-------------------

आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

शिवराज गूजर की लघुकथा : नजरिया

(लघु कथा)

100_7125

नजरिया

‘सीट दो की ह तो क्या, थोड़ा-सा खिसककर किसी को बैठा लेंगे तो क्या चला जाएगा? इंसानियत भी कोई चीज होती ह।’

बस में मेरी बगल में खड़े सज्जन सीटों पर बैठे लोगों को कोसते हुए बड़बड़ा रहे थे। अगले स्टॉपेज पर सामने वाली सीट से एक आदमी उठा, तो उन महाशय को भी सीट मिल गई। वे भी मेरी तरह ही दुबले-पतले थे। सीट में थोड़ी जगह दिखाई दे रही थी। इससे मुझे भी थोड़ी उम्मीद जगी।

मैंने उनसे कहा, ‘भाई साहब! थोड़ा खिसक जाओ तो मैं भी अटक जाऊं।’

इतना सुनते ही वे भड़क गए।

बोले, ‘सीट दो की है और हम दो ही बैठे ह। कहां जगह दिख रही ह तुम्हें? अपनी सहूलियत देखते ह सब, दूसरे की परेशानी नहीं समझते। ’

अब मुझे समझ आ गया था कि दो की सीट पर दो ही लोग क्यों बैठे थे।

------

शिवराज गूजर

 

mail….shivraj@gmail.com

टिप्पणियाँ

  1. Waah !
    Steek !
    lajawaab !
    Is sankshipt kalewar me poori maansikta chitrit kar dee aapne..Sadhuwaad..

    उत्तर देंहटाएं
  2. वक्त वक्त की बात है. इंसान वक्त के साथ चलता है तो क्या हुआ...

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.