February 2008

महेंद्र भटनागर का कविता संग्रह : आहत युग

आहत युग -महेंद्र भटनागर (इस कविता संग्रह का ई-बुक यहाँ से डाउनलोड करें) * (१) संग्राम; और जिस स्वप्न को साकार करने के लिए- ...

तरूण शर्मा की ग़ज़ल : सुबह का ख्वाब दिखा गया कोई...

ग़ज़ल -तरूण शर्मा मेरी मजार पे एक चिराग जला गया कोई बुझती उम्मीदों को एक आस दिखा गया कोई आज की रात बहुत बेचैन है कटती ही नही सुबह का एक ...

विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में भारत भवन लन्दन द्वारा हिन्दी विद्वानों का सम्मान

यह सभी उपस्थित जनों के लिये एक विशेष अनुभव रहा होगा क्यों कि भारतीय उच्चायोग लंदन, यू.के. में कार्यरत हिन्दी विद्वानों का सम्मान कर रहा था...

विद्या देवदास नायर की कविता : आखिरी झलक

कविता आखिरी झलक -विद्या देवदास नायर पहले मैं भी सोचा करता था , जब कोई अपना हमसे दूर चला जाता , तो किसी से ये दर्द क्यों नहीं ...

अनिल पाण्डेय का आलेख : आंसू की सार्थकता

आलेख आंसू की सार्थकता -अनिल पाण्डेय आंसू जो कभी कभार बहा करते हैं। बेवजह और अनायास। तब जब हम किसी को विदा करते हैं या किसी के घर से...

मेराज अहमद की कहानी : सही

कहानी सही - मेराज अहमद गाँव के लोग काहिल होते हैं।‘‘ बेटे की मां ने उसके पेपर में आये सवाल को दुहराते हुए कहा, ’’बताओ सही कि गलत?‘‘ ...

सीमा सचदेव की कहानी : मुखौटा

कहानी मुखौटा -सीमा सचदेव मेट्रिक पास , उम्र लगभग सोलह साल ,बातों में इतनी कुशल कि बड़े-बड़ों मात दे जाए , साँवला रंग , दरमियान कद ,...

प्रेम कुमार की कहानी : तिब्बत बाजार

कहानी तिब्बत बाजार -प्रेम कुमार फुब्बू, तुम्हारे अलीगढ़ से जाने के बाद भी एक पत्र लिखा था। उसका क्या हुआ, मालूम नहीं। जब तुम्हारा...

दिव्य प्रकाश दुबे का सस्वर, जीवंत कविता पाठ : आज अचानक फिर से वो टकरा गए

हम सभी कभी न कभी डायरी लिखते हैं या कोशिश करते हैं कुछ यादों को ,कुछ पन्नों में समेटने की ये कविता उसी कोशिश का एक हिस्सा भर है (कविता क...