March 2009

अशोक गौतम का व्यंग्य : दूसरे दर्जे की धमा चौकड़ी!!

मे रा और उनका रिश्ता तबका है जब हम दोनों एक साथ ऊपर नीचे की रसोई में एक ही वक्त कुंडी में डंडे से प्याज लहसुन कूटा करते थे और एक साथ अपनी अप...

यशवन्त कोठारी का आलेख : राम कथा - अनन्ता

राम के चरित्र ने हजारों वर्षों से लेखकों, कवियों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों को आकर्षित किया है, शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जिसमें राम के चर...

ओमप्रकाश कश्यप का आलेख : भारतीय लोकतंत्र – यात्रा और पड़ाव

खून की बूंद न गिरते हुए भी लोगों के जीवन में सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन लाने की व्यवस्था का अभिप्राय है-लोकतंत्र! डॉ. आंबेडकर. कालेज के द...

अपनी रचना इंटरनेट पर प्रकाशित करते-करवाते समय निम्न बातों का ध्यान रखें –

  रचनाकार में प्रकाशनार्थ हर विधा की रचनाओं का स्वागत है.   अपनी या अपने रचनाकार मित्रों की रचनाएँ  हिन्दी के किसी भी फ़ॉन्ट यथा -  कृतिदेव...

सीमा सिंघल की कविताएँ

(1) हौसले हों गर बुलन्‍द . . . बातें करता सागर की तो उसका दायरा बड़ा है, तू नदी की बात कर, उसकी गोद में पला है। मजबूत इरादों को...

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : सेवा -निवृत्‍ति के संकट

  आखिर हिम्‍मत कर के मैंने स्‍वैच्‍छिक सेवा निवृत्‍ति ले ही ली। काफी पुरानी परम्‍परा है हिन्‍दी में। जिन्‍दगी भर नौकरी कर के समय पूर्व ...

पुरू मालव की ग़ज़लें

ग़ज़ल रिश्‍तों से अब डर लगता है रिश्‍तों से अब डर लगता है। टूटे पुल-सा घर लगता है।   चेहरों पे शातिर मुस्‍कानें हाथों में ख...

आदेश कुमार पंकज की कविताएँ

दो कवितायें   प्रश्‍न   वर्षों से, एक प्रश्‍न जो - मेरे सामने मुँह बाए खड़ा है । हिमालय सा , मेरे सामने अड़ा है ।...

आकांक्षा यादव की कविता : एक लड़की

एक लड़की न जाने कितनी बार टूटी है वो टुकड़ों-टुकड़ों में हर किसी को देखती याचना की निगाहों से एक बार तो हाँ कहकर देखो कोई क...

हर्ष शर्मा की कविता : व्यग्रता

कवि तुम्हारी कल्पना में आऊंगी मैं, तुमको बहुत लुभाऊंगी मैं, तड़पोगे छटपटाओगे तुम, मुझे व्यक्त न कर पाओगे तुम, शब्द- दर- शब्द तलाश...

कृष्ण कुमार यादव का आलेख : गणेश शंकर ‘विद्यार्थी' का अद्‌भुत ‘प्रताप'

विद्यार्थी जी की पुण्‍यतिथि पर (25 मार्च)   गणेश शंकर ‘विद्यार्थी' का अद्‌भुत ‘प्रताप'   कृष्ण कुमार यादव   साहित्‍य क...

यशवन्त कोठारी का संस्मरण : ये जो थे पंडित शरद जोशी

(शरद जोशी - चित्र साभार - लेखनी.नेट) वे 1977 की सर्दियों के दिन थे। शरद जोशी किसी कवि सम्‍मेलन के चक्‍कर में उदयपुर आये थे। मैं उनसे म...

कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : हवाई जहाज़ या चिड़िया

    हवाई जहाज या चिड़िया डा० कान्ति प्रकाश त्यागी   ए क बार अम्मा,पिताजी ,का खाना पहुंचाने गई मुझे भी कुछ पकड़ाकर ,साथ में लिव...

श्याम यादव का आलेख : पत्रकारिता की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न

आलेख - सवाल पत्रकारिता की पवित्रता पर ?   - श्याम यादव   दे श के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिह शेखावत ने पद्मश्री से सम्मानित ...

हरि भटनागर की कहानी : भय

उ स लड़के को देखकर मैं यकायक डर गया जो मेरे घर के सामने आ खड़ा हुआ था। लड़का फटीचर हालत में था। तन पर बहुत ही गंदी, जगह-जगह फटी बनियान ...