बुधवार, 12 नवंबर 2008

सूरज तिवारी 'मलय' की कविताएँ

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समझ

बच्‍चा जब तक

रहता है मां के पास

डर नहीं रहता

उसे किसी का

मां की आंचल में

सुरक्षित महसूस करता है

अपने आप को

नही जानता वह

आधुनिक इंसान के

परमाणु बमों को

आग्‍नेयास्‍त्रों को

वह तो बस मां की

गोद को ही जानता है ।

मां भी

बच्‍चे के लिए

भूल जाती है

अपना सब कुछ

पूर्णतः समर्पित होती है

बच्‍चे के लिए

मां की ममता के आगे

हार भले ही न माने

आज के परमाणु बम

या मिसाइल

जो लाखों मील तक

प्रहार कर देते हैं

लेकिन हार मान जाते हैं

वे इंसान जो खुद ही

बनाते हैं इन

आग्‍नेयास्‍त्रों को

दुनिया को खत्‍म करने के लिए ॥

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कविता –2

द्वापर में

धरा धाम पर

अवतरित हुए

कृष्ण नर रूप में

छठ्‌ठी के दिन से

नष्ट किया उन्‍होनें

पूतना राक्षसी को

बाद में आते गए

अधासुर, बकासुर,

धेनुकासुर आदि

एक एक कर

सब समाते गए

कृष्ण में ।

सारथि बन

अर्जुन की रथ हांके

रणक्षेत्र में

गीता ज्ञान

-----

कविता –3

 

हमारी इस सुंदर धरती पर

इंसानों की स्‍वार्थपरता

खत्‍म न कर दे

पक्षियों की चहचहाहट

विलुप्‍त न हो जाये

माटी की सौंधी सौंधी महक

कृत्रिम रसायनों के प्रयोग से........

पावन, सुंदर पौधों में

जब खिलना ही बंद हो जाएगा

सुरभित/सुगंधित पुष्प

तब कहां बैठेंगी......?

तितलियां/भंवरे

रस चूसने के लिए ॥

अपने ही आसमां के नीचे

हम हो रहे असुरक्षित

सूनी न हो जाए

संपूर्ण धरती हमारे कृत्‍यों से

तब आखिर........

क्‍या कर लेंगे हमारे

सेटेलाईट , मोबाईल, कम्‍प्‍यूटर

या कोई अन्‍य

अत्‍याधुनिक आविष्कार

जब उन्‍हें नियंत्रित करने वाले

हाथ ही सलामत न रहें

तब फिर से राज करेंगे

डायनासोर जैसे सरीसृप

इस सूखी , वीरान हो रही

धरती पर और

जिम्‍मेदार होगा

आज का आधुनिक कहलाने वाला

हाइटेक इंसान ..... ।

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परिचय

नाम - सूरज तिवारी 'मलय'

पिता - श्री चंद्रचूड़ तिवारी

पता - ब्राम्‍हण पारा, लोरमी

जिला-बिलासपुर छ.ग.

पिन-495115

उम्र - 30वर्ष जन्‍मतिथि 30/07/1977

संप्रति - स्‍वतंत्र लेखन कार्य, सहसचिव मनियारी साहित्‍य समिति, लोरमी, स्‍वतंत्र पत्रकारिता ।

रचना प्रकाशन- बिहार, उत्‍तराखण्‍ड, उ.प्र. मध्‍यप्रदेश एवं छग की अनेक साहित्‍यिक पत्रिकाओं में

रचना का प्रकाशन होचुका है ।

सम्‍मान - अनेक साहित्‍य समितियों से पुरस्‍कृत ।

E-mail- surajtiwarimalay@yahoo.com

surajtiwarimalay@gmail.com

surajtiwarimalal1@rediffmail.com

3 blogger-facebook:

  1. hempandey2:57 pm

    बच्चा माँ के आँचल में अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है | वही बच्चा एक दिन कृष्ण बन कर गीता ज्ञान देता है और यह सुंदर धरती जब इंसान के कृत्यों से असुरक्षित हो जाती है तो वही बच्चा कृष्ण बन कर इसकी रक्षा करता है |

    उत्तर देंहटाएं
  2. rachana9:36 pm

    sunder kavitayen
    saader
    rachana

    उत्तर देंहटाएं

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