April 2008

संजय सेन सागर की कविता : एक घर था मेरा...

एक घर था मेरा। -संजय सेन सागर एक घर था मेरा, अब कई घर है मेरे इसी घर में पाला था ,मैंने अपने तीन लड़कों को । अब वे सभी पालते हैं ,...

गौतम राजऋषि की ग़ज़लें : रदीफ़ रख काफ़िया रख

ग़जल की जिस किताब की खूब चर्चा रही वह हिन्द युग्म से आई ‘पाल ले इक रोग नादां’ है. उसी शायर   गौतम राजऋषि   की नई नई गजलों को पढने की ...