रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

रचना दीक्षित की कविता – सूर्य का संताप

surya ka santaap

सूर्य का संताप      
मैंने बचपन से आज तक
हर रोज़
सूरज को सुबह औ  शाम
गंगा नहाते देखा है 
जैसे मानो उसने
भीष्म प्रतिज्ञा कर रखी हो 
कि गंगा में डुबकी लगाये बिना 
गंगा के चरण स्पर्श किये बिना 
न तो मैं धरती में प्रवेश करूँगा 
और न ही धरती से बाहर आऊंगा

इधर कुछ दिनों से देखती हूँ 
सूरज कुछ अनमना सा है 
हिम्मत जुटा पूंछ  ही बैठी मैं 
किन सोंचों में गुम रहते हो 
बड़ा दयनीय सा चेहरा बना कर 
बोला मैं सोचता हूँ 
कि भगवन से प्रार्थना करूं 
कि इस धरती पर पानी बरसे
रात दिन पानी बरसे 
और कुछ नहीं तो केवल  
सुबह शाम तो बरसे

मेरे चेहरे पे मुस्कान आ गयी 
आखिरकार इसे भी इन्सान का दुख समझ आ रहा है
फिर सोचा शायद स्वार्थी हो गया है 
खुद  इतनी लम्बी पारी खेलते -खेलते थक गया है 
कुछ दिन विश्राम करना चाहता है 
मेरे चेहरे की कुटिल मुस्कान
देख कर वो बोला 
तुम जो समझ रहे हो वो बात नहीं है 
दरअसल मैं
इस गन्दी मैली कुचैली  गंगा में 
और स्नान नहीं कर सकता

अवाक् रह गयी थी मैं 
पूछा 
अपनी माँ को गन्दा मैला कुचैला कहते 
जबान न कट गयी तेरी 
जवाब मिला 
अपनी माँ को इस हाल में पहुँचाने वाले 
हर दिन उसका चीर हरण करने वाले 
हर दिन उसकी मर्यादा को 
ठेस पहुँचाने वाले 
तुम इंसानों को ये सब करते 
कभी हाँथ पाँव कटे क्या ?

फिर मैं ही क्यों ?
इसी से चाहता हूँ की
सुबह शाम बरसात हो 
तो कम से कम मैं नहाने से बच जाऊँगा 
सीधा दोपहर में चमकूंगा 
अपना सा मुंह ले कर 
कोसती रही मैं 
अपने आप को इन्सान को 

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

bahut hi khoobsoorti se ek aisa dard bayan kiya hai jiske baare mein sab kahte hi rahte hain magar koi karta kuch nhi........shayad aapki rachna padhkar koi kuch samjh sake.

बहुत ही अच्छी कविता......

कविता से कुछ अधिक कविता ॥

_अभिनन्दन !

सशक्‍त रचना। पर्यावरण को समर्पित। बधाई।

बहुत शानदार,सशक्त ,अर्थपूर्ण रचना, पर्यावरण की समस्या को बड़े ठोस ढंग से उठाया गया है |

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget