बुधवार, 25 मार्च 2009

आकांक्षा यादव की कविता : एक लड़की

akansha yadav

एक लड़की

न जाने कितनी बार

टूटी है वो टुकड़ों-टुकड़ों में

हर किसी को देखती

याचना की निगाहों से

एक बार तो हाँ कहकर देखो

कोई कोर कसर नहीं रखूँगी

तुम्‍हारी जिन्‍दगी संवारने में

पर सब बेकार

 

कोई उसके रंग को निहारता

तो कोई लम्‍बाई मापता

कोई उसे चलकर दिखाने को कहता

कोई साड़ी और सूट पहनकर बुलाता

पर कोई नहीं देखता

उसकी आँखों में

जहाँ प्‍यार है, अनुराग है

लज्‍जा है, विश्‍वास है।

 

21वीं सदी की बेटी

जवानी की दहलीज पर

कदम रख चुकी बेटी को

माँ ने सिखाये उसके कर्तव्‍य

ठीक वैसे ही

जैसे सिखाया था उनकी माँ ने

पर उन्‍हें क्‍या पता

ये इक्‍कीसवीं सदी की बेटी है

जो कर्तव्‍यों की गठरी ढोते-ढोते

अपने आँसुओं को

चुपचाप पीना नहीं जानती है

वह उतनी ही सचेत है

अपने अधिकारों को लेकर

जानती है

स्‍वयं अपनी राह बनाना

और उस पर चलने के

मानदण्‍ड निर्धारित करना।

---

आकांक्षा यादव

प्रवक्‍ता, राजकीय बालिका इण्‍टर कॉलेज

नरवल, कानपुर-209401

kk_akanksha@yahoo.com

3 blogger-facebook:

  1. जीवन में हमारे सामने कई तरह के सवाल आते हैं... कभी वो अर्थ के होते हैं... कभी अर्थहीन.. अगर आपके पास हैं कुछ अर्थहीन सवाल या दें सकते हैं अर्थहीन सवालों के जवाब तो यहां क्लिक करिए

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक लड़की की कविता ज़्यादा अच्छी लगी

    उत्तर देंहटाएं
  3. आकांक्षा जी!
    आपने नारि के विभिन्न स्वरूपों की सुन्दर विवेचना की है। नर की खान नारि के दिन जल्दी ही सँवर जायेंगे। क्योंकि वो दिन जल्दी ही आने वाले हैं। जब पुरुषों की संख्या दुनिया में अधिक होगी और स्त्रियाँ कम हो जायेंगी।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------