19 नवम्बर 2009

प्रभा मुजुमदार की कविताएँ

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सामर्थ्य 

1

सत्ता का सिंहासन
कितना ही छोटा क्यो न हो
बन जाता है केन्द्र.
पैदा कर लेता है

गुरुत्वाकर्षण का बल
सूर्य बन खींच लेता है 
आसपास मंडराते तमाम ग्रह
उनके उपग्रहों समेत.

निर्धारित करने लगता है
नियम और प्रतिमान
परिक्रमा-पथ
गति और दिशा
समय/ मौसम/ पर्यावरण.

बन जाता है जरुरत
अपनी परिधि के भीतर जगते
कण कण के अस्तित्व की.

विस्तृत ब्रंह्मांड मे
घूमती आकाश-गंगाओं
और चमकते विशाल नक्षत्रों के बीच
कितना ही क्षुद्र/नगण्य हो वह
अपने सौर मंडल का तो
स्वामी ही होगा.

चाहेगा ही अपने
प्रभामंडल का विस्तार.

दूर परिक्रमा पथ पर
घूमते पिंडो को रोके रखेगा यथाशक्ति
विचरित अथवा विचलित होने से
किसी और आकर्षण की तहत.

प्रकाश और ऊर्जा की पूंजी
लुटाता है
प्रतिबद्धता की एवज में.

उसी पूंजी के सहारे
जो चुक रही है पल पल,
विशाल दानवी आकार
अथवा ब्लैक होल में

बदल जाने से पहले,
अधिपत्य चाहता है
एक जीती/ धड़कती
दुनिया पर.

2.

 


थामे रखनी है
अपने हाथों मे एक मशाल
ताकि गुजर सकें
वक्त-बेवक्त अकेले
अन्धी सुरंगों से होकर
बेखौफ़.

षड़यंत्रो से परिचित हो कर भी
दिख सके निश्चिंत
बना कर रखनी है
खुद अपने लिये सुरंगे
जो निकाल सके
सही वक्त पर
लाक्षागृहों से.

अपने ही प्रयासों से
पाने होंगे मंत्र
रथी-महारथियों के रचे
चक्र-व्यूहों को
सुरक्षित भेद सकने के लिये.

रखना  होगा
थोड़ी सी हंसी और
उल्लास को बचा कर
विषाद और आंसू की
वैतरणी को
पार कर सकने के लिये.

बचा कर रखने होंगे
कुछ अंकुर
सृष्टि के अंत तक
फिर नये जीवन की
सम्भावना के लिये.

---

5 प्रतिक्रियाएँ.:

  1. प्रभा मजूमदार की कविताएँ गहरी संवेदनाओं के साथ-साथ वैज्ञानिक बिम्बों प्रतीकों के इस्तेमाल के कारण काफी महत्वपूर्ण होती है। शिल्प की सुगढ़ता भी इनकी कविताओं की एक अनन्य विशेषता है। 'रचनाकार' और रचनाकार दोनों को बधाइयाँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in
    www.vyangyalok.blogpost.co.in

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर एवं सार्थक रचनाएँ।
    ------------------
    11वाँ राष्ट्रीय विज्ञान कथा सम्मेलन।
    गूगल की बेवफाई की कोई तो वजह होगी? रवि रतलामी जी, कृपया इस समस्या से निजात दिलाएं।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. प्रभा मजूमदार जी,

    आप सच भी लिख रहे हो और वो भी बहुत ही अच्छा और खूबसूरत सलीके से.....इस
    उत्साह और प्रेरणा को हमेशा बनाये रखना हालात चाहे कुछ भी क्यूँ न
    बनें...????

    आपका अपना ही,
    रेक्टर कथूरिया
    सम्पर्क: :(rectorkathuria@gmail.com)
    Please also watch : (http://www.punjabscreen.blogspot.com/)

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. वैज्ञानिक प्रतीकों का सटीक प्रयोग साथ ही साथ संदेशो का भी सुंदर समावेश. अद्भुत. कवियत्री और रचनाकार दोनों का आभार और बधाई.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

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