का प्रवेश तो हुआ.

लेकिन ठहरिए, इसके साथ एक और समस्या आई. जो एएलपी सॉफ्टवेयर हमें भेजा गया था उसमें केवल इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल था. चूँकि वह मैनुअल टाइपराइटर के कुंजीपटल से बुनियादी रूप से भिन्न था इसलिए हमारी टाइपटिस्ट ने उस पर टाइप करने से मना कर दिया. इस चक्‍कर से निकलने के लिए हमने सोचा कि एक कुंजीपटल खरीद लेते हैं जो रेमिंग्टन के हिंदी कुंजीपटल जैसा हो. ताकि हमारी टाइपिस्ट को उस पर काम करने में कठिनाई न हो.

कुंजीपटल विक्रेता ने हमारा ज्ञान वर्धन किया कि यह मामला कुंजीपटल का नहीं, सॉफ्टवेयर का है, इसलिए बेहतर हो कि हम उसका कंपनी का सॉफ्टवेयर खरीद लें जिसमें इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल के साथ-साथ रेमिंग्टन कुंजीपटल और एग्ज़ीक्यूटिव कुंजीपटल भी दिया गया है.

अभी यह चल ही रहा था कि कार्यालय में विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम ने प्रवेश किया. जिसके साथ ही एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल और एमएस पावरप्वाइंट थे. अंग्रेज़ी में बनी प्रस्तुतियों को देख कर मन सालता रहता था कि यह सब हिंदी में कब होगा. इससे मुझे अहसास हो गया कि मंज़िल अभी दूर है. लेकिन मैं यह भी समझ गया कि मंज़िल दूर भले ही हो, पर हासिल की जा सकती है. लेकिन कैसे? मैं एक हिंदी अधिकारी, भाषा की बारीकियों को तो समझता था, सहयोगियों की अंग्रेजी़ मानसिकता के दाँव-पेचों से भी अनभिज्ञ नहीं था. परंतु कंप्यूटर की तकनीक का क्या करूँ? वह कहाँ से सीखूँ?

इसी बीच प्रचार सामग्री के मुद्रण के समय पता चला कि डीटीपी की दुनिया में हिंदी का प्रवेश हो चुका है. ऐसी ही स्थिति में एक दिन हिंदी अधिकारी को ढूँढते हुए एक सॉफ्टवेयर विक्रेता आए. उनका नाम था श्रीकांत और वे एसआरजी कंपनी से जुड़े थे. उन्होंने मुझे कहा कि अगर हम उनका सॉफ्टवेयर खरीद लें तो वे सब काम जो अंग्रेज़ी में होते हैं, हिंदी में भी हो सकेंगे.

उनकी इस बात ने मेरी बरसों की हसरत को फिर जगा दिया और हमने ठान लिया कि अब चाहे कुछ हो जाए, हिंदी को कंप्यूटर पर उसका उचित स्थान दिलाना ही मेरा मकसद होगा.

1996 में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यपालक बिल गेट्स भारत आए. तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री एच.डी. देवेगौड़ा से मुलाकात के समय उन्होंने वादा किया कि विंडोज़ के अगले संस्करण में वे हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं को भी शामिल कर लेंगे.

1996 में हिंदी दिवस के अवसर पर 14 सितंबर को तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव ने पीसी-डॉस के हिंदी संस्करण का विमोचन किया. जिसमें एक हिंदी प्रोग्रामिंग भाषा भी शामिल थी. लेकिन तब तक ज़माना डॉस छोड़कर विंडोज़ के वातावरण में प्रवेश कर चुका था. इसलिए इस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया.

विंडोज़ 98 तो नहीं, पर विंडोज़ 2000 और माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के दक्षिण एशियाई संस्करण में हिंदी समर्थन प्रदान कर माइक्रोसॉफ्ट ने अपना वादा निभाया.

तब से हिंदी कंप्यूटरी लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है.

हालाँकि समस्याओं ने इसका दामन नहीं छोड़ा, कभी फोन्ट की समस्या, कभी कुंजीपटल की समस्या, कभी पुराने आँकड़ाकोशों की समस्या, पर इसने आगे बढ़ना भी नहीं छोड़ा. हिंदी कंप्यूटरी की कहानी जनभाषा हिंदी और इसके समर्थकों के अथक प्रयासों की कहानी है. यह एक ज़िंदा भाषा की प्रतिकूल परिस्थितियों में डटे रहने, उनका मुकाबला करने और कभी हार न मानने की कहानी भी है. इसके लिए हिंदी भाषी जनता और उन सभी को जो इस प्रयासों में जुटे रहे, मेरा शत-शत प्रणाम.

इन्हीं संघर्षों की गाथा इस पुस्तक का विषय है. यह कहानी तकनीकी होने के बावजूद काफी रोचक है. इसमें हिंदी कंप्यूटरी के भविष्य का पथ भी चिह्नित करने का प्रयास किया गया है.

