सोमवार, 28 दिसंबर 2009

यशवन्‍त कोठारी का आलेख - गुजराती-अंग्रेजी-हिन्‍दी के प्रसिद्ध साहित्‍यकार जयन्‍ती एम. दलाल की 75 वीं जयन्‍ती पर चर्चा



अँग़ेज़ी हिन्‍दी व गुजराती के प्रसिद्ध साहित्‍यकार जयन्‍ती एम. दलाल से परिचय अनायास ही ई-मेल के माध्‍यम से हो गया। इन्‍टरनेट पर उनके उपन्‍यासों से पूर्व परिचय था। पिछले दिनों वे जयपुर में अन्‍तरराष्ट्रीय साहित्‍यकार सम्‍मेलन में भाग लेने आये थ्‍ो, तो उनसे व्‍यक्‍तिगत परिचय हुआ। विचारों, जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ। वे बुजुर्ग साहित्‍यकार है मगर तन और मन से युवा लेखक है। देशी-विदेशी साहित्‍यकारों को उन्‍होनें खूब पढ़ रखा है। गुजराती में उनकी 22 पुस्‍तकें छप चुकी है। जिनमें 14 उपन्‍यास तीन लघु कहानियों के संग्रह व अन्‍य पुस्‍तकें हैं। वे गुजराती के पहले साहित्‍यकार है जिनका उपन्‍यास आखं सगपन आंसूना का अंग्रेजी अनुवाद अमेरिका में 2005 में छपा। इस रचना के प्रमोशन हेतु उन्‍होने अमेरिका, केनाडा, यू.के. की यात्रा की। बाद में यहीं उपन्‍यास भारत में भी छपा इन्‍टरनेट पर भी प्रकाशित हुआ और चर्चित हुआ। उनका दूसरा उपन्‍यास स्‍पेशल इकोज भी अमेरिका तथा भारत में छपा। इन्‍टरनेट पर हजारों पाठकों ने इसे पढ़ा और सराहा।
जयन्‍ती एम. दलाल का एक बेटा लगभग पचास वर्ष से सेरेब्रल पालिसी से पीड़ित है, उसकी सेवा करना ही उनका मुख्‍य ध्‍येय है। वे इसे ईश्वर की सेवा मानते हैं। जयन्‍ती दलाल विज्ञान के स्‍नातक है और व्‍यापार में भी दखल रखते हैं। वे भारतीय प्‍लास्‍टिक संघ के उपाध्‍यक्ष रहे है। भारत में प्‍लास्‍टिक उद्योगों को विकसित करने में उनके योगदान को भारत सरकार ने सराहा हैं। उन पर 20 मिनिट की डोक्‍यूमेंटरी भी बनाकर जारी की गई है।
दलाल का अगला उपन्‍यास ब्‍लीडिंग हाइटस आफॅ कारगिल शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। इस उपन्‍यास में दलाल सीमा पार के आतंकवाद को आधार बनाया है।
स्‍पेशल इकोज नामक उपन्‍यास 514 पृप्‍ठों का है। और इसमें जीवन के विविध पहलुओं को छुआ गया है। इसमें न्‍यूक्‍लियर युद्ध, आतंकवाद की चर्चा है।
ओरडिएल ऑफ इन्‍नोसेसं में दलाल ने शशांक और सुकन्‍या के माध्‍यम मानवीय सम्‍बन्‍धों की गहरी पड़ताल की है। उपन्‍यास अत्‍यन्‍त पठनीय है।
दो दिन तक जयपुर में दलाल से ढेरों बातें हुई। हम दोनो ने जयपुर शहर का भ्रमण भी किया। आतंकवादियों ने जिन स्‍थानों पर बम फोड़े थ्‍ो, हम वहां भी गये। आतंक के अन्‍ध्‍ो युग को आंखों से देखा। सांगानेरी गेट, हवामहल, सिटीपेलेस, जन्‍तर मन्‍तर, गुजराती समाज एम. आई. रोड पर भी गये । खाना भी खाया। घूमे फिरे चर्चाएं हुई। वे प्रसन्‍न वदन जयपुर से गये। उन्‍हे इस बात का मलाल था कि गुजरात साहित्‍य अकादमी ने उनका मूल्‍यांकन नहीं किया लेकिन मस्‍त मौला लेखक से मिलने का जो सुख होता है वो तो मुझे ही मिला।
पचहत्तरवें जन्‍म दिवस पर शुभ कामनाएं।
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यशवन्‍त कोठारी
86.लक्षमीनगर ब्रहमपुरी
बाहर जयपुर . 302002
फो.2670596

3 blogger-facebook:

  1. गुजराती लेखक जयंती एम् दलाल की ७५वी वर्ष गाँठ पर उनके बारे में जानकारी मिली. भाई यशवंत कोठारी को धन्यवाद. दीनदयाल शर्मा.

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  2. जयन्‍ती एम. दलाल के बारे में जाना सुना है, कुछ कुछ पढ़ा भी है, जानकारियों के लिये धन्यवाद्

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  3. जयन्‍ती एम. दलाल के बारे में पढ़कर अच्छा लगा।
    सबसे महत्व पूर्ण लाइन तो यह रही कि जयन्‍ती एम. दलाल का एक बेटा लगभग पचास वर्ष से सेरेब्रल पालिसी से पीड़ित है, उसकी सेवा करना ही उनका मुख्‍य ध्‍येय है। वे इसे ईश्वर की सेवा मानते हैं।
    सचमुच इस महान कष्ट को वे जिस महानता से स्वीकार करते हैं वह अनुकरणीय है। इसे पढ़कर यह एहसास हो जाता है कि अच्छा लिखने के लिए अच्छा होना भी जरूरी है।

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