रविवार, 31 मई 2009

महावीर सरन जैन का आलेख : आतंकवाद को निर्मूल करने के लिए सर्व धर्म समभाव

आतंकवाद को निर्मूल करने के लिए सर्व धर्म समभाव प्रोफेसर महावीर सरन जैन धर्म की प्रासंगिकता एक व्‍यक्‍ति की मुक्‍ति में ही नहीं है। धर्म ...

प्रियेश दत्त मालवीय की अजूबा कलाकृतियाँ

  प्रियेश दत्त मालवीय की कलाकृतियाँ उनके निर्माण के लिहाज से वाकई अजूबा हैं, मगर दर्शनीयता और कला में नहीं. प्रियेश गर्म प्रेस से कैनवस ...

शनिवार, 30 मई 2009

माखनलाल चतुर्वेदी का व्यंग्य निबन्ध : ‘ब्लॉगर देवता’

(माखनलाल चतुर्वेदी की मूल रचना ‘साहित्य देवता’ आज के ‘चिट्ठाकार देव’ उर्फ ‘ब्लॉगर देवता’ पर क्या सटीक नहीं बैठती? पढ़ें और मजे लें --)   ...

शुक्रवार, 29 मई 2009

प्रतापनारायण मिश्र का आलेख : वृद्ध

(प्रतापनारायण मिश्र (1856-1894) का यह व्यंग्यात्मक आलेख कोई सौ सवा सौ वर्ष पुराना है, मगर परिस्थितियाँ शायद अब भी वैसी ही नहीं हैं?) इन...

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : मेरी असफलताएँ

इधर व्‍यंग्‍य में विषयों का अकाल है। समाचारों का अकाल है। घिसे पिटे लेखक घिसेपिटे विषयों पर घिसेपिटे व्‍यंग्‍य लिखकर घिसेपिटे स्‍थानों ...

बुधवार, 27 मई 2009

अशोक गौतम का व्यंग्य : हे जूते! रे जूते!

हुर्रे! वे चुनाव हार गए। उनके घर गया था। उनके सामने उनके लिए भगवान से उनकी हारी हुई कुर्सी की आत्‍मा के लिए शांति मांगने। किसी मंदिर, गुरू...

महावीर सरन जैन का आलेख : दिनकर का काव्य

रामधारी सिंह ‘ दिनकर ' का काव्‍य : काव्‍य के माघ्‍यम से राष्‍ट्रीय सांस्‍कृतिक चेतना की सशक्‍त अभिव्‍यक्‍ति प्रोफेसर महावीर सरन ज...

चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव की कविता : मुट्ठी भर बीज

मुट्‌ठी भर बीज मुट्‌ठी भर बीज से करनी है मुझे हरी भरी समूची पृथ्‍वी गिनो मत इन बीजों को मत हँसो इन पर सिर्फ प्रदक्षिणा करो ...

मंगलवार, 26 मई 2009

महावीर सरन जैन का आलेख : संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएं एवं हिन्‍दी

विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक – हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा में क्योंकर तत्काल शामिल किया ज...

महावीर सरन जैन का आलेख : भारत की भाषाएँ

(भारत की 100 से अधिक भाषाओं के बारे में अपने शोधपरक आलेख में विस्तार पूर्वक बता रहे हैं केंद्रीय हिन्दी संस्थान के पूर्व निदेशक महावीर...

महावीर सरन जैन का आलेख : भविष्‍य का धर्म

धर्म पर जब जब भी बात होती है, विवाद होते रहे हैं. मेरा धर्म अच्छा तेरा धर्म घटिया. पर, क्या भविष्य का धर्म वास्तविक रूप में सर्व-धर्म-समभ...

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