शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

जयंती जैन की ई-बुक – सकारात्मक कैसे बनें

यहीं रचनाकार पर स्क्रिब्ड ई-पेपर पर पढ़ें या पीडीएफ़ रूप में डाउनलोड करें स्क्रिब्ड से. पूरे आकार में बड़े अक्षरों में पढ़ने के लिए फुल ...

सुजान पंडित की व्यंग्य कविता - कुरसी हो गयी मैली

यारों फिर से सावन आया, सोच समझ कर बोना है. कुरसी हो गयी मैली उसको गंगाजल से धोना है.. १. तन पर होंगे खादी, बोली मिस्री सी होगी मीठी. ...

शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

रचना दीक्षित की कविता – सूर्य का संताप

सूर्य का संताप       मैंने बचपन से आज तक हर रोज़ सूरज को सुबह औ  शाम गंगा नहाते देखा है  जैसे मानो उसने भीष्म प्रतिज्ञा क...

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : हिन्दी की आखिरी किताब

अकहानी : अकहानी वह है जो न तो कहानी है और न ही जिसमें ‘अ' अक्षर का प्रयोग होता है । वास्‍तव में अकहानी असफल अकहानीकारों की आंतरिक व...

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन : रेनू'दीपक ' का व्यंग्य - मिलावट

(प्रविष्टि क्रमांक - 21) मिलावट ___________ कुत्ते की वफादारी के किस्से बहुत जाने पहचाने हैं। पता नहीं कौन से कम्पोजीशन का ख...

गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

अशोक गौतम का व्यंग्य : मुबारकां! मुबारकां!!

वे हाव भाव से पूरे के पूरे सरकारी बंदे ही लग रहे थे। उन पांच में से एक ने कंधे पर एक टूटी कुदाल ली थी तो दूसरे ने बिना हथ्‍थी का बेलचा ...

एस. के. पाण्डेय की बाल कविताएँ

  बच्चों के लिए :  चूहा और खरगोश                 ( १) चूहा जी ने पिया शराब । इनकी आदत बड़ी खराब ।। नशे में झूमे गिरे धड़ाम । ...

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन : विवेक रंजन श्रीवास्तव का व्यंग्य - भ्रष्ट व्यवस्था के लाभ

(प्रविष्टि क्रमांक - 20)     भ्रष्टाचार की जय हो ! एक और घोटाला सफलता पूर्वक संपन्न हुआ . सरकार हिल गई . स्वयं प्रधानमंत्री...

मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन : मीनू खरे का व्यंग्य - लिफ़ाफ़ाबाद का ब्लॉगर सम्मेलन और मच्छर

(प्रविष्टि क्रमांक - 19) एक शहर था लिफाफाबाद. उस शहर में कुछ ब्लॉगर और बहुत सारे मच्छर रहते थे. ब्लॉगर बड़ी मेहनत से ब्लॉगिंग करते ...

सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

सुजान पंडित की व्यंग्य कविता – लुट गई सब्जी की झोली…

लुट गई सब्जी की झोली -------- ऐसी खबर छपी है मौला, आज के अख़बार में. लुट गई सब्जी की झोली, एक बच्चे की बाज़ार में.. आलू, गोभी, परबल, भिन...

सी . बी . श्रीवास्तव " विदग्ध " की कविता

प्रभामय ओंकार हूं मैं   व्यक्ति नहीं विचार हूं मैं, जगत का आधार हूं मैं ! एक झोंका हूं हवा का, नहीं जिसका ठौर कोई ज्ञान हूं , ...

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन : विनोद साव का व्यंग्य – सपनों का गांव

(प्रविष्टि क्रमांक - 18)   स्‍कूल और जनपद कार्यालय के भवन साफ सुथरे थे जैसे गांव में रहने वालों के उनके घर हों। सड़कें बिलकुल ...

देवी नागरानी की पुस्तक समीक्षा : बेघर आँखें – संवेदनशील हृदय की पारदर्शी अभिव्यक्ति

बेघर आँखें ( कहानी संग्रह ) ॰॰                कहानीकार – तेजेंद्र शर्मा संवेदनशील ह्रदय की पारदर्शी अभिव्यक्ति लेखन की हर व...

शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन – विवेक रंजन श्रीवास्तव का व्यंग्य : आतंकवाद अमर हो

(प्रविष्टि क्रमांक - 17)   प्रत्येक वस्तु को देखने के दो दृष्टिकोण होते हैं . आधे भरे गिलास को देखकर नकारात्मक विचारों वाले लोग...

मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

वीरेन्‍द्र सिंह यादव का आलेख – मीरा : सामंती अभिजात्‍य की विद्रोही प्रवक्‍ता

  बदलते परम्‍परा के प्रतिमानों में मध्‍यकाल की कवयित्री मीरा अपनी लोकप्रियता में बेमिसाल हैं। इनका महत्‍व उस विद्रोही चेतना की अभिव्‍यक...

रविवार, 18 अक्तूबर 2009

वीरेन्द्र सिंह यादव का आलेख – लोक कवि रहीम : जातीय लोक जीवन के प्रहरी

  रहीम की कविता में जातीय जीवन और लोक की समानता पर बल मिलता है। आपने कविता की पवित्रता बनाये रखी, उस पर दरबार की कालिख नहीं लगने दी।...

व्यंग्य लेखन पुरस्कार आयोजन - श्याम बाबू शर्मा का व्यंग्य : हमारी धर्मनिरपेक्षता

(प्रविष्टि क्रमांक - 16 - A) मिश्रीलाल हमारे मित्रों में सबसे बुध्दिमान व्यक्ति हैं। वे कुछ न कुछ नये विषयों से हमारा ज्ञानवर्धन...

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

मनसा आनन्‍द ‘मानस’ की कहानी : गे-युग

गाँव की शांति में अचानक तूफान आ गया, कहाँ दबी पडी थी यह अशांति जंगली घास की तरह दो बूंद पडी नहीं की उग आई। मनुष्य, औरतें, बच्चे ही नहीं, ...

मनसा आनन्‍द ‘मानस’ की कहानी : फूल वाला

फजलु मियां की पान की दुकान मोहल्‍ले की नाक थी। उसी के सामने एक बड़ा सा खुला चौक पसरा पड़ा था। जो भविष्‍य के सचिन, गावस्‍कर, कपि‍ल देव त...

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