लेकिन मेरी बात अधूरी रह जाएगी यदि मैं उन तकनीकी लोगों का ज़िक्र न करूँ जिन्होंने हर कदम पर इस विषय को समझने में मेरी सहायता की थी. मेरे छोटे-छोटे प्रयासों को उत्साहपूर्वक अपनाया था. सबसे पहले सी-डेक, बेंगलूर के श्री सुमन सरकार, इन्होंने हर तकनीकी विषय को मुझे समझाने का प्रयास किया. तकनीकी शब्दावली के जाल में से सार कैसे ग्रहण किया जाता है, यह सिखाया. कंप्यूटर की व्यवहारिक दिक्‍कतों के लिए मेरे बेंगलूर कार्यालय की श्रीमती एस.विजयश्री ने मुझे काफी सहयोग दिया. और धैर्यपूर्वक मुझ सरीखे तकनीक अनभिज्ञ आदमी को तकनीक के साथ रहना सिखाया.

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बेंगलूर की सदस्य सचिव श्रीमती विजया मल्लिक ने मेरे कंप्यूटर संबंधी लेखों को छाप कर मेरा उत्साह बढ़ाया. मेरे धैर्यवान मित्र श्री भूपेंद्र कुमार ने मेरे साथ टीम बना कर जिस तरह हिंदी कंप्यूटरी को आगे बढ़ाया उससे मेरे विचार मूर्त रूप ग्रहण कर सके.

मेरी कंपनी के सभी वरिष्ठ अधिकारियों का मुझे भरपूर समर्थन मिला, शब्दों में उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना काफी कठिन कार्य है. फिर भी, मैं बेंगलूर कार्यालय के तत्कालीन प्रभारी पी. आर. तिरुमलै, तथा अपने वर्तमान विभागाध्यक्ष श्री डी.के. बबूता, कार्यालय प्रभारी श्री ओ.पी. पाण्डेय जी और सहयोगी श्री विवेक सक्सेना के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ.

सी-डेक, दिल्ली के श्री जसजीत सिंह तो इस पुस्तक के शब्द-शब्द में मौजूद हैं. इसके ड्राफ्ट को पढ़कर उन्होंने अपने बहुमूल्य विचारों से इस किताब को संवारने में जो मदद की है, उसे बयान करना संभव ही नहीं.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने ही मुझे प्रेरित किया कि मैं अपने विचारों को पुस्तक रूप दूँ. प्रो.पुरुषोत्तम अग्रवाल ने ठीक ही हिंदी कंप्यूटरी को भारत के लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा माना है. बिना हिंदी या भारतीय भाषाओं के कैसा भारत?

पुस्तक के आवरण के लिए मैं अपने मित्र चित्रकार एवं भित्ति मूर्तिकार कमलकांत का आभारी हूँ.

पुस्तक के लिखने में मेरी पत्‍नी कृष्णा प्रिया और पुत्री प्रज्ञा एवं पुत्र सम्यक का आभार प्रकट करना उनके प्रेम, आत्मीयता और समर्पण के प्रति कृतघ्‍नता होगी.

सभी हिंदी प्रेमियों से अनुरोध है कि वे इस पुस्तक की त्रुटियों और खामियों से अवगत कराने का कष्ट करें ताकि इसे और अधिक प्रामाणिक व उपयोगी बनाया जा सके.

वेद प्रकाश

273, पाकेट-डी,

मयूर विहार, फेज़ 2,

दिल्ली-110091

===

क्रमश: अगले अंक में जारी….

---

tag: hindi computing, computing in hindi, hindi computing - problems and solutions, hindi enabled software and hardware, software programming in hindi

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 2
  1. इस विषय पर मैंने तुरंत सर्च किया तो पाया कि लिखा तो गया है लेकिन इस अंदाज में नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस पुस्तक का परिचय पढ़कर बहुत अच्छा लगा। आगे इसकी विषय-सूची भी देने का कष्ट करें तो इस पुस्तक के बारे में और रूचि जागे।

    उत्तर देंहटाएं

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3913,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,260,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2872,कहानी,2166,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,495,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,91,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,330,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,54,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,23,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,1137,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1957,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,686,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,722,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,72,साहित्यम्,4,साहित्यिक गतिविधियाँ,193,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,73,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: वेद प्रकाश की किताब : हिन्दी कम्प्यूटरी (1)
वेद प्रकाश की किताब : हिन्दी कम्प्यूटरी (1)
http://lh5.ggpht.com/raviratlami/SKhHxsOm0gI/AAAAAAAADhk/-LOaZnEETGY/hindicomputri_thumb1.jpg?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/raviratlami/SKhHxsOm0gI/AAAAAAAADhk/-LOaZnEETGY/s72-c/hindicomputri_thumb1.jpg?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2008/08/1.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2008/08/1.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