गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

विजय शर्मा का आलेख : अपना शहर अपनी दुनिया

म धुमक्खी, तितलियाँ और भँवरे जगह-जगह जाते हैं तरह-तरह के फूलों पर मँडराते हैं और रस संग्रह करके मधु बनाते हैं. इसी तरह कहा जाता है कि यदि ज्...

राकेश कुमार की कहानी : पारस पत्थर

(कवयित्री अजन्‍ता शर्मा के जन्‍म दिन 30 अप्रैल को उन्‍हें सादर समर्पित) पारस पत्‍थर ब रसात का महीना था, रिमझिम गिरते सावन की मस्‍त फुहा...

बुधवार, 29 अप्रैल 2009

राजा रवि वर्मा आदरांजली – चित्र प्रदर्शनी

विश्वविख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा आदरांजली स्वरूप चित्र प्रदर्शनी में प्रदर्शित कुछ कलाकृतियाँ.   प्रदर्शनी में राज...

विजय शर्मा का आलेख : बसाया हमने अपना जहाँ

‘चि म्बोराजो से तीन सौ मील से ज्यादा दूर, कोटोपाक्सी से सौ मील दूर इक्वाडोर एंडीज के विशाल वीराने में, मनुष्यों की दुनिया से कटी हुई एक रहस्...

अरविंद कुमार का आलेख : आधुनिक भारत के आंतरिक द्वंद्व

    अरविंद कुमार का नज़रिया कई धाराओं से बना है. उन में से एक है -- चार्ल्स डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत. जब वे लंदन गए तो डार्वि...

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