संदेश

April, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

-------------------

संजय सेन सागर की कविता : एक घर था मेरा...

चित्र
एक घर था मेरा।
-संजय सेन सागर

एक घर था मेरा, अब कई घर है मेरे
इसी घर में पाला था ,मैंने
अपने तीन लड़कों को ।
अब वे सभी पालते हैं ,मुझे
बारी बारी से अपने घरों में।
सिखाता था मैं कभी उनको अपनी
देश की संस्क्रति ,पर अब
सिखाते हैं वे मुझे आधुनिकता
के पहलुओं को ।

उन तीनो की एक मां भी हुआ करती थी
जो रहती थी विदेश में ,बड़े लड़के के साथ।
काफी मंहगा होता है विदेश।
इक रोज उसे दिल का दौरा पड़ा उसे,
विदेश से भारत लाते समय ही चल बसी वो।
आखिर इलाज मंहगा होता है वहां।

मैंने कहा था हर कदम ईमानदारी
क रास्ते पर रखना ,हर लब्ज
सच कहना।
वे सब कहते है बस यही सच की
पैसा ईमानदारी से बड़ा है और
सच सफलता के रास्ते में रोड़ा है।


समय नही है यहाँ किसी के पास
किसी को ,अपनी मां
की चिता को आग दी थी ,सिर्फ छोटे लड़के ने।
और मेरे दो लड़के तो व्यस्त थे
कंपनी के टूर पर।

देखता था ख्याब में उनको बड़ी स्कूल
मे पढ़ाने का ।
अब देखते हैं वे सभी एक सपना मुझे
वृध्दाश्रम भेजने का.
उन्होंने सुना है कि दिमाग
बढ़ता है और बड़े लोगो के साथ रहने में
सोचता हूं मैं हर वक्त कि मैं कब बड़ा
हो पाउंगा , कब सीख पाउंगा
हर कुछ।

कितना प्यारा था वो मेरा एक घर
कितने खुदगर्ज हैं , वे…

गौतम राजऋषि की ग़ज़लें : रदीफ़ रख काफ़िया रख

चित्र
(1)कितने कंधों पे खड़ा हुआ
फिर वो इतना है बड़ा हुआ तेरी आँखों में चमके है
आसमाँ तारों से जड़ा हुआ मेरी किस्मत का सूरज है
मेरी मुट्ठी में पड़ा हुआ आँखें समझे बातें सारी
फिर दिल क्यों जिद पे अड़ा हुआ वो चराग फूंक से क्या डरे
जो आंधी से हो लड़ा हुआ चांद को देख तन्हा रोते
सितारों का जमावड़ा हुआ रस्ते में तुम याद आये तो
ये सफर और भी कड़ा हुआ --
(2)
इस अहले-दुनिया के हँसने का जो कुछ भी सबब हुआ
हा हा हा हा वही तो हुआ संग मेरे वही सब हुआ सच्ची बातें जो भी थीं हमने तो बस लिख डाली हैं
भले जमाना कहता रहे शेर मेरा बेअदब हुआ दरियाओं को हुक्म हुआ था समंदर में जा मिलने का
रस्ते में कुछ गुम हुए तो मुद्दा ये गौरतलब हुआ मेरे कत्ल का भेद खुला जब गये देखने कातिल को
अपना ही वो यार खडा़ था उफ़ ये कैसा गजब हुआ मेरे छत भर का सूरज तो देखो वो मेरा ही था
आसमाँ तेरे बादलों का क्यों हिस्सा ये अब हुआ मसिहाओं की शक्ल में फ़िरते थे जो हुक्मराँ हमारे
इक रोज मुखौटा उतरा तो फ़िर तमाशा अजब हुआ कौवे का देखो रंग भले ही कोयल-सा काला है
सुर कहाँ से बैठेगा अगर लहजा ही बेढ़ब हुआ (3)
देख पंछी सब जा रहे …

शेर सिंह की कविता : दबंग झूठ अपना काम कर जाता है...

