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सुधा भार्गव की लघुकथाएँ

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1महापुरुष

अँधेरे में उस जगमगाती अट्टालिका से दो भीमकाय एक औरत को उठाये निकले। झटके से उसे कार की पिछली सीट पर फेंक दिया। तेज गति से गाड़ी चलाते हुए समुद्र के किनारे जाकर दम लिया।

'चल इसे लहरों के हवाले कर दे।'एक ने कहा।

'लहरों ने किनारे पर फेंक भी दिया तो समझा जायेगा कि इसने आत्महत्या कर ली है "!दूसरे ने कहा।'

वहां अपने जैसे डीलडौल वाले आदमकद को देखकर वे अचकचा गए।

एक ने पूछा -'तू कौन है ?'

'आदमखोर '!

'इसे क्या खायेगा। इसमें कुछ हो तब न।'उसका इशारा औरत की ओर था।

आदमखोर ने उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया और बोला --'मान गए। आप दोनों तो मेरे भी गुरु निकले।'

'कैसे?'दोनों एकसाथ बोले।

'मैं तो पेट की भूख मिटाने के लिए ही आदमी को मारता हूँ। पर महापुरुषों ,आपने तो शरीर की भूख मिटाने को एक जीते इंसान को इस तरह निगल लिया कि वह लाश बन कर रह गया।'

'हां --हां ----तू निरा बच्चा है। शरीर की भूख कभी मिटीहै। तू कहे तो हम चार -चार को एक साथ निगल जाएँ।'

दैत्याकार अट्टहास से धरती कांप उठी।

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२ लहँगे

हरी बत्ती जल उठी पर वह कार की खिड़की से हटीही नहीं। माँ कुछ दे दो की रट लगाये थी। मैने एक नजर उस पर डाली ---मैला -कुचैला ,हजार थेगलीवाला लहंगा ,बुरी तरह फटा ब्लाउज ,उसमे से झांकता हुआ गदराया मांसल अंग। जिसे जो देखना था वह सब ही तो दिखाई दे रहा था। उसकी इस हालत पर मैं अपने गुस्से को काबू में न रख सकी।

'हट्टी-कट्टी जवान को भीख मांगने में लज्जा नहीं आती।

कहीं रोटी पकाने ,बर्तन मांजने का काम तो कर सकती है। अधनंगी सी चौराहे पर खड़ी है। दो टाँके मारने में क्या शर्म आती है।'

'माँ ----ऐसे न बोल। दिन -रात सूत कातती हूँ। दुबई और अफ्रीका की औरतों के लहंगों में ६--६ घंटे सितारे टांकती हूँ पर मेरे पास इतना नहीं कि मैं अपना बदन ढक सकूँ ।

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परिचय --सुधा भार्गव

जन्मस्थल --अनुपशहर ,जिला --बुलंदशहर--भारत

शिक्षा --बी ,ए.बी टी ,रेकी हीलर

शिक्षण --बिरला हाई स्कूल कलकत्ता में २२ वर्षों तक हिन्दी भाषा का शैक्षिक कार्य |अ

साहित्य सृजन ---

विभिन्न विधाओं पर रचना संसार

साहित्य संबन्धी संकलनों में तथा पत्रिकाओं में रचना प्रकाशन

प्रकाशित पुस्तकें

रोशनी की तलाश में --काव्य संग्रह

बालकथा पुस्तकें---

१ अंगूठा चूस

२ अहंकारी राजा

३ जितनी चादर उतने पैर ---सम्मानित

आकाश वाणी दिल्ली से कहानी कविताओ. का प्रसारण

सम्मानित कृति--रोशनी की तलाश में

सम्मान --डा .कमला रत्नम सम्मान

पुरस्कार --राष्ट्र निर्माता पुरस्कार (प. बंगाल -१९९६)

अभिरुचि --देश विदेश भ्रमण ,पेंटिंग .योगा

वर्तमान लेखन का स्वरूप

संस्मरण --कनाडा के १५१ दिन ..,बाल साहित्य

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संपर्क --जे =७०३ स्प्रिंग फील्डस

#१७/२० अम्बालिपुरा विलेज

बेलंदुरगेट

सरजापुरा रोड

बैंगलोर -५६०१०२

कर्नाटक (भारत

टिप्पणियाँ

  1. जहाँ पहली लघुकथा झकझोर के रख देती है.. वही दूसरी यथार्थ का नंगा सच सामने ले आती है..

    सुधा भार्गव जी को बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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