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रचना दीक्षित का लघु आलेख : खबरिया चैनल

वाह रे पत्रकारिता,वाह रे खबरिया चैनल,वाह रे टी आर पी. टी वी कि दुनिया में क्रांति लाने का गौरव अगर बी आर चोपड़ा और लेख टंडन जैसे लोगों को जाता है. तो जनता को अतिशयोक्ति कि उचित परिभाषा सिखाने का गौरव जाता है एकता कपूर को. खैर उनके दिन तो अब लदने लगे हैं. पर खबरिया चैनल वालों ने इससे कोई सीख नहीं ली.

मैं चूँकि शिक्षा के क्षेत्र से बहुत सालों से जुड़ी हुई हूँ मैं जानती हूँ कि अगर किसी शिक्षक के पास कक्षा में सिखाने के लिए कुछ नया नहीं है तो आप छात्रों को दस मिनट से ज्यादा बेवकूफ नहीं बना सकते हैं. पर खबरिया चैनल वालों को तो देखिये बस एक वाकया दे दीजिये और उसी के सहारे सारा दिन निकालने कि कला क्या खूब जानते हैं. एक ही वाक्य को किस तरह अलग-अलग रसों छंदों व चौपाइयों में पिरो कर और सजा कर परोसते हैं.

मेरी सलाह है इन चैनल वालों को कि अपनी इस प्रतिभा को यूँ ही बर्बाद न करें. बल्कि इसे शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल करें. इससे इन्हें हमारी तुलना में एक फायदा ये होगा कि इन्हें हमारी तरह कक्षा में चीखने में कोई ताकत लगाने कि जरुरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि ये लोग तो माइक लगाने के बावजूद भी चीख ही रहे होते हैं. दूसरा फ़ायदा तो इनका भी होगा और बच्चों का भी. वो ये कि इन्हें हमारी तरह न तो कोई साप्ताहिक /मासिक/वार्षिक परीक्षा लेने की और न ही कॉपियाँ जांचने की जरुरत पड़ेगी. क्योंकि यहाँ पर तो एक वाक्य/वाकया एक चैनल पर एक दिन में कम से कम १००८ बार दोहराया जाता है. सारे चैनलों का तो हिसाब लगाना बहुत मुश्किल होगा. बच्चों को सब कुछ आसानी से याद हो जायेगा. और कोई भी बच्चा चाहकर भी फ़ेल नहीं हो पायेगा .   क्योंकि जब तक एक-एक वाक्य/वाकया अच्छी तरह से कंठस्थ नहीं हो जाता ये आसानी से पीछा नहीं छोड़ते.

देश में एक नयी क्रांति आयेगी. बिना किसी जद्दोजहद के युवा आगे बढ़ेंगे . फिर देश को प्रगति करने से कोई नहीं रोक सकता है. हम तो भाई ठहरे आशावादी सो बुराई में भी अच्छाई ढूंढने की एक पहल की है

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बेनामी

वाह जी दिल खुश कर दिया बहुत अच्छा लगा

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