चित्र
दबंग झूठ अपना काम कर जाता है० शेर सिंहएक कमजोर कड़ी सारे ढांचे को ढहा सकती है
एक कुटिल बुद्धि दुनिया को हिला सकती है । सदविचार व्यक्ति को बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं
कुविचार, ओछी मानसिकता गर्त में पहुंचा सकती है । सन्मार्ग का रास्ता कठिन तो है जरूर
मगर जो इस पर चलते हैं उदाहरण बन जाते हैं । लाख सफाई दे मनुष्य अपने चरित्र से ही जाना जाता है
सोना आग में ही तप कर कुंदन बनता है । कोशिश सफलता की पहली सीढ़ी है
जो इसे जान जाता  है नाम कमा लेता है । करे कोई भरे कोई उक्ति तो बहुत प्रसिद्ध है
दूसरों के दगा को बिसरा निस्वार्थ कर्म इस का पैमाना है । दे - दो ,  ले -लो  इस पर क्यों अड़े रहे
बात तो तब बनेगी जब देने के लिए हाथ उठे रहें । प्यार, मान- सम्मान सब छलावा है
जो इन से ऊपर उठ जाता है वही सच्चा साधक है । आत्म चिंतन , आत्म मंथन मन की प्रक्रिया है
जीवन में खुशी चाहिए तो सब के लिए यह जरूरी है । मीन- मेख निकालना ही जीवन का ध्येय नहीं
इस के लिए तो सर्वप्रथम अपनी ही समीक्षा चाहिए । दिल में स्वार्थ हो , ईर्ष्या भर गई  हो
ऐसे में तो केवल आग की  ही संभावना रहती है । सच और झूठ दो …

कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : चूहे का प्रस्ताव

चूहेकाप्रस्ताव-डॉ०कान्तिप्रकाशत्यागीएकचूहाशेरनीकेपासआयासाष्टांगदंडवतकरशीशझुकायाहे! मधुरभाषिणी, मनभाविणीजगजामिनी,मृगनयनीवनस्वच्छन्दविहारिणीकामज्वरअपहारिणीलज्जास्मितगौरांगिनीनिजस्वरूपअभिमानिनीभावीअर्धांगिनीभावीसंतानजननीममप्रस्तावविचारिणीअबे! गोलमोलबोलक्याकहना, साफ़साफ़बोलफ़ालतूमेंपहेलियांबुझारहाहैदेरसेमेरादिमागखारहाहैहेदेवी! तेरेचरणोंमें, निष्कामकामसेआयाहूँसृष्टिकेकल्याणहेतु, तेराहाथमांगनेआयाहूँप्रिय! मैंतुम्हेंजीवनसाथीबनानेआयाहूँसृष्टिमें, एकनयाइतिहासरचानेआयाहूँहोगीसंतानहमारी, चतुरएवंहृष्टसभीकरेंगेमौज़, होगाकिसीकोकष्टअबेबोलनेसेपहले, आईनेमेंसूरतदेखशेखचिल्लीकीऔलाद, दिनमेंसपनेदेखहे! मयूरचकोरी, तूमेरीसूरतपेजानौजवानकी, अक्लहिम्मतपरजाअबे! भागताहैयाबताऊंयायहींतेरीशादीरचाऊंतेरीयहऔकात?, औकातकीक्याबातहिम्मतओरअक्लचाहिए,वहमुझमेंहैवधुकेलिए, सौन्दर्यतालावण्यचाहिएइसबातसेतोसहमतहो,वहतुममेंहैमैंविघ्नविनायकश्रीगणेशकीसवारीहूँउन्हींकाआशीर्वादहै, उनकाबहुतआभारीहूँआशाहै, मुझेनिराशनहींकरोगीप्रेमप्रस्ताव, पुनःविचारकरोगीजल्दीनहीं, आरामसेविचारकरनाअपनेबापूको, मेरेघरभेजदेनासर्वेभवन्तुसुखिनः, सर्वेसन्तुनिरामयाटाटा

