रविवार, 12 जुलाई 2009

फारूक आफरीदी का व्यंग्य : सबसे खुश हम

farooq afradi उस समय मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब यह सुना कि विश्‍व में भारत ही ऐसा देश है जहां के लोग अमेरिका से भी ज्‍यादा खुश रहते हैं। रहें भी क्‍यों ना। हमें हर हाल में खुश रहने की आदत है। यहां जब भी कभी दुःखी होने की बात सामने आती है तब हमारी कल्‍याणकारी सरकार तुरन्‍त कोई कमेटी बना देती है। कुछ जोर मारो तो आयोग तक बिठा दिया जाता है। भारत अब कृषि प्रधान ही नहीं रहा बल्‍कि आयोग और कमेटी प्रधान देश बन गया है।

एक सर्वे के अनुसार भारत के लोग ओबामा के अमेरिका से ज्‍यादा खुश हैं। खुशी का एक कारण यह है कि वैश्‍वीकरण के इस युग में जायज-नाजायज, वर्जित-अवर्जित, वैधानिक-अवैधानिक, गरीब-अमीर और लैंगिक आदि भेदों की खाई पाट दी गई है। खुश रहने के लिए हमारे यहां हर तरह का हथकंडा अपनाने की छूट है। जीवन का एक ही मकसद है कि आदमी हर हाल में खुश रहे। हर क्षेत्र में आज गला-काट प्रतिस्‍पर्धा के बावजूद हम खुश रहना चाहते हैं। खुश रहने के लिए हमें न तो कोई नियम डराता है और न ही कोई कानून बल्‍कि कोई संहिता भी आड़े नहीं आती। आजादी का आनन्‍द लूटने की छूट के कारण ही हमारा भारत महान है।

यहां हर आदमी खुश है। अफसर, कर्मचारी, नेता, अभिनेता, मंत्री, संतरी, फुटपाथी-खुराफाती, गुण्‍डे-मवाली, शरीफ-बदमाश सारे के सारे वर्ग खुश हैं। सबको अपने-अपने क्षेत्र में हाथ आजमाने की पूरी आजादी है। स्‍वतंत्रता हमारा जन्‍मसिद्ध अधिकार है और हम मजे से इसका इस्‍तेमाल कर रहे हैं।

हम बेघर हैं तो भी खुश, बेरोजगार हैं तो भी खुश, निरक्षर भट्‌टाचार्य हैं तब भी खुश हैं। कोई हमारा तेल निकाल दे, कोई हमें धकिया दे, कोई हमें लूट ले, कोई हम पर चाहे जितना अत्‍याचार करे लेकिन हम हैं कि सदा खुश रहते हैं। चूं तक नहीं करते। कोई कूट-पीटकर हमारा चूंचू का मुरब्‍बा बना दे तब भी खुश रहते हैं। हम दूसरे के सुख में भी खुश रहते हैं और दुःख में भी। अगर पड़ोसी देश भी हमें दुःखी करे या हम पर दादागीरी करे तब भी हम हंसकर झेल लेते हैं। हम खून के आंसू पीकर भी खुश रहना जानते हैं।

इतिहास गवाह है कि जब हम गुलाम थे तब भी खुश थे और आजाद हुए तब भी खुश हैं। खुदा न करे कोई ऐसी-वैसी स्‍थिति आ जाए तब भी हम खुश ही रहेंगे। यह हमारा वादा है। यह क्‍या कम बात है कि हम भूखे-नंगे, टैक्‍सों के मारे, पल-पल असुरक्षित और ठगे जाने के बावजूद भी खुश हैं। यह इस देश की ही तासीर है वरना कोई और ऐसा देश हो तो वहां इतना सब कुछ होने पर लोग हाय-हाय करते हुए सड़कों पर उतर आते हैं। धन्‍य हमारी धरती और धन्‍य है हमारा देश जहां हर हाल में, हर चाल में और हर ढाल में खुशियों की फसल लहलहाती है।

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(फारूक आफरीदी)

ई-916, न्‍याय पथ,

गांधी नगर, जयपुर-302015

ईमेल - farooq.afridy@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. सादे सीधे शब्द से चला व्यंग्य का तीर।
    भारतवासी खुश रहे पीकर अपना पीड़।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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