बुधवार, 1 जुलाई 2009

रचनाकार की हिन्दी पीडीएफ़ ई-बुक जिसे अब तक 13 हजार से अधिक बार पढ़ा गया...

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प्रिंट मीडिया में जहाँ हिन्दी किताबें हजार, पाँच सौ की संख्या में छापी जा रही हों, इंटरनेट का माध्यम राहत प्रदान कर सकता है – कम से कम पाठकों के मामले में. रचनाकार के तहत हर विधा की बहुत सी किताबें पीडीएफ़ रूप में छापी गई हैं और उन्हें ई-स्निप व आर्काइव.ऑर्ग पर आसान पठन-पाठन व मुफ़्त डाउनलोड हेतु रखा गया है.

1001 हिन्दी चुटकुलों के संग्रह वाली पीडीएफ़ ई-बुक को 13 हजार से अधिक बार पढ़ा जा चुका है. द्वितीय स्थान पर 1001 सुविचारों वाली फ़ाइल है जिसे 10 हजार से ऊपर बार पढ़ा जा चुका है. असगर वजाहत के कहानी संग्रह - मैं हिन्दू हूं को 1 हजार 6 सौ से अधिक बार पढ़ा जा चुका है. ऐसे ही बहुत से अन्य ई-पुस्तकों को हजारों बार पढ़ा जा चुका है.

हाल ही में रचनाकार के माध्यम से कुछ और किताबें ई-बुक के रूप में प्रकाशित की गई हैं. पठन पाठन सीधे ई-स्निप या आर्काइव.ऑर्ग पर करें या डाउनलोड करें और अपने मित्रों को भेजें.

हिन्दी ई-बुक की सूची यहाँ देखें.

ई-स्निप पर पीडीएफ़ हिन्दी ई-बुक हिन्दी साहित्य खंड से सीधे यहाँ से डाउनलोड करें

2 blogger-facebook:

  1. ये तो बहुत खुशी की बात है। सही बात यह है कि हिन्दी को लोग पढ़ना और लिखना चाहरहे हैं किन्तु अब भी अंधविश्वास बना हुआ है कि कम्प्यूटर पर हिन्दी पढ़ी जा सकती है न लिखी।

    हम सबको और मेहनत करने की जरूरत है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. किताबे हमारें देश में हर रोज प्रकाशित होती रहती हैं लेकिन लोग पढतें कितने हैं । फिर रचनाकार को सम्मान भी नही मिल पता ।

    उत्तर देंहटाएं

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