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रचना दीक्षित की बाल कविताएँ

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माँ

मेरी माँ जैसी कोई माँ हो ,

ऐसा कभी हुआ न होगा ,

स्नो व्हाइट सिंड्रेला सी ,

शांत सौम्य और सुन्दरता में ,

उसका जैसा हुआ, न होगा,

रात अँधेरी सुबह- सवेरे,

जब भी देखो जब भी मांगो ,

उसका प्यार बरसता होगा .

मेरी माँ जैसी कोई माँ हो ,

ऐसा कभी हुआ न होगा ,

दुर्गा काली सी गरिमा और

सरस्वती सा ज्ञान लिए

कहीं कोई भी,हुआ न होगा ,

सोते-जगते आते-जाते

अपनी बिटिया से मिलने को ,

सपना एक तरसता होगा .

मेरी माँ जैसी कोई माँ हो ,

ऐसा कभी हुआ न होगा ,

----

सपना

मैंने भी एक सपना देखा ,

चंदा अपने अंगना देखा ,

गली गली पर मोड़ मोड़ पर,

इतराता इठलाता देखा ,

इंदरधनुष सा रंग बिरंगा ,

इधर उधर मंडराता देखा.

मैंने भी एक सपना देखा ,

चंदा अपने अंगना देखा ,

फूल फूल पर कली कली पर,

हँसता और हंसाता देखा ,

तितली जैसा श्वेत रंग का ,

मेरी बगिया में जाते देखा ..

मैंने भी एक सपना देखा ,

चंदा अपने अंगना देखा ,

अपनी माँ को ढूँढ रहा हो ,

ऐसा उसका सपना देखा ,

मेरी माँ के आँचल में .

उसको आज पिघलते देखा

मैंने भी एक सपना देखा ,

चंदा अपने अंगना देखा ,

----.

हँसना

हँसना और हँसाना सीखो

हर पल तुम मुस्काना सीखो

कली कली से फूल फूल से

खुशबू तुम महकाना सीखो

इस प्यारी सी धरती को

सूरज सा चमकाना सीखो

अपनी धरती के दुश्मन को

दुनिया से पार लगाना सीखो

हँसना और हँसाना सीखो

हर पल तुम मुस्काना सीखो

-----.

धरती माँ

धरती माँ के वीर सिपाही

इतना तो बतला देंगे

दुश्मन की हो बुरी नज़र

तो उसको पाठ पढ़ा देंगे

धरती माँ के हर कोने में

खुशियाँ हम बिखरा देंगे

खुशियों पर जो ग्रहण लगाये

उसको मज़ा चखा देंगे

धरती माँ की बगिया में

हम सुंदर फूल खिला देंगे

इन फूलों को जो मसलेगा

उसको सही सजा देंगे

धरती माँ की ताकत को

दुनिया के आगे कर देंगे

इसको जो ना माने तो

उसको भी सबक सिखा देंगे

धरती माँ के वीर सिपाही

इतना तो बतला देंगे

दुश्मन की हो बुरी नज़र

तो उसको पाठ पढ़ा देंगे

----.

पानी की ये कहानी है

पानी की ही जुबानी है

पेडों से पानी की बूँदें

आसमान तक जानी हैं

बूँदें मिल बादल बन

फिर बारिश धरती पर आनी है

पानी की ये कहानी है

पानी की ही जुबानी है

पेडों के बिन बूँद न बननी

न आसमान तक जानी है

बिन बूंदों के बदली न बननी

फिर बारिश कहाँ से आनी है

पानी की ये कहानी है

पानी की ही जुबानी है

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बहुत सुन्दर।आभार।

सभी कवितायेँ छोटे छोटे सपनो , कोमल इच्छाओं , से जुडी हैं.....माँ कविता दिल को गहरे छु गयी.....आभार रचना दीक्षित जी की कविताओं की प्रस्तुती पर....

regards

बेनामी

सपना कविता तो वाकई बड़ी अच्छी है.
रवि

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