शैलेन्द्र चौहान का व्यंग्य: एक दिन उत्तरआधुनिकता के नाम

चित्र
एक दिन उत्तरआधुनिकता के नाम- शैलेन्द्र चौहानअक्सर मैं सोचता हूँ, जो लिख रहा हूँ वह क्यों लिख रहा हूँ ? किसके लिए लिख रहा हूँ ? यह भी, कि क्या लिख रहा हूँ. मेरे मित्र मेरी इस मन: स्थिति पर दार्शनिक मुद्रा में मुस्काते हैं, फिर यकायक गंभीर हो जाते हैं, और समझाते हैं बच्चा ये तो बुनियादी सवाल हैं, इन सवालों पर तो लोग बहुत बहसें कर चुके हैं. तुम्हें अपना दार्शनिक स्तर थोड़ा बढ़ाना चाहिए. मसलन आजकल उत्तर आधुनिकता पर जो बहस हो रही है, उसमें तुम्हारा क्या रोल हो, अभी तक तुमने उत्तर आधुनिकता पर क्या लिखा है, कुछ नहीं न दरअसल तुम समय से काफी पीछे चल रहे हो. मैं हीन भावना लिए वापस लौटता हूँ. मेरा इसीलिए लेखकों की बिरादरी में कोई सम्मानजनक स्थान नहीं बन पाया है. कोई भी लेखक मुझे झिड़क सकता है - आखिर मैंने लिखा क्या है ? न तो उसमें भाषा के साथ खेलने का कौशल है, न उसमें चमत्कृत करती स्थितियाँ ही हैं, न पतनोन्मुखी पश्चिमी लेखकों की रचनाओं के परिष्कृत अंश ही उसमें हैं, न अभद्रता, अश्लीलता और नग्नता उसमें है तब क्या है मेरे लेखन में ? अब भइया ये क्यों नहीं समझते कि आदर्शवादी और यथार्थवादी लेखन का भी …

रविकांत का आलेख : दर्दे-इश्क़ से दर्दे-डिस्को तक

चित्र
दर्दे-इश्क़ से दर्दे-डिस्को तक- रविकांत['बदले जीवन मूल्य' शीर्षक पर केन्द्रित
विचार परिक्रमा के प्रवेशांक(अप्रैल २००८) में पूर्व-प्रकाशित] भारतीय सिनेमा आम तौर पर और हिन्दी सिनेमा ख़ास तौर पर बाक़ी देशों की फ़िल्मों की अपेक्षा ज़्यादा शब्दमय है, वैसे ही जैसे कि इसका गीत-संगीतमय होना इसकी अनोखी ख़ुसूसियत के रूप में स्थापित हो चुका है। और इतनी सारी फ़िल्मों के इतने सारे गीतों के आधार पर एक सामाजिक सफ़र का ख़ाक़ा पेश करने की हिमाकत करना - इतने छोटे-से आलेख में - वैसा ही है जैसा संस्कृत की वह कहावत कि आप दुस्तर समंदर में तैरने तो निकले हैं पर बतौर साज़ोसामान आपके पास बस एक अदद डोंगी है! लिहाज़ा मैं अपना काम थोड़ा आसान यह कहते हुए किए लेता हूँ कि मैं सिर्फ़ इश्क़िया गानों के कुछ पहलुओं पर कुछ स्थूल बातें ही कह पाऊँगा। अब प्रेम गीतों की तादाद भी कोई कम तो नहीं है - क्योंकि विधाएँ हमारे यहाँ अक्सर नत्थम-गुत्था पाई जाती हैं और हर क़िस्म की फ़िल्म में एक प्रेम-कहानी, चाहे उप-प्लॉट के रूप में ही सही, अमूमन होती ही है। नायक-नायिका प्रेम से पहले, प्रेम के दौरान, विरह की अवस्था में तथा शादी व सुहा…

