अनुज नरवाल रोहतकी का आलेख : काश!

 

काश!

-डॉ. अनुज नरवाल रोहतकी

हिन्‍दुस्‍तान की आर्थिक राजधानी कहीं जाने वाली मुंबई को दहशतगर्दों से मुक्‍त करा दिया गया है। यह टिप्‍पणी मैं अपनी ओर से नहीं कर रहा हूं अपितु आला अधिकारियों ने इसकी पुष्‍टी कर दी है। ये खबर सच्‍ची है। एक सच से भी है कि हम चंद दहशतगर्दों से मुक्‍त हुए हैं न कि पूरी तरह आतंकवाद से मुक्‍त हुए।

हर घटना हमें बहुत कुछ सीखा जाती है। हर घटना हमें आईना दिखाती है। सो ये काम मुंबई में हुए इस घटना ने भी किया। इस घटना ने हमारे खुफिया तन्‍त्र की पोल खोल दी। जिसका नतीजा हमें 59 घंटे तक चले ऑपेरशन में 175 लोगों की मौत 20 पुलिसवालों व एनएसजी के जवान शहीद और सैकड़ों की तादाद में लोग घायलों के रूप में भुगतना पड़ा। दहशतगर्द समुद्र के रस्‍ते से आए और किसी को कानों-कान खबर भी नहीं लगी। यदि ऐसा ही है हमारा खुफिया तन्‍त्र,तो सरकार करोड़ों रूपये का ख़र्च क्‍यों करते हैं इस विभाग पर।

सरकार नेताओं के ऐशो-आराम पर करोड़ों खर्च कर देती है। लेकिन इस खर्च का कुछ हिस्‍सा पुलिस की बेहतर बुलेट प्रूफ जैकेटों के लिए लगा दिया जाता तो हमें मुंबई प्रकरण में एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे और एसीपी अशोक काम्‍ते जैसे जवानों की जान नहीं देनी पड़ती। दूसरी ओर इस घटना के जख्‍म अभी हरे ही हैं और जिसमें हुए शहीदों की चिंताओं की राख अभी ठन्‍डी भी नहीं हुई है। महाराष्‍ट्र्‌ के नेता आर.आर.पाटिल साहब ने एक प्रेस वार्ता में मुंबई की इस घटना के बारे में कहते है कि ऐसी छुटपुट घटनाएं तो बड़े शहरों में हो ही जाती हैं। कुछ तो शर्म करो पाटिल साहब इस घटना ने देश को हिलाकर रख दिया। और आप इसे छुटमुट घटना कह रहे हैं।.............शर्म करो नेता महोदय!

हिन्‍दुस्‍तान में ये नहीं कि आतंकी हमला पहली दफा हुआ है। इससे पहले लाल किले,संसद,अक्षरधाम मंदिर,आर.एस.एस.मुख्‍यालय,सीआरपीएफ के ग्रुप रेजिमेंट सेंटर पर हमला,मुंबई ट्र्‌नों में सिलसिले वार धमाके हो चुके हैं। याद हो अमेरिका पर एक बड़ा हुआ था, उसके बाद वहां ऐसे पुख्‍ता इन्‍तजाम कर दिए गए कि आज तक कोई घटना नहीं हुई। और तो और हमारे पड़ोसी राज्‍य बाग्‍लादेश जैसे देश में आतंकवाद विरोधी सख्‍त कानून लागू बनाए हुए हैं। वहां जो आतंकियों की किसी तरह की सहायता देने वाले को भी फांसी की सजा का कानून है। मगर हमारे देश में इतने हमलों के बावजूद भी एक कड़ा कानून नहीं बनाया गया है। अफजल जैसे आतंकियों के पीछे राजनीति की रोटियां तो हर राजनैतिक दल सेंकता है। मगर सरकार आने पर उनको फांसी कोई नहीं देना चाहता। चंद वोटों के लिए देश को बांटने में जुटे नेताओं से पूछना चाहते हैं क्‍या यूंही आतंकी आतंक फैलाते रहेंगे। क्‍या यूं ही आम आदमी मरते रहेंगे, क्‍या यूं हमारे जांबाज सिपाही अपनी जान पर खेलते रहेंगे। क्‍या नेता सिर्फ कुर्सी के चक्‍कर में भारत को गर्त में पहुंचाने का काम करते रहेंगे। नेताओं से प्रार्थना कभी देश के दर्द को अपना दर्द बनाकर तो देखो। देश को भाषणों की नहीं देशहित के कामों की जरूरत है।

अपने उपर के खर्चों को जरा कम करवाइए नेता जी

सेना को, खुफिया विभाग को अत्‍याधुनिक बनाइए नेता जी

देश को तोड़िए मत, देश को जोड़िए माननीय नेता जी

बस बड़ी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाइए नेता जी

आतंकवाद को मिटाना क्‍या बड़ी बात है नेता जी

अपने बेटों में से एक बेटा सेना में भर्ती करवाइए नेता जी।

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