सोमवार, 24 अगस्त 2009

रचना दीक्षित की वर्षा, वेदना, प्रणय व अवसाद की कविताएँ

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 वर्षा  

 
 वर्षा के इस मौसम में  ,मेरा उर घट क्यों रीता है .
  वर्षा के इस मौसम में तो पौधा-पौधा जीता है
दादुर के इस मौसम में क्यों मन की कोयल  गाती है .
उर के कोने- कोने में क्यों कटु संगीत सुनाती  है.
झींगुर के इस मौसम में,मेरी उर वीणा क्यों बजती है
उर वीणा के क्षत-विक्षत तारों को जोड़ा करती है
 
वर्षा के इस मौसम में  ,मेरा उर घट क्यों रीता है .
वर्षा के इस मौसम में तो पौधा-पौधा जीता है .
माना वर्षा के बाद तो हर पत्ता-पत्ता रोता है ,
अपने प्रियतम के जाने पर शोक मनाया करता है.
क्यों वर्षा के इस मौसम में मेरा उर मानव सोता  है,
वर्षा की ठंडी बूंदों से मन आह़त होता रहता है .         
 
 
 
                                 बादल
 
 
जब आसमान पर बादल छाए
                                 तुम याद हमें भी आयी हो.
काले बादल का जमघट
                                 ज्यों  केशावली    लहराई हो .
बादल में बिजली की चम- चम
                                 ज्यों तुम आज कहीं  मुस्काई हो .
सर सर सर सर चले पवन
                                ज्यों चुनरी तुमने लहराई हो .
पानी में मिट्टी की खुशबू
                                 ज्यों साँस तुम्हारी आयी हो .
खिड़की पर बूंदों की छम-छम
                                ज्यों झांझर तुमने झंकायी हो.
ठंडी  बूंदों की वोह सिहरन
                                 ज्यों पास कहीं  तुम आयी हो.
बारिश में वो इन्द्रधनुष
                                ज्यों ली तुमने अंगडाई हो .
पानी की अविरल जल धारा
                                ज्यों तुम,आलिंगन कर आयी हो
मेरी अश्रु धारा में ,
                                ज्यों तुम आज नहा कर आयी हो .
             
 
 
                      अहसास
 
मेरे बालों में रह रह के, महकता बादल.
मेरे होंठों पे,बसने को,मचलता बादल.
मेरे बाजुओं में आकर के,पिघलता बादल.           
मेरी पाजेब से मिलकर के,फिसलता बादल.
ये बादल नहीं,स्पर्ष है किसी का.
जो तन मन भिगोये,ये प्यार है उसी का.
 
मेरी सांसों में आकर के, सुलगता ये बादल
मेरी आँखों से जब तब छलकता,ये बादल.
मेरी धडकनों में रह-रह के धधकता,ये बादल
जिगरे नासूर से रह-रह के रिसता ये बादल.
ये बादल नहीं अवसाद है,किसी का
जो मन को भिगोये,ये अहसास है उसी का    
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चित्र – तैलरंग पर रेखा की कलाकृति

2 blogger-facebook:

  1. आपकी वर्षा कविता में दिल का दर्द खूबसूरती से मन को भिगोता है |बादल कविता वर्षा का अहसास कराती है |अच्छी रचना |

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