आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

सूरज तिवारी 'मलय' की कविताएँ

100_7127

समझ

बच्‍चा जब तक

रहता है मां के पास

डर नहीं रहता

उसे किसी का

मां की आंचल में

सुरक्षित महसूस करता है

अपने आप को

नही जानता वह

आधुनिक इंसान के

परमाणु बमों को

आग्‍नेयास्‍त्रों को

वह तो बस मां की

गोद को ही जानता है ।

मां भी

बच्‍चे के लिए

भूल जाती है

अपना सब कुछ

पूर्णतः समर्पित होती है

बच्‍चे के लिए

मां की ममता के आगे

हार भले ही न माने

आज के परमाणु बम

या मिसाइल

जो लाखों मील तक

प्रहार कर देते हैं

लेकिन हार मान जाते हैं

वे इंसान जो खुद ही

बनाते हैं इन

आग्‍नेयास्‍त्रों को

दुनिया को खत्‍म करने के लिए ॥

----0----

----

कविता –2

द्वापर में

धरा धाम पर

अवतरित हुए

कृष्ण नर रूप में

छठ्‌ठी के दिन से

नष्ट किया उन्‍होनें

पूतना राक्षसी को

बाद में आते गए

अधासुर, बकासुर,

धेनुकासुर आदि

एक एक कर

सब समाते गए

कृष्ण में ।

सारथि बन

अर्जुन की रथ हांके

रणक्षेत्र में

गीता ज्ञान

-----

कविता –3

 

हमारी इस सुंदर धरती पर

इंसानों की स्‍वार्थपरता

खत्‍म न कर दे

पक्षियों की चहचहाहट

विलुप्‍त न हो जाये

माटी की सौंधी सौंधी महक

कृत्रिम रसायनों के प्रयोग से........

पावन, सुंदर पौधों में

जब खिलना ही बंद हो जाएगा

सुरभित/सुगंधित पुष्प

तब कहां बैठेंगी......?

तितलियां/भंवरे

रस चूसने के लिए ॥

अपने ही आसमां के नीचे

हम हो रहे असुरक्षित

सूनी न हो जाए

संपूर्ण धरती हमारे कृत्‍यों से

तब आखिर........

क्‍या कर लेंगे हमारे

सेटेलाईट , मोबाईल, कम्‍प्‍यूटर

या कोई अन्‍य

अत्‍याधुनिक आविष्कार

जब उन्‍हें नियंत्रित करने वाले

हाथ ही सलामत न रहें

तब फिर से राज करेंगे

डायनासोर जैसे सरीसृप

इस सूखी , वीरान हो रही

धरती पर और

जिम्‍मेदार होगा

आज का आधुनिक कहलाने वाला

हाइटेक इंसान ..... ।

----0----

परिचय

नाम - सूरज तिवारी 'मलय'

पिता - श्री चंद्रचूड़ तिवारी

पता - ब्राम्‍हण पारा, लोरमी

जिला-बिलासपुर छ.ग.

पिन-495115

उम्र - 30वर्ष जन्‍मतिथि 30/07/1977

संप्रति - स्‍वतंत्र लेखन कार्य, सहसचिव मनियारी साहित्‍य समिति, लोरमी, स्‍वतंत्र पत्रकारिता ।

रचना प्रकाशन- बिहार, उत्‍तराखण्‍ड, उ.प्र. मध्‍यप्रदेश एवं छग की अनेक साहित्‍यिक पत्रिकाओं में

रचना का प्रकाशन होचुका है ।

सम्‍मान - अनेक साहित्‍य समितियों से पुरस्‍कृत ।

E-mail- surajtiwarimalay@yahoo.com

surajtiwarimalay@gmail.com

surajtiwarimalal1@rediffmail.com

टिप्पणियाँ

  1. hempandey2:57 pm

    बच्चा माँ के आँचल में अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है | वही बच्चा एक दिन कृष्ण बन कर गीता ज्ञान देता है और यह सुंदर धरती जब इंसान के कृत्यों से असुरक्षित हो जाती है तो वही बच्चा कृष्ण बन कर इसकी रक्षा करता है |

    उत्तर देंहटाएं
  2. rachana9:36 pm

    sunder kavitayen
    saader
    rachana

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.