December 2008

अनुज नरवाल रोहतकी की नववर्ष कविता सौगात

नए साल पर दे रहा है ‘ अनुज ' कविता की सौगात   खुशियां झूमे आंगन तेरे, गा उठे हर जज़्बात हर वक्‍त मिले, तुझे ही मिले, फूलों का ब...

साबिर अली घायल की ग़ज़ल

जो भी होता है वो पहले से लिखा होता है हर एक राज़ लकीरों में छुपा होता है लिखने वाला ही लिख पाता है नसीब अपना हर किसी में कहाँ य...

अखिलेश शुक्ल की रचनाएँ

दो कविताएँ प्रश्‍न चिन्‍ह कचरे के ढेर से पन्‍नी बीनती हुई लड़कियाँ, कंधे पर अपनी ऊँचाई सदृश्‍य, लटकाए हुए थैला। मैले-कुचै...

मोहन सिंह रावत की रपट – पंत-शैलेश के बहाने साहित्यिक विमर्श

रपट- पंत-शैलेश के बहाने साहित्‍यिक विमर्श अपनी समग्रता में उत्त्‍ाराखण्‍ड को पहली बार महाकवि सुमित्रानंदन पंत और कथाशिल्‍पी शैलेश मटिय...

गणेश लाल मीणा का रिपोर्ताज : आदिवासी विद्रोह और साहित्य विषयक संगोष्ठी

आदिवासी विद्रोह और साहित्‍य ' विषयक संगोष्‍ठी उदयपुर। श्रम, समूह और सहकारिता पर आधारित आदिवासी जीवन का विघटन व्‍यक्‍तिगत संपत्‍ति क...

योगेन्द्र सिंह राठौर की कहानी : प्रतिबिम्ब

वक्‍त किसी और के लिए ठहरा हो या न ठहरा हो, उसके लिए लगभग ठहर सा गया है। अब क्‍या बदल सकता है उसकी जिन्‍दगी में, जब तक कि वह अपने विचारों ...

नरेन्द्र निर्मल की कुछ कविताएँ

कविताएँ नरेन्द्र निर्मल गीत दोस्‍तों के लिए 1. हर दिन एक दिन बनेंगे दोस्‍त, नए वो लोग कुछ होंगे पल के लिए कुछ याद आए...

नव वर्ष की कविताएँ

  बाल कविता नव वर्ष   कृष्‍ण कुमार यादव नव वर्ष की बेला आई खुशियों की सौगातें लाई नया कर गुजरने का मौका सद्‌भावों क...

नन्दलाल भारती की तीन कविताएँ

  नन्‍दलाल भारती 1-श्रमवीर ॥ अपनी ही जहां में घाव डंस रही पुरानी शोषित संग दुत्‍कार भरपूर हुई मनमानी लपटों की नही रूकी है शै...

उमेश गुप्ता का व्यंग्य : बिचौलिये

बिचौलिये जिन्‍हें हिन्‍दी में मध्‍यस्‍थ , उर्दू में दलाल, अंगे्रजी में आरबिटे्रटर कहते हैं, बहुत काम के आदमी रहते हैं जो काम इस दुनिया मे...

पुरु मालव की ग़ज़ल - मुश्‍किलें आती रही हादिसे बढते गए

मुश्‍किलें आती रही हादिसे बढते गए मंजि़लों की राह में क़ाफि़ले बढ़ते गए   दरमियां थी दूरियां दिल मगर नज़दीक़ थे पास ज्‍यूं-ज...

नरेन्द्र निर्मल की कविता : कलम की धार में जंग

मुझे उन रास्तों पर चलना नहीं आता, जिस पर सच की चादर न चढ़ी हों। सिर्फ झूठ का ओला पसरा हो। मुझे झूठ बोलना भी नहीं आता, जब बोलता हूँ...

नरेन्द्र निर्मल का आलेख : मीडिया बनाम मीडिया पर टीआरपी का हमला

मीडिया एक ऐसा माध्यम है जिसके भूत, वर्तमान और भविष्य की चर्चा करे तो इसे दुनिया का सबसे सफल, साहसिक और कर्तव्यपरक क्षेत्र कहा जा सकता है। क्...

नरेन्द्र निर्मल का आलेख : उग्रवाद हथियार से नहीं, बदलाव से खत्म किया जा सकता है

  आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है, जिससे अबतक कोई भी देश अछूता नहीं रहा है। फिर चाहे शक्तिशाली अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड सेंटर का गिरा...

नरेन्द्र निर्मल की कहानी : तारे जमीन पर का बेचारा पप्पू

  कहानी तारे जमीन पर का बेचारा पप्पू   - नरेन्द्र निर्मल   बचपन से ही शर्मीला किस्म का इंसान। लड़कियां तो दूर लड़कियों के शब्द से ...

देवी नागरानी की कहानी : क्षितिज के उस पार

क्षितिज के उस पार हाँ वो शिला ही थी!! कैसे भूल कर सकती थी मैं पहचान ने में उसे, जिसे बरसों देखा, साथ गुजारा, पल पल उसके बारे में ...

अखिलेश शुक्ल की 3 लघुकथाएँ

जरूरत ”चलो पीछे करों भाई इन सबको, दरवाजे पर भीड़ क्‍यों इकट्ठा कर रखी है।“ मरीजों को देखते हुए डॉ. प्रशांत ने अपने कम्‍पाउंडर से कहा। उ...

नरेन्द्र निर्मल की कविताएं – साहित्यकारों में राजनीति एक गंभीर समस्या व अन्य

    साहित्यकारों में राजनीति एक गंभीर समस्या     राजनीतिज्ञों की राजनीति देखी धर्म, सम्प्रदाय में राजनीति दिखी जाति, भाषा से बंटे...

महेन्द्र भटनागर का कविता पाठ

महेन्द्र भटनागर की कविताएँ व कविता संग्रह रचनाकार पर पूर्व प्रकाशित हो चुके हैं. प्रस्तुत है उनका सस्वर कविता पाठ. नीचे दिए गए डाउनलोड लि...

नन्‍दलाल भारती की कविता

एक बरस और ․․․․․․․ कविता नन्‍दलाल भारती मां की गोद पिता के कंधों गांव की माटी और टेढ़ीमेढ़ी पगडण्‍डी से होकर उतर पड़ा कर्मभूमि ...