रचना श्रीवास्तव की कविता अपनों के बीच भी कहाँ सुरक्षित नारी है

चित्र
अपनों के बीच भी कहाँ सुरक्षित नारी है

-रचना श्रीवास्तव

---------------------------------------------

कहते हैं कि नारी ताड़न की अधिकारी है
जन्मा तुम को जिसने वो भी एक नारी है

गाँव की पगडंडी,हो या शहर का परिवेश
हर ओर ही नारी का शोषण जारी है

गैरों की बात क्या करना दोस्तों
अपनों के बीच भी कहाँ सुरक्षित नारी है

बेटी हो तो सिर बाप के झुक जाते है
दहेज की कुछ इस कदर फैली महामारी है

बेटा घर का चिराग बेटी पराये घर का राग
बेटे बेटी का ये अंतरद्वंद्व अभी भी जारी है

पाप किसी का दोष इसके के सर मढ़ा जाता है
इस जुल्म को देख भी चुप रहती दुनिया सारी है

आने देते नहीं बाहर माँ की कोख से
जन्म से पहले कर देते मृत्यु हमारी है

बेटा हुआ तो पुरुष का ही है सारा कमाल
हो गई बेटी तो ये माँ की जिम्मेदारी है

बेटे की चाह में कुछ यूं गिर जाते है लोग
पहली के होते करते दूसरे विवाह की तैयारी है

चैन से जीने नहीं देगा ये समाज तुझे
यदि घर में बैठी तेरे बेटी कुंआरी है

बेटे को दिए ये महल दुमहलें तुमने
बेटी को मिली सिर्फ़ औरों की चाकरी है

आज़ादी का सारा सुख तो है मर्दों के लिए
औरत की दुनिया तो बस ये चारदीवारी है

एक साथ ख़त्म हो जायें यदि औरतें सा…

ताज़ा हिन्दी ईबुक डाउनलोड कड़ियाँ

ताज़े व सम्पूर्ण ईबुक सूची के लिए यहाँ जाएँ

रचनाकार पर समय समय पर पीडीएफ ई-बुक प्रकाशित की जाती हैं. इनकी डाउनलोड कड़ियाँ तथा अन्य ई-बुक की कड़ियाँ आप यहाँ पाएंगे. यदि आपको कोई अच्छी हिन्दी किताबों की ई-बुक की कड़ी मिलती है तो कृपया टिप्पणी में जोड़ कर हम सब को बताएँ.


रचनाकार पर पूर्व में ई-स्निप पर प्रकाशित ई-बुक की कड़ियाँ काम नहीं कर रही हैं, शायद ई-स्निप सेवा बंद है. अतः उन कड़ियों को अभी हटा दिया गया है.
**-**

सीमा सचदेव का कविता संग्रह : मेरी आवाज

चित्र
कविता संग्रह मेरी आवाज-सीमा सचदेव****************************************************** दो-शब्दभाषा भावों की वाहिका होती है | अपने काव्य संग्रह
"मेरी आवाज़" में भाषा के माध्यम से एक लघु प्रयास
किया है भावों को व्यक्त करने का जो कभी हमें
खुशी प्रदान करते हैं, तो कभी गम | कभी हमें सोचने पर
मजबूर कर देते हैं और हम अपने आप को असहाय सा
महसूस करते हैं | यह संग्रह अपने माता-पिता को एक छोटा
सा उपहार है जिन्होंने मुझे आवाज दी और "मेरी आवाज"
उभर कर आई | आशा करती हूँ पाठकों को मेरा यह
लघु प्रयास अवश्य पसंद आएगा |
सीमा सचदेव ****************************** मेरी आवाज अनुक्रम:- १.वंदना
२.जीवन एक कैनवस
३.हर पल मरती जिन्दगी
४.परछाई
५.माँ (चंद क्षणिकाएँ)
६.आँखें
७.जब तक रहेगा समोसे में आलू
८.हुआ क्या जो रात हुई
९.आँसू
१०.आदर्शवादी
११.समाज के पहरेदार
१२.एक सपना
१३.वह सुंदर नहीं हो सकती
१४.झोंपड़ी में सूर्यदेव
१५.आज का दौर
१६.रक्षा-बंधन
१७.साइकिल
१८.रेत का घरौंदा
१९.आज़ाद भारत की समस्याएँ
२०.किस्मत का खेल
२१.जमाना अब भी वही है
२२.धरती माता
२३.वह मुस्काता सुंदर चेहरा
२४.22वीं सदी में........…